Pithoragarh
सीएम धामी ने पिथौरागढ़ अस्पताल का किया औचक निरीक्षण, मरीजों से बात कर सुविधाओं का लिया फीडबैक

Pithoragarh News : सीएम धामी ने पिथौरागढ़ दौरे के दौरान जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों के साथ ही उनके परिजनों से बात कर अस्पताल की सुविधाओं का फीडबैक भी लिया।
Table of Contents
सीएम धामी ने पिथौरागढ़ अस्पताल का किया औचक निरीक्षण
सीएम धामी ने पिथौरागढ़ जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण कर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, साफ-सफाई एवं उपचार व्यवस्था का जायज़ा लिया। इस दौरान उन्होंने वार्डों का निरीक्षण कर मरीजों औकर उनके परिजनों से वार्ता की। इसके साथ ही उपचार, दवाइयों और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में फीडबैक लिया।

हर मरीज को मिलें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं
दवा स्टोर का निरीक्षण कर आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सकों की उपलब्धता, समय पर उपचार और प्रत्येक मरीज को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।
अस्पताल प्रशासन को स्वच्छता बनाए रखने के दिए निर्देश
अस्पताल प्रशासन को स्वच्छता, बेहतर प्रबंधन और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के साथ ही मरीजों और तीमारदारों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। ताकि जनहित में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी बन सकें।
Pithoragarh
पंचाचूली से लौट रहे यात्रियों के वाहन पर गिरा बोल्डर, दो की मौके पर ही मौत, 3 घायल

Pithoragarh News : उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से एक दुखद हादसे की खबर सामने आई है। धारचूला तहसील क्षेत्र में पंपाबे के पास पर्यटकों से भरी एक बोलेरो वाहन पर अचानक भारी चट्टान गिर गई। हादसा इतना भीषण था कि वाहन चालक समेत दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
Table of Contents
पंचाचूली से लौट रहे यात्रियों के वाहन पर गिरा बोल्ड
मिली जानकारी के अनुसार ये दुर्घटना धारचूला मुख्यालय से लगभग 42 किलोमीटर दूर पंपाबे क्षेत्र में हुई। चट्टान गिरने के कारण बोलेरो वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा घायलों को उपचार के लिए उप जिला चिकित्सालय धारचूला भेजा गया।
राजस्थान के कोटा के रहने वाले थे सभी पर्यटक
बताया जा रहा है कि वाहन में सवार सभी पर्यटक राजस्थान के कोटा जिले के रामगंज मंडी क्षेत्र के निवासी थे। एक ही परिवार के नौ सदस्य उत्तराखंड भ्रमण पर आए हुए थे। परिवार में तीन बहनें और छह भाई-बहन शामिल थे, जो प्रदेश के विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों का दौरा कर रहे थे।

हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत, 3 घायल
यात्रा के दौरान परिवार ने सबसे पहले आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए। इसके बाद वे दारमा घाटी स्थित प्रसिद्ध पंचाचूली बेस कैंप घूमने पहुंचे। शुक्रवार दोपहर करीब 1:30 बजे पंचाचूली क्षेत्र से लौटते समय उनकी बोलेरो वाहन पंपाबे के पास पहुंची ही थी कि अचानक पहाड़ी से विशाल चट्टान गिर गई और वाहन उसकी चपेट में आ गया।
हादसे में दो लोगों की जान चली गई, जबकि चार घायल यात्रियों का इलाज जारी है। प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
Pithoragarh
पिथौरागढ़ के धारचूला में रेबीज से बच्चे की मौत, 20 दिनों के भीतर दूसरी मौत से लोगों में दहशत

Pithoragarh News : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में रेबीज से एक बच्चे की मौत हो गई। बीते 20 दिनों के भीतर रेबीज के कारण दूसरे किशोर की मौत का मामला सामने आया है। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में भय का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है।
Table of Contents
पिथौरागढ़ के धारचूला में रेबीज से बच्चे की मौत
धारचूला के जुम्मा गांव निवासी 14 वर्षीय मोहित धामी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने बताया कि उसे पानी और हवा से डर लगने लगा था तथा उसके व्यवहार में भी असामान्य बदलाव दिखाई दे रहे थे। स्थिति गंभीर होने पर उसे पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
20 दिनों के भीतर दूसरी मौत से लोगों में दहशत
चिकित्सकों की जांच में रेबीज संक्रमण की आशंका सामने आई, जिसके बाद उसे विशेष निगरानी में रखा गया। अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण से बचाव के लिए उसे अलग वार्ड में भर्ती किया। उपचार के दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुछ महीने पहले गांव में एक लावारिस कुत्ते ने कई लोगों को काटा था। बाद में उस कुत्ते की भी मौत हो गई। हाल के दोनों मामलों में मृत किशोर उसी घटना से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
पहले भी गांव के एक अन्य किशोर की रेबीज संक्रमण से हुई मौत
इससे पहले भी गांव के एक अन्य किशोर की रेबीज संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। लगातार दूसरी मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित लोगों की पहचान और निगरानी की प्रक्रिया तेज कर दी है।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते या अन्य जानवर ने काटा है तो वह तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और समय पर एंटी-रेबीज टीका लगवाएं।
Uttarakhand
Khaliya Top Trek Hindi Guide 2026 : मुनस्यारी के इस छिपे हुए स्वर्ग की संपूर्ण यात्रा और जरूरी टिप्स

Khaliya Top Trek
क्या आप प्रकृति प्रेमी हैं और पहाड़ों की गॉड में कुछ पल सुकून के बिताना चाहते हैं? या फिर आप एक ऐसे एडवेंचर की तलाश में हैं जो बहुत ज्यादा थका देने वाला भी न हो और आपको हिमालय के गगनचुंबी शिखरों के बेहद करीब ले जाए? यदि हाँ, तो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित खलिया टॉप ट्रेक (Khaliya Top Trek) आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
कुमाऊं हिमालय की वादियों में बसा यह खूबसूरत मखमली घास का मैदान (Bugyal) समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर (11,483 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यदि आप इससे भी आगे जाना चाहते हैं, तो इसका उच्चतम बिंदु जीरो पॉइंट (Zero Point) है, जो 4,000 मीटर की ऊंचाई पर है। मुनस्यारी के पास स्थित यह ट्रेक न केवल आपको बर्फ से ढकी चोटियों के जादुई दर्शन कराता है, बल्कि घने जंगलों और अनूठे वन्यजीवों से भी रूबरू कराता है।
आइए, इस विस्तृत ट्रेवल गाइड में जानते हैं कि आप खलिया टॉप ट्रेक की योजना कैसे बना सकते हैं, यहाँ क्या खास है, और आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
खलिया टॉप ट्रेक: एक नज़र में (Trek Overview)
ट्रेक पर निकलने से पहले इस यात्रा से जुड़ी मुख्य बातों को एक तालिका के माध्यम से समझ लेते हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | मुनस्यारी के पास, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड |
| अधिकतम ऊंचाई | 3,500 मीटर (खलिया टॉप), 4,000 मीटर (जीरो पॉइंट) |
| ट्रेक की दूरी | बलाती बेंड से लगभग 15 किमी (आना-जाना) |
| ट्रेक की अवधि | 3 से 4 दिन (काठगोदाम से काठगोदाम) |
| कठिनाई का स्तर | आसान से मध्यम (Easy to Moderate) |
| सबसे अच्छा समय | अप्रैल से जून (गर्मियों में) और सितंबर से नवंबर (सर्दियों की शुरुआत में) |
| मुख्य आकर्षण | पंचचूली, नंदा देवी, हरदेओल और राजरंभा चोटियों का 360-डिग्री व्यू |
खलिया टॉप क्यों है इतना खास? (Why Choose Khaliya Top Trek?)
उत्तराखंड में वैसे तो केदारकंठ, दयरा बुग्याल और रूपकुंड जैसे कई प्रसिद्ध ट्रेक हैं, लेकिन खलिया टॉप की बात ही कुछ अलग है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. पांच प्रसिद्ध चोटियों के साक्षात दर्शन
खलिया टॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ से हिमालय की पांच प्रसिद्ध चोटियों—पंचचूली (Panchachuli), नंदा देवी (Nanda Devi), हरदेओल (Hardeol), नंदकोट (Nandakot), और राजरंभा (Rajrambha) का बेहद स्पष्ट और भव्य नजारा दिखाई देता है। शाम के समय जब डूबते सूरज की किरणें इन बर्फबारी चोटियों पर पड़ती हैं, तो ये सोने की तरह चमक उठती हैं। यह नजारा किसी का भी दिल जीतने के लिए काफी है।
2. जीरो पॉइंट का 360-डिग्री पैनोरैमिक व्यू
खलिया टॉप से महज 1 किलोमीटर आगे बढ़ने पर आप जीरो पॉइंट (Zero Point) पहुँचते हैं। 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान मुनस्यारी क्षेत्र का सबसे ऊँचा बिंदु है। यहाँ खड़े होकर जब आप चारों तरफ घूमते हैं, तो आपको बादलों का समंदर और हिमालय की अनंत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं, जो आपको दुनिया के शिखर पर होने का अहसास कराती हैं।
3. अद्भुत जैव विविधता और घने जंगल
यह ट्रेक बुरांश (Rhododendron), बांझ (Oak), देवदार (Cedar), और सनोवर (Spruce) के घने जंगलों से होकर गुजरता है। वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में जब लाल और गुलाबी बुरांश के फूल खिलते हैं, तो पूरा रास्ता किसी दुल्हन की तरह सज जाता है। इसके अलावा, यहाँ उत्तराखंड का राज्य पक्षी मोनाल (Monal), कस्तूरी मृग (Musk Deer), और पहाड़ी तीतर जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिल जाते हैं।
4. विंटर और समर स्पोर्ट्स
सर्दियों के महीनों में जब यह पूरा बुग्याल सफेद बर्फ की चादर से ढक जाता है, तब यह स्कीइंग (Skiing) के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन मैदान बन जाता है। यहाँ स्कीइंग ट्रेनिंग एसोसिएशन भी काम करते हैं। वहीं गर्मियों के दिनों में यहाँ पर्यटकों के रोमांच के लिए पैराग्लाइडिंग (Paragliding) का आयोजन भी किया जाता है।

खलिया टॉप ट्रेक का विस्तृत रूट मैप और यात्रा कार्यक्रम (Day-by-Day Itinerary)
खलिया टॉप की यात्रा को अच्छे से एन्जॉय करने के लिए 4 दिनों का यह रूट सबसे आदर्श माना जाता है:
दिन 1: काठगोदाम से मुनस्यारी (दूरी: 300 किमी, समय: 9-11 घंटे)
आपकी यात्रा कुमाऊं के प्रवेश द्वार काठगोदाम रेलवे स्टेशन से शुरू होती है। यहाँ से आपको मुनस्यारी के लिए सीधे टैक्सी या बस मिल जाएगी। यह सफर लंबा जरूर है, लेकिन बेहद खूबसूरत है। रास्ता अल्मोड़ा, बागेश्वर और थल जैसे पहाड़ी कस्बों से होकर गुजरता है। रास्ते में आपको हरे-भरे पहाड़, कलकल बहती नदियां और खूबसूरत बिरथी फॉल्स (Birthi Falls) देखने को मिलेंगे। शाम तक आप मुनस्यारी पहुँच जाएंगे, जहाँ आप किसी होटल या होमस्टे में विश्राम कर सकते हैं।
दिन 2: मुनस्यारी से बलाती बेंड (ड्राइव) और भुजानी तक ट्रेक (ट्रेक दूरी: 2 किमी)
सुबह मुनस्यारी के शांत वातावरण में पंचचूली चोटियों के दर्शन के साथ शुरुआत करें। इसके बाद मुनस्यारी से करीब 9 किमी दूर बलाती बेंड (Balati Bend) के लिए ड्राइव करें। बलाती बेंड ही इस ट्रेक का शुरुआती बिंदु (Starting Point) है। यहाँ से आपका पैदल सफर शुरू होता है। पहले दिन आपको घने जंगलों के बीच से होते हुए भुजानी (Bhujani) बेस कैंप तक लगभग 2 किमी की चढ़ाई करनी होगी। कुछ हिस्से थोड़े सीधे और थका देने वाले हैं, इसलिए अपनी गति धीमी रखें। रात का ठहराव भुजानी में टेंट के अंदर तारों की छांव में होगा।
दिन 3: भुजानी से खलिया टॉप और जीरो पॉइंट, वापसी मुनस्यारी (ट्रेक दूरी: 8 किमी)
यह इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत दिन है। सुबह जल्दी उठकर भुजानी से खलिया टॉप की ओर बढ़ें। जैसे-जैसे आप ऊपर चढ़ेंगे, पेड़ कम होने लगेंगे और विशाल मखमली घास के मैदान आपका स्वागत करेंगे। खलिया टॉप पहुँचकर आपको जो दृश्य दिखेगा, वह आपकी सारी थकान मिटा देगा।
यदि मौसम साफ हो और आपकी शारीरिक क्षमता अनुमति दे, तो यहाँ से 1 किमी आगे जीरो पॉइंट तक जरूर जाएं। वहाँ की जादुई खूबसूरती को अपने कैमरे और यादों में कैद करने के बाद, वापस बलाती बेंड की तरफ उतरना शुरू करें। बलाती बेंड से गाड़ी पकड़कर शाम तक वापस मुनस्यारी आ जाएं और होटल में आराम करें।
दिन 4: मुनस्यारी से काठगोदाम (वापसी)
सुबह नाश्ते के बाद, अपनी खूबसूरत यादों के साथ वापस काठगोदाम के लिए प्रस्थान करें। शाम तक काठगोदाम पहुँचकर आप अपनी आगे की ट्रेन या बस पकड़ सकते हैं।

खलिया टॉप जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
यूं तो खलिया टॉप साल के अधिकांश महीनों में खूबसूरत लगता है, लेकिन आपकी पसंद के आधार पर दो बेहतरीन सीजन हैं:
- अप्रैल से जून (वसंत और गर्मी): यदि आप खिले हुए रंग-बिरंगे फूल, हरी-भरी घास और सुहावना मौसम देखना चाहते हैं, तो यह समय सबसे बेस्ट है। इस समय तापमान ट्रेकिंग के लिए एकदम अनुकूल होता है।
- सितंबर से नवंबर (शरद ऋतु): मानसून के ठीक बाद आसमान बिल्कुल साफ होता है। इस दौरान हिमालय की चोटियाँ इतनी स्पष्ट दिखाई देती हैं कि लगता है हाथ बढ़ाते ही उन्हें छू लेंगे। फोटोग्राफी के लिए यह समय सर्वोत्तम है।
- दिसंबर से फरवरी (सर्दियों का मौसम): जो लोग बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं और स्कीइंग के शौकीन हैं, वे सर्दियों में आ सकते हैं। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड होती है और रास्ता काफी फिसलन भरा हो जाता है।
बजट और ठहरने के विकल्प (Where to Stay and Accommodation)
मुनस्यारी और खलिया टॉप ट्रेक के दौरान ठहरने के लिए बजट से लेकर प्रीमियम तक कई विकल्प मौजूद हैं:
- कैंपिंग (Camping): भुजानी या खलिया टॉप के पास खुले आसमान के नीचे टेंट में रहना सबसे रोमांचक अनुभव है। कई ट्रेकिंग एजेंसियां इसके लिए पूरा पैकेज देती हैं।
- KMVN गेस्ट हाउस: खलिया टॉप समिट से लगभग 1 किलोमीटर पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) का एक टूरिस्ट रेस्ट हाउस भी है। यहाँ आपको गरम पानी और बुनियादी सुविधाएं मिल जाती हैं। मुनस्यारी मुख्य बाजार में भी KMVN का बड़ा रेस्ट हाउस है।
- मुनस्यारी में बजट होटल्स: मुनस्यारी बस स्टैंड के पास पांडे लॉज, बिज्जू इन, और होटल हयात पैराडाइज जैसे कई विकल्प हैं, जहाँ ₹500 से लेकर ₹2500 तक में अच्छे कमरे मिल जाते हैं।
ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण टिप्स और सावधानियां (Essential Travel Tips)
खलिया टॉप ट्रेक भले ही आसान से मध्यम श्रेणी का हो, लेकिन हिमालय के मौसम और ऊंचाई को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यात्रा पर जाने से पहले इन बातों को नोट कर लें:
- पर्याप्त कैश (नकद) साथ रखें: मुनस्यारी और उसके आसपास के इलाकों में एटीएम हमेशा काम नहीं करते हैं, और नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन पेमेंट (UPI) में भी दिक्कत आ सकती है। इसलिए पर्याप्त कैश साथ लेकर चलें।
- गर्म कपड़े ले जाना न भूलें: पहाड़ों पर रातें हमेशा ठंडी होती हैं। भले ही आप गर्मियों में जा रहे हों, अपने साथ एक अच्छी विंडप्रूफ जैकेट, थर्मल इनर और ऊनी टोपी जरूर रखें।
- शारीरिक फिटनेस: ट्रेक पर कुछ जगह चढ़ाई काफी खड़ी है। यात्रा पर जाने से कम से कम एक महीने पहले से रोजाना दौड़ने या वॉक करने की आदत डालें, इससे आपके फेफड़ों की क्षमता बढ़ेगी।
- एएमएस (Acute Mountain Sickness) के प्रति सतर्क रहें: जब आप अचानक अधिक ऊंचाई पर जाते हैं, तो सिरदर्द, उल्टी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखें, खूब पानी पिएं और चढ़ाई के दौरान जल्दबाजी न करें।
- फर्स्ट एड किट: अपनी जरूरी दवाइयों के साथ ओआरएस (ORS), दर्द निवारक स्प्रे, बैंडेज और एंटी-नोसिया (उल्टी रोकने की) दवाइयाँ हमेशा अपने पास रखें।
- ट्रेकिंग गियर: एक अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज और एक ट्रेकिंग पोल (Sticks) आपकी चढ़ाई और उतराई को 50% तक आसान बना देते हैं।

खलिया टॉप कैसे पहुँचें? (How to Reach Khaliya Top)
ट्रेन द्वारा (By Train)
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम (KGM) है। दिल्ली, देहरादून, कोलकाता और लखनऊ से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं (जैसे शताब्दी और रानीखेत एक्सप्रेस)। काठगोदाम से आगे का सफर सड़क मार्ग से तय करना होता है।
सड़क मार्ग द्वारा (By Road)
दिल्ली से मुनस्यारी की दूरी लगभग 570 किमी है। आप दिल्ली के आनंद विहार से अल्मोड़ा या हल्द्वानी के लिए बस ले सकते हैं, और वहां से मुनस्यारी के लिए लोकल शेयरिंग टैक्सी या बस बदल सकते हैं। काठगोदाम से मुनस्यारी के लिए सुबह-सुबह सीधी टैक्सियां चलती हैं।
हवाई मार्ग द्वारा (By Air)
सबसे निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (PGH) है, जो काठगोदाम से करीब 32 किमी दूर है। पंतनगर के लिए दिल्ली और देहरादून से नियमित उड़ानें हैं। हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही आपको मुनस्यारी या काठगोदाम के लिए कैब मिल जाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
खलिया टॉप ट्रेक केवल एक यात्रा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के उस अनछुए रूप से साक्षात्कार है जो शहरों की भागदौड़ में कहीं खो गया है। घने जंगलों की ताजी हवा, पैरों के नीचे मखमली बुग्याल और आंखों के सामने पंचचूली का विशाल साम्राज्य—यह एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता।
चाहे आप अकेले यात्रा कर रहे हों, दोस्तों के साथ एडवेंचर पर हों या परिवार के साथ एक शांत वेकेशन चाहते हों, खलिया टॉप आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा। तो देर किस बात की? अपने बैग पैक कीजिए, पहाड़ों को अपना रुख कीजिए और खलिया टॉप के इस छिपे हुए खजाने को खुद अपनी आंखों से महसूस कीजिए।
क्या आपने कभी उत्तराखंड के बुग्यालों की यात्रा की है? खलिया टॉप के बारे में आपका क्या विचार है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
Cricket24 hours agoIND-W vs BAN-W Dream11 Team Today: T20 WC 2026 के लिए बेस्ट फैंटेसी प्रेडिक्शन और पिच रिपोर्ट
Uttarakhand23 hours agoस्व. जसपाल राणा के त्रयोदशी संस्कार में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और CM धामी, दी भावभीनी श्रद्धांजलि
Cricket3 hours agoIndia tour of Ireland 2026: श्रेयस अय्यर की कप्तानी में युवा ब्रिगेड तैयार, जानें पूरा शेड्यूल, स्क्वाड और लाइव स्ट्रीमिंग की डिटेल्स
Cricket4 hours agoSA-W vs NED-W Dream11 Team Today: ICC Women’s T20 World Cup 2026 I 25 JUNE 2026
Uttarakhand3 hours agoNirjala Ekadashi 2026: हरिद्वार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, गंगा में लगाई आस्था की डुबकी
Uttarakhand2 hours agoHaridwar News : गंगा पार कर हाथियों के साथ सेल्फी लेना युवकों को पड़ा भारी, बाल-बाल बची जान…
Uttarakhand1 hour agoनंदा गौरा योजना: हरिद्वार और उत्तरकाशी की 4098 बालिकाओं को मिला लाभ, खातों में पहुंचे 19.23 करोड़ रुपये







































