Uttarakhand
गैस सिलेंडर ने पकड़ी आग, सपेटा में सब्जी की रसोई बनी राख !

उत्तरकाशी – उत्तरकाशी के विकासखंड मुख्यालय के निकट स्थित सपेटा गांव में एक आवासीय भवन की छत पर बनी लकड़ी की रसोई में आग लग गई। इस घटना के कारण रसोई का सारा सामान जलकर राख हो गया। स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर आग बुझाने का प्रयास किया।
भवन के स्वामी जनक सिंह ने बताया कि आग ने रसोई के अंदर रखे फ्रिज और बर्तनों को भी नष्ट कर दिया। आग तब बेकाबू हो गई जब रसोई के अंदर गैस सिलेंडर फट गया, जिसके कारण आसपास के लकड़ी के कमरे भी आग की चपेट में आ गए।
इस आगजनी की घटना में कमरे में रखे राजमा, गेहूं, चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी जलकर नष्ट हो गई। घटना के बाद, राजस्व निरीक्षक शुखवीर असवाल ने कहा कि उन्होंने राजस्व उपनिरीक्षक को घटनास्थल पर जाकर रिपोर्ट तैयार करने के लिए निर्देशित किया है।
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Haridwar
हरिद्वार में विसर्जित की गईं दिवंगत अजित पंवार की अस्थियां, दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

Haridwar News : महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पंवार की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित की गईं। इस दौरान उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
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हरिद्वार में विसर्जित की गईं दिवंगत अजित पंवार की अस्थियां
प्लेन क्रैश हादसे में जान गंवाने वाले महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पंवार की अस्थियों का विसर्जन धर्मनगरी हरिद्वार में किया गया। बृहस्पतिवार को हरिद्वार से अस्थि विसर्जन कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
हरिद्वार के वीआईपी घाट पर एनसीपी की यूथ विंग और राष्ट्रीय युवक कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विधि-विधान के साथ अजित पंवार की अस्थियों का गंगा में विसर्जन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि अजित पंवार की अस्थियों का विसर्जन हरिद्वार के साथ-साथ काशी, रामेश्वरम, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश सहित देश के कई पवित्र स्थलों की नदियों में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके योगदान को स्मरण करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। गौरतलब है कि 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुए प्लेन क्रैश हादसे में अजित पंवार की मृत्यु हो गई थी।
Almora
अल्मोड़ा में जंगली जानवरों की दहशत, ड्रोन और वन कर्मियों की निगरानी में हुई प्रयोगात्मक परीक्षा

Almora: वन कर्मियों की तैनाती और ड्रोन की निगरानी में छात्रों ने दी परीक्षा
मुख्य बिंदु
अल्मोड़ा (Almora): उत्तराखंड में जंगली जानवरों का आतंक इस कदर छाया हुआ है कि अब छात्रों को स्कूल जाने में भी भारी मुश्किलों का समाना करना पढ़ रहा है. ऐसा ही एक मामला अल्मोड़ा जिले से सामने आया है. जहाँ पर वन विभाग की तैनाती और ड्रोन कैमरों की निगरानी में छात्र परीक्षाएं देते हुए नजर आए.
अल्मोड़ा में वन विभाग की तैनाती में छात्रों की परीक्षाएं
अल्मोड़ा जिले में जंगली जानवरों हमलों से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है. इसी कड़ी में सल्ट विधानसभा क्षेत्र के टोटाम गाँव में इंटर कॉलेज के छात्रों की प्रयोगात्मक परीक्षाएं चल रही हैं. जहाँ बीते रोज वन विभाग की टीम सुबह से ही स्कूल परिसर में तैनात रही. इसके साथ ही ड्रोन कैमरे से स्कूल परिसर और आस-पास के इलाकों में कड़ी निगरानी रखी गई.
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ड्रोन से रखी गई स्कूल परिसर में नजर
वन कर्मियों की तैनाती के बीच छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा के पुख्ता इन्तेजाम किए गए. इसके बाद छात्रों की प्रयोगात्मक परीक्षा समय पर पूरी हुई. वन कर्मियों की इस पहल के बाद शिक्षकों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली.
शनिवार को स्कूल परिसर में तेंदुआ दिखने से दहशत
दरअसल, टोटाम इंटर कॉलेज और प्राइमरी स्कूल के पास शनिवार शाम तेंदुआ दिखने से क्षेत्र में दहशत फैल गई. सूचना पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर गश्त की और तेंदुए को दूर भगाने के लिए पटाखे जलाए. लेकिन बाद के दिनों में उसकी गतिविधि नजर नहीं आई, फिर भी परीक्षाओं के दौरान सुरक्षा के लिए वनकर्मी विद्यालय में तैनात रहे.
वन विभाग के मुताबिक, गांव में मादा तेंदुआ अपने तीन शावकों के साथ देखी गई है. निगरानी और पकड़ के लिए गांव में पिंजरे, ट्रैप कैमरे और ड्रोन कैमरों की मदद से लगातार नजर रखी जा रही है.
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वन विभाग की टाम आगे भी क्षेत्र में करेगी गश्त
वन विभाग की टीम की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विद्यार्थियों ने अपनी प्रयोगात्मक परीक्षाएं संपन्न कीं. तेंदुए के भय से लोगों को राहत दिलाने के लिए विभागीय टीम विद्यालय और गांव क्षेत्र में लगातार गश्त करती रहेगी. बीते दो दिनों से क्षेत्र में तेंदुए के दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली है, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.
— गंगासरन, वन क्षेत्राधिकारी, मोहान रेंज
big news
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड हुआ समाप्त, क्या कहता है अल्पसंख्यक समाज, पढ़ें खास रिपोर्ट

Uttarakhand News : धामी सरकार ने खत्म किया मदरसा बोर्ड, सामने आई अल्पसंख्यक समाज की प्रतिक्रिया
Uttarakhand News : उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। मदरसा बोर्ड को जहां खत्म कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर अल्पसंख्यक समाज क्या सोचता है इस खास रिपोर्ट में आपको बताते हैं।
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उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
अवैध मदरसों की आड़ में अपने मंसूबों को अंजाम देने वालों पर सीएम धामी ने बड़ा प्रहार किया है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक छात्र हितों में क्रांतिकारी बदलाव किया है। सरकार ने Madrasa Board को बैन करते हुए, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। प्राधिकरण में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षाविदों को सम्मिलित किया गया है। जिसमें अध्यक्ष डॉ सुरजीत सिंह गांधी समेत 11 सदस्य बनाए गए हैं।

पिछले विधानसभा सत्र सीएम ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले विधानसभा सत्र में Madrasa Board खत्म करने की घोषणा की थी। जिसकी अधिसूचना अब जारी की गई है। फिलहाल मदरसा बोर्ड का अस्तित्व जुलाई में खत्म हो जाएगा। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आएगा।
उत्तराखंड में 452 मदरसे हैं Madrasa Board से रजिस्टर्ड
उत्तराखंड में 452 मदरसे, मदरसा बोर्ड से रजिस्टर्ड है। 117 मदरसों का संचालन वक्फ बोर्ड करता है। जबकि बड़े पैमाने पर और भी मदरसे हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक इन मदरसों में लगभग 70 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं को तालीम दी जा रही है।

मदरसा बोर्ड खत्म करने पर क्या कहता है अल्पसंख्यक समाज
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी के साथ ही वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मदरसा बोर्ड को भंग करने पर फैसले का स्वागत किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री का भी आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक प्राधिकरण की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है।
मुफ्ती शमून कासमी का कहना है कि ये अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि मदरसों के बच्चे दीन के साथ दुनिया की तालीम भी हासिल करेंगे। उनको भी अब शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा।

शिक्षाविदों ने फैसला को बताया समाज हित में दूरदर्शी
अल्पसंख्यक समाज के लोग भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस फैसले की सभी सराहना कर रहे हैं। खासतौर पर अल्पसंख्यक समाज के शिक्षाविद इसको समाज हित में दूरदर्शी निर्णय बता रहे हैं। हालांकि जुलाई के बाद जब प्राधिकरण अस्तित्व में आएगा। उसके बाद क्या कुछ बदलाव मदरसों में तालीम लेने वाले छात्र-छात्राओं के जीवन में आएगा ये देखना दिलचस्प होगा।
FAQs: Madrasa Board बैन और नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
Q1. उत्तराखंड में Madrasa Board को क्यों बैन किया गया?
अवैध मदरसों पर रोक लगाने, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और छात्र हितों की रक्षा के लिए सरकार ने Madrasa Board को बैन किया है।
Q2. Madrasa Board की जगह कौन-सी नई व्यवस्था लाई गई है?
सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है।
Q3. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में कौन-कौन शामिल हैं?
प्राधिकरण में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षाविद शामिल हैं, जिसमें अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी समेत कुल 11 सदस्य हैं।
Q4. Madrasa Board को खत्म करने की घोषणा कब हुई थी?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी घोषणा पिछले विधानसभा सत्र में की थी।
Q5. Madrasa Board का अस्तित्व पूरी तरह कब समाप्त होगा?
जारी अधिसूचना के अनुसार, Madrasa Board का अस्तित्व जुलाई महीने में समाप्त हो जाएगा।
Q6. उत्तराखंड में कितने मदरसे Madrasa Board से रजिस्टर्ड हैं?
राज्य में कुल 452 मदरसे Madrasa Board से रजिस्टर्ड हैं।
Q7. वक्फ बोर्ड द्वारा कितने मदरसों का संचालन किया जाता है?
उत्तराखंड में 117 मदरसे वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित किए जाते हैं।
Q8. क्या राज्य में बिना रजिस्ट्रेशन के भी मदरसे हैं?
हां, बड़ी संख्या में ऐसे मदरसे भी हैं जो अब तक रजिस्टर्ड नहीं हैं।
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