Sports
रानीखेत में ओपन टेनिस कुमाऊं कप प्रतियोगिता का आयोजन , 11 अप्रैल से होगा शुभारम्भ |

उत्तराखंड, रानीखेत : नगर में ओपन टेनिस कुमाऊं कप प्रतियोगिता 11 अप्रैल से शुरू होगी। दो दिनी प्रतियोगिता का उद्घाटन केआरसी कमांडेंट ब्रिगेडियर एसके यादव और एसएसबी डीआईजी डॉ. ओबी सिंह करेंगे। वहीँ प्रतियोगिता रानीखेत क्लब मै आयोजित की जायेगी। यहां आयोजित बैठक में बताया कि प्रतियोगिता दो वर्गों में खेली जाएगी। इसमें ओपन और 60 वर्ष की आयु से ऊपर खिलाड़ी भाग लेंगे।
जानकारी के अनुसार रानीखेत, नैनीताल, रुद्रपुर, हल्द्वानी, रामनगर की टीमों के कुल 53 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रतियोगिता में सबसे कम 17 वर्ष के रामनगर निवासी मानस तिवारी जबकि सबसे अधिक 78 वर्ष के वरिष्ठ खिलाड़ी और पूर्व क्रीड़ा अधिकारी नैनीताल जीएल साह भाग लेंगे। आयोजन के लिए केआरसी, एसएसबी, हैड़ाखान ट्रस्ट, छावनी परिषद, होटल एसोसिएशन सहित तमाम संस्थान सहयोग कर रहे हैं। उत्तराखंड टेनिस टेनिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुमित गोयल ने जानकारी देते हुए बताया किप्रतियोगिता रानीखेत क्लब में होगी । प्रतियोगिता के निर्णायक महिराज माहरा व ललित बिष्ट रहेंगे।
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कैसी चाहिए उत्तराखंड की खेल नीति ?, आम जनता 30 जुलाई तक दे सकती है सुझाव, यहां जानें कैसे ?

Uttarakhand Sports Policy : उत्तराखंड की नई खेल नीति कैसी होनी चाहिए, अब यह तय करने में आम जनता भी भागीदार बनेगी। खेल विभाग ने प्रदेशवासियों से 30 जुलाई तक सुझाव मांगे हैं।
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कैसी चाहिए उत्तराखंड की खेल नीति ?
उत्तराखंड की नई खेल नीति के लिए आम जनता खुद अपने सुझाव दे सकती है। खिलाड़ी, प्रशिक्षक, खेल विशेषज्ञ, खेल संघ, अभिभावक, शिक्षक, खेल प्रेमी और आम नागरिक ऑनलाइन पोर्टल, ई-मेल या डाक के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।
आम जनता 30 जुलाई तक दे सकती है सुझाव
सोमवार को विधानसभा स्थित सभागार में बैठक के बाद खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि उपयोगी सुझावों को नई खेल नीति में शामिल करने पर विचार किया जाएगा, जबकि बेहतर सुझाव देने वालों को सम्मानित भी किया जाएगा।

सुझावों को नई खेल नीति में किया जाएगा शामिल
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सरकार ऐसी खेल नीति तैयार करना चाहती है, जो प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप होने के साथ ही खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण में जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त सुझावों का परीक्षण कर उपयुक्त सुझावों को नई खेल नीति में शामिल किया जाएगा।
30 जुलाई 2026 तक मिलने वाले सुझावों पर होगा विचार
खेल मंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की भागीदारी से तैयार होने वाली खेल नीति उत्तराखंड में खेलों के विकास को नई दिशा देगी। इसलिए अधिक से अधिक लोगों से सुझाव भेजने की अपील की गई है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 जुलाई 2026 तक प्राप्त होने वाले सुझावों पर ही विचार किया जाएगा।
आप ऐसे दे सकते हैं अपने सुझाव
ऑनलाइन : www.khelouk.in/contact-us
ई-मेल : info@khelouk.in
डाक से : निदेशक, खेल विभाग,
खेल निदेशालय, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर,
थानो रोड, रायपुर,
देहरादून-248008, उत्तराखंड।
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सरकारी नौकरी तो मिली, लेकिन छूट रहा खेल !, दुविधा में ‘आउट ऑफ टर्न’ जॉब वाले खिलाड़ी…

Uttarakhand News : उत्तराखंड सरकार राज्य को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था लागू की गई है, ताकि उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ बेहतर भविष्य मिल सके। लेकिन अब इस व्यवस्था से जुड़े कुछ व्यावहारिक मुद्दे सामने आने लगे हैं। जिस कारण खिलाड़ी परेशान हैं।
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दुविधा में ‘आउट ऑफ टर्न’ जॉब वाले खिलाड़ी
सरकारी विभागों में नियुक्ति मिलने के बाद कई खिलाड़ियों को अपने कार्यालयी दायित्वों और खेल अभ्यास के बीच तालमेल बैठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि नियमित सरकारी कार्यों के कारण उन्हें अभ्यास और प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे उनके प्रदर्शन और खेल करियर पर असर पड़ने की आशंका बढ़ रही है।

अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए नहीं मिल रहा समय
कई खिलाड़ियों के अभ्यास उस शहर में नहीं है जहां उन्हें नियुक्ति दी मिली है। जिस कारण उन्हें अभ्यास पर जाने के लिए भी विभाग या फिर खेल विभाग की अनुमति का इंतजार करना पड़ रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि इस कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिस कारण ना तो वो अपने खेल पर ध्यान दे पा रहे हैं ना ही नौकरी पर ही ध्यान दे पा रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने रखी अपनी बात
राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके एथलीट सूरज पंवार और अंकित रावत ने भी इस विषय पर चिंता जताई है। सूरज पंवार वर्तमान में युवा कल्याण विभाग में कार्यरत हैं, जबकि अंकित रावत वन विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि सरकारी जिम्मेदारियों के साथ-साथ खेल की तैयारी करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो जाता है।
सरकार कर रही समाधान पर मंथन
खिलाड़ियों की इन समस्याओं को देखते हुए खेल विभाग और राज्य सरकार ऐसी नीति तैयार करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे सरकारी नौकरी कर रहे खिलाड़ियों को अभ्यास, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए आवश्यक समय और सुविधाएं मिल सकें। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था खिलाड़ियों के करियर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ राज्य में खेल संस्कृति को भी मजबूती दे सकती है।
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शूटिंग के ‘चैंपियन कोच’ जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में दिल्ली के मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस

jaspal rana : भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध निशानेबाज, कोच और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता Jaspal Rana का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
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शूटिंग के ‘चैंपियन कोच’ jaspal rana का निधन
शूटिंग के ‘चैंपियन कोच’ जसपाल राणा का निधन हो गया है। मिली जानकारी के दौरान जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय विमान में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
49 साल की उम्र में दिल्ली के मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस
राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, उड़ान के दौरान उन्हें असहज महसूस हो रहा था। जांच के बाद डॉक्टरों ने उनके हृदय में स्टेंट भी डाला था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस खबर के बाद से देश शोक की लहर दौड़ गई है।

भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
एक खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा का करियर बेहद शानदार रहा। उन्होंने एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए कई पदक जीते तथा देश के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते थे। बाद में उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जसपाल राणा मनु भाकर के भी थे गुरू
कोच के रूप में भी उनका योगदान अमूल्य रहा। उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया और पेरिस ओलंपिक में दो पदक हासिल किए। इसके अलावा उन्होंने Saurabh Chaudhary, Anish Bhanwala और Chinki Yadav जैसे कई प्रतिभाशाली निशानेबाजों के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई।
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