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24 दिसंबर से शुरू होगा साल का अंतिम Panchak, इन 4 राशियों को रहना होगा अलर्ट…

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खरमास में साल का अंतिम Panchak, 24 से 29 दिसंबर तक रहें सतर्क
खरमास के दौरान इस बार साल का अंतिम Panchak पड़ने जा रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से काफी संवेदनशील समय माना जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है, तब लगभग एक महीने की अवधि को खरमास कहा जाता है। यदि इसी दौरान Panchak पड़ जाए, तो इसे द्विगुण दोष काल माना जाता है, यानी इस समय सावधानी और अधिक जरूरी हो जाती है।
इस बार यह Panchak 24 दिसंबर से शुरू होकर 29 दिसंबर तक रहेगा। इन पांच दिनों में विशेष रूप से वृषभ, कर्क, धनु और मीन राशि के जातकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
Panchak और खरमास क्यों माने जाते हैं अशुभ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहते हुए पांच विशेष नक्षत्रों से होकर गुजरता है। वहीं खरमास में शुभ और मांगलिक कार्य पहले से ही वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में जब पंचक और खरमास का संयोग बनता है, तो इसका प्रभाव सामान्य से कहीं अधिक माना जाता है।
पंचक का वृषभ राशि पर प्रभाव
पंचक के दौरान वृषभ राशि वालों को किसी भी तरह के विवाद से दूर रहना चाहिए। नौकरीपेशा जातकों पर कार्यस्थल पर दबाव बढ़ सकता है और अपेक्षित सहयोग न मिलने से तनाव महसूस हो सकता है। व्यापार में लाभ सीमित रहने के संकेत हैं, जबकि खर्च बढ़ सकते हैं। पारिवारिक जीवन में जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना है, इसलिए धैर्य से काम लेना जरूरी होगा।
कर्क राशि के लिए पंचक में सावधानी
पंचक के समय कर्क राशि वालों को धन के लेन-देन में विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। गलत संगति या जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। करियर में काम का दबाव रहेगा और सीनियर्स के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। हालांकि, नई नौकरी या बदलाव के अवसर भी इसी दौरान मिल सकते हैं।
धनु राशि पर पंचक का असर
धनु राशि वालों के लिए पंचक की यह अवधि उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है। पारिवारिक परेशानियां बढ़ने की आशंका है। करियर में यात्रा, स्थान परिवर्तन या नौकरी बदलने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। व्यापार में अपेक्षित मुनाफा पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।
मीन राशि वालों के लिए पंचक में चेतावनी
पंचक के दौरान मीन राशि के जातकों को अपनी और परिवार की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यात्रा और रोजमर्रा के कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। पारिवारिक तनाव और जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना भी अधिक रहेगी, इसलिए संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।
पंचक के दौरान क्या करें और क्या न करें?
क्या न करें:
- नए शुभ या मांगलिक कार्य
- गृह प्रवेश या नया निर्माण
- बड़ी खरीदारी
- अनावश्यक यात्रा
क्या करें:
- पूजा-पाठ और दान
- आत्मचिंतन और संयम
- पुराने अधूरे कार्य पूरे करना
निष्कर्ष
24 से 29 दिसंबर तक रहने वाला यह पंचक, जो खरमास के दौरान पड़ रहा है, सावधानी और संतुलन का समय है। घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सोच-समझकर लिए गए फैसले इस Panchak के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए संयम बनाए रखना ही इस अवधि का सबसे बेहतर उपाय माना जाता है।
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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू से संक्रमित 5 मरीजों की मौत, प्रदेश में अब तक सामने आए 49 मामले

Uttarakhand News : स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक कुल 40 मामले सामने आए हैं। जिनमें से 27 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि अन्य मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू से संक्रमित 5 मरीजों की मौत
उत्तराखंड में अब तक स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों में से अब तक 5 मौतें रिपोर्ट हुई हैं। अधिकारियों के मुताबिक मृतकों में अन्य गंभीर बीमारियां और को-मॉर्बिडिटी भी मौजूद थीं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के लिए एडवाइजरी जारी
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। राज्य स्तर से भी एडवाइजरी मिलने के बाद अस्पतालों में आइसोलेशन बेड चिह्नित करने, फ्लू के मरीजों के लिए आवश्यक व्यवस्था करने, पर्याप्त दवाइयां, मास्क, सैनिटाइजर और पीपीई किट उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सामग्री की खरीद भी की जा रही है।

वर्तमान स्थिति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वर्तमान स्थिति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार फिलहाल सामने आ रहे अधिकांश मामले माइल्ड हैं। हालांकि बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी या को-मॉर्बिडिटी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का करें इस्तेमाल
विभाग ने लोगों से अपील की है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें। सर्दी, जुकाम या बुखार जैसे लक्षण होने पर घर पर रहें और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें। खांसते या छींकते समय रुमाल अथवा टिश्यू का इस्तेमाल करें, खुले में न थूकें और किसी सतह को छूने के बाद हाथों को सैनिटाइज करें। अधिकारियों ने कहा कि कोरोना काल के दौरान अपनाई गई सावधानियां इस संक्रमण से बचाव में भी कारगर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें
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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू की दस्तक, 22 दिनों में 31 संक्रमित, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

Swine Flu Alert : उत्तराखंड में मौसम बदलते ही एक ऐसे वायरस ने दस्तक दे दी है, जो शुरुआत में आम वायरल जैसा लगता है। लेकिन लापरवाही पर ये गंभीर रूप से सकती है। स्वाइन फ्लू यानी H1N1 की दस्तक से प्रदेश में अलर्ट है।
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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू की दस्तक, 22 दिनों में 31 लोग मिले संक्रमित
स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के कई मामले प्रदेश में सामने आ चुके हैं। उत्तराखंड में अगस्त महीने में अब तक 31 मरीजों में इसकी पुष्टि हो चुकी है और ज्यादातर मामले देहरादून से सामने आए हैं। मामले बढ़ते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है और एडवाइजरी जारी कर दी गई है। इसके साथ ही अस्पतालों में निगरानी और स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है।
स्वाइन फ्लू होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
स्वाइन फ्लू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल जैसी ही होती है। अचानक बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और तेज थकान इसके आम लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में उल्टी या दस्त जैसी समस्या भी देखने को मिल सकती है।

लक्षण दिखने पर डॉक्टर से करें संपर्क
सबसे जरूरी बात ये है कि अगर सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, लगातार चक्कर या अत्यधिक कमजोरी जैसी गंभीर परेशानी हो रही है, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इसके साथ ही स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बेहद जरूरी हैं।
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
- हाथों को बार-बार साबुन से धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
- बीमार व्यक्ति के बेहद करीब जाने से बचें।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के मुताबिक मास्क का इस्तेमाल करें।
- इस्तेमाल किए गए टिश्यू को खुले में न फेंकें।
- अगर आप बीमार हैं तो दूसरों के संपर्क में आने से बचें और पर्याप्त आराम करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या कोई दवा खुद से न लें।
National
आज से नौतपा शुरू, अगले नौ दिन पड़ेगी भीषण गर्मी, लू से बचना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां

Nautapa 2026 : 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो चुकी है। नौतपा का संबंध सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से माना जाता है। मान्यता के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब धरती पर गर्मी का असर सबसे अधिक महसूस होता है। इसी वजह से इन शुरुआती नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है।
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आज से नौतपा शुरू, अगले नौ दिन पड़ेगी भीषण गर्मी
Nautapa 2026 शुरू होते ही कई इलाकों में भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। भारतीय पंचांग के अनुसार ये नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में शामिल होते हैं। इस दौरान लू लगना, शरीर में पानी की कमी, पेट संबंधी समस्याएं और थकान जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।
लू से बचना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को ठंडा रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी की पूर्ति करें। वहीं, शरीर की गर्मी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है। सही खानपान अपनाकर गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

नौतपा में क्या करें और क्या ना करें ?
खाने-पीने में ज्यादा तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन कम लेना चाहिए, क्योंकि यह शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। भारी नॉनवेज भोजन जैसे मटन से भी परहेज करना बेहतर माना जाता है। इसकी जगह हल्का भोजन जैसे दाल, हरी सब्जियां और ताजे फल शामिल किए जा सकते हैं।
चाय और कॉफी का अधिक सेवन करने के बजाय पानी, जूस और अन्य तरल पदार्थों को प्राथमिकता देना चाहिए। साथ ही शराब और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना बेहतर रहता है।

नौतपा के दौरान इन चीजों को डाइट में करें शामिल
- छाछ और लस्सी
- नारियल पानी
- तरबूज, खरबूजा और खीरा
- नींबू पानी
- दही और हल्का भोजन
- मौसमी फल
- अधिक पानी और ORS

गर्मी से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
इसके अलावा गर्मी से बचाव के लिए हल्के और सूती कपड़े पहनना फायदेमंद माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि धूप में बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को कपड़े, टोपी या अन्य साधनों से ढककर रखना चाहिए।
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