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उत्तराखंड में मौसम का कहर, शीतलहर से बढ़ेगी परेशानी, इन जिलों में घना कोहरा छाने का अलर्ट जारी

Uttarakhand Weather Update : उत्तराखंड में इन दिनों कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। पहाड़ों पर जहां ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने से सर्दी कहर ढा रही है। तो वहीं मैदानी इलाकों में कोहरा छाने से लोग परेशान है। बारिश ना होने से मैदानी इलाकों में सूछी ठंड का प्रकोप जारी है।
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उत्तराखंड में शीतलहर से बढ़ेगी परेशानी (Uttarakhand Weather Update)
उत्तराखंड में आने वाले दिनों में शीतलहर के कहर से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अगले कुछ दिनों में मौसम की बात करें (Uttarakhand Weather Update) तो मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के मुताबिक आने वाले दिनों में प्रदेश में घना कोहरा छाने का अनुमान है।
जारी पूर्वानुमान के अनुसार राजधानी देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी, नैनीताल और चंपावत जिले में घना कोहरा छा सकता है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

इन दो जिलों में कोल्ड डे रहने के आसार
मौसम विभाग ने प्रदेश के दो जिलों में कोल्ड रहने का पूर्वानुमान (Uttarakhand Weather Update) जारी किया है। ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले के कुछ इलाकों में कोल्ड डे जैसी स्थिति रहने के आसार हैं। जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में कल मौसम करवट ले सकता है औक 20 व 21 दिसंबर को बारिश और बर्फबारी होने के आसार हैं। हालांकि इसके बाद 22 से लेकर 24 दिसंबर तक प्रदेशभर में मौसम शुष्क बना रहेगा।
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पहाड़ों का मानसून मैदानों की ओर शिफ्ट? उत्तराखंड में बारिश का बदला पैटर्न, वैज्ञानिक भी हैरान

Uttarakhand Monsoon : उत्तराखंड में मानसून का पैटर्न बदल रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक उत्तराखंड में पहाड़ों से ज्यादा अब मैदानी इलाकों में भारी बारिश हो रही है। इस रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।
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उत्तराखंड में बदल रहा मानसून का पैटर्न
उत्तराखंड के मानसून को लेकर एक अध्ययन में मौसम के बदलते पैटर्न की तस्वीर सामने आई है। लंबे समय के बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि मानसून के दौरान अब पहाड़ी इलाकों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या अधिक दर्ज हो रही है।
पहाड़ों का मानसून मैदानों की ओर हो रहा शिफ्ट?
बता दें कि ये अध्ययन मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह और मौसम विज्ञानी रोहित थपलियाल ने किया है, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 1983 से 2023 तक यानी 41 साल के मानसूनी बारिश के आंकड़ों का अध्ययन किया।
इसके लिए उत्तराखंड के चार मौसम केंद्रों को आधार बनाया गया। इनमें देहरादून और पंतनगर को मैदानी क्षेत्र, जबकि मुक्तेश्वर और टिहरी को पहाड़ी क्षेत्र का प्रतिनिधि माना गया।

देहरादून में सबसे ज्यादा भारी बारिश वाले दिन
अध्ययन में भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश वाले दिनों का औसत निकाला गया। इसके अनुसार मानसून के दौरान देहरादून में ऐसे दिनों की औसत संख्या 7.1 रही। पंतनगर में यह आंकड़ा 4.2 दिन दर्ज हुआ।
वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में मुक्तेश्वर में औसतन 2.3 दिन और टिहरी में केवल 1.7 दिन भारी या उससे अधिक बारिश वाले रहे। आंकड़ों की तुलना करने पर मैदानी इलाकों के दोनों केंद्र पहाड़ी क्षेत्रों के दोनों केंद्रों से आगे नजर आए। यानी पिछले चार दशकों के आंकड़ों के आधार पर अध्ययन ये संकेत देता है कि मानसून के दौरान भारी बारिश की घटनाएं मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ज्यादा हो रही हैं।
जुलाई-अगस्त में हो रही सबसे ज्यादा बारिश
अध्ययन में जुलाई और अगस्त को उत्तराखंड के मानसून के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण महीने बताया गया है। जुलाई में राज्य में औसतन 417.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज होती है, जबकि अगस्त में औसत बारिश करीब 385.7 मिलीमीटर रहती है।
इन दोनों महीनों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या भी अधिक रहती है। साथ ही, जून और सितंबर की तुलना में जुलाई और अगस्त में बारिश के पैटर्न में साल-दर-साल बदलाव अपेक्षाकृत कम देखा गया।

भारी बारिश का बड़ा हिस्सा मैदानी क्षेत्रों में
शोध में भारी, बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश को एक साथ ‘चरम बारिश’ की श्रेणी में रखा गया। अध्ययन के मुताबिक मानसून के दौरान होने वाली कुल बारिश में इस तरह की चरम बारिश का हिस्सा देहरादून में औसतन 37 प्रतिशत है।
पंतनगर में यह हिस्सेदारी 33 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके मुकाबले मुक्तेश्वर में 24 प्रतिशत और टिहरी में 19 प्रतिशत बारिश चरम बारिश की श्रेणी में आती है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अध्ययन में शामिल चार मौसम केंद्रों में मैदानी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश का अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा भारी या उससे अधिक तीव्रता वाली बारिश के रूप में दर्ज हुआ है।
प्रदे बदलते मौसम पैटर्न पर बढ़ी चिंता
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बारिश के स्वरूप में बदलाव का असर सड़क, यातायात, नदियों और पहाड़ी ढलानों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर कम समय में होने वाली तेज बारिश अचानक जलभराव, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी परिस्थितियों का खतरा बढ़ा सकती है।
हालांकि, ये अध्ययन केवल चार मौसम केंद्रों के 41 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए पूरे उत्तराखंड में बारिश के बदलते स्वरूप को समझने के लिए अन्य क्षेत्रों और अधिक मौसम केंद्रों के आंकड़ों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण होगा।
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उत्तराखंड में आज भी बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज, उत्तरकाशी समेत कई जिलों के लिए अलर्ट

Uttarakhand Weather : उत्तराखंड में फिलहाल बारिश से राहत मिलने के आसार नहीं है। मौसम विभाग ने 12 अगस्त को टिहरी गढ़वाल और बागेश्वर में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही 13 अगस्त को भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है।
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उत्तराखंड में आज भी बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के देहरादून केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक आज प्रदेश के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में बारिश का तेज दौर चल सकते हैं।
टिहरी और बागेश्वर में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने 12 अगस्त को टिहरी गढ़वाल और बागेश्वर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। टिहरी में 11 अगस्त की शाम से मौसम में बदलाव देखने को मिला और कई इलाकों में तेज बारिश हुई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है, हालांकि पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन की आशंका भी बढ़ गई है।

बागेश्वर में भी देर रात से रुक-रुककर बारिश जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों और नदी किनारे बसे इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। लगातार बारिश के चलते संवेदनशील स्थानों पर सड़क बाधित होने और छोटे-बड़े भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।
14 अगस्त से फिर बिगड़ सकता है मौसम
मौसम विभाग के अनुसार 12 और 13 अगस्त को प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। इसके बाद 14 अगस्त को मौसम के और अधिक सक्रिय होने की संभावना है।
14 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इन क्षेत्रों में आकाशीय बिजली और तेज बारिश को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।

यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह
उत्तराखंड में इस समय चारधाम और अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों की आवाजाही भी बनी हुई है। ऐसे में मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर अचानक मलबा आने, पत्थर गिरने और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की घटनाएं हो सकती हैं। इसलिए यात्रियों को नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों के पास जाने से बचना चाहिए।
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उत्तराखंड के 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा, अगले 24 घंटों के लिए अलर्ट जारी

Uttarakhand Weather : उत्तराखंंड में मौसम का मिजाज आज भी बिगड़ा रहेगा। कई जिलों में बारिश के आसार हैं। इसके साथ ही मौसम विभाग ने 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया है।
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उत्तराखंड के 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा
मौसम विभाग के मुताबिक आज प्रदेश में बारिश का दौरा जारी रहेगा। इसके साथ ही अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल में कुछ स्थानों पर अचानक बाढ़ की स्थिति बनने की आशंका है।

खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के बाद छोटे नदी-नालों और जलधाराओं का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। वहीं, निचले इलाकों में बारिश का पानी तेजी से जमा होने से जलभराव और सतही बहाव की समस्या पैदा हो सकती है।
आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर
फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र सतर्क है। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन के अनुसार, मौसम विभाग और अन्य तकनीकी संस्थानों से मिलने वाले पूर्वानुमान एवं चेतावनी के आधार पर संबंधित विभागों को अलर्ट रखा गया है।

लोगों से नदी-नालों के पास ना जाने की अपील
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि बारिश के दौरान नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की स्थिति और प्रशासन की एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।
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