Uttarakhand
देवीसौड़ में बना 42 गांव को जोड़ने वाला आर्च ब्रिज के दोनों हिस्स झुक, आवाजाही पर लगी रोक।

उत्तरकाशी – विकासखंड के दिचली, गमरी पट्टी सहित टिहरी के प्रतापनगर क्षेत्र के 42 गांव को जोड़ने वाले आर्च ब्रिज के दोनों हिस्स झुक गए हैं। इसे देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। पुल से छोटे वाहनों की आवाजाही ही सुचारू रहेगी।

टिहरी झील पर देवीसौड़ में बने करीब 160 मीटर लंबे आर्च ब्रिज का रखरखाव नहीं होने के कारण उसका डामर उखड़ गया है। वहीं पुल के दोनों हिस्सों पर भी भारी वाहनों की आवाजाही से तीन से चार इंच झुकाव आ गया है। पुल की भार क्षमता मात्र 24 टन है, लेकिन इस पर 30 टन से अधिक भारी वाहनों की आवाजाही भी हो रही थी।
स्थानीय लोग लंबे समय से पुल के मरम्मतीकरण की मांग कर रहे थे। स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने आर्च पुल से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। अब भारी वाहनों की आवाजाही नेरी और तुल्याड़ा की ओर से हो रही है। बता दें कि टिहरी झील बनने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों की लंबी लड़ाई के बाद वर्ष 2018 में 52.75 करोड़ की लागत से इस आर्च पुल का निर्माण किया गया था।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज दास ने बताया कि पुल की स्थिति को देखते हुए आर्च पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही को फिलहाल तीन दिन के लिए रोक दिया गया है। वहीं पुल पर गाडर से वेल्डिंग कर केवल छोटे चौपहिया और दोपहिया वाहनों की आवाजाही सुचारू रहेगी।
Tehri Garhwal
ग्लोबल डिटिनेशन के रूप में विकसित की जाएगी टिहरी झील, मुख्य सचिव ने प्रभावी कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

Tehri News : टिहरी झील को ग्लोबल डिटिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने टिहरी झील को ग्लोबल डिटिनेशन के रूप में विकसित किये जाने के लिये प्रभावी कार्ययोजना बनाये जाने के निर्देश दिये है।
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ग्लोबल डिटिनेशन के रूप में विकसित की जाएगी टिहरी झील
मुख्य सचिव ने सचिव पर्यटन को उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के स्तर पर टिहरी झील और0 उसके समीपवती क्षेत्रो को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किये जाने तथा अवस्थापना सुविधाओं के विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन से पूर्व टिहरी लेक डिटिनेशन का पर्यटन के दृष्टिगत विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिए।
सोमवार को सचिवालय में पर्यटन विकास परिषद द्वारा टिहरी लेक प्रोजेक्ट के तहत सतत् समावेशी अनुकूल जलवायु आधारित पर्यटन विकास योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि टिहरी लेक को ग्लोबल डिटिनेशन के रूप में विकसित किये जाने संबंधी भारत सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में शामिल किया जाय। उन्होने टिहरी लेक का पूरा मास्टर प्लान तैयार करने के लिये अनुभवी कन्सलटेन्ट की नियुक्ति के साथ पर्यटन विभाग को इसी के दृष्टिगत अपनी कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
रिंग रोड तैयार करने की कार्ययोजना में लाई जाए तेजी
मुख्य सचिव ने टिहरी लेक के चारों ओर रिंग रोड तैयार करने की कार्ययोजना में तेजी लाये जाने, टिहरी लेक में प्रस्तावित सी प्लान योजना के साथ रिंग रोड पर कम से कम दो हेलीपैड बनाए जाने की व्यवस्था के भी निर्देश दिये। इसके लिये उन्होंने सचिव वित्त से सचिव पर्यटन, नागरिक उड्डयन तथा लाके निर्माण से समन्वय कर योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
टिहरी में विश्व स्तरीय अवस्थापना सुविधाओं का विकास जरूरी
मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी लेक को ग्लोबल डिटिनेशन के रूप में पहचान दिलाने के लिये आवश्यक है कि यहां पर विश्व स्तरीय अवस्थापना सुविधाओं का विकास हो, उन्होंने लोक निमार्ण विभाग को रिग रोड के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि रिंग रोड बनने से अन्य अवस्थापना सुविधाओं के विकास में भी तेजी आ सकेगी। मुख्य सचिव ने ऋषिकेश मुनि की रेती तथा लोहाघाट चम्पावत के पर्यटन विकास से संबंधित योजनाओं के प्रस्ताव भी शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए ताकि सभी प्रस्तावों को मास्टर प्लान के साथ समयान्तर्गत भारत सरकार को प्रेषित किया जा सके।
Haridwar
कांवड़ यात्रा के बाद गंगा घाटों पर लगा गंदगी का अंबार, स्थानीय लोग और श्रद्धालु परेशान

Haridwar News : धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा रविवार को संपन्न हो गई है। लेकिन इसके बाद जो तस्वीरें सामने आई हैं इनसे स्थानीय लोग और श्रद्धालु बेहद ही परेशान हैं। दरअसल गंगा घाटों पर गंदगी का अंबार लगा है जिस से बदबू भी आ रही है।
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कांवड़ यात्रा के बाद गंगा घाटों पर लगा गंदगी का अंबार
धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा भले ही संपन्न हो चुकी हो, लेकिन यात्रा के समापन के बाद गंगा घाटों की जो तस्वीर सामने आई है वो बेहद ही चिंताजनक और प्रशासनिक दावों की पोल खोलने वाली है। पवित्र गंगा के घाटों पर जगह–जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। प्लास्टिक, कपड़े, भोजन सामग्री और अन्य कचरे का अंबार साफ देखा जा सकता है। घाटों के आसपास से गुजरते ही बदबू का एहसास हो रहा है। जिससे स्थानीय लोग और श्रद्धालु दोनों ही परेशान हैं।
गंदगी के कारण स्थानीय लोग और श्रद्धालु दोनों परेशान
शारदीय कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे थे। प्रशासन ने यात्रा से पहले साफ-सफाई के बड़े-बड़े दावे किए थे और जिला अधिकारी मयूर दीक्षित ने दुकानदारों व स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील भी की थी। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

शारदीय कावड़ यात्रा खत्म होते ही घाटों की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई दिखाई दे रही है। नगर निगम की टीम अब तक पूरी तरह से कूड़ा उठाने में नाकाम रही है, जिससे कई स्थानों पर हालात बदतर बने हुए हैं।
नगर निगम की सक्रियता पर उठ रहे सवाल
श्रद्धालुओं का कहना है कि गंगा हमारी आस्था का केंद्र है, लेकिन यहां फैली गंदगी देखकर बेहद दुख हो रहा है। उनका आरोप है कि हरिद्वार प्रशासन की लापरवाही के साथ-साथ कई दुकानदारों ने भी अपने आसपास की सफाई की जिम्मेदारी नहीं निभाई। नगर निगम की सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
धर्मनगरी की पहचान स्वच्छता और पवित्रता से है, लेकिन मौजूदा हालात इस पहचान को धूमिल कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक गंगा घाटों की सफाई केवल कागजी दावों तक सीमित रहेगी और कब जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई देगी।
big news
चारधाम यात्रा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर, मेडिकल रिलीफ पोस्ट की बढ़ाई जाएगी संख्या

Chardham Yatra 2026 : चारधाम यात्रा 2026 की तारीखों का ऐलान हो गया है। जिसे देखते हुए तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इस साल 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्र6 धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हो जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कमर कस ली है।
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चारधाम यात्रा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर
19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार हेल्थ व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। पिछले साल चारधाम रोड पर 24 मेडिकल रिलीफ कैंप आयोजित किए गए थे। इस बार मेडिकल रिलीफ कैंप को और बढ़ाया जाएगा।
यमुनोत्री और केदारनाथ पैदल मार्गों पर रहेगा फोकस
स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने बताया कि खासतौर पर यमुनोत्री और केदारनाथ पैदल मार्गों पर इसको लेकर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने बताया कि इसी तरह से ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की जाएगी ताकि डेथ रेट को कम किया जा सके। ये स्क्रीनिंग ज्यादातर 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों की की जाएगी।

भारत सरकार से भी की जा रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग
स्वास्थ्य महानिदेशक ने बताया कि भारत सरकार से मिलने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों पर भी ज्यादा फोकस रहेगा। क्योंकि उत्तराखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।
ऐसे में इंटर स्टेट डॉक्टर को यदि हम चार धाम मार्गों पर लगाया जाता हैं तो जिले की पब्लिक सफर करती है। ऐसे में प्राइवेट कॉलेज और भारत सरकार से भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित बनाया जा सके।
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