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स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच पर गोदियाल ने उठाए सवाल, मुख्यमंत्री पर साधा निशाना

देहरादून: प्रदेश मे पिछले तीन वर्षों में बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जाँच को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। जिस पर अब नवनिर्वाचित कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच को लेकर गोदियाल ने साधा मुख्यमंत्री पर निशाना
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री का तीन सालों मे बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जाँच का आदेश स्वागत योग्य है। लेकिन हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि तीन साल ही क्यों विगत 15 सालो मे बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों भी जाँच होनी चाहिए ताकि यह पता लग सके की कितने लोगों ने फर्जी या तरीके अपने स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनवाए हैं।
मुख्यमंत्री केवल अपनी छवि चमकाने के लिए करवा रहे हैं जांच
उन्होंने साथ ही कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले भी यही सवाल राज्य की भाजपा सरकार से पूछती रही है। डोडियल ने आगे कहा कि आज राज्य में बहुत संख्या मे ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्होंने फर्जी तरह से अपने स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाए हैं। जो यहाँ के मूलनिवासियों और वंचित वर्ग के लोगों को सरकार द्वारा दी जाने वाली योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ा दोष सरकार का है जिसने नियमों की ढील देकर प्रमाण पत्र बनाने का काम किया है। मुख्यमंत्री केवल अपनी अपनी खाल बचने के लिए ये जांच करवा रहे हैं। इसमें जितना दोष अधिकारियों का है उतना ही मुख्यमंत्री का भी है।
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इंस्टग्राम चलाते हैं तो हो जाइए सावधान ! करोड़ों एकाउंट्स का डाटा हुआ लीक

INSTAGRAM DATA BREACH: इंस्टाग्राम चलने वालों के लिए बड़ी खबर, 1.75 करोड़ लोगों का डाटा हुआ लीक
मुख्य बिंदु
INSTAGRAM DATA BREACH: अगर आप भी इंस्टाग्राम का उपयोग करते हैं तो साव धान हो जाइए, ये खबर आपके लिए है। इंस्टाग्राम यूजर्स जे लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। तजा अपडेट के मुताबिक एक बार फिर से साइबर हैकर्स ने इंस्टाग्राम को निशान बना दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हैकर्स ने 1.75 करोड़ लोगो का परसनल डेटा चोरी कर दिया है। जिससे अब इन यूजर्स पर अकाउंट हैक होने का खतरा मंडरा रहा है।
INSTAGRAM PASSWORD HACK
सोशल मीडिया पर हैकर्स रोजाना डाटा चोरी और अकाउंट हैक करने के नए-नए तरीके अपनाते हैं। तजा मामला इंस्टाग्राम से जुड़ा हुआ है। जहाँ पर रिपोर्ट्स के मुताबिक हैकर्स ने 1.75 करोड़ यूजर्स का डाटा लीक कर दिया है। इसके बाद इन यूजर्स के एकाउंट्स पर अब हैकिंग का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

INSTAGRAM DATA LEAK
इस डाटा लीक में यूजर्स का परसनल डाटा जैसे फ़ोन नंबर, ईमेल आईडी, यूजर नाम और अन्य जानकारी लीक होने की खबर है। लेकिन राहत की खबर ये है कि यूजर्स के पॉसवर्ड अभी इस लीक में शामिल नहीं हैं। साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये हाल ही में Instagram Data Breach में लगभग 1.75 करोड़ यूजर्स की प्राइवेट जानकारी लीक हो गई है। ये पूरा डेटा एक मशहूर हैकिंग फोरम पर सार्वजनिक किया गया है। जिसके बाद से ही यूजर्स को उनके ईमेल और रेजिस्टर्ड नंबर पर पासवर्ड रिसेट करने के फेक नोटिफिकेशंस भेजे जा रहे हैं।
क्या आपका अकाउंट हैक हो जाएगा
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक पासवर्ड्स अभी तक इस लीक का हिस्सा नहीं हैं। लेकिन हैकर्स उनके निजी डेटा के आधार पर भी एकाउंट्स हैक कर सकते हैं। जिसमें वो फेक लिंक की मदद से पासवर्ड रिसेट करवा सकते हैं। साथ ही ईमेल और फ़ोन नंबर के जरिए फिशिंग के जरिए भी डाटा लीक किया जा सकता है।

इंस्टाग्राम अकाउंट हैक से कैसे बचें
- मजबूत और यूनिक Password बनाएं (12–16 characters) ताकि Credential Stuffing से बचाव हो।
- Two-Factor Authentication (2FA/MFA) सक्षम करें और Authenticator App का उपयोग करें।
- संदिग्ध लिंक और Phishing Attacks से बचें तथा Spoofed Login Pages पर विवरण न डालें।
- अनचाही Third-Party OAuth Permissions हटाएं और अविश्वसनीय API Integrations से बचें।
- नियमित रूप से Login Activity और Active Sessions की जांच कर Unauthorized Access पहचानें।
इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो जाए तो क्या करें (RECOVER INSTAGRAM ACCOUNT)
हैक की स्थिति में तुरंत Account Recovery Process शुरू करें, Force Logout करें और Credentials Rotate करें। लेकिन अगर आपको भी लगता है कि आपका अकाउंट हैक हो चुका है, तो सबसे पहले पासवर्ड तुरंत बदलें, इसके साथ ही Two-Factor Authentication ऑन करें और सभी डिवाइस से Force Logout करें। इसके बाद Login Activity और Active Sessions चेक करके अनजान डिवाइस हटाएं। फिर, Account Recovery Process शुरू करते हुए इंस्टाग्राम के Help/Support Center में मामला रिपोर्ट करें और बैकअप Recovery Codes सुरक्षित रखें—ताकि आगे दोबारा ऐसी स्थिति न बने।

इंस्टाग्राम अकाउंट हैक की जांच कैसे करें
- Login Activity में Unknown Devices/Locations दिखाई देना
- बिना आपकी जानकारी के Posts, Stories या Messages का अपने-आप भेजा जाना
- बार-बार Password Change या OTP Emails/Alerts आना
- आपका Email या Phone Number अपने-आप बदल जाना
- कुछ फीचर्स पर अचानक Access Restricted/Disabled का नोटिफिकेशन आना
- बार-बार Unexpected Logout होना, जबकि आपने खुद लॉगआउट नहीं किया हो
Instagram पर बिना अनुमति Posts/Stories भेजे जा रहे हैं, क्या अकाउंट हैक है?
हाँ, यह unauthorized access का संकेत है—पासवर्ड बदलें और 2FA ऑन करें।
बार-बार Password/OTP ईमेल आ रहे हैं, इसका क्या मतलब?
कोई आपके login credentials ट्राय कर रहा है—ईमेल लिंक न खोलें, तुरंत पासवर्ड अपडेट करें।
बार-बार Unexpected Logout हो रहा है, क्या यह हैक का संकेत है?
हाँ—login activity चेक करें, unknown sessions हटाएँ और 2FA सक्षम करें।
INSTAGRAM DATA BREACH कितने लोगो का डाटा लीक हुआ है?
1.75 CRORES PEOPLE’S
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Justice for Ankita Bhandari : आज उत्तराखंड बंद, जानें आज क्या रहेगा बंद और क्या खुला ?

Uttarakhand Bandh : अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश में लंबे समय से प्रदरेशन देखने को मिल रहे हैं। अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सभी राजनीतिक संगठन एक मंच के नीचे नजर आ रहे हैं। इसी के तहत 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का का ऐलान किया गया है।
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Justice for Ankita Bhandari को लेकर आज उत्तराखंड बंद
आज यानी 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद है। इसका ऐलान तो अंकिता भंडारी मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए किया गया था। लेकिन सरकार द्वारा मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद भी आज उत्तराखंड बंद है। लेकिन इसके बावजूद अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने आज उत्तराखंड बंद रखने का फैसला लिया है। बता दें कि उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में करने की मांग उठाई है।

जानें आज क्या रहेगा बंद और क्या खुला ?
Uttarakhand Bandh को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है जहां एक ओर कई संगठनों ने इसे समर्थन दिया है। तो वहीं दूसरी ओर कुछ संगठनों ने इस से अपना समर्थन वापस ले लिया है। उत्तराखंड बंद लेकर व्यापारी संगठन और दलों में मतभेद देखने को मिल रहा है।
प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन चंद्र वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा Ankita Bhandari मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के बाद अब बंद का कोई औचित्य शेष नहीं रह गया है।

बंद को व्यापारियों का नहीं समर्थन इसलिए खुली रहेंगी दुकानें
बता दें कि आज बुलाए गए Uttarakhand Bandh को व्यापारियों ने समर्थन नहीं दिया है। जिसके चलते आज आपको प्रदेशभर में दुकानें और बाजार खुले मिलेंगे। ऐसे में दुकानों और बाजारों को पर इस बंद का असर देखने को नहीं मिलेगा।
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उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के ये हाल, जन्म नहीं लेकिन मौत की गारंटी !, डिलीवरी से पहले कराए जिम्मेदारी के साइन

Uttarkashi News : उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों के रेफर सेंटर बनने की खबरें अक्सर सामने आती हैं। लेकिन उत्तरकाशी से एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव में प्रसव के लिए गई महिला के परिजनों से कर्मचारियों ने प्रसव के बाद मौत अस्पताल की ना होने पर दस्तखत करवाए।
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उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की जन्म नहीं लेकिन मौत की गारंटी !
एक प्रसूता दर्द में कहरा रही है और परिजन उसे अस्पताल ले जाते हैं। लेकिन कर्मचारी ईलाज से पहले मौत की जिम्मेदारी को लेकर हस्ताक्षर करवाते हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला और इंसानियत को झकझोर देने वाली ये घटना Uttarkashi जिले के नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई है।
मिली जानकारी के मुताबिक यहां प्रसूता को डिलीवरी के लिए ले जाया जाता है। लेकिन कर्मचारी उसका प्रसव कराने की तैयारी नहीं बल्कि अस्पताल प्रबंधन परिजनों से एक एग्रीमेंट साइन करवाता है। जिस पर लिखा होता है कि “अस्पताल में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है, न ब्लड बैंक की सुविधा है और न ही ऑपरेशन की व्यवस्था। इसके साथ ही पत्र में जच्चा-बच्चा की मौत की जिम्मेदारी अस्पताल की ना होने की बात लिखी गई।

Uttarkashi में डिलीवरी से पहले कराए जिम्मेदारी के साइन
बता दें कि इस पत्र में लिखा गया है कि “हमे बता दिया गया है कि इस अस्पताल मे कोई भी विषेशज्ञ डाक्टर नहीं हैं और न ही ब्लड बैंक और आप्रेश की सुविधा है प्रसव के दौरान होने वाले सभी खतरों के बारे में हमें अवगत करा दिया गया है, और मै इसके बावजूद भी अपनी पत्नी का प्रसव सामु०स्वा० केन्द्र नौगांव में उपलब्ध सीमित सुविधाओं के साथ करवाना चाहता हूं।
प्रसव के दौरान ज्यादा रक्तश्राव होने से मां और बच्चे के साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना घट सकती है जिसमे मृत्यु भी भाामिल है यह सब जानते हुए हम इसी अस्पताल मे उपलब्ध सीमित सुविधाओं मे प्रसव कराने के लिए तैयार हैं। यदि उपरोक्त कोई भी घटना घटती है तो उसके लिये मैं स्वयं जिम्मेदार रहूंगा, इसके लिए अस्पताल के कर्मचारी और अधिकारी जिम्मेदार नही होगें।”

मौत का सौदागर उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग
अस्पताल प्रबंधन द्वारा ऐसा पत्र लिखवाया जाना प्रदेश के लोगों को भद्दा मजाक ही नहीं है बल्कि ये उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है। भले ही स्वास्थ्य मंत्री और सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लाख दावे करे लेकिन इस एक घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।
Uttarkashi की इस घटना को देखकर ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग इलाज देने वाला ना बनकर मौत का सौदागर बन गया है। क्योंकि ये किसी एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल नहीं है बल्कि पूरे पहाड़ के हर अस्पताल का यही हाल है। जिसके मामले गाहे-बगाहे सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आते रहते हैं।
क्या पहाड़ों पर रहने वालों की जान का नहीं है कोई मोल ?
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिसमें सबसे बड़ा सवाल ये है कि मरीजों और प्रसूताओं को रेफर कर देना या इस तरीके से मजबूरन उनसे जिम्मेदारी के लिए साइन करवाना कहां तक ठीक है ?, पहाड़ के लोगों की जान का कोई मोल नहीं है।
क्या उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी खराब हो गई है कि एक सुरक्षित प्रसव तक सरकारी अस्पतालों में नहीं हो सकता। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो सरकार क्यों हर सुविधा होने के दावे करती है ? Qj आखिर कब तक पहाड़ की महिलाएं और अन्य लोग रेफर-रेफर के खेल में अपनी जान गंवा देंगे ?
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