Uttarakhand
प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा के लिए उत्तराखण्ड में भव्य आयोजन की तैयारी, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर जोर….

उत्तरकाशी : उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित हर्षिल-मुखबा यात्रा को भव्य तरीके से आयोजित करने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। शासन-प्रशासन ने कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए व्यापक योजना बनाई है, ताकि प्रधानमंत्री का दौरा सफल और स्मरणीय बने।
आज सचिव मुख्यमंत्री एवं आयुक्त गढ़वाल मंडल, विनय शंकर पांडेय, सचिव प्रोटोकॉल विनोद कुमार सुमन, आईजी गढ़वाल मंडल राजीव स्वरूप ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, पुलिस अधीक्षक सरिता डोभाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हर्षिल से लेकर मुखबा तक सभी तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए विचार-विमर्श किया।

भव्य आयोजन की तैयारी पर जोर
स्थलीय निरीक्षण के दौरान विनय शंकर पांडेय ने प्रधानमंत्री के स्वागत से लेकर प्रस्थान तक के सभी कार्यक्रमों को मिनट-टू-मिनट तय करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे से संबंधित सभी व्यवस्थाएं भव्य, त्रुटिरहित और समय पर पूरी होनी चाहिए। इस यात्रा के दौरान क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
मुखबा में गंगा मंदिर के दर्शन-पूजन और हर्षिल में प्रस्तावित कार्यक्रम के दूरदर्शन के माध्यम से लाइव प्रसारण की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा, मीडिया कर्मियों के लिए भी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए निर्णय लिए गए।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्थाओं की समीक्षा
हर्षिल में कार्यक्रम स्थल के विभिन्न पहलुओं पर भी गहन चर्चा की गई। सीटिंग प्लान, यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, बिजली और पेयजल आपूर्ति, टॉयलेट एवं सफाई व्यवस्थाओं पर विचार करते हुए अधिकारियों को इन सभी मुद्दों पर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए।
विनोद कुमार सुमन ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए तय प्रोटोकॉल और ब्लूबुक में निर्धारित व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आगमन से लेकर हेलीपैड, मुखबा और हर्षिल तक सभी व्यवस्थाओं में तय मानकों का पालन किया जाए। उन्होंने हर्षिल के कार्यक्रम स्थल पर अधिक लोगों को व्यवस्थित करने के लिए सिटिंग प्लान में बदलाव का सुझाव भी दिया, जिसके लिए जर्मन हैंगर का आकार बढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया।

सुरक्षा प्रबंधों की विशेष निगरानी
आईजी राजीव स्वरूप ने सुरक्षा प्रबंधों का निरीक्षण करते हुए सुरक्षा व्यवस्था, मूवमेंट और यातायात प्लान की समीक्षा की। उन्होंने हर्षिल में कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश और निकास की उपयुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक सरिता डोभाल ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित यात्रा के दौरान किए जा रहे इन व्यापक प्रबंधों से यह स्पष्ट है कि उत्तराखण्ड सरकार इस अवसर को पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के रूप में बड़ी सफलता मान रही है।
Dehradun
4 साल बाद भी अंकिता को न्याय का इंतजार! सड़कों पर उतरे लोग, VIP की पहचान की मांग

Dehradun News : अंकिता भंडारी हत्याकांड को चार साल पूरे होने पर सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठनों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने गांधी पार्क में अंकिता भंडारी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर मामले में कथित VIP की पहचान सार्वजनिक करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
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4 साल बाद भी अंकिता को न्याय का इंतजार !
प्रदर्शन में शामिल उत्तराखंड पूर्व सैनिक अर्धसैनिक संयुक्त संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रकाश थपलियाल ने कहा कि चार साल बीतने के बाद भी उत्तराखंड की जनता अंकिता को भूली नहीं है। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिवार को अब भी न्याय का इंतजार है।
आज देहरादून में सड़कों पर उतरे लोग
प्रकाश थपलियाल ने आरोप लगाया कि अंकिता ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और कथित तौर पर VIP को विशेष सेवाएं देने के लिए दबाव बनाए जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने मांग की कि इन आरोपों और अंकिता से जुड़े कथित अंतिम बयानों की भी निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।

VIP की पहचान की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मामले में जिस VIP का जिक्र लगातार होता रहा है, उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी वक्ताओं ने की।
इस दौरान अंकिता के अंतिम संस्कार को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने अंतिम संस्कार के समय और प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं होने का आरोप लगाया।
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ऋषिकेश में गंगा किनारे दो नवजात बच्चियों के शव मिलने से हड़कंप, पुलिस जांच में जुटी

Rishikesh News : गंगा किनारे अलग-अलग स्थानों पर दो बच्चियों के शव मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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गंगा किनारे दो नवजात बच्चियों के शव मिलने से हड़कंप
ऋषिकेश में गंगा किनारे दो नवजातों के शव मिलने से सनसनी मच गई। पहली घटना नाव घाट के पास सामने आई है। जबकि दूसरी बच्ची का शव साई घाट के नजदीक बरामद किया गया। दोनों मामलों की जानकारी स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी।
पुलिस ने दोनों घटनाओं को लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चियों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उनके शव गंगा किनारे तक कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के दौरान सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।
नाव घाट के पास मिला बच्ची का शव
पहला मामला नाव घाट के आसपास का है। यहां पुलिस को करीब 10 महीने की बच्ची का शव मिला। शुरुआती जांच में यह संभावना सामने आई है कि बच्ची की किसी वजह से मौत हुई होगी और इसके बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार के बजाय शव को गंगा में प्रवाहित कर दिया होगा।

पुलिस इस संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है कि गंगा के तेज बहाव के साथ बच्ची का शव किसी दूसरे स्थान से बहकर ऋषिकेश तक पहुंचा हो। हालांकि, बच्ची की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही चल सकेगा।
साई घाट पर एक दिन की नवजात का शव बरामद
दूसरी घटना साई घाट के पास हुई। यहां गंगा किनारे पुलिस को करीब एक दिन की नवजात बच्ची का शव मिला। पुलिस के मुताबिक, नवजात की नाल भी कटी हुई नहीं थी। इस वजह से मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस मामले की जांच में जुटी
पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि बच्ची का जन्म होने के बाद उसकी मौत हुई और फिर उसे गंगा किनारे छोड़ दिया गया, या नवजात को किसी अन्य परिस्थिति में वहां लाकर छोड़ा गया। बच्ची की पहचान और उसके परिवार तक पहुंचने के लिए भी पुलिस संभावित सुराग जुटा रही है। दोनों घटनाओं की जांच अलग-अलग स्तर पर की जा रही है।
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उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी GPS मैपिंग, अब बिना नेटवर्क भी मिलेगी पूरी जानकारी

Uttarakhand News : उत्तराखंड में ट्रेकिंग और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। प्रदेश के 100 प्रमुख ट्रेक और हाइकिंग रूट्स की GPS और GIS मैपिंग की जाएगी। इसके लिए अभियान दल को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंप कार्यालय से फ्लैग ऑफ किया।
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उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी GPS मैपिंग
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से गठित टीम चयनित ट्रेक रूट्स का मौके पर जाकर तकनीकी और स्थलीय सर्वे करेगी। इस दौरान प्रत्येक रूट की विस्तृत GPS व GIS मैपिंग के साथ ट्रेकर्स के लिए जरूरी सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी।
बिना नेटवर्क भी मिलेगी ट्रेक रूट की जानकारी
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि मैपिंग के बाद ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने वाले दुर्गम इलाकों में भी ट्रेकर्स अपने मोबाइल फोन पर ट्रेल और रूट से जुड़ी जरूरी जानकारी देख सकेंगे।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, परियोजना के सफल होने के बाद उत्तराखंड ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से GPS नेविगेशन सुविधा विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।

ट्रेकर्स की सुरक्षा पर रहेगा फोकस
उत्तराखंड में कई ट्रेकिंग रूट ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क की सुविधा सीमित या उपलब्ध नहीं होती। ऐसे क्षेत्रों में सही रास्ते की जानकारी और आपात स्थिति में लोकेशन की जानकारी काफी महत्वपूर्ण होती है। वैज्ञानिक तरीके से की जाने वाली मैपिंग के जरिए ट्रेक रूट की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
इससे ट्रेकर्स को रास्ते को समझने में मदद मिलेगी और जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव अभियानों को भी अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने ट्रेकिंग रूट्स के विकास में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
कैंप साइट और शौचालय के लिए भी चिन्हित होंगी जगहें
GPS/GIS मैपिंग के दौरान केवल रास्तों का सर्वे नहीं किया जाएगा। टीम ट्रेकिंग रूट्स पर कैंप साइट, डस्टबिन और शौचालय बनाने के लिए उपयुक्त स्थानों की भी पहचान करेगी। इससे भविष्य में ट्रेकिंग रूट्स पर जरूरी सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही कूड़ा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बेहतर योजना तैयार की जा सकेगी।
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