Chamoli
उत्तराखंड: चमोली में एवलांच में मृतक संख्या बढ़कर सात, तीन शव मिले, लापता एक श्रमिक की तलाश जारी…

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में 28 फरवरी को माणा गांव के पास हुए हिमस्खलन में मृतक संख्या अब सात तक पहुंच चुकी है। पहले लापता चार मजदूरों में से तीन के शव रविवार को मिल गए हैं। चमोली के जिला प्रशासन और राहत कार्यों में लगे कर्मियों ने एक और श्रमिक की तलाश जारी रखी है।
रेस्क्यू अभियान जारी, Mi-17 हेलीकॉप्टर की मदद से तलाशी
चमोली के माणा और बद्रीनाथ इलाके में रविवार को रेस्क्यू अभियान फिर से शुरू किया गया। भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान के लिए एक Mi-17 हेलीकॉप्टर और ड्रोन आधारित इंटेलिजेंट बरीड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन सिस्टम एयरलिफ्ट किया गया है। हेलीकॉप्टर और अन्य उपकरणों की मदद से राहत कार्यों को तेज़ी से किया जा रहा है।
गंभीर रूप से घायल को एम्स भेजा गया
चमोली में हिमस्खलन के दौरान गंभीर रूप से घायल पवन पुत्र महेंद्र सिंह (23), जो उत्तर प्रदेश के इशापुर, सम्भल निवासी हैं, को हेली एंबुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेजा गया है। पहले एक घायल को शनिवार को भी एम्स भेजा गया था।
लापता श्रमिकों की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम भेजी गई
एसडीआरएफ की एक विशेषज्ञ टीम को लापता कर्मियों की तलाश के लिए पीड़ित लोकेटिंग कैमरा और थर्मल इमेज कैमरा लेकर भेजा गया है। पुलिस महानिरीक्षक एसडीआरएफ रिधिम अग्रवाल के निर्देशन में यह टीम माणा में राहत कार्यों में जुटी हुई है। इन उपकरणों से बर्फ में दबे शेष कर्मियों की पहचान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण, राहत कार्यों के लिए किया सहयोग
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार सुबह हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने आर्मी अस्पताल में इलाज कर रहे श्रमिकों से मुलाकात की और राहत कार्यों के लिए अधिक संसाधनों की व्यवस्था के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से भी सभी आवश्यक सहायता की बात की।
सेना, आईटीबीपी, बीआरओ समेत 200 कर्मी राहत कार्यों में जुटे
उत्तराखंड सरकार के अनुसार, 28 फरवरी को हिमस्खलन के बाद से राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। सेना, आईटीबीपी, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन सेवाओं के लगभग 200 कर्मी मौके पर राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
सड़कें अवरुद्ध, सेना का हेलीपैड तैयार
माणा बेस कैंप के पास सेना ने हेलीपैड तैयार किया है ताकि आपातकालीन कार्यों में तेजी लाई जा सके। भारी बर्फबारी के कारण बद्रीनाथ क्षेत्र में सड़कें बंद हैं, लेकिन राहत कर्मी सड़कें खोलने के लिए प्रयासरत हैं। बर्फबारी के कारण 5-6 किलोमीटर का हिस्सा अवरुद्ध हो गया है, जिसे साफ करने के प्रयास जारी हैं।
सैन्य नेतृत्व का आकलन
1 मार्च को उत्तराखंड सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल प्रेम राज और ब्रिगेडियर हरीश सेठी ने राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) का दौरा किया और चल रहे सैन्य नेतृत्व वाले बचाव कार्यों का आकलन किया। उन्होंने राहत कार्यों के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है।
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बड़ी खबर : चमोली में घास लेने गई महिला के ऊपर गिरा बोल्डर, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत

Chamoli News : चमोली जिले से दुखद खबर सामने आ रही है। यहां घास लेने के लिए जंगल गई एक महिला की बोल्डर गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया है।
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चमोली में घास लेने गई महिला के ऊपर गिरा बोल्डर
चमोली जिले के गैरबारम गांव में जानवरों के लिए घास लेने के जंगल गई महिला की पत्थर गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। मिली जानकारी के मुताबिक कमला देवी(52) पत्नी कुंदन सिंह अपने पालतू पशुओं के लिए घास लेने के लिए जंगल गई थी। इसी दौरान उनके ऊपर पहाड़ी से पत्थर गिर गया। इस हादसे में वो गंभीर रूप से घायल हो गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम
आनन-फानन में महिला को 108 की सहायता से सीएचसी थराली ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला की मौत के बाद ग्रामीणों ने अस्पताल पहुंचकर हंगामा किया। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के ऊपर कोई कार्य चल रहा था। वहीं से पत्थर गिर कर महिला के ऊपर आया और ये हादसा हो गया।
दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग
ग्रामीणों ने इस हादसे की जांच की मांग की है। इसके साथ ही दोषियों की गिरफ्तारी की मांग भी की है। पुलिस के समझाने के बाद ग्रामीणों शांत हो गए हैं। मामले को लेकर सीएमओ चमोली अभिषेक गुप्ता ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के पहले ही महिला की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतका कमला देवी जूनियर हाईस्कूल में भोजनमाता थी।
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इस बार समय से पहले शुरू होगी Hemkund Sahib Yatra, 23 मई को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट

Hemkund Sahib Yatra 2026 : उत्तराखंड में स्थित पवित्र हेमकुंड साहिब तीर्थस्थल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए 23 मई को खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही हेमकुंड यात्रा का भी आगाज हो जाएगा।
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23 मई को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
उत्तराखंड में स्थित पवित्र हेमकुंड साहिब धाम 23 मई 2026 से श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। इसी के साथ यात्रा का भी शुभारंभ हो जाएगा। हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने मुख्य सचिव आनंद वर्धन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आगामी तीर्थयात्रा सीजन की तैयारियों पर चर्चा की।

इस बार समय से पहले शुरू होगी Hemkund Sahib Yatra 2026
बता दें कि इस बार हेमकुंड साहिब यात्रा समय से पहले शुरू हो रही है। हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट ने इस वर्ष मौसम की अनुकूल परिस्थितियों और पिछले वर्षों की अपेक्षा कम बर्फबारी को देखते हुए यात्रा को सामान्य समय से पहले शुरू करने का फैसला लिया है।

पिछले साल 25 मई से शुरू हुई थी हेमकुंड साहिब यात्रा
बता दें कि साल 2025 में हेमकुंड साहिब यात्रा 25 मई से शुरू हुई थी। 10 अक्टूबर 2025 को यात्रा का समापन हुआ। यात्रा के 139 दिनों में कुल 2 लाख 75 हजार से ज्यादा श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब पहुंचे और मत्था टेका। इस संख्या को अब तक की सबसे अधिक दर्शन करने वालों की संख्या है।
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चमोली : पोखरी के डुंगर गांव में सड़क पहुंचने पर जश्न, ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर बनाई गांव तक रोड

Chamoli News : चमोली जिले से ऐसी खबर सामने आई है जो सरकार को आईना तो दिखाती ही है। लेकिन इसके साथ ही ये भी साबित करती है कि अगर पहाड़ी कुछ करने की ठान ले तो उसे कर के दिखाते हैं। पोखरी के डुंगर गांव में ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर अपने गांव तक सड़क पहुंचाई है।
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पोखरी के डुंगर गांव में सड़क पहुंचने पर जश्न
चमोली जिले विकासखंड पोखरी में डुंगर गांव में सड़क पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। वर्षों से सड़क सुविधा से वंचित इस गांव के लोगों ने आखिरकार खुद ही पहल करते हुए चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान कर करीब 1 किलोमीटर सड़क का निर्माण कर दिया। यह सड़क तोणजी मोटर मार्ग से गांव को जोड़ती है।
वाहन के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों मनाई खुशी
सड़क बनने के बाद बृहस्पतिवार को पहली बार गांव में वाहन पहुंचा। वाहन के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की और इसे एक उत्सव की तरह मनाया। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने वाहन का स्वागत किया और एक-दूसरे को बधाई दी।

नेताओं ने सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने खुद उठाई जिम्मेदारी
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही थी, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला और न किसी नेताओं ने हमारी सुध ली तो गांव के लोगों ने खुद ही सड़क बनाने की जिम्मेदारी उठाई। सभी ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान करते हुए सड़क निर्माण का कार्य पूरा किया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से अब गांव तक वाहनों की पहुंच संभव हो गई है, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाने, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के कामकाज में बड़ी सुविधा मिलेगी।
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