Uttarakhand
रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी खबर! दो महीने से प्रभावित ट्रेनों का संचालन अब सामान्य

रुड़की: जम्मू मंडल में प्राकृतिक आपदा के कारण दो माह से प्रभावित चार ट्रेनों का संचालन अब निर्धारित शेड्यूल के अनुसार फिर से शुरू किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि नवंबर माह से इन ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सामान्य हो जाएगा।
बीते अगस्त में जम्मू मंडल में भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस दौरान जम्मू से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच संचालित कई ट्रेनों को निरस्त या शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया गया था।
स्थिति सामान्य होने के बाद अब इस रूट पर ट्रेनों का संचालन सामान्य होने लगा है। इस बीच सहारनपुर से मुरादाबाद मंडल तक संचालित होने वाली 15655/56 कामाख्या–श्री माता वैष्णो देवी कटरा–कामाख्या एक्सप्रेस और 14609/10 योगनगरी ऋषिकेश–श्री माता वैष्णो देवी कटरा–योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन नवंबर माह में पूर्व निर्धारित शेड्यूल के अनुसार फिर से शुरू होगा।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक आदित्य गुप्ता ने बताया कि कामाख्या एक्सप्रेस ट्रेन 2 नवंबर से कामाख्या और 5 नवंबर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा से चलना शुरू करेगी। वहीं, श्री माता वैष्णो देवी कटरा–योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस ट्रेन 1 नवंबर से ऋषिकेश और श्री माता वैष्णो देवी कटरा से पूर्व निर्धारित समय अनुसार संचालित होगी।
Uttarakhand
उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल!, 6 अधिकारियों का हुआ ट्रांसफर

Uttarakhand News : उत्तराखंड सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में व्यापक प्रशासनिक बदलाव किया है। शासन की ओर से राज्य के मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की नई तैनाती के आदेश जारी किए गए हैं।
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उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल!
शासन के आदेश के मुताबिक सोबन सिंह जीना राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा के प्राचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा को स्थानांतरित कर राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर का प्राचार्य बनाया गया है। अब वो रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे।
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को मिला नया प्राचार्य
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में तैनात डॉ. जीएस तितियाल को अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज का नया प्राचार्य नियुक्त किया गया है। उनके सामने मेडिकल कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में भी बदलाव
शासन ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। चिकित्सा शिक्षा प्रभार के निदेशक डॉ. अजय कुमार आर्या को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी का नया प्राचार्य नियुक्त किया गया है।
| क्रम | अधिकारी का नाम | वर्तमान/पूर्व पद | नई जिम्मेदारी |
|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर |
| 2 | डॉ. जीएस तितियाल | मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा |
| 3 | डॉ. अजय कुमार आर्या | निदेशक, चिकित्सा शिक्षा प्रभार | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी |
| 4 | डॉ. आशुतोष सयाना | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर | निदेशक, चिकित्सा शिक्षा |
| 5 | डॉ. चंद्र मोहन सिंह रावत | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हरिद्वार | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर |
| 6 | डॉ. पंकज सिंह | प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी | प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हरिद्वार |
Uttarkashi
उत्तरकाशी में पापड़गाड़ में फिर धंसा गंगोत्री हाईवे, डरा रहीं बड़ी-बड़ी और चौड़ी होतीं दरारें

Uttarkashi News : उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में पापड़गाड़ के पास गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर भू-धंसाव की स्थिति सामने आई है। सोमवार सुबह सड़क पर करीब 50 मीटर लंबी दरार दिखाई देने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई। कुछ ही घंटों में दरार चौड़ी होने लगी, जिसके चलते हाईवे पर लगभग चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।
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उत्तरकाशी में पापड़गाड़ में फिर धंसा गंगोत्री हाईवे
उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में पापड़गाड़ के पास गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन बढ़ गया है। एक बार फिर से बड़ी-बड़ी दरारें नजर आने लगी हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम ने एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए केवल दोपहिया वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति दी। बाद में सड़क पर बनी दरारों में मिट्टी और अन्य सामग्री भरकर यातायात को दोबारा शुरू कराया गया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फिलहाल अस्थायी व्यवस्था है और समस्या का स्थायी समाधान अभी भी जरूरी है।
पिछले साल भी धंस चुका है हाईवे
पापड़गाड़ क्षेत्र में भू-धंसाव कोई नई समस्या नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले साल अगस्त में आई आपदा के दौरान इसी हिस्से में करीब 100 मीटर तक सड़क का हिस्सा धंस गया था। इसके कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब तीन दिनों तक आवाजाही पूरी तरह बंद रही थी।

उस दौरान धराली और हर्षिल क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान चलाने वाली टीमों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हाईवे बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने वाली राहत व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी।
वैकल्पिक मार्ग नहीं होने से बढ़ी चिंता
पापड़गाड़ के इस हिस्से को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि गंगोत्री हाईवे के बंद होने की स्थिति में लोगों के पास कोई प्रभावी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सड़क पर लगातार बढ़ रही दरारें स्थानीय ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल की घटना के बाद भी अब तक इस संवेदनशील हिस्से के लिए स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। प्रताप प्रकाश, संजीव नौटियाल और केशव नौटियाल समेत अन्य स्थानीय लोगों ने प्रशासन से भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण कराने और स्थायी सुरक्षा कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है।
Champawat
तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क, मरीज आज भी कंधों पर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Champawat News : सरकार गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और पलायन रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन पाटी विकासखंड के सुदूरवर्ती घिंघारुकोट तोक की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। घिंघारुकोट तोक में मरीज को डोली से अस्पताल पहुंचने का मामला सामने आया है।
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तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क
चंपावत जिले के घिंघारुकोट तोक में साल 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांव को चार किलोमीटर मोटर मार्ग से जोड़ने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। नतीजा ये है कि आज भी घिंघारुकोट के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं और दुर्गम पैदल रास्तों पर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
मरीज को डोली से पहुंचाया गया अस्पताल
गांव तक कोई मोटर मार्ग नहीं होने से बीमार मरीजों को आज भी डोली या परिजनों के कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोजाना उबड़-खाबड़ और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब फिसलन और भूस्खलन के खतरे के बीच ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करते हैं।

कई बार मांग के बाद भी मिला केवल आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। जिससे योजना फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई है।
गांव के बुजुर्गों का दर्द सबसे अधिक झकझोरने वाला है। उनका कहना है कि पूरी जिंदगी सड़क का इंतजार करते-करते बीत गई। अब उनकी अंतिम इच्छा सिर्फ इतनी है कि गांव तक सड़क पहुंच जाए, ताकि कम से कम अंतिम यात्रा सम्मान के साथ सड़क मार्ग से हो सके।
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