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मुख्यमंत्री धामी के आदेश पर डॉ. आर. राजेश कुमार ने की चारधाम यात्रा तैयारियों की समीक्षा, 25 अप्रैल तक पूर्ण करने के दिए निर्देश…

चमोली: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चारधाम यात्रा 2025 की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के सचिव एवं बद्रीनाथ धाम के नोडल अधिकारी डॉ. आर. राजेश कुमार ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार, चमोली में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में उन्होंने कमेड़ा से बद्रीनाथ तक सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का स्थलीय निरीक्षण किया है। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे 25 अप्रैल तक अपनी समस्त तैयारियाँ पूर्ण करें।

डॉ. राजेश कुमार ने विशेष रूप से नंदप्रयाग, कमेड़ा और पागलनाला में आगामी 15 से 20 दिनों के भीतर प्रोटेक्शन वर्क व डामरीकरण कार्य पूर्ण करने तथा नंदप्रयाग के पार्थाडीप में पुरानी गैबियन वॉल पर कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जोगीधारा में सड़क किनारे मौजूद बड़े पत्थरों को एक सप्ताह के भीतर हटाने और हाथीपहाड़ के पास गैबियन वॉल का निर्माण जून माह तक पूर्ण करने को कहा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्वयं चारधाम यात्रा की तैयारियों की निरंतर मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस वर्ष की यात्रा को “हरित चारधाम” के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके तहत सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है। सभी विभागों को इसके लिए डिस्पोजल प्लान तैयार करने को कहा गया है।

डॉ. राजेश कुमार ने अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील करते हुए नमक, चीनी और तेल के उपयोग में 10% की कमी लाने की सलाह दी।
मुख्य चिकित्साधिकारी को यात्रा मार्गों पर मेडिकल रिलीव पोस्ट की स्थापना हेतु स्थान चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं बद्रीनाथ में दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति के लिए जल संस्थान को दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। माणा एवलांच रेस्क्यू ऑपरेशन के सफल संचालन के लिए उन्होंने जिला प्रशासन की सराहना की।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने जानकारी दी कि कमेड़ा से नंदप्रयाग तक कार्य तीव्र गति से चल रहे हैं। नंदप्रयाग में रैंप विकसित किए गए हैं जिससे सड़क पर मलबा नहीं आएगा। बद्रीनाथ में बिजली और पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से संचालित है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विवेकानंद हॉस्पिटल, पीपलकोटी एवं बद्रीनाथ का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। सभी आवश्यक कार्य 25 अप्रैल तक पूर्ण कर लिए जाएंगे।
डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा पीपलकोटी में बाढ़ सुरक्षा योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण
इसी क्रम में डॉ. आर. राजेश कुमार ने विकासखंड दशोली, नगर पंचायत पीपलकोटी के अंतर्गत मेहरगांव गधेरा, प्यूली गधेरा और अगथला गधेरा में एसडीएमएफ (राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि) के तहत प्रस्तावित बाढ़ सुरक्षा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने इन योजनाओं को क्षेत्र की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी और आवश्यक बताया
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मकर संक्रांति पर खुले आदिबद्री मंदिर के कपाट, दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

Chamoli News : पंचबद्री में से एक Adibadri Temple के कपाट आज विधि-विधान पूर्व भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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मकर संक्रांति पर खुले Adibadri Temple के कपाट
मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर आज सुबह साढ़े पांच बजे आदिबद्री मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। मुख्य पुजारी चक्रधर थपलियाल ने सुबह विधि-विधान मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

14 से 20 जनवरी तक होगा महाभिषेक समारोह का आयोजन
कपाट उद्घाटन के शुभ अवसर पर 14 से 20 जनवरी तक महाभिषेक समारोह का आयोजन किया जाएगा। बता दें कि Adibadri Temple पंचबद्री में से एक है और चमोली जिले में स्थित है। ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ के दर्शन से पहले आदिबद्री के दर्शन जरूर करने चाहिए।

भगवान विष्णु का सबसे प्राचीन मंदिर है आदिबद्री
भगवान विष्णु का सबसे प्राचीन मंदिर है। इसे भगवान श्री हरि विष्णु की तपस्थली भी माना जाता है। जो कि 16 मंदिरों का समूह है। स्थानीय लोगों के मुताबिक स्वर्ग जाते हुए पांडवों ने इन मंदिरों का निर्माण करवाया था। बाद में आदि गुरू शंकराचार्य ने इनका जीर्णोद्वार करवाया था।
Chamoli
विकास के दावे हुए फेल! चमोली से सामने आया चौंकाने वाला VIDEO, बीमार को 5 KM डंडी-कंडी से ढोया

Chamoli News : उत्तराखंड में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधआओं को लेकर सरकार चाहे लाख दावे करेष। लेकिन आए दिन प्रदेश के किसी ना किसी कोने से ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जो विकास के दावों की पोल खोलकर रख देती हैं। ऐसी ही वीडियो चमोली जिले से सामने आई है। जहां एक बीमार बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचान के लिए ग्रामीओं ने पांच किलोमीटर पैदल डंडी-कंडी का सहारा लिया।
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Chamoli से सामने आया विकास के दावों की पोल खोलता वीडियो
चमोली जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जो पोखरी ब्लॉक में हुए विकास कार्यों की वानगी पेश कर रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक मामला Chamoli जिले के पोखरी ब्लॉक के सैरा मालकोटी का है। जहां सड़क न होने के कारण ग्रामीण 5 किलोमीटर पैदल चलकर डंडी-कंडी के सहारे असहाय और बीमार बुजुर्ग को कंधों पर ढोकर अस्पताल ले गए।

बीमार को 5 KM डंडी-कंडी से ढोया, फिर पहुंचे अस्पताल
पोखरी ब्लॉक के सैरा मालकोटी गांव में शुक्रवार को एक साठ वर्षीय व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब हो गई। बुजुर्ग चलने में असमर्थ थे तो अस्पताल खुद जाना नामुमकिन था। ऐसे में ग्रामीणों ने डंडी-कंडी का सहारा लिया। गांव के लोग पांच किलोमीटर पैदल खड़ी चढ़ाई चढ़कर बुजुर्ग को डंडी-कंडी से सड़क तक ले गए। जिसके बाद निजी वाहन से बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया।
राज्य गठन के 25 सालों तक भी नहीं पहुंच सकी सड़क
ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमें लोग अपनी समस्या बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है राज्य गठन के 25 साल बाद भी उनके गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई। सड़क तो छोड़ो जो कच्चे रास्ते हैं उनकी स्थिति इतनी खराब है कि अक्सर कई लोग हादसे का शिकार होते हैं।
Chamoli जिले से सामने आए इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विषम परिस्थितियों में ग्रामीण बड़ी मुश्किल से बुजुर्ग को ले जा रहे हैं। रास्ता इतना खराब है कि कभी भी हादसा हो सकता है।

सालों से सड़क की मांग नहीं हो पाई पूरी
ग्रामीणों ने रोष जताते हुए वीडियो के माध्यम से कहा है कि अक्सर गांव में जब कोई बीमार हो तो बीमार को डंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाया जाता है। सालों से सड़क की मांग की जा रही है लेकिन सरकार हर बार अनसुना कर देती है। उनकी मांग 25 सालों में पूरी नहीं हो पाई।
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भारत-चीन सीमा पर बड़ी उपलब्धि, मलारी स्टील पुल से सेना और नीति घाटी को नई ताकत…

Chamoli news: मलारी स्टील ब्रिज से मिलेगी भारत को मजबूती, नीती घाटी के दर्जनों गांवों में बढ़ेगा पर्यटन
Chamoli news: चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारत को मिली महत्वपूर्ण सफलता। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत स्यून गदेरे के पास 104 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत, अगले साल तक इस पुल को यातायात के लिए खोलने की योजना है, जिससे सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्य बिंदु
भारत चीन सीमा को जोड़ेगा Malari Steel Bridge
इसके साथ ही, दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में बने इस स्टील ब्रिज को इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सीमांत क्षेत्र में इतने बड़े स्टील ब्रिज का निर्माण पहली बार किया गया है। परिणामस्वरूप, भारतीय सेना और आईटीबीपी की चौकियों तक रसद सामग्री और भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित हो सकेगी, जिससे सीमा सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नीति घाटी और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इसी कड़ी में, ढाक वार्ड की जिला पंचायत सदस्य आरुषि बुटोला ने बताया कि इस पुल के बन जाने से नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पहले से मौजूद कई पुल जर्जर स्थिति में थे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी। अब, इस नए और मजबूत स्टील ब्रिज से ग्रामीणों की आवाजाही सुरक्षित होगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका
एसडीएम जोशीमठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने इस पुल को सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे नीति घाटी के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इसके परिणामस्वरूप, पर्यटकों को सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। BRO का ये प्रोजेक्ट सामरिक महत्व के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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Malari Steel Bridge कहाँ बनाया जा रहा है?
Malari स्टील ब्रिज उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्यून गदेरे के पास बनाया जा रहा है।
Malari Steel Bridge की लंबाई कितनी है?
इस स्टील ब्रिज की कुल लंबाई 104 मीटर है, जिसे सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत बनाया जा रहा है।
Malari स्टील ब्रिज कब तक यातायात के लिए खुलेगा?
BRO के अनुसार Malari Steel Bridge को अगले वर्ष तक आम यातायात और सैन्य उपयोग के लिए खोलने की योजना है।
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