Uttarakhand
उत्तराखंड के दिव्य धाम: जहां दर्शन करने पर मिलता है ईश्वर का आशीर्वाद !

उत्तराखंड, जिसे देवों की भूमि कहा जाता है, अपनी धार्मिकता और अद्भुत मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि हर एक मंदिर की अपनी एक अनोखी पहचान है। आज हम आपको देवभूमि के पांच ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां जाकर आप महसूस करेंगे जैसे आपने स्वयं भगवान के दर्शन कर लिए हों।
1. श्री केदारनाथ धाम
उत्तराखंड के चार धामों में से एक, यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। बर्फ से ढकी चोटियों के बीच स्थित, केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित है। यहां का शिवलिंग बैल के पीठ की आकृति में है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह मंदिर केवल 6 महीनों के लिए खुलता है।

2. बद्रीनाथ मंदिर
चमोली जिले में स्थित भगवान बद्रीनाथ का यह धाम भी चार धामों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और बर्फबारी के कारण साल में 6 महीने के लिए बंद रहता है। अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर पंच-बदरी में से एक है, जहां भक्तजन आस्था के साथ आते हैं।
3. श्री तुंगनाथ मंदिर 
द्रप्रयाग जिले में स्थित, यह विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है, जो 3680 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां पहुंचने के लिए भक्तों को 4 किमी की ट्रेकिंग करनी होती है। यह मंदिर भी सर्दियों में बंद रहता है, लेकिन यहां की ट्रैकिंग और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव अद्भुत है।
4. त्रियुगी नारायण मंदिर
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित त्रियुगी नारायण मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का स्थल है। यहां की जलती धुनी आज तक नहीं बुझी है, जो इस स्थान की पवित्रता को और बढ़ाती है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जिन्होंने शिव-पार्वती का विवाह करवाया था।
5. गोलू देवता मंदिर
अल्मोड़ा जिले में स्थित गोलू देवता का मंदिर न्याय के देवता के रूप में प्रसिद्ध है। भक्त यहां अपनी समस्याओं को चिट्ठियों में लिखकर छोड़ते हैं, जिससे उन्हें राहत मिलती है। यह मंदिर “चिट्ठियों वाला मंदिर” भी कहलाता है, जहां न्याय की अद्भुत भावना देखने को मिलती है।

6. कसार देवी मंदिर
कश्यप पर्वत पर स्थित कसार देवी मंदिर लगभग 1800 साल पुराना है। यहां की चुंबकीय शक्ति भक्तों को आकर्षित करती है। स्वामी विवेकानंद की ज्ञान की प्राप्ति का यह स्थल आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है।

इन अद्भुत मंदिरों के दर्शन करने के बाद, आप न केवल आध्यात्मिकता का अनुभव करेंगे, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को भी करीब से जान पाएंगे। यदि आप एक बार भी यहां आएं, तो इन मंदिरों को देखना न भूलें!
Uttarakhand
शीतकालीन यात्रा में आस्था के पथ पर नया अध्याय, ठंड के बावजूद गुलजार हैं चारधाम के शीतकालीन प्रवास

Uttarakhand News : शीतकाल में पहाड़ पर इस बार भी वीरानी नहीं है, जो कि चार धामों के कपाट बंद हो जाने के बाद अक्सर दिखाई देती थी। पिछले वर्ष से शुरू हुई शीतकालीन यात्रा के बाद पहाड़ में तस्वीर बदली हुई है। यात्रियों की चहल-पहल सुखद अनुभूति करा रही है।
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शीतकालीन यात्रा में आस्था के पथ पर नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल भर पहले उत्तराखंड आकर जिस शीतकालीन यात्रा का प्रमोशन किया था। वो अब तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा एक नया अध्याय लिख रही है। चारों धामों से संबंधित पांडुकेश्वर, ऊखीमठ, मुखवा और खरसाली जैसे शीतकालीन प्रवास स्थलों तक देश-दुनिया के यात्री अच्छी-खासी संख्या में पहुंच रहे हैं।
ठंड के बावजूद गुलजार हैं चारधाम के शीतकालीन प्रवास
ठंड के बावजूद चारधाम के शीतकालीन प्रवास गुलजार हैं। इस बार चार धाम यात्रा के कपाट बंद होने के बाद से अभी तक 34,140 यात्री इन स्थानों पर पहुंच चुके हैं। अभी करीब ढाई महीने शीतकालीन यात्रा अभी और चलनी है। ये लगातार दूसरा वर्ष है, जबकि राज्य सरकार के स्तर पर सफलतापूर्वक शीतकालीन यात्रा का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में जब पहली बार यह यात्रा शुरू की गई, तो तब 73,381 यात्री शीतकालीन यात्रा पर उत्तराखंड आए थे।
शीतकालीन यात्रा में ऊखीमठ सबसे आगे
शीतकालीन यात्रा में अभी तक सबसे ज्यादा यात्री बाबा केदारनाथ के गद्दीस्थल ऊखीमठ पहुंचे हैं। चार धाम यात्रा प्रबंधन एवं नियंत्रण संगठन के विशेष कार्याधिकारी डॉ . प्रजापति नौटियाल के अनुसार-अभी तक सबसे ज्यादा 20,338 यात्रियों ने ऊखीमठ में दर्शन किए हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा ज्योर्तिमठ में यात्री पहुंचे हैं। खरसाली और मुखवा में भी लगातार यात्री दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। डॉ .नौटियाल के अनुसार-एक से डेढ़ हजार यात्री प्रतिदिन उत्तराखंड पहुंचकर शीतकालीन प्रवास स्थलों पर दर्शन कर रहा है।
शीतकाल में पर्यटक स्थलों पर भी चहल-पहल
शीतकालीन यात्रा के प्रमोशन के बाद तमाम पर्यटक स्थलों पर भी काफी यात्री पहुंच रहे हैं। राज्य सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक शीतकाल में उत्तराखंड पहुंचे। इस क्रम में स्नो लैपर्ड टूर, टूर एंड ट्रैवल्स कॉन्कलेव जैसे आयोजनों पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।
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उत्तराखंड में STF के हाथ लगी बड़ी कामयाबी, तीन करोड़ की हेरोइन के साथ तस्कर गिरफ्तार

Rudrapur News : उत्तराखंड में एसटीएफ के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। एसटीएफ की कुमाऊं एंटी नारकोटिक्स यूनिट व पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन करोड़ की हेरोइन के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है।
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उत्तराखंड में STF के हाथ लगी बड़ी कामयाबी
एसटीएफ की कुमाऊं एंटी नारकोटिक्स यूनिट और पुलिस के हाथों नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कामयाबी लगी है। टीम ने तीन करोड़ से भी ज्यादा की हेरोइन के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। बता दें कि इस तस्कर की तलाश कुमाऊं एंटी नारकोटिक्स यूनिट व पुलिस को लंबे समय से थी।

तीन करोड़ की हेरोइन के साथ तस्कर गिरफ्तार
गिरफ्तार तस्कर की पहचान सहनवाज उर्फ मामू निवासी बरेली के रूप में हुई थी। आरोपी से बरामद एक किलो 33 ग्राम हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग तीन करोड़ 10 लाख बताई जा रही है। पुलिस आरोपी के नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।
कुमाऊं का सबसे बड़ा हेरोइन सप्लायर है मामू
पुलिस का कहना है कि गरिफ्तार आरोपी सहनवाज उर्फ मामू रूद्रपुर ही नहीं बल्कि कुमाऊं के सबसे बड़े तस्करों में से एक है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने ये हेरोइन बरेली के रहने वाले भैया नामक एक शख्स से खरीदी थी। जिसे वो हरजिंदर नामक व्यक्ति को बेचने वाला था।
Haridwar
यूजीसी कानून पर रोक के बाद संतों का गंगा पूजन, 1 फरवरी को सवर्ण समाज से दुकानें बंद रखने की अपील

Haridwar News : देशभर में यूजीसी कानून भारी विरोध के बाज सुप्रीम कोर्ट स्टे लगा दिया है। जिसके बाद हरिद्वार में सतों ने गंगा पूजन किया है। इसके साथ ही संतों ने सवर्ण समाज से 1 फरवरी को दुकानें बंद रखने की अपील की है।
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यूजीसी कानून पर रोक के बाद संतों का गंगा पूजन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर रोक लगाए जाने के बाद परशुराम अखाड़े से जुड़े संतों और स्वर्ण समाज के लोगों ने हरिद्वार में गंगा पूजन किया।संतों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि ये कानून समाज को बांटने वाला था। गंगा तट पर एकत्र होकर संतों ने देश में शांति, एकता और भाईचारे की कामना की।
1 फरवरी को सवर्ण समाज से दुकानें बंद रखने की अपील
परशुराम अखाड़े से जुड़े संतों ने स्वर्ण समाज से एकजुट रहने का आह्वान किया है। इस दौरान सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने एक फरवरी को दुकानें बंद रखकर अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की।

परशुराम अखाड़े से जुड़े संतों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूजीसी कानून पूरी तरह गलत है और इससे भाई-भाई के बीच विभाजन पैदा किया जा रहा था, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
UGC कानून तुरंत लिया जाना चाहिए वापस
संतों का कहना है कि केंद्र सरकार को यह कानून तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा। सवर्ण समाज देशभर में इस मुद्दे को लेकर संगठित होकर संघर्ष करता रहेगा।
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4. त्रियुगी नारायण मंदिर












































