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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड हुआ समाप्त, क्या कहता है अल्पसंख्यक समाज, पढ़ें खास रिपोर्ट

Uttarakhand News : धामी सरकार ने खत्म किया मदरसा बोर्ड, सामने आई अल्पसंख्यक समाज की प्रतिक्रिया
Uttarakhand News : उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। मदरसा बोर्ड को जहां खत्म कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर अल्पसंख्यक समाज क्या सोचता है इस खास रिपोर्ट में आपको बताते हैं।
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उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
अवैध मदरसों की आड़ में अपने मंसूबों को अंजाम देने वालों पर सीएम धामी ने बड़ा प्रहार किया है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक छात्र हितों में क्रांतिकारी बदलाव किया है। सरकार ने Madrasa Board को बैन करते हुए, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। प्राधिकरण में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षाविदों को सम्मिलित किया गया है। जिसमें अध्यक्ष डॉ सुरजीत सिंह गांधी समेत 11 सदस्य बनाए गए हैं।

पिछले विधानसभा सत्र सीएम ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले विधानसभा सत्र में Madrasa Board खत्म करने की घोषणा की थी। जिसकी अधिसूचना अब जारी की गई है। फिलहाल मदरसा बोर्ड का अस्तित्व जुलाई में खत्म हो जाएगा। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आएगा।
उत्तराखंड में 452 मदरसे हैं Madrasa Board से रजिस्टर्ड
उत्तराखंड में 452 मदरसे, मदरसा बोर्ड से रजिस्टर्ड है। 117 मदरसों का संचालन वक्फ बोर्ड करता है। जबकि बड़े पैमाने पर और भी मदरसे हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक इन मदरसों में लगभग 70 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं को तालीम दी जा रही है।

मदरसा बोर्ड खत्म करने पर क्या कहता है अल्पसंख्यक समाज
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी के साथ ही वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मदरसा बोर्ड को भंग करने पर फैसले का स्वागत किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री का भी आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक प्राधिकरण की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है।
मुफ्ती शमून कासमी का कहना है कि ये अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि मदरसों के बच्चे दीन के साथ दुनिया की तालीम भी हासिल करेंगे। उनको भी अब शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा।

शिक्षाविदों ने फैसला को बताया समाज हित में दूरदर्शी
अल्पसंख्यक समाज के लोग भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस फैसले की सभी सराहना कर रहे हैं। खासतौर पर अल्पसंख्यक समाज के शिक्षाविद इसको समाज हित में दूरदर्शी निर्णय बता रहे हैं। हालांकि जुलाई के बाद जब प्राधिकरण अस्तित्व में आएगा। उसके बाद क्या कुछ बदलाव मदरसों में तालीम लेने वाले छात्र-छात्राओं के जीवन में आएगा ये देखना दिलचस्प होगा।
FAQs: Madrasa Board बैन और नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
Q1. उत्तराखंड में Madrasa Board को क्यों बैन किया गया?
अवैध मदरसों पर रोक लगाने, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और छात्र हितों की रक्षा के लिए सरकार ने Madrasa Board को बैन किया है।
Q2. Madrasa Board की जगह कौन-सी नई व्यवस्था लाई गई है?
सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है।
Q3. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में कौन-कौन शामिल हैं?
प्राधिकरण में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षाविद शामिल हैं, जिसमें अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी समेत कुल 11 सदस्य हैं।
Q4. Madrasa Board को खत्म करने की घोषणा कब हुई थी?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी घोषणा पिछले विधानसभा सत्र में की थी।
Q5. Madrasa Board का अस्तित्व पूरी तरह कब समाप्त होगा?
जारी अधिसूचना के अनुसार, Madrasa Board का अस्तित्व जुलाई महीने में समाप्त हो जाएगा।
Q6. उत्तराखंड में कितने मदरसे Madrasa Board से रजिस्टर्ड हैं?
राज्य में कुल 452 मदरसे Madrasa Board से रजिस्टर्ड हैं।
Q7. वक्फ बोर्ड द्वारा कितने मदरसों का संचालन किया जाता है?
उत्तराखंड में 117 मदरसे वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित किए जाते हैं।
Q8. क्या राज्य में बिना रजिस्ट्रेशन के भी मदरसे हैं?
हां, बड़ी संख्या में ऐसे मदरसे भी हैं जो अब तक रजिस्टर्ड नहीं हैं।
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आपके बच्चे के फोन में भी है ये गेम तो हो जाएं सावधान !, एक टास्क ने ले ली तीन सगी बहनों की जान

Uttar Pradesh News : आपके बच्चे भी खेलते ऑनलाइन गेम्स तो जाएं सावधान, एक टास्क ने ले ली तीन सगी बहनों की जान
UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ऑनलाइन गेमिंग की लत में आकर तीन सगी बहनों ने खुदखुशी कर ली। इस मामले के सामने आने के बाद से हर कोई हैरान है और ये मामला कई सवाल भी उठा रहे हैं।
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गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने छत से कूदकर की खुदखुशी
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग लड़कियों ने एक अपार्टमेंट की नौंवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। शुरूआत में लोगों को लग रहा था कि ये एक सामान्य आत्महत्या का मामला है। लेकिन प्रारंभिक जांच के बाद हुए खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों लड़कियों ने अवसाद या परेशानी के चलते आत्महत्या नहीं की थी। बल्कि ऑनलाइन गेमिंग की लत थी जिसे छोड़ने को कहने पर इसे छोड़ने के बजाय लड़कियों ने मौत को गले लगाना सही समझा। इस खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। लड़कियों ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है जिसमें उन्होंने माता-पिता से माफी मांगकर अपनी डायरी को पढ़ने को कहा है।

ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण तीनों ने ले ली अपनी जान
गाजियाबाद के डीसीपी निमिष पाटिल ने मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिस को एक नोट मिला है जिसमें उन्होंने लिखा है कि वो कोरियन कल्चर से प्रभावित थी और इसी के चलते उन्होंने अपनी जान ली है।
कोरियाई टास्क आधारित गेम खेलती थी तीनों
एसीपी अतुल कुमार सिंह कुमार ने बताया कि तीनों लड़कियां क कोरियाई टास्क-आधारित इंटरएक्टिव- ‘लव गेम’ खेलती थीं और उन्हें इसकी लत लग गई थी। ज्यादातर समय वो Online games खेलती रहती थी इसीलिए माता-पिता ने उनकी इसे लेकर नाराजगी जताई। परिजनों ने तीनों बहनों के फोन इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी इसी के चलते उन्होंने ये कदम उठा लिया।

अगर आपके बच्चे भी खेलते हैं ऑनलाइन गेम तो दें ध्यान
गाजियाबाद की इस घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। इसके साथ ही परिजनों के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा किया है। अगर आपके बच्चे भी गेम खेलते हैं तो आपको बच्चों पर ध्यान देने की खास जरूरत है। बच्चे किस तरीके का Online game खेल रहे हैं कितने समय तक खेल रहे हैं या फिर वो फोन पर क्या कर रहे हैं परिजनों को इस बात का खास ख्याल रखने की जरूरत है।
ये घटना ऐसे परिजनों की आंखें खोलने के लिए काफी है जो व्यस्त होने के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं देते या फिर बच्चों को टाइमपास करने के लिए फोन पकड़ा देते हैं। धीरे-धीरे बच्चों को इसकी आदत पड़ जाती है। कई बार जहां बच्चों को ऑनलाइन गेम्स की लत लग जाती है तो कई मामलों में बच्चों के गलत आदतें सीखने की बात भी सामने आई है। फोन के कारण छोटी उमर में ही बच्चे अश्लील कटेंट देख रहे हैं जो कि बिल्कुल गलत है।
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हरिद्वार में SSP प्रमेंद्र डोभाल ने किया बड़ा फेरबदल, 11 इंस्पेक्टर और 4 दारोगाओं के किए तबादले

Haridwar News : पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोभाल ने बुधवार रात आदेश जारी करते हुए आधे से अधिक थानों और कोतवालियों के प्रभार में बदलाव कर दिया। इस तबादला सूची के तहत 11 इंस्पेक्टर और चार सब इंस्पेक्टरों को इधर से उधर किया गया है।
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हरिद्वार में SSP प्रमेंद्र डोभाल ने किया बड़ा फेरबदल
हरिद्वार में SSP प्रमेंद्र डोभाल ने बड़ा फेरबदल किया है। जारी आदेशों के अनुसार इंस्पेक्टर प्रवीण कोश्यारी को लक्सर कोतवाली का प्रभारी बनाया गया है। वहीं लक्सर से इंस्पेक्टर राजीव रौथान को एक बार फिर भगवानपुर कोतवाली भेजा गया है।
इंस्पेक्टर मणि भूषण श्रीवास्तव को गंगनहर कोतवाली का प्रभारी नियुक्त किया गया है। जबकि यहां से मनोहर सिंह भंडारी को श्यामपुर थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
11 इंस्पेक्टर और 4 दारोगाओं के किए तबादले
रानीपुर कोतवाली से इंस्पेक्टर शांति कुमार को हटाकर हाल ही में जिले में आमद करने वाले इंस्पेक्टर आशुतोष राणा को रानीपुर की कमान दी गई है। इंस्पेक्टर प्रदीप बिष्ट को रुड़की कोतवाली प्रभारी बनाया गया है। लंबे समय से एसएसपी कार्यालय में वाचन का दायित्व संभाल रहे इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह रावत को कनखल कोतवाली का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
इन्हें मिली बहादराबाद थाने की जिम्मेदारी
एएनटीएफ सेल के प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह को बहादराबाद थाने की जिम्मेदारी दी गई है। बहादराबाद से इंस्पेक्टर अंकुर शर्मा को एसएसआई भगवानपुर बनाया गया है। खानपुर थाने से इंस्पेक्टर धर्मेंद्र राठी को हटाकर एसआईएस शाखा भेजा गया है, जहां एसएसपी के पीआरओ दिगपाल कोहली को थाना प्रभारी निरीक्षक नियुक्त किया गया है।

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पौड़ी में भालू ने महिला पर किया हमला, गंभीर हालत में हायर सेंटर किया गया रेफर

Pauri News : उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। लगातार गुलदार, भालू और बाघ के हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। पौड़ी में आज फिर भालू ने एक महिला पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
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पौड़ी में भालू ने महिला पर किया हमला
पौड़ी गढ़वाल में जंगली जानवरों का आतंक के कारण लोग दहशत में है। बुधवार सुबह पौड़ी में भालू ने एक महिला पर हमला कर दिया। मिली जानकारी के मुताबिक पाबौ विकासखंड के खंडुली गांव में महिला जानवरों के लिए चारा लेने के लिए जंगल गई थी। इसी दौरान भालू ने उस पर हमला कर दिया।
गंभीर हालत में हायर सेंटर किया गया रेफर
महिला की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे जिस कारण उसकी जान बच सकी। ग्रामीणों ने आनन-फानन में महिला को 108 एंबुलेंस सेवा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ पहुंचाया। जहां महिला को प्राथमिक उपचार देने के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर किया है।
जानवरों के लिए चारा लेने के लिए गई थी जंगल
मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह लगभग 11:30 बजे ज्योति देवी, पत्नी जगदीश चारा लेने के लिए जंगल जा रही थी। इसी दौरान भालू ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने तत्परता के कारण महिला की जान बची। जिला पंचायत सदस्य कलूण भरत रावत ने बताया कि डॉक्टरों ने महिला को हायर सेंटर रेफर किया है। जिसके बाद महिला को एयर एंबुलेंस से देहरादून में मैक्स अस्पताल पहुंचाया गया है।
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