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सांसद निधि में माननीयों ने किया बड़ा खेल, उत्तराखंड का पैसा UP में बांट दिया, RTI में हुआ बड़ा खुलासा

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड के सांसदों का गजब खेल, सांसद निधि को दूसरे राज्यों में बांट दिया
Uttarakhand Politics : उत्तराखंड की राजनीति से ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने जनता को हैरान कर दिया है। उत्तराखंड के माननीयों यानी कि सांसदों ने सांसद नीधि का पैसा उत्तराखंड में लगाने की जगह उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बांट दिया। सांसद निधि के इस गड़बड़झाले का खुलासा आरटीआई में हुआ है।
सांसद निधि में माननीयों ने किया बड़ा खेल
Uttarakhand में आए दिन घोटाले सामने आते रहते हैं। कभी अधिकारियों के घोटाले तो कभी मंत्रियों के घोटाले की खबरें सामने आती हैं। अब एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों से घोटाले की खबर सामने आ रही है। जहां प्रदेश के विकास के लिए मिलने वाली सांसद निधि को उत्तराखंड के सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बांट दिया।
Uttarakhand का पैसा UP में बांट दिया
उत्तराखंड के कई गांव जहां आज भी पानी, सड़क और स्वास्थ्य समेत कई बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। वहीं राज्य के सांसद अपनी निधि का एक बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) में इसका खुलासा हुआ है।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल लगवाने, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए 1.28 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। ये हाल तब हैं जब उत्तराखंड में आए दिन सड़क और पानी के लिए लोग आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

UP में सांसद निधि बांटने वाला सांसद कौन ?
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सूचना के अधिकार (आरटीआई) में से सामने आई जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के विकास के लिए मिली सासंद निधि दूसरे राज्यों में बांटने वाले सांसदों में टिहरी से लोकसभा सासंद माला राज्य लक्ष्मी शाह पहले नंबर पर हैं। जिन्होंने दूसरे राज्यों में पांच या दस लाख नहीं बल्कि एक करोड़ की धनराशि दी है। ये धनराशि उत्तर प्रदेश राज्य के एक जिले आगरा को ही दी गई है। जो कि विकास कार्यों के लिए दी गई है।
लोकसभा सासंदों ने अपनी निधि से दूसरे राज्यों में पैसा बांटा तो भला राज्यसभा सांसद क्यों पीछे रहते। राज्यसभा सासंद नरेश बंसल ने अपनी सासंद निधि का पैसा हरियाणा में बांट दिया। उन्होंने सांसद निधि से हरियाणा को शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए 25 लाख की धनराशि दी है। पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010-16) के दौरान स्वीकृत धनराशि 10 दिसंबर 2025 को आवंटित की गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जल निकासी, सड़कों आदि के लिए तीन लाख रुपये स्वीकृत किए थे।

अपनी लोकसभा से बाहर जाकर इस सांसद ने बांटी सांसद निधि
ये बात तो थी Uttarakhand के सांसदों द्वारा दूसरे राज्यों में पैसा बांटने की। लेकिन एक सांसद तो ऐसे भी हैं जिन्होंने दूसरे राज्य में तो पैसे नहीं दिए पर अपने संसदीय क्षेत्र को छोड़कर दूसरी लोकसभा में विकास कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी।
अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा ने अपने संसदीय क्षेत्र की सीमाओं से बाहर जाकर नैनीताल जिले के लिए धनराशि को स्वीकृति दी है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सांसद अजय टम्टा ने नैनीताल के स्कूलों में हॉल और कमरों के निर्माण के लिए 5 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं।

सांसद कहीं भी खर्च कर सकता है अपनी निधि – बीजेपी
भाजपा प्रवक्ता नवीन ठाकुर का इस पूरे मामले को लेकर कहना है कि अब देश में या नियम आ चुका है। जिसके तहत सांसद देश के किसी भी राज्य में सांसद निधि खर्च कर सकते हैं। क्योंकि देश के कई राज्यों में उत्तराखंड के निवासी रहते हैं। वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
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BJP के Survey ने खोली विधायकों की पोल, 32 चेहरे रेड जोन में, कट सकता है कई का टिकट !

Uttarakhand Politics : बीजेपी के आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट ने उत्तराखंड के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के आंतरिक सर्वे से बीजेपी के भीतर खलबली मच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 47 विधायकों में से 32 विधायकों का टिकट रेड जोन में है।
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BJP के Survey ने खोली विधायकों की पोल
बीजेपी के आंतरिक सर्वे के बारे में सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इन विधायकों की परर्फॉर्मेंस पर स्थानीय जनता ने गहरी नाराजगी जताई है जो कि पार्टी के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। पार्टी सत्ता की हैट्रिक के रास्ते में विधायकों के खिलाफ नाराजगी को बड़ा खतरा नहीं बनने देना चाहती, ऐसे में कई मौजूदा चेहरों के टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है।
32 चेहरे रेड जोन में, कट सकता है कई का टिकट !
पार्टी के विश्वत सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के दो तिहाई विधायकों का अगले विधानसभा चुनाव में टिकट कट सकता है। पार्टी और संघ की ओर से राज्य में अपने हिस्से की सभी 47 सीटों पर कराए गए आंतरिक सर्वे में 32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक लोग विधायकों से बेहद नाराज हैं। वो मानते हैं कि भाजपा के दस साल के शासन में विकास के कई कार्य हुए हैं। लेकिन कई ऐसे काम हैं जिनके वो आवाज उठाते रहे लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई। आंतरिक कलह, कुछ स्तरों पर प्रशासनिक ढिलाई, युवाओं में नाराजगी की भी बात सामने आई है। बीते कुछ समय में सोशल मीडिया पर भी इस तरीके के कई मामले सामने आए हैं।

अलग-अलग माध्यमों से संपर्क के बाद तैयार हुई रिपोर्ट
संघ सूत्रों के मुताबिक बीते दो महीने में राज्य की सभी 70 सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, महत्वपूर्ण हस्तियों के अलावा सामान्य लोगों से अलग-अलग माध्यमों से संपर्क के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है।
सूत्रों ने बताया कि राज्य में विपक्ष के मजबूत या कमजोर होने का परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ता, मुख्य मुद्दा स्थानीय स्तर की नाराजगी का होता है। राज्य में दिवंगत भवन चंद खंडूड़ी के सीएम रहते कांग्रेस बेहद कमजोर थी, हालांकि तब भी विधायकों और उम्मीदवारों के खिलाफ लोगों की नाराजगी के कारण भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी थी।
यानी साफ है कि भाजपा के सामने चुनौती सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि अपने ही विधायकों के खिलाफ बन रही नाराजगी से भी है। इसके साथ ही टिकटों की लड़ाई में भी भाजपा के कई सियासी सिरमौर आपस में ही सींग मार रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ये भी है कि दूसरे दलों से भाजपा में आए नेता भी दावेदारी कर रहे हैं।
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चुनावी साल में धामी सरकार खोलेगी भर्ती का पिटारा, दिसंबर से पहले ढाई हजार से ज्यादा पदों के लिए फॉर्म

govt job vacancies 2026 : विधानसभा चुनाव से पहले पुष्कर सिंह धामी सरकार एक बार फिर से सरकारी नौकरियों का पिटारा खोलने की तैयारी में है। दिसबंर से पहले ढाई हजार से ज्यादा पदों के लिए फॉर्म भरे जाने हैं।
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चुनावी साल में धामी सरकार खोलेगी भर्ती का पिटारा
चुनावी साल में धामी सरकार भर्ती का पिटारा खोलने जा रही है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, दिसंबर से पहले विभिन्न विभागों में करीब 2500 नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इसके साथ ही जिन पदों के लिए पहले ही आवेदन लिए जा चुके हैं, उनकी लिखित परीक्षाएं भी दिसंबर तक कराने की तैयारी है। इन पदों की संख्या भी लगभग 1500 है। इस तरह वर्ष के अंत तक करीब चार हजार पदों की भर्ती प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में पहुंच जाएगी।
दिसंबर से पहले ढाई हजार से ज्यादा पदों के लिए फॉर्म
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने बताया कि दिसंबर से पहले करीब 2477 पदों पर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इनमें स्केलर, कनिष्ठ सहायक, वैयक्तिक सहायक, स्नातक स्तरीय विज्ञान वर्ग के पद, पुलिस, आबकारी और परिवहन विभाग के वर्दीधारी पद, संस्कृत विभाग में सहायक अध्यापक तथा सहायक विकास अधिकारी जैसे पद शामिल हैं।
इसके समानांतर जिन रिक्त पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनकी परीक्षा भी दिसंबर तक करा ली जाएगी। इनमें व्यैक्तिक सहायक, पशुधन प्रसार अधिकारी, विभिन्न सेवाओं के तकनीकी पद, सहायक लेखाकार, कृषि विभाग के इंटरमीडिएट स्तर के पद तथा विभिन्न विभागों के स्नातक स्तरीय पद सहित कुल 1470 पद शामिल हैं।

34 हजार भर्तियां, रोजगार बड़ी उपलब्धि
धामी सरकार अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में रिकॉर्ड 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान कर चुकी है। प्रदेश में वर्ष 2024 से सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद भर्ती प्रक्रिया ना सिर्फ पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हो रही है, बल्कि निर्बाध भर्ती होने से आवेदन से लेकर नियुक्ति तक का औसत समय भी घट गया है। इस तरह सरकार चुनाव में रोजगार को बड़ी उपलब्धि की तरह पेश करने की तैयारी कर रही है।
बेरोजगारी की समस्या को खत्म करने का प्रयास कर रही सरकार
सीएम धामी ने कहा है कि पहले दिन से ही बेरोजगारी की समस्या को खत्म करने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में हमने सरकारी विभागों में रिक्त पदों को अभियान चलाकर भरने का काम किया है, जिसके फलस्वरूप विगत साढ़े चार वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिल चुकी है। आने वाले महीनों में भी विभिन्न विभागों में हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि योग्य युवाओं को अधिक अवसर मिल सकें और राज्य की विकास यात्रा को नई गति मिले।
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उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल!, 6 अधिकारियों का हुआ ट्रांसफर

Uttarakhand News : उत्तराखंड सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में व्यापक प्रशासनिक बदलाव किया है। शासन की ओर से राज्य के मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की नई तैनाती के आदेश जारी किए गए हैं।
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उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल!
शासन के आदेश के मुताबिक सोबन सिंह जीना राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा के प्राचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा को स्थानांतरित कर राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर का प्राचार्य बनाया गया है। अब वो रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे।
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को मिला नया प्राचार्य
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में तैनात डॉ. जीएस तितियाल को अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज का नया प्राचार्य नियुक्त किया गया है। उनके सामने मेडिकल कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में भी बदलाव
शासन ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। चिकित्सा शिक्षा प्रभार के निदेशक डॉ. अजय कुमार आर्या को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी का नया प्राचार्य नियुक्त किया गया है।
| क्रम | अधिकारी का नाम | वर्तमान/पूर्व पद | नई जिम्मेदारी |
|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर |
| 2 | डॉ. जीएस तितियाल | मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा |
| 3 | डॉ. अजय कुमार आर्या | निदेशक, चिकित्सा शिक्षा प्रभार | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी |
| 4 | डॉ. आशुतोष सयाना | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर | निदेशक, चिकित्सा शिक्षा |
| 5 | डॉ. चंद्र मोहन सिंह रावत | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हरिद्वार | प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर |
| 6 | डॉ. पंकज सिंह | प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी | प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हरिद्वार |
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