Uttarkashi
उत्तरकाशी के युवाओं के लिए खुशखबरी, जिले में आइस स्केटिंग प्रतियोगिता का होगा आयोजन

Uttarkashi News : उत्तरकाशी के युवाओं के लिए खुशखबरी है। उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अब उत्तरकाशी में आइस स्केटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
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उत्तरकाशी में आइस स्केटिंग प्रतियोगिता का होगा आयोजन
उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार जगह जगह ऐसे स्थानों की तलाश कर रही है जहां पर्यटन के साथ साहाषिक शीतकालीन खेलों को भी बढ़ावा मिल सके। इसी कड़ी में जनपद में शीतकालीन खेलों के लिए उत्तरकाशी में जगह का चयन किया गया है। यहां ice skating प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

हिमाचल और लद्दाख की तर्ज पर उत्तराखंड में भी होंगे खेल
उत्तराखंड आइस स्केटिंग एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष शिव पैन्यूली ने अगले साल से यहां पर आइस स्केटिंग प्रतियोगिता सुरू करने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल और लद्दाख की तर्ज पर उत्तराखंड में भी कई जिलों में स्केटिंग के सुटेविल जगह ओर उत्तरकाशी में जनपद मुख्यालय के नजदीक जगह का चुनाव कर लिया गया है।
जिला अधिकारी उत्तरकाशी द्वारा इस पर सहमति प्रदान कर दी गई है जिसके लिए जल्द ही रैम्प के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जाएगी और आने वाले समय में यहां के युवाओं को प्रशिक्षित कर ice skating प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
Uttarkashi
उत्तरकाशी में वरूणा नदी में नहाते समय 18 वर्षीय युवक लापता, SDRF का सर्च ऑपरेशन जारी

Uttarkashi News : उत्तरकाशी जिले में रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। जिला मुख्यालय के पास स्थित वरूणा नदी में दोस्तों के साथ नहाने गया 18 वर्षीय युवक तेज बहाव की चपेट में आकर लापता हो गया।
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उत्तरकाशी में दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था युवक
उत्तरकाशी में ज्ञानसू निवासी 18 वर्षीय अनमोल जोशी, पुत्र महेश जोशी, रविवार दोपहर अपने दोस्तों के साथ वरूणा नदी में स्नान करने गया था। बताया गया कि बड़ेथी चुंगी के पास वो नदी में छलांग लगाकर नहा रहा था। इसी दौरान नदी का तेज बहाव उसे अपनी चपेट में ले गया और वो पानी में बहने लगा।
दोस्तों ने मचाया शोर, स्थानीय लोगों ने किया बचाने का प्रयास
घटना होते ही अनमोल के साथ मौजूद दोस्तों ने मदद के लिए शोर मचाया। आसपास मौजूद लोगों ने भी नदी में बह रहे युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण वह कुछ ही पलों में उनकी नजरों से ओझल हो गया। इसके बाद तुरंत पुलिस और जिला प्रशासन को सूचना दी गई।

पुलिस, एसडीआरएफ और क्यूआरटी ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और क्विक रिस्पांस टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। राहत एवं बचाव दल ने मौके का निरीक्षण करने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने वरूणा नदी के कई हिस्सों में खोजबीन की और गंगा नदी तक तलाशी अभियान चलाया।
हालांकि देर शाम तक चले अभियान के दौरान युवक का कोई पता नहीं चल पाया। प्रशासन का कहना है कि खोज एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और नदी के आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी रखी जा रही है।
परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
घटना की खबर मिलते ही अनमोल के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। अपने बेटे के लापता होने की सूचना से परिवार सदमे में है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि स्थानीय लोग भी युवक के सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं।
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Gidara Bugyal Trek : उत्तरकाशी का अनछुआ खजाना | Complete Trekking Guide 2026

गिदारा बुग्याल ट्रेक (Gidara Bugyal Trek): उत्तराखंड का विशाल और अनछुआ मखमली मैदान
अगर आप हिमालय की गोद में बसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहाँ दूर-दूर तक फैली हरियाली, शांत माहौल और बादलों को छूती पर्वत शृंखलाएँ हों, तो गिदारा बुग्याल ट्रेक (Gidara Bugyal Trek) आपके लिए एक सपने के सच होने जैसा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित गिदारा बुग्याल भारत के सबसे बड़े और खूबसूरत आल्पाइन घास के मैदानों (Alpine Meadows) में से एक है।
जहाँ दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) जैसे प्रसिद्ध ट्रेक पर पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है, वहीं गिदारा बुग्याल आज भी शांत, अनछुआ और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। लगभग 12,780 फीट (3,900 मीटर से 4,200 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित यह मखमली मैदान ट्रेकर्स को एक अलग ही दुनिया का अहसास कराता है। इस लेख में हम आपको Gidara Bugyal Trek से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी विस्तार से देंगे।
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गिदारा बुग्याल ट्रेक का संक्षिप्त परिचय (Trek Overview)
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | उत्तरकाशी जिला, उत्तराखंड |
| अधिकतम ऊँचाई | लगभग 12,780 फीट – 13,900 फीट |
| ट्रेक की दूरी | लगभग 29 किमी से 35 किमी (रूट के अनुसार) |
| ट्रेक की अवधि | 6 से 7 दिन |
| कठिनाई का स्तर | मध्यम (Moderate) |
| बेस कैंप | भांगेली गाँव (Bhangeli Village) / तिहार गाँव |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | देहरादून (Dehradun) |
| निकटतम हवाई अड्डा | जौलीग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून |
| सबसे अच्छा समय | मई – जून (ग्रीष्मकाल) और सितंबर – अक्टूबर (शरद ऋतु) |
गिदारा बुग्याल ट्रेक क्यों खास है? (Why Choose Gidara Bugyal Trek?)
उत्तराखंड में कई खूबसूरत बुग्याल (हिमालयी घास के मैदान) हैं, लेकिन गिदारा बुग्याल की बात ही कुछ अलग है। आइए जानें कि यह ट्रेक ट्रेकर्स के दिलों में खास जगह क्यों रखता है:
1. भारत के विशालतम मखमली मैदानों में से एक
गिदारा बुग्याल का दायरा बेहद विशाल है। जब आप इस बुग्याल में कदम रखते हैं, तो जहाँ तक आपकी नज़र जाती है, आपको हरे-भरे घास के मैदान और रंग-बिरंगे जंगली फूल ही दिखाई देते हैं। इसे पूरा घूमने में ही कई घंटे लग जाते हैं।
2. भीड़भाड़ से दूर एकांत अनुभव
केदारकंठ या दयारा बुग्याल की तुलना में गिदारा ट्रेक पर व्यावसायिक गतिविधियाँ कम हैं। यदि आप शांति, अध्यात्म और प्रकृति के साथ एकांत क्षण बिताना चाहते हैं, तो यह ट्रेक आपके लिए सबसे उपयुक्त है।
3. हिमालयी चोटियों के भव्य दृश्य
गिदारा बुग्याल ट्रेक के दौरान आपको गंगोत्री ग्रुप, श्रीकंठ, बंदरपूँछ, जौनली और द्रौपदी का डांडा जैसी भव्य हिमालयी चोटियों के 360-डिग्री स्पष्ट नज़ारे देखने को मिलते हैं।
4. समृद्ध वनस्पति और दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ
यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ देवदार, बांज (Oak) और भोजपत्र के घने जंगलों के साथ-साथ कई प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ (जैसे मासी, जयान आदि) पाई जाती हैं।
गिदारा बुग्याल जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Gidara Bugyal Trek)
गिदारा बुग्याल ट्रेक वर्ष के अलग-अलग महीनों में अपना अलग ही रूप दिखाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार यात्रा का समय चुन सकते हैं:
मई से जून (ग्रीष्मकाल – Pre-Monsoon)
- मौसम: मौसम सुहावना और साफ़ रहता है।
- विशेषता: मई की शुरुआत में ऊपरी हिस्सों में बर्फ के टुकड़े मिल सकते हैं। जून आते-आते बर्फ पिघल जाती है और मखमली घास उगने लगती है। इस समय दिन में धूप खिली रहती है और रातें हल्की ठंडी होती हैं।
सितंबर से अक्टूबर (शरद ऋतु – Post-Monsoon)
- मौसम: मानसून के ठीक बाद का समय सबसे सुंदर माना जाता है।
- विशेषता: बारिश के बाद पूरा बुग्याल गहरे हरे रंग से भर जाता है और जगह-जगह रंग-बिरंगे जंगली फूल खिल उठते हैं। आसमान एकदम साफ़ रहता है, जिससे दूर-दूर स्थित बर्फ से ढकी चोटियाँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।
नोट: जुलाई और अगस्त (मानसून) के दौरान भारी बारिश, फिसलन और भूस्खलन के खतरे के कारण इस ट्रेक पर जाने से बचना चाहिए। वहीं अत्यधिक सर्दियों (दिसंबर से मार्च) में भारी बर्फबारी के कारण मार्ग बंद हो जाता है।
गिदारा बुग्याल ट्रेक का विस्तृत रूट चार्ट (Detailed Itinerary)
गिदारा बुग्याल ट्रेक को आमतौर पर 6 से 7 दिनों में पूरा किया जाता है। यहाँ एक आदर्श 6-दिवसीय यात्रा कार्यक्रम दिया गया है:
दिन 1: देहरादून से भांगेली गाँव (Drive: 185 किमी, 8-9 घंटे)
आपकी यात्रा देहरादून से शुरू होती है। आप मसूरी, चिन्यालीसौड़ और उत्तरकाशी होते हुए भागीरथी नदी के किनारे-किनारे भांगेली गाँव पहुँचते हैं। भांगेली एक खूबसूरत और पारंपरिक पहाड़ी गाँव है। यहाँ होमस्टे में रात विश्राम किया जाता है।
दिन 2: भांगेली से रिकोडा कैंपसाइट (Trek: 5 किमी, 4-5 घंटे)
सुबह भांगेली गाँव से ट्रेक की शुरुआत होती है। रास्ते में ओक, मैपल और देवदार के घने जंगल आते हैं। छोटे-छोटे पहाड़ी झरनों को पार करते हुए आप रिकोडा पहुँचते हैं। रिकोडा में टेंट लगाकर रात गुजारी जाती है।
दिन 3: रिकोडा से डोगरानी / थलोत्या (Trek: 5-6 किमी, 5 घंटे)
इस दिन की चढ़ाई जंगलों से होकर गुजरती है। जैसे-जैसे आप ऊँचाई पर बढ़ते हैं, पेड़ों की रेखा खत्म होने लगती है। यहाँ से गंगोत्री रेंज के नज़ारे दिखने लगते हैं। थलोत्या या डोगरानी कैंपसाइट पर रात का कैंप लगाया जाता है।
दिन 4: थलोत्या से गिदारा बुग्याल व गिदारा टॉप और वापसी (Trek: 9-10 किमी, 7-8 घंटे)
यह ट्रेक का सबसे मुख्य और रोमांचक दिन है। सुबह जल्दी उठकर आप गिदारा बुग्याल की ओर चढ़ाई शुरू करते हैं। कुछ ही देर में आप विशाल घास के मैदानों में प्रवेश कर जाते हैं। गिदारा टॉप (Gidara Top) पर पहुँचकर आपको जो 360-डिग्री व्यू मिलता है, वह आपकी सारी थकान दूर कर देता है। बुग्याल का अन्वेषण करने के बाद आप वापस कैंपसाइट लौट आते हैं।
दिन 5: थलोत्या / थिरया से वापस भांगेली गाँव (Trek: 7-8 किमी, 4-5 घंटे)
गिदारा की खूबसूरत यादों को सहेजते हुए आप ढलान की ओर चलना शुरू करते हैं और जंगलों व पगडंडियों से होते हुए वापस भांगेली गाँव पहुँचते हैं।
दिन 6: भांगेली गाँव से देहरादून वापसी (Drive: 185 किमी, 8 घंटे)
सुबह नाश्ते के बाद भांगेली से देहरादून के लिए गाड़ी से रवाना होते हैं और शाम तक देहरादून पहुँच जाते हैं।
कठिनाई का स्तर और शारीरिक तैयारी (Difficulty Level & Fitness)
Gidara Bugyal Trek को मध्यम (Moderate) श्रेणी का ट्रेक माना जाता है।
- दूरी: प्रतिदिन लगभग 5 से 10 किमी चलना होता है।
- चढ़ाई: कुछ हिस्सों पर खड़ी चढ़ाई और तीखी ढलानें हैं।
- ऑक्सीजन स्तर: ऊँचाई 12,000 फीट से अधिक होने के कारण हवा हल्की हो सकती है।
शारीरिक तैयारी कैसे करें?
- कार्डियो व्यायाम: ट्रेक पर जाने से 3-4 सप्ताह पहले रोज़ाना 4-5 किमी पैदल चलें या जॉगिंग करें।
- स्टैमिना बढ़ाएँ: सीढ़ियाँ चढ़ना-उतरना, साइकिल चलाना और तैराकी करना बहुत फायदेमंद रहता है।
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: पैरों और कोर (Core) की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए स्क्वैट्स (Squats) और लंग्स (Lunges) करें।
गिदारा बुग्याल ट्रेक के लिए आवश्यक पैकिंग सूची (Packing Checklist)
हिमालयी क्षेत्रों में मौसम बहुत तेज़ी से बदलता है। इसलिए सही सामान साथ ले जाना बेहद ज़रूरी है:
1. कपड़े (Clothing)
- ट्रेकिंग पैंट (Quick-dry Track Pants) – 2
- फुल स्लीव टी-शर्ट (Synthetic/Dry-fit) – 3
- थर्मल इनरवियर (Top & Bottom) – 1 सेट
- फ़्लीस जैकेट (Fleece Jacket) – 1
- डाउन जैकेट (Down/Puffer Jacket) – 1
- रेनकोट या पोंचो (Raincoat/Poncho) – 1
2. जूते और मोज़े (Footwear)
- अच्छी ग्रिप वाले वॉटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज़ (Trekking Shoes with Ankle Support)
- सूती मोज़े (Cotton Socks) – 3 जोड़े
- ऊनी मोज़े (Woolen Socks) – 2 जोड़े
3. गियर्स और एक्सेसरीज़ (Gears)
- 50-60 लीटर का बैकपैक (Rain Cover के साथ)
- ट्रेकिंग पोल (Trekking Pole)
- हेडलैंप या टॉर्च (अतिरिक्त बैटरी के साथ)
- यूवी प्रोटेक्शन सनग्लासेस (Sunglasses)
- सनस्क्रीन लोशन (SPF 50+) और लिप बाम
- वॉटर बॉटल / हाइड्रेशन बैग (कम से कम 2 लीटर)
4. पर्सनल मेडिकल किट (Medical Kit)
- पैरासिटामोल, डिस्प्रिन, ओआरएस (ORS) या इलेक्ट्रोलाइट्स
- बैंडेज, कॉटन और एंटीसेप्टिक क्रीम
- एल्टीट्यूड सिकनेस (AMS) की दवा (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा टिप्स (Safety Guidelines)
- एक्लिमेटाइजेशन (Acclimatization) का ध्यान रखें: ऊँचाई वाले क्षेत्रों में शरीर को ढलने का समय दें। अधिक मात्रा में पानी पिएँ।
- स्थानीय गाइड साथ रखें: गिदारा बुग्याल के रास्ते अनछुए हैं और कई जगह भ्रमित कर सकते हैं। हमेशा स्थानीय गाइड या प्रमाणित ट्रेकिंग एजेंसी के साथ ही जाएँ।
- पर्यावरण का सम्मान करें: “Leave No Trace” के नियम का पालन करें। प्लास्टिक, पॉलिथीन या कचरा पहाड़ों पर न फेंकें।
- मौसम पर नज़र रखें: पहाड़ों में मौसम अचानक बदल सकता है। गाइड के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: क्या गिदारा बुग्याल ट्रेक शुरुआती (Beginners) के लिए सही है?
उत्तर: यदि आप शारीरिक रूप से फिट हैं और नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, तो आप एक अच्छे गाइड के साथ यह ट्रेक कर सकते हैं। हालाँकि, यह बिल्कुल नए ट्रेकर्स के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रश्न 2: क्या इस ट्रेक पर मोबाइल नेटवर्क मिलता है?
उत्तर: भांगेली गाँव तक बीएसएनएल (BSNL) और जिओ (Jio) का नेटवर्क मिल जाता है। लेकिन जैसे ही आप ट्रेक पर आगे बढ़ते हैं, नेटवर्क पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 3: दयारा बुग्याल और गिदारा बुग्याल में क्या अंतर है?
उत्तर: दयारा बुग्याल अधिक प्रसिद्ध और आसानी से सुलभ है, जहाँ पर्यटकों की भीड़ होती है। वहीं गिदारा बुग्याल आकार में दयारा से बड़ा, अधिक ऊँचाई पर स्थित और बहुत शांत व अनछुआ है।
प्रश्न 4: क्या गिदारा बुग्याल में सोलो (Solo) ट्रेकिंग की जा सकती है?
उत्तर: नहीं, गिदारा बुग्याल का मार्ग काफी दूरदराज़ का है और रास्ते में भटकने की संभावना रहती है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से सोलो ट्रेकिंग के बजाय गाइड या समूह के साथ जाना ही उचित है।
निष्कर्ष (Conclusion)
गिदारा बुग्याल ट्रेक (Gidara Bugyal Trek) प्राकृतिक सुंदरता, शांति और रोमांच का एक अद्भुत संगम है। अगर आप शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, प्रकृति के विशाल और मखमली आंचल में कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तरकाशी का यह अनछुआ खजाना आपका इंतज़ार कर रहा है। अपनी अगली हिमालयी यात्रा की योजना बनाएँ और गिदारा बुग्याल के अविस्मरणीय नज़ारों के साक्षी बनें!
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Earthquake : उत्तरकाशी में महसूस हुए भूकंप के हल्के झटके, लोग घरों से बाहर निकले

Earthquake in Uttarkashi : उत्तराखंड में एक बार फिर भूकंप के कारण धरती डोली है। उत्तरकाशी में गुरुवार रात भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। जिसके बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।
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उत्तरकाशी में महसूस हुए भूकंप के हल्के झटके
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गुरुवार को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। जिससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत का माहौल बन गया। भटवाड़ी विकासखंड मुख्यालय और आसपास के इलाकों में जैसे ही धरती कांपी।
लोग घरों से बाहर निकले
भूकंप के कारण एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। हालांकि, झटके कुछ ही सेकंड तक रहे और जल्द ही स्थिति सामान्य हो गई। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र भटवाड़ी तहसील के पिलंग गांव के जंगलों में स्थित था।

भूकंप की गहराई जमीन से करीब 7 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई, जबकि इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई। कम तीव्रता होने के कारण जिले के अन्य हिस्सों में इसका असर सीमित रहा।
लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
भूकंप की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने तत्काल स्थिति का जायजा लेना शुरू कर दिया। सभी संबंधित तहसीलों, पुलिस थानों और विभागों से संपर्क कर हालात की जानकारी जुटाई गई।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से जिले में कहीं भी जनहानि, भवनों को नुकसान या किसी अन्य प्रकार की क्षति की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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