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तेल बचाने के लिए स्कूटी चलाकर फंस गए मंत्री जी, इंश्योरेंस और PUC दोनों निकले एक्सपायर, अब हो रहे ट्रोल …

Dehradun News : पीएम मोदी के आह्वान के बाद कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी स्कूटी से अपने कैंप कार्यालय पहुंचे थे। इस से वो पेट्रोल बचत का संदेश देना चाहते थे। लेकिन हुआ कुछ ऐसा कि अब प्रदेश ही नहीं देशभर में उनकी चर्चाएं हो रही हैं।
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तेल बचाने के लिए स्कूटी चलाकर फंस गए मंत्री जी !
पेट्रोल बचाने और ईंधन संरक्षण का संदेश देने के लिए कृषि मंत्री गणेश जोशी ने गढ़ी कैंट में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं किया और स्कूटी से अपने आवास रवाना हुए। हालांकि, उनकी यह पहल दूसरे कारणों से चर्चा में आ गई।
इंश्योरेंस और PUC दोनों निकले एक्सपायर
जिस स्कूटी पर मंत्री सवार थे, उसका इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) एक्सपायर पाया गया। इतना ही नहीं, स्कूटी के पीछे उनका सरकारी वाहन भी चलता नजर आया। मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे, जिसके बाद मंत्री को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।

पूरे मामले को लेकर सामने आई मंत्री जी की सफाई
मामले में मंत्री गणेश जोशी ने सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने पेट्रोलियम पदार्थों की बचत की अपील की थी। इसके साथ ही सीएम धामी ने भी यही बात दोहराई। जिसके बाद उन्होंने कार्यक्रम के बाद ही अपने स्टाफ की स्कूटी से घर जाने का फैसला किया। ताकि लोगों तक पेट्रोल बचत का संदेश जा सके।
मंत्री ने एसएसपी से किया जुर्माना लगाने का अनुरोध
लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि जिस स्कूटी से वो घर पहुंचे उसका इंश्योरेंस और प्रदूषण की अवधि दोनों ही समाप्त हो चुके थे। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा एसएसपी को पत्र दिया गया है जिसमें स्टाफ की स्कूटी के कारण जो भी नियम टूटे हैं उन पर जुर्माना लगाने के लिए अनुरोध किया गया है।

छोटी दूरी तय करने के लिए दोपहिया वाहन का करेंगे इस्तेमाल
इसके साथ ही मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि भविष्य में भी वो छोटी दूरी तय करने के लिए दोपहिया वाहन का उपयोग जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि लंबी यात्राओं के लिए चारपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम रखने की कोशिश की जाएगी।
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चमोली पीपलकोटी टनल हादसे में मरने वालों की संख्या हुई 9, जिलाधिकारी ने की पुष्टि…

Pipalkoti Tunnel Accident : उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। सुरंग के भीतर अचानक पानी और मलबा आने के बाद कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए थे। हादसे के बाद से राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
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चमोली पीपलकोटी टनल हादसे में मरने वालों की संख्या हुई 9
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी के अनुसार, घटना के वक्त सुरंग के अंदर कुल 22 लोग मौजूद थे। रेस्क्यू टीमों ने रातभर अभियान चलाकर 19 लोगों को सुरंग से बाहर निकाल लिया। इनमें से 9 लोगों की मौत हो चुकी है।
तीन लोग अब भी लापतास तलाश जारी
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के बाद से अब भी तीन लोग लापता हैं। उन्हें खोजने के लिए सुरंग के अंदर राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

THDC की निर्माणीधीन टनल में हुआ ये हादसा
बता दें कि ये हादसा टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ। देर शाम टनल के अंदर पानी और मलबा अचानक अंदर घुस गया था। जिस कारण 22 मजदूर अंदर ही फंस गए थे। रातभर चले रेस्क्यू अभियान के बाद 19 लोगों को बाहर निकाला जा सका।

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पहाड़ों का मानसून मैदानों की ओर शिफ्ट? उत्तराखंड में बारिश का बदला पैटर्न, वैज्ञानिक भी हैरान

Uttarakhand Monsoon : उत्तराखंड में मानसून का पैटर्न बदल रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक उत्तराखंड में पहाड़ों से ज्यादा अब मैदानी इलाकों में भारी बारिश हो रही है। इस रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।
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उत्तराखंड में बदल रहा मानसून का पैटर्न
उत्तराखंड के मानसून को लेकर एक अध्ययन में मौसम के बदलते पैटर्न की तस्वीर सामने आई है। लंबे समय के बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि मानसून के दौरान अब पहाड़ी इलाकों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या अधिक दर्ज हो रही है।
पहाड़ों का मानसून मैदानों की ओर हो रहा शिफ्ट?
बता दें कि ये अध्ययन मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह और मौसम विज्ञानी रोहित थपलियाल ने किया है, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 1983 से 2023 तक यानी 41 साल के मानसूनी बारिश के आंकड़ों का अध्ययन किया।
इसके लिए उत्तराखंड के चार मौसम केंद्रों को आधार बनाया गया। इनमें देहरादून और पंतनगर को मैदानी क्षेत्र, जबकि मुक्तेश्वर और टिहरी को पहाड़ी क्षेत्र का प्रतिनिधि माना गया।

देहरादून में सबसे ज्यादा भारी बारिश वाले दिन
अध्ययन में भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश वाले दिनों का औसत निकाला गया। इसके अनुसार मानसून के दौरान देहरादून में ऐसे दिनों की औसत संख्या 7.1 रही। पंतनगर में यह आंकड़ा 4.2 दिन दर्ज हुआ।
वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में मुक्तेश्वर में औसतन 2.3 दिन और टिहरी में केवल 1.7 दिन भारी या उससे अधिक बारिश वाले रहे। आंकड़ों की तुलना करने पर मैदानी इलाकों के दोनों केंद्र पहाड़ी क्षेत्रों के दोनों केंद्रों से आगे नजर आए। यानी पिछले चार दशकों के आंकड़ों के आधार पर अध्ययन ये संकेत देता है कि मानसून के दौरान भारी बारिश की घटनाएं मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ज्यादा हो रही हैं।
जुलाई-अगस्त में हो रही सबसे ज्यादा बारिश
अध्ययन में जुलाई और अगस्त को उत्तराखंड के मानसून के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण महीने बताया गया है। जुलाई में राज्य में औसतन 417.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज होती है, जबकि अगस्त में औसत बारिश करीब 385.7 मिलीमीटर रहती है।
इन दोनों महीनों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या भी अधिक रहती है। साथ ही, जून और सितंबर की तुलना में जुलाई और अगस्त में बारिश के पैटर्न में साल-दर-साल बदलाव अपेक्षाकृत कम देखा गया।

भारी बारिश का बड़ा हिस्सा मैदानी क्षेत्रों में
शोध में भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश को एक साथ ‘चरम बारिश’ की श्रेणी में रखा गया। अध्ययन के मुताबिक मानसून के दौरान होने वाली कुल बारिश में इस तरह की चरम बारिश का हिस्सा देहरादून में औसतन 37 प्रतिशत है।
पंतनगर में यह हिस्सेदारी 33 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके मुकाबले मुक्तेश्वर में 24 प्रतिशत और टिहरी में 19 प्रतिशत बारिश चरम बारिश की श्रेणी में आती है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अध्ययन में शामिल चार मौसम केंद्रों में मैदानी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश का अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा भारी या उससे अधिक तीव्रता वाली बारिश के रूप में दर्ज हुआ है।
प्रदे बदलते मौसम पैटर्न पर बढ़ी चिंता
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बारिश के स्वरूप में बदलाव का असर सड़क, यातायात, नदियों और पहाड़ी ढलानों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर कम समय में होने वाली तेज बारिश अचानक जलभराव, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी परिस्थितियों का खतरा बढ़ा सकती है।
हालांकि, ये अध्ययन केवल चार मौसम केंद्रों के 41 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए पूरे उत्तराखंड में बारिश के बदलते स्वरूप को समझने के लिए अन्य क्षेत्रों और अधिक मौसम केंद्रों के आंकड़ों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण होगा।
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देहरादून के फाइव स्टार होटलों में छापा, किचन में मचा हड़कंप, जांच के लिए भेजे गए सैंपल

Dehradun News : खाद्य पदार्थों में मिलावट और गुणवत्ता के मानकों से किसी भी तरह का समझौता रोकने के लिए उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़े होटल प्रतिष्ठानों की जांच तेज कर दी है। इसी क्रम में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने देहरादून-मसूरी रोड स्थित प्रमुख फाइव स्टार होटलों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया।
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देहरादून के फाइव स्टार होटलों में छापा
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान के दौरान टीमों ने बड़े होटलों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटल के किचन, स्टोर रूम और खाद्य सामग्री के रखरखाव से जुड़ी व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा।
छापे से फाइव स्टार होटलों के किचन में मचा हड़कंप
जांच के दौरान खाद्य पदार्थों के भंडारण, कच्चे माल की गुणवत्ता, पैकेज्ड फूड की स्थिति, साफ-सफाई और खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के इंतजामों की भी पड़ताल की गई। अधिकारियों ने होटल संचालकों और खाद्य कारोबारियों को निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता नियमों का पालन करने के निर्देश दिए।

दो होटलों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूने
निरीक्षण के दौरान विभाग की टीम ने दो अलग-अलग बड़े होटलों से खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए। एक होटल से मसाले का नमूना, जबकि दूसरे होटल से तैयार दाल का सैंपल जांच के लिए लिया गया है। दोनों नमूनों को प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एनालॉग पनीर पर भी विभाग की नजर
अभियान के दौरान विभाग ने विशेष रूप से एनालॉग पनीर और अन्य गैर-दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भी जांच की। अधिकारियों ने खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता, लेबलिंग, स्रोत या निर्धारित मानकों में गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य होटल और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने कारोबारियों से साफ-सफाई बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
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