Dehradun
डीएम हरिद्वार धीराज सिंह गर्ब्याल ने राज्यपाल गुरमीत सिंह से की मुलाकात, कॉफी टेबल बुक दि एटर्नल लॉर्ड ग्रेट शिव टेम्पल्स ऑफ उत्तराखण्ड भेंट की।

देहरादून – हरिद्वार के जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने राज्यपाल से मुलाक़ात कर कॉफी टेबल बुक दि एटर्नल लॉर्ड ग्रेट शिव टेम्पल्स ऑफ उत्तराखण्ड भेंट की। यह पुस्तक भगवान शिव के महानतम स्वरूप सदाशिव से प्रेरित है। राज्य में इस प्रकार की किताब का पहली बार प्रकाशन है जिसमें भगवान शिव के लगभग सभी मन्दिरों की जानकारियां दी गई हैं। यह पुस्तक भारतीय परम्परा में भगवान शिव के आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक व ऐतिहासिक आयामों के तो परिचित कराती ही है, उत्तराखण्ड के ऐतिहासिक तथा सामाजिक परिप्रेक्ष्य में उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराती है।

पुस्तक कहा सबसे महत्वपूर्ण अंश उत्तराखण्ड के कुमाऊॅ और गढ़वाल क्षेत्रों में अवस्थित सबसे महत्वपूर्ण शिव मन्दिरों का विस्तृत वर्णन है। पुस्तक के इस खण्ड में पंच केदार धाम से लेकर जागेश्वर तथा बेजनाथ जैसे अनेक पुरातन शिव मन्दिरों से सम्बन्धित मिथकीय व लोक आधारित आयामों को विस्तार से स्थान दिया गया है। ऐंसे अनेक लोकप्रिय मन्दिरों के अतिरिक्त राज्य के सुदूर क्षेत्रो में स्थित अनेक ऐंसे शिव मन्दिरों के विषय में भी अनूठी जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिनके बारे में सामान्य जन की जानकारी बहुत अधिक नहीं रही है। किताब में उत्तराखण्ड के इन पुरातन शिव मन्दिरो में दृष्टिगोचर होने वाली विविध वास्तुशिल्पनीय विशेषताओं तथा शैलियों के विषय में भी आकर्षक तथ्य जुटाए गए हैं। इन शिव मन्दिरों की विभिन्न शैलीगत घटकों और प्रवृत्तियों के कलात्मक तथा एहितहासिक आयामों का परिचय भी दिया गया है।

शताब्दियों से देश-विदेश के संत-सन्यासियों, तीर्थयात्रियों, यात्रियों, शोधकर्ताओं तथा इतिहासवेत्ताओं को आकर्षित करने वाले इन महान शिव-मंदिरों का महातम्य अनेक शाखों तथा ग्रंथों में उपलब्ध है। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल का मानना है कि भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर महान भारतीय वास्तुशिल्प की प्राचीन जड़ों का प्रामाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं और एक ऐसे इतिहास की और संकेत करते हैं जो कलात्मक व सांस्कृतिक रूप से विलक्षण ऊंचाइयां प्राप्त कर चुका था. इस अर्थ में भगवान शिव के आराधना-स्थल हमारी सबसे प्रमुख सामूहिक, सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर हैं. इस धरोहर को सुरक्षित तथा संरक्षित बनाये रखना हमारी वरीयता है और इस दिशा में लगातार नई योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन किया जाता रहेगा।
इस किताब में उत्तराखण्ड राज्य में स्थित भगवान शिव के लगभग सभी मन्दिरों की पौराणिक एवं एतिहासिक जानकारियों, महत्व, मन्दिरों की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। यह राज्य में पहली बार है कि इस प्रकार की कॉफी टेबल बुक का प्रकाशन किया गया है। यह किताब राजय में आने वाले शिव भक्तों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इस किताब के सहयोग से शिव भक्त उत्तराखण्ड राज्य में स्थित शिव मन्दिरों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं तथा मन्दिरो तक आसानी से पहुॅच सकते हैं।
Uttarakhand
Dehradun:‘नारी तू नारायणी’ कार्यक्रम में मातृशक्ति का सम्मान, CM धामी और मंत्री रेखा आर्या रहे शामिल

महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल वरिष्ठ महिलाओं का सम्मान
Dehradun: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्य सेवक सदन में “नारी तू नारायणी, कहानी उनकी प्रेरणा सबकी” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई 38 वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया।
मुख्य बिंदु
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर “नारी तू नारायणी” कार्यक्रम
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता और परिश्रम से समाज को नई दिशा दी है। वरिष्ठ महिलाओं का यह सम्मान उनके संघर्ष, अनुभव और समाज के प्रति समर्पण को नमन करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है और मातृशक्ति के सहयोग से प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

CM धामी और मंत्री रेखा आर्या ने किया महिलाओं को सम्मानित
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सम्मानित की गई सभी महिलाएं 60 वर्ष से अधिक आयु की हैं, लेकिन उन्होंने शारीरिक और मानसिक रूप से थकने या कार्य से विरत होने के बजाय समाज सेवा का मार्ग चुना है। उन्होंने कहा कि ये सभी महिलाएं प्रदेश की महिलाओं के लिए सच्चे अर्थों में प्रेरणा और सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल हैं।

महिला दिवस इस बार नयी थीम के आधार पर मनाया गया
मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ महिलाओं से संवाद का अवसर भी मिला। उनके संघर्ष, जीवटता और आत्मविश्वास से भरी जीवन कहानियों से यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश की मातृशक्ति ने बिना किसी दिखावे के जमीनी स्तर पर स्वयं का और अन्य महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण किया है।

Uttarakhand
Jhanda Mela 2026: झंडे जी मेले की आज से शुरुआत, 94 फीट ध्वजदंड का आरोहण
देहरादून में ऐतिहासिक झंडे जी मेले का आगाज, देश-विदेश से पहुँच रहे श्रद्धालु
Jhanda Mela 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आस्था और परंपरा से जुड़े ऐतिहासिक झंडे जी मेले की शुरुआत आज से हो चुकी है। दरबार साहिब में इस बार 94 फीट लंबे नए ध्वजदंड का आरोहण किया जा रहा है। देशभर से संगतों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है, इसके साथ ही प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर विशेष व्यवस्था लागू कर दी है।
मुख्य बिंदु
दरबार साहिब में शुरू हुआ झंडा जी मेला 2026
दरअसल, देहरादून स्थित दरबार साहिब में हर साल आयोजित होने वाला झंडे जी मेला धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इस बार भी आयोजन को भव्य बनाने के लिए कई दिनों से तैयारियां जारी थीं, जिसके बाद आज से झंडा जी के आरोहण के साथ शुरू हो चुका है। खास बात ये है कि इस बार झंडे जी के लिए 94 फीट लंबे नए ध्वजदंड को तैयार किया गया है, जिसे बनाने में कारीगरों को करीब दो महीने का समय लगा।
Jhanda Mela 2026 – देशभर से पहुँच रहे श्रद्धालु
दूसरी तरफ, देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं का देहरादून पहुंचना भी शुरू हो गया है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में संगतें इस आयोजन में भाग लेने के लिए पहुंचती हैं। इसके अलावा स्थानीय लोग भी इस आयोजन को लेकर काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया है।
गिलाफ चढ़ाने के लिए 90 से 100 साल पहले दर्ज होता है नाम
इसी बीच झंडे जी से जुड़ी एक खास परंपरा गिलाफ चढ़ाने की भी है, जिसे बेहद श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाया जाता है। इसके लिए कई महीने पहले से ही सेवादारों द्वारा गिलाफ सिलने का कार्य शुरू कर दिया जाता है। विशेष रूप से महिलाएं इस सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं और पूरी श्रद्धा के साथ गिलाफ तैयार करती हैं। परंपरा के अनुसार झंडे जी पर कुल तीन प्रकार के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं।
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सबसे पहले 41 सादे गिलाफ लगाए जाते हैं, इसके बाद 21 सनील के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं। अंत में सबसे ऊपर दर्शनी गिलाफ लगाया जाता है, जिसे चढ़ाने का अवसर बेहद खास माना जाता है। दिलचस्प बात ये है कि इसके लिए श्रद्धालु वर्षों पहले ही अपना नाम दर्ज कराते हैं और कई बार 90 से 100 साल बाद यह मौका मिलता है। इस बार देहरादून के अनिल गोयल को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
होली की पंचमी तिथि को होता है झंडे जी का आरोहण
परंपरा के मुताबिक, झंडे जी का आरोहण हर साल होली के बाद पंचमी तिथि को किया जाता है। इसी दिन शाम के समय धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरे विधि-विधान के साथ ध्वजदंड स्थापित किया जाता है। इससे पहले दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की रस्म पूरी की जाती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरबार साहिब पहुंचते हैं।
ढोल-नगाड़ों की गूंज पर ध्वजदंड को लाया गया दरबार साहिब
एक दिन पहले ही नए ध्वजदंड को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दरबार साहिब लाया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और श्रद्धालुओं की पुष्प वर्षा के बीच ध्वजदंड का भव्य स्वागत किया गया। इस धार्मिक माहौल ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। वहीं जैसे ही झंडे जी का आरोहण होता है, उसके साथ ही प्रसिद्ध झंडे मेले की शुरुआत भी हो जाती है। इसके बाद दरबार साहिब के आसपास पूरे इलाके में मेले की रौनक देखने को मिलती है।

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800 से ज्यादा विदेशी श्रद्धालुओं को भेजा गया निमंत्रण
हर साल हजारों श्रद्धालु इस मेले में शामिल होते हैं, जिससे शहर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। दिलचस्प बात ये है कि इस बार विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। दरबार साहिब की ओर से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन सहित कई देशों में रहने वाले लगभग 800 से अधिक श्रद्धालुओं को निमंत्रण भेजा गया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार मेले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संगतों की अच्छी भागीदारी देखने को मिलेगी।
मेले के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान जारी
मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु रखना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। दरबार साहिब के आसपास के इलाके को जीरो जोन घोषित किया गया है, जहां बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन भी लागू किया गया है जिससे ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रहे।
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सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे से रखी जा रही निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जाएगी। वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठहरने और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। कई स्कूलों और धर्मशालाओं में संगतों के ठहरने की व्यवस्था की गई है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मेला परिसर में अस्थायी अस्पताल भी बनाए गए हैं। इसके अलावा 24 घंटे लंगर की व्यवस्था भी रहेगी।
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जरूरी खबर : आठ मार्च को होगा श्री झंडे जी का आरोहण, देहरादून में कल ये रूट रहेंगे डायवर्ट

Dehradun News : राजधानी देहरादून में कल कई रूट डायवर्ट रहेंगे। दरअसल कल देहरादून के प्रसिद्ध श्री झंडे जी मेले का आगाज होने जा रहा है। जिसके चलते देहरादून पुलिस ने रूट डायवर्जन प्लान जारी कर दिया है।
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आठ मार्च को होगा श्री झंडे जी का आरोहण
आठ मार्च यानी कल श्री झंडे जी के आरोहण के साथ ही झंडे जी का मेला शुरू हो जाएगा। बता दें कि झंडे जी का आरोहण 10 मार्च को नगर परिक्रमा होगी। 27 मार्च तक मेला चलेगा। इस बार दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य देहरादून के व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार को मिला है।
देहरादून में कल ये रूट रहेंगे डायवर्ट
1- बिन्दाल से तिलक रोड़ तथा तालाब की ओर समस्त प्रकार के चौपहिया/दुपहिया वाहनों का प्रवेश पूर्णतः वर्जित रहेगा।
2- सहारनपुर चौक से दरबार साहिब की ओर कोई भी वाहन नही आयेगा।
3- पीपल मण्डी चौक से हनुमान चौक और सहारनपुर चौक जाने वाले वाहनों को दर्शनी गेट होते हुये भेजा जायेगा।
4- कांवली रोड़ गुरुराम राय स्कूल की ओर से कोई भी वाहन तालाब और दरबार साहिब की ओर नही जायेगा।
5- बैण्ड बाजार की ओर से दरबार साहिब की ओर भी कोई वाहन नही आयेगा, उक्त वाहनों को तिलक रोड/मच्छी बाजार की ओर भेजा जायेगा।
यहां भारी वाहनों का प्रवेश रहेगा वर्जित
सहारनपुर चौक – गऊ घाट तिराहा – दर्शनी गेट – पीपल मण्डी चौक – तालाब के चारों ओर – भण्डारी चौक से गुरुद्वारे की ओर आने वाले सभी मार्गों पर बैरियर लगाकर सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा।
यातायात का दबाव बढ़ने पर निरजनपुर मण्डी से सहारनपुर चौक की ओर और बल्लीवाला चौक से सहारनपुर चौक की ओर आने वाले यातायात को आवश्कतानुसार डायवर्ट कर कमला पैलेस की ओर भेजा जाएगा। इसके साथ ही लालपुल से सहारनपुर चौक की ओर आने वाले यातायात को निरंजनपुर मण्डी की ओर भेजा जायेगा।
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