Chamoli
चमोली: दशोली के दुर्मी गांव में बहुउद्देशीय शिविर: 26 शिकायतें दर्ज, 15 का मौके पर निस्तारण…

चमोली: चमोली जिला प्रशासन की ओर से सोमवार को दशोली विकासखंड के दूरस्थ गांव दुर्मी में उप जिलाधिकारी चमोली राजकुमार पांडेय की अध्यक्षता में बहुउद्देशीय शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान यहां क्षेत्रीय ग्रामीणों ने 26 शिकायतें दर्ज की। जिनमें से 15 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। जबकि शेष शिकायतों के निस्तारण के लिए उप जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए।

दशोली ब्लॉक के दुर्मी गांव में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर निजमूला घाटी के दुर्मी, गौंणा, निजमूला, सैंजी, गाड़ी, पगना, झींझी, पांणा, ईराणी गांवों के ग्रामीणों ने प्रतिभाग कर शिकायतें दर्ज की। इस दौरान ग्रामीणों की ओर से सड़क, मनरेगा और क्षेत्र में पर्यटन विकास के कार्यों को लेकर समस्याएं व शिकायतें दर्ज की। दुर्मी की प्रशासक कविता देवी ने दुर्मी पैदल मार्ग पर पुल निर्माण व दुर्मी ताल के पुनर्निर्माण की मांग की। जिस पर जहां उप जिलाधिकारी ने पुल निर्माण के लिए वन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं दुर्मी ताल पुनर्निर्माण को लेकर शासन स्तर पर कार्रवाई की बात कही गई। ईराणी गांव निवासी विजय सिंह ने पीएमजीएसवाई की ओर से निजमूला-पाणा-ईराणी सड़क पर निर्माणाधीन पुल के निर्माण को शीघ्र करवाने की मांग उठाई। जिस पर पीएमजीएसवाई अधिकारियों ने पुल निर्माण के लिए सर्वेक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद निर्माण कार्य करने की बात कही। दिनेश नेगी की ओर आपदा में क्षतिग्रस्त भवन के निर्माण के लिए सहायता दिए जाने, मोहन सिंह ने गौणा के सेराबगड़ तोक में बाढ सुरक्षा कार्य किए जाने, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य माहेश्वरी देवी ने प्राथमिक विद्यालय दुर्मी में निर्मित कीचन का सुधारीकरण करने, पगना के प्रतापी लाल ने पगना लिंक रोड़ निर्माण, छप्पीलाल ने सड़क निर्माण से क्षतिग्रस्त खेतों का मुआवजा दिए जाने और विजय सिंह ने वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को जारी नोटिस में शिथिलता दिए जाने की मांग की। जिस पर उप जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए।

शिविर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच शिविर भी आयोजित किए गए। इस दौरान यहां 195 ग्रामीणों ने शिविर में स्वास्थ्य जांच की सुविधाओं का लाभ लिया। जिसमें 75 ग्रामीणों की रक्त जांच, 2 लोगों का टीकाकरण किया गया। जबकि 3 ग्रामीणों को दिव्यांग प्रमाण पत्र वितरित किए गए। साथ ही होम्योपैथिक ने 101 तथा आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने 117 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाईयां वितरित की। पशुपालन विभाग की ओर से 54 पशुपालकों को दवाइयां, कृषि विभाग ने 13 ग्रामीणों को कृषि यंत्र और उद्यान विभाग की ओर से 10 काश्तकारों को कृषि औजार उपलब्ध कराएं गए। इस दौरान राजस्व विभाग, पंचायती राज विभाग, समाज कल्याण, वन विभाग, सैनिक कल्याण, जड़ी-बूटी शोध संस्थान, पशुपालन, कृषि और उद्यान विभाग की ओर से स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई।
इस मौके पर एपीडी केके पंत, एसीएमओ डा. एमएस खाती, समाज कल्याण अधिकारी धनंजय लिंगवाल, पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता मनमोहन बिजल्वाण सहित सभी विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
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बद्रीनाथ धाम में आस्था का नया रिकॉर्ड, पहली बार 17.79 लाख के पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या

Badrinath Dham : बद्रीनाथ धाम की यात्रा इस बार श्रद्धालुओं की संख्या के मामले में नया रिकॉर्ड बना रही है। यात्रा सीजन पूरा होने से पहले ही धाम में दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या पुराने सभी आंकड़ों को पार कर चुकी है।
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बद्रीनाथ धाम में आस्था का नया रिकॉर्ड
बद्रीनाथ धाम में आस्था का नया रिकॉर्ड देखने को मिला है। धाम में पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या 17.79 लाख के पार पहुंच गई है। 22 सितंबर तक बद्रीनाथ धाम में 17 लाख 79 हजार 805 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। खास बात यह है कि अभी कपाट बंद होने में करीब डेढ़ से पौने दो महीने का समय बाकी है।
153 दिनों में टूटा पुराना रिकॉर्ड
बद्रीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। 22 सितंबर तक यात्रा को शुरू हुए 153 दिन पूरे हुए और इसी अवधि में दर्शनार्थियों की संख्या अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। मौसम में सुधार के साथ धाम में यात्रियों की आवाजाही भी बढ़ रही है। मंगलवार को ही 6,685 श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ धाम में दर्शन किए।
लगातार बढ़ती जा रही है बद्रीनाथ आने वालों की संख्या
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2000 में उत्तराखंड के गठन के समय बद्रीनाथ धाम में 6 लाख 95 हजार 332 श्रद्धालु पहुंचे थे। इसके बाद यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। वर्ष 2007 में यह आंकड़ा बढ़कर 7 लाख 68 हजार 107 हो गया था।
इसके बाद कुछ वर्षों में बद्रीनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 10 लाख के आंकड़े को भी पार कर गई। वर्ष 2018 में 10 लाख 48 हजार 51 और वर्ष 2019 में 12 लाख 44 हजार 993 श्रद्धालुओं ने धाम में दर्शन किए।

कोरोना काल में घट गई थी यात्रा
कोरोना संक्रमण के दौरान बदरीनाथ यात्रा पर भी इसका असर पड़ा। वर्ष 2020 में सिर्फ 1 लाख 55 हजार 55 तीर्थयात्री धाम पहुंच पाए, जबकि 2021 में यह संख्या 1 लाख 99 हजार 409 रही। इसके बाद यात्रा व्यवस्था सामान्य होने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में फिर तेजी आई। वर्ष 2022 में 17 लाख 63 हजार 578, वर्ष 2023 में 17 लाख 80 हजार 429 और वर्ष 2024 में 17 लाख 74 हजार 264 श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ धाम में दर्शन किए।
श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद
वर्ष 2026 में भी यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक 17 लाख 79 हजार 805 श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं। इस तरह धाम की यात्रा के इतिहास में पहली बार दर्शनार्थियों का आंकड़ा 17.79 लाख के पार पहुंचा है।
यात्रा सीजन के अभी कई सप्ताह बाकी हैं। ऐसे में मौसम अनुकूल रहने पर श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है। बदरीनाथ धाम में बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या चारधाम यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं के लगातार बढ़ते आकर्षण को भी दर्शाती है।
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नींद की झपकी और फिर जोरदार टक्कर, इंटरसेप्टर वाहन ने स्कूटी सवारों को मारी टक्कर

Chamoli News : सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को पंती बाजार के समीप सड़क हादसा हो गया। यातायात विभाग के इंटरसेप्टर वाहन की चपेट में आने से स्कूटी सवार विद्युत विभाग के दो संविदा कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
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इंटरसेप्टर वाहन ने स्कूटी सवारों को मारी टक्कर
चमोली में आज इंटरसेप्टर वाहन की चपेट में आने से हादसा हो गया। हादसे में अनिल रावत के सिर में गंभीर चोट लग गई। जबकि लक्ष्मण सिंह के पैर में फ्रैक्चर बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने दोनों घायलों को तत्काल नारायणबगड़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है।
इंटरसेप्टर वाहन थराली की ओर से जा रहा था कर्णप्रयाग
बताया जा रहा है कि इंटरसेप्टर वाहन थराली की ओर से कर्णप्रयाग जा रहा था। पंती बाजार के पास वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सड़क की दूसरी लेन में चला गया। इसी दौरान नारायणबगड़ से पंती की तरफ जा रही स्कूटी से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई।

टक्कर के बाद स्कूटी सवार दोनों कर्मचारी सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। अनिल रावत के सिर में चोट अधिक गंभीर होने के कारण उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। वहीं, लक्ष्मण सिंह के पैर में फ्रैक्चर हुआ है।
पुलिस ने मामले की जांच की शुरू
हादसे के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इंटरसेप्टर वाहन चालक ने पूछताछ में बताया कि उसे नींद की झपकी आ गई थी, जिसके चलते वाहन नियंत्रण से बाहर होकर दूसरी दिशा में चला गया। दोनों घायल विद्युत विभाग में संविदा कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। पुलिस हादसे के कारणों और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
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कुरुड़ से नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा शुरू, मां नंदा की डोली कैलाश के लिए हुई रवाना

Chamoli News : उत्तराखंड की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा मां नंदा देवी की बड़ी जात शनिवार, 5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू हो गई। मां नंदा की डोली के प्रस्थान के साथ ही कुरुड़ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ मां नंदा को विदाई दी। डोली के साथ बड़ी संख्या में भक्त भी यात्रा पर रवाना हुए।
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कुरुड़ से नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा शुरू
कुरुड़ से नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा शुरू हो गई है। यात्रा शुरू होने से पहले सिद्धपीठ कुरुड़ में पांच दिनों तक मां नंदा राजराजेश्वरी की विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। अनुष्ठान पूरे होने के बाद परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ डोली को कैलाश की ओर रवाना किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचे। डोली की विदाई के समय भक्त भावुक भी दिखाई दिए।
मां नंदा की डोली कैलाश के लिए हुई रवाना
मां नंदा की बड़ी जात यात्रा को उत्तराखंड की प्रमुख और कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। यात्रा का मार्ग करीब 280 किलोमीटर लंबा है। इस दौरान मां की डोली पहाड़ी गांवों और विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए हिमालयी क्षेत्र की ओर आगे बढ़ेगी।
परंपरागत लोकजात यात्रा में डोली का पड़ाव वेदनी कुंड तक रहता है, लेकिन इस बार बड़ी जात यात्रा को आगे होमकुंड तक ले जाने की तैयारी है। होमकुंड में निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और अन्य अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद यात्रा का समापन होगा।

गांवों में होगा डोली का भव्य स्वागत
कुरुड़ से निकलने के बाद मां नंदा की डोली अपने निर्धारित पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ेगी। रास्ते में आने वाले गांवों में श्रद्धालु मां नंदा की डोली का स्वागत करेंगे। जगह-जगह पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन होंगे। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और मां नंदा के जयकारों से यात्रा मार्ग का माहौल भक्तिमय रहेगा।
12 साल बाद आयोजित हो रही बड़ी जात
इस बार की बड़ी जात यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। 12 वर्ष के अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस यात्रा में चमोली के अलावा उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों से भी भक्त पहुंच रहे हैं। यात्रा के शुभारंभ के साथ ही कुरुड़ और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है।
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