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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पद यात्रा से पहले सिद्बबली बाबा मंदिर में पूजा अर्चना कर लिया आशीर्वाद।

कोटद्वार- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत कल देवप्रयाग से गढ़वाल की पद यात्रा का भ्रमण करने जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने आज उत्तराखंड का द्वार कोटद्वार सिद्बबली बाबा मंदिर में पूजा अर्चना कर बाबा का आशीर्वाद लिया।
कहा कि कल 22 नवम्बर से गढ़वाल मंडल की पद यात्रा का शुभारंभ देवप्रयाग की राजा जनक पुत्री मात सीता कोटी मंदिर परिसर से पद यात्रा का आगाज किया जायेगा। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोटद्वार पहुंचकर प्रसिद्ध बाबा सिद्धधाम में सुबह की आरती में भाग लेकर बाबा सिद्बबली की पूजा अर्चना की।
देवप्रयाग मुच्छयाली गांव सीता कोटी मंदिर परिसर पद यात्रा का शुभारंभ कल होगा। 23 नवम्बर को मुच्छयाली गांव से देवलगढ़ लक्ष्मण जी के मंदिर में रात्रि विश्राम 24 को ईगास के दिन देवल के कोटसा गांव वाल्मीकि के मन्दिर से माता सीता के समाधी स्थान फलस्वाडी गांव में पद का आखरी पड़ाव रहेगा।
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पौड़ी के महरगांव में भारी बारिश का कहर, भूस्खलन होने से मलबे में दबे तीन लोग, रेस्क्यू जारी

Pauri News : पौड़ी जिले में भारी बारिश का कहर देखने को मिला है। लगातार हो रही बारिश के कारण कोटद्वार के द्वारीखाल ब्लॉक के मेहरगांव (भलगांव) भूस्खलन हो गया। जिसमें तीन लोगों के दबे होोने की सूचना है। मौके पर राहत-बचाव कार्य जारी है।
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पौड़ी के महरगांव में भूस्खलन होने से मलबे में दबे तीन लोग
कोटद्वार के द्वारीखाल ब्लॉक के मेहरगांव (भलगांव) में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक मकान ढह गया। हादसे के बाद मलबे में तीन लोगों के दबे होने की सूचना सामने आई है। घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।
मौके पर रेस्क्यू अभियान जारी
प्रशासन और बचाव दल हालात पर नजर बनाए हुए हैं। मकान के मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार सुबह से ही भारी बारिश का दौर जारी है, जिसके चलते प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

बीती रात से लगातार हो रही बारिश से हालात हुए खराब
पर्वतीय क्षेत्रों में बीती रात से लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण कई इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। द्वारीखाल क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
लगातार बारिश के चलते सिलगाड़ और लंगूरगाड़ नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। सरुड़ा गांव में पंचायत घर को भी खतरा बना हुआ है। इसके अलावा खोह नदी के किनारे बने कई मकानों और आशियानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
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पौड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति का उल्लास, तिरंगे के रंग में रंगा पूरा जनपद

80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को पूरा पौड़ी जनपद तिरंगे के रंग में रंगा नजर आया। तिरंगे की आन, बान और शान के साथ शहर से लेकर गांव तक देशभक्ति का उल्लास छाया रहा। भारत माता के जयघोष और राष्ट्रभक्ति के नारों से वातावरण गूंज उठा। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में देशप्रेम, राष्ट्रगौरव और राष्ट्रीय एकता की भावना ने लोगों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
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छात्र-छात्राओं ने निकाली भव्य प्रभात फेरी
विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने एजेंसी चौक से कलेक्ट्रेट तक भव्य प्रभात फेरी निकाली। हाथों में तिरंगा और जुबां पर देशभक्ति के नारों के साथ निकली प्रभात फेरी ने पूरे शहर में स्वतंत्रता दिवस का जोश भर दिया।
जिला मुख्यालय में प्रभारी मंत्री ने किया ध्वजारोहण
जिला मुख्यालय में प्रभारी मंत्री मदन कौशिक ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को सलामी दी। इसके पश्चात कलेक्ट्रेट परिसर में प्रभारी मंत्री तथा जिलाधिकारी द्वारा सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित की गयी। राष्ट्रगान की गूंज के बीच पूरा परिसर देशभक्ति के भाव से भर उठा। इस अवसर पर राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस का उत्साह मनाया गया।
मुख्य समारोह में ‘नशामुक्त भारत’ की शपथ
संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में आयोजित मुख्य समारोह का शुभारंभ प्रभारी मंत्री मदन कौशिक, जिला पंचायत अध्यक्ष रचना बुटोला, विधायक राजकुमार पोरी, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया और नगर पालिकाध्यक्ष हिमानी नेगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रभारी मंत्री ने उपस्थित लोगों को ‘नशामुक्त भारत’ की शपथ दिलाई।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर शहीदों को किया नमन
प्रभारी मंत्री मदन कौशिक ने जनपदवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि आजादी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि महान सेनानियों के त्याग और बलिदान को स्मरण कर राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी जिम्मेदारी दोहराने का दिन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भारत और उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं तथा विकसित भारत के संकल्प में उत्तराखंड पूरी मजबूती से अपनी भूमिका निभा रहा है।
पौड़ी की मिट्टी ने दिए देश को वीर सपूत
उन्होंने कहा कि पौड़ी वीर सैनिकों की धरती है, जहां की मिट्टी ने देश को ऐसे वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने तिरंगे की आन, बान और शान के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उत्तराखंड के कण-कण में राष्ट्रभक्ति की भावना इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने युवाओं और बच्चों को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए नशे से दूर रहने, लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
बेटियों की शिक्षा और विरासत के संरक्षण पर जोर
साथ ही बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए गांवों की मजबूती तथा प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए सभी को मिलकर सशक्त, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना है।
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चौबट्टाखाल में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
Pauri News : चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के गवाणी गांव में एक साल पहले बारिश में बहा पुल अब तक दोबारा नहीं बन सका है। पुल के टूटने से आसपास के कई गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। बरसात के दिनों में बच्चों को उफनती मछलाड नदी को पार कर स्कूल जाना पड़ रहा है, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
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चौबट्टाखाल में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
चौबट्टाखाल में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को बच्चे मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि अगस्त 2025 में हुई भारी बारिश के दौरान गवाणी गांव का पुल बह गया था। ये पुल ड्वीला मल्ला, ड्वीला तल्ला, देगला और तिमलपट समेत आसपास के गांवों को आपस में जोड़ता था। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं और करीब एक साल गुजरने के बावजूद इसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।

उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
पुल नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों को स्कूल जाने के लिए जोखिम भरा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। पानी के रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचने में बच्चों को करीब 3 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं, यदि बच्चे जंगल के रास्ते से स्कूल जाते हैं तो दूरी बढ़कर करीब 5 किलोमीटर हो जाती है।
जंगल वाले रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है।
एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ पुल का निर्माण
ग्रामीणों का कहना है कि पुल बहने के बाद से ही संबंधित विभाग और सरकार से इसके पुनर्निर्माण की मांग की जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही पुल का निर्माण शुरू होगा, लेकिन लगभग एक साल बीतने के बाद भी धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ।
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