Pauri
पौड़ी गढ़वाल में भारी भूस्खलन से तबाही, दो महिलाओं की मौत, मवेशी भी मलबे में दबे

Paudi mein do mahila ki maut
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में बारिश कहर बनकर टूट रही है। बुधवार सुबह पौड़ी जिले के बुरासी गांव में एक दर्दनाक हादसा हो गया। भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन में दो महिलाओं की मौत हो गई और कई मवेशी मलबे में दबकर मर गए। गांव में भारी तबाही मची है, वहीं आसपास के इलाकों से भी नुकसान की खबरें आ रही हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिमला देवी (पत्नी स्व. बलवंत सिंह भंडारी) और आशा देवी (पत्नी स्व. प्रेम सिंह नेगी) बुधवार सुबह अपने घरों में ही थीं, जब अचानक पहाड़ी से आया मलबा उनके घरों में घुस गया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है।
वहीं अमर सिंह का आवासीय भवन और गौशाला भी भूस्खलन की चपेट में आ गया। हादसे में उनके कई मवेशी भी मारे गए। इससे परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
पास के सैजी गांव में भी कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लगातार हो रही बारिश से स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है।
जनकल्याण सामाजिक समिति ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक जताया है और प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत और मुआवजा दिया जाए। साथ ही समिति ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सतर्क रहें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। स्थानीय लोग भी राहत कार्यों में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में लगातार हो रही बारिश से आपदा का खतरा लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में प्रशासन ने भी लोगों से सावधानी बरतने और खतरे वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है।
Kotdwar
डेढ़ साल की मासूम बनी गुलदार का निवाला, आँगन में खेलते समय किया हमला

Kotdwar: जयहरीखाल विकासखंड में गुलदार ने मासूम को बनाया निवाला
कोटद्वार (Kotdwar): उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे जंगली जानवरों के हमले से पूरे प्रदेश भर में दहशत का माहौल है। ऐसी ही एक झकझोर कर रख देने वाली खबर कोटद्वार से सामने आई है। जहाँ पर शनिवार शाम एक डेढ़ वर्षीय मासूम को गुलदार ने अपना शिकार बना दिया।
मुख्य बिंदु
आँगन में खेल रही बच्ची को गुलदार ने बनाया निवाला
जानकारी के मुताबिक, पौड़ी जिले के कोटद्वार के निकट विकासखंड जयहरीखाल की ग्राम पंचायत बरस्वार में डेढ़ वर्षीय यशिका अपने माता-पिता के साथ घर के आंगन में मौजूद थी। इसी दौरान अचानक जंगल की ओर से आए गुलदार ने पल भर में बच्ची पर हमला कर उसे उठाकर जंगल की ओर गया।
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कई घंटों की तलाश के बाद जंगल से मिला शव
घटना होते ही, माता-पिता की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। इसके बाद, ग्रामीणों ने आनन-फानन में जंगल में खोजबीन शुरू की। काफी प्रयासों के बावजूद बच्ची का पता नहीं चल सका। जिसके बाद रात करीब नौ बजे, घर से काफी दूरी पर जंगल क्षेत्र में बच्ची का शव गंभीर अवस्था में बरामद हुआ।
परिवार में मातम, वन विभाग ने संभाला मोर्चा
इस घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में शोक का माहौल है। वहीं, सूचना मिलते ही लैंसडौन वन प्रभाग के वनकर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। फिलहाल, वन विभाग की ओर से क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
Pauri
उत्तराखंड का ये गांव हो गया वीरान, भालू के हमलों से परेशान होकर मज़बूरी में लिया फैसला

Pauri : भालू की दहशत से पौड़ी में गांव हुआ खाली, मज़बूरी में लेना पड़ा फैसला
मुख्य बिंदु
पौड़ी गढ़वाल (Pauri): उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक जंगली जानवरों के हमले ज़े लोग खौफ में हैं। राज्य निर्माण के बाद पिछले वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा मानव-वन्य जीव संघर्ष के मामले सामने आए। जिनमें कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, इसके चलते पौड़ी जिले के पोखड़ा ब्लॉक के एक गांव में भालू के हमले से दहशत में आए लोगों ने पूरा गांव खाली कर दिया है। बीते दिनों गाँव के आखिरी परिवार ने भी अपना पैतृक घर छोड़ दिया है।
पौड़ी जिले में भालू के हमले से पूरा गांव हुआ खाली
एक तरफ जहाँ सरकार अपनी तारीफ़ करते नहीं थकती है। वहीँ दूसरी ओर पहाड़ से लेकर मैदान तक जंगली जानवरों के हमलों को नियंत्रित करने के लिए पूरा तंत्र फेल होता दिख रहा है। विभाग के पास सैकड़ों की तादात में शिकायत जाने के बाद भी कोई ठोस रणनीति जमीन पर प्रभावी नहीं दिख रही है। इसके चलते अब पौड़ी जिले के पोखड़ा ब्लॉक में की पणिया ग्राम सभा के तोक गांव बस्ताग के एक परिवार ने बीते दिनों अपना पैतृक गाँव छोड़ दिया है। जिसके बाद पूरा गाँव वीरान हो गया है।
बीते दिनों आखिरी परिवार भी विस्थापित
बता दें कि, पूरा गांव पहले ही पलायन कर चुका था। जिसके बाद कई लोगों ने भालू के हमले से परेशान होकर विस्थापन किया था। ऐसे में यही एक आखिरी परिवार था जो गाँव को आबाद कर रहा था। लेकिन अब भालू के बढ़ते हमलों से इस परिवार का हौंसला भी टूट गया है। जिसके बाद वो भी पड़ोस के गांव पाणिया में विस्थापित हो चुके हैं।
जनवरी महीने में महज तीन दिनों के भीतर भालू ने उनके छह मवेशियों को अपना शिकार बना लिया। लगातार जान के खतरे और आजीविका पर मंडराते संकट को देखते हुए उन्हें पूरे परिवार के साथ गांव छोड़ने का कठोर फैसला लेना पड़ा। उनका कहना है कि अब तक न तो प्रशासन की ओर से कोई आर्थिक सहायता मिली है और न ही कोई अधिकारी हालचाल लेने पहुंचा है।
– हरिप्रसाद, पलायन करने वाले ग्रामीण
मज़बूरी में लेना पड़ा गाँव छोड़ने का फैसला
परिवार के सदस्यों का कहना है कि ये निर्णय उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि मजबूरी में लिया है। गांव में रहना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि भालू दिन के उजाले में भी गांव के आसपास घूमते नजर आ रहे हैं। इस कारण महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक दहशत में हैं। इसके अलावा भालू लगातार मवेशियों को निशाना बना रहा है, जिससे परिवार को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है ।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पहले से ही जीवन यापन चुनौतीपूर्ण है और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने हालात को और अधिक कठिन बना दिया है। ऐसे में सरकार से जल्द ठोस और व्यावहारिक निर्णय लेने की मांग की जा रही है, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से अपने गांवों में रह सकें।
–बलवंत सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य, पोखड़ा
इस पूरे मामले पर वन विभाग का कहना है कि बस्तांग गांव में मवेशियों की मौत से जुड़े प्रकरण में मुआवजा प्रक्रिया प्रगति पर है। संबंधित रेंजर से रिपोर्ट मांगी गई है और प्रभावित परिवार को शीघ्र मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही भालू को पकड़ने के लिए उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
– महातिम यादव, डीएफओ
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बड़ी खबर : गढ़वाल के कई हिस्सों में हुआ ब्रेक डाउन, छह घंटे से बिजली गुल, लोग परेशान

Pauri News : उत्तराखंड की बड़ी खबर सामने आ रही है। गढ़वाल के कई हिस्सों में ब्रेक डाउन (Breakdown in Garhwal) हुआ है। पांच या छह घंटे से पौड़ी सहित गढ़वाल के कई हिस्सों में बिजली गुल होने से लोग परेशान हैं।
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गढ़वाल के कई हिस्सों में हुआ ब्रेक डाउन
गढ़वाल के कई हिस्सों में ब्रेक डाउन होने की खबरें सामने आ रही हैं। मिली जानकारी के मुताबिक गढ़वाल के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप (Breakdown in Garhwal) है। कड़कड़ाती ठंड में घंटों से बिजली गुल होने के कारण लोग परेशान हैं। बिजली ना होने से कई कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
श्रीनगर में पांच से छह घंटे से है बिजली गुल
बताया जा रहा है कि विष्णुप्रयाग मुरादाबाद 400 केवी हाइटेंशन लाइन में गड़बड़ी हो गई है। इसी कारण गढ़वाल में ब्रेकडाउन हुआ है। बता दें कि श्रीनगर में पिछले पांच घंटे से बिजली गुल है। इसके साथ ही जिला मुख्यालय पौड़ी और इसके आस-पास के क्षेत्रों में भी रात से ही बिजली गुल है।
बिजली ना होने से लोग परेशान
जिला मुख्यालय पौड़ी के आसपास के नगर क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। इसके साथ ही जिले के सभी विकासखंडों में भी बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुक्रवार रात से ही ब्रेक डाउन की स्थिति बनी हुई है।
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