Uttarakhand
उत्तराखंड में मौसम ने बदला मिज़ाज: पहाड़ी जिलों में बारिश-बर्फबारी की संभावना, मैदानी इलाकों में भी ठंड ने दी दस्तक l

देहरादून: उत्तराखंड में मौसम ने करवट ले ली है। प्रदेश के पहाड़ी जिलों में आज हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और देहरादून में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक, पर्वतीय इलाकों में मौसम का असर अब मैदानी जिलों तक पहुंचने लगा है। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है और धीरे-धीरे ठंड ने दस्तक देना शुरू कर दिया है।
हालांकि विभाग का अनुमान है कि 23 से 27 अक्टूबर के बीच प्रदेश भर में मौसम साफ रहेगा।
बता दें कि बीते महीनों में लगातार हुई बारिश ने राज्य के कई इलाकों में जनजीवन को प्रभावित किया था। भारी बारिश के चलते कई संपर्क मार्ग भूस्खलन और मलबा गिरने से बाधित रहे, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मानसून 26 सितंबर को उत्तराखंड से पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार मानसून सीजन में 2024 में औसतन 9 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। राज्य के 69 प्रतिशत क्षेत्रों में सामान्य, 23 प्रतिशत क्षेत्रों में सामान्य से अधिक, और 8 प्रतिशत क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई।
📊 बारिश के आंकड़े:
इस मानसून सीजन कुल 22% अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
बागेश्वर जिले में सामान्य से 241% अधिक बारिश हुई।
टिहरी गढ़वाल में 58% अधिक, और हरिद्वार में 55% अधिक बारिश दर्ज की गई।
वहीं, पौड़ी गढ़वाल में सामान्य से 30% कम, और चंपावत में 7% कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग ने यात्रियों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
Almora
पहाड़ में इलाज की ऐसी बेबसी! 6 अस्पतालों के चक्कर, फिर मां और दोनों बच्चों की मौत

Almora News : अल्मोड़ा के इनोलू गांव से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती खबर सामने आ रही है। यहां इलाज के लिए एक परिवार को दर-दर भटकना पड़ा। जिसका खामियाजा परिवार को एक साथ तीन जानों से चुकाना पड़ा।
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3 दिन अस्पतालों के चक्कर लगाए फिर भी नहीं बची गर्भवती
अल्मोड़ा के इनोलू गांव की 24 वर्षीय गर्भवती निशा की मौत ने पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के मुताबिक, निशा की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे बेहतर इलाज की उम्मीद में रामनगर से हल्द्वानी और फिर काशीपुर तक ले जाया गया। परिवार तीन दिनों तक अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन निशा और उसके गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों को समय पर उपचार नहीं मिल सका।
निशा को अचानक सांस लेने में हुई थी परेशानी
30 अगस्त की रात निशा को अचानक सांस लेने में परेशानी हुई। कुछ समय बाद हालत सामान्य लगी तो परिवार ने इसे गंभीर नहीं माना, लेकिन 31 अगस्त की सुबह उसकी दिक्कत दोबारा बढ़ गई। इसके बाद परिजन उसे रामनगर के रामदत्त जोशी राजकीय चिकित्सालय ले गए। वहां उसकी स्थिति को जटिल बताते हुए हल्द्वानी ले जाने की सलाह दी गई।
परिजन निशा को सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल, हल्द्वानी लेकर पहुंचे। यहां निजी अस्पताल में उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया। परिजनों के अनुसार जांच के बाद उसकी स्थिति ठीक बताई गई और उसे घर ले जाने की सलाह दी गई। इसके बाद परिवार उसे एक रिश्तेदार के घर ले गया।
रात में फिर बिगड़ी थी तबीयत
एक सितंबर की रात करीब नौ बजे निशा की हालत अचानक फिर खराब हो गई। सांस लेने में परेशानी बढ़ने के बाद परिवार उसे दोबारा सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि उसकी हालत गंभीर और मामला जटिल बताते हुए उसे भर्ती नहीं किया गया और आगे इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।
इसके बाद परिवार ने एक निजी अस्पताल में इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन वहां भी उपचार नहीं हो पाया। निशा की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे काशीपुर ले गए। वहां भी उन्हें तीन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े।
गर्भवती मां के साथ दोनों बच्चों की भी मौत
परिजनों के मुताबिक 2 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे निशा को ऑपरेशन थिएटर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसे लगातार दो अटैक आए और उसकी मौत हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गर्भ में मौजूद दोनों बच्चों को बाहर निकाला। परिजनों के अनुसार, एक बच्चा पहले ही दम तोड़ चुका था, जबकि दूसरे की भी कुछ घंटे बाद मौत हो गई। निशा की मौत के साथ ही परिवार ने एक साथ तीन जिंदगियां खो दीं।
Rudraprayag
केदारनाथ पैदल मार्ग पर फिर हादसा, चीरबासा में बोल्डर गिरने से एक शख्स की मौत

Rudraprayag News : केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर रविवार को बड़ा हादसा हो गया। चीरबासा हेलिपैड के पास पहाड़ से अचानक बोल्डर गिरने की घटना में एक स्थानीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई।
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केदारनाथ पैदल मार्ग पर बोल्डर गिरने से एक शख्स की मौत
केदारनाथ पैदल मार्ग पर रविवार को बोल्डर गिरने से एक शख्स की मौत हो गई। मृतक की पहचान ऊखीमठ क्षेत्र के ग्राम पठाली निवासी मोहन तिवारी के रूप में हुई है। घटना के बाद लगातार पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ से लौट रहे करीब 3200 श्रद्धालुओं को अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया है।
श्रद्धालुओं को अस्थायी रूप से रोका
सोनप्रयाग कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुरेश बलूनी के अनुसार, करीब 500 यात्रियों को लिनचोली, 1000 को भीमबली, 1000 को सोनप्रयाग और 700 श्रद्धालुओं को गौरीकुंड में अस्थायी रूप से रोका गया है।
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि बोल्डर की चपेट में आने से मोहन तिवारी की मौत हुई। रेस्क्यू टीम ने शव को गौरीकुंड पहुंचाया, जहां से उसे जिला चिकित्सालय भेज दिया गया।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता
लोक निर्माण विभाग गुप्तकाशी के अधिशासी अभियंता सुनील सिंह के मुताबिक मार्ग पर गिरे मलबे और पत्थरों को हटाने का काम जारी है। इसके लिए 26 श्रमिकों को लगाया गया है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि आपदा नियंत्रण कक्ष के माध्यम से केदारनाथ पैदल मार्ग समेत जिले के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सोनप्रयाग और गौरीकुंड में यात्रियों को रोका गया है। मौसम और पैदल मार्ग की स्थिति का आकलन करने के बाद ही आगे की आवाजाही की अनुमति दी जाएगी।
uttarakhand weather
उत्तराखंड में आज सात जिलों में बारिश के आसार, अगले दो दिन ऐसा रहेगा मौसम का मिजाज

Uttarakhand Weather : उत्तराखंड में मानसून की विदाई का दौर शुरू होने के बावजूद बारिश का सिलसिला अभी पूरी तरह थमा नहीं है। मौसम विभाग ने 14 सितंबर को प्रदेश के कई जिलों के लिए मौसम खराब होने का येलो अलर्ट जारी किया है।
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उत्तराखंड में आज सात जिलों में बारिश के आसार
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज बौछारें पड़ सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों की तेज गर्जना और आकाशीय बिजली के साथ बारिश के तीव्र दौर की भी संभावना जताई गई है।

अगले दो दिन ऐसा रहेगा मौसम का मिजाज
मौसम विभाग ने 14 और 15 सितंबर को खासतौर पर पहाड़ी जिलों में सतर्कता बरतने की सलाह दी है। वहीं, बीते दिनों मैदानी इलाकों में उमस और गर्मी से परेशान लोगों को अब मौसम में बदलाव के चलते कुछ राहत मिल रही है और कई क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

मानसून की पूरी तरह विदाई में लग सकता है समय
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 14 सितंबर के बाद प्रदेश में मानसून की सक्रियता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगी। हालांकि, उत्तराखंड से मानसून की पूरी तरह विदाई में अभी कुछ समय लग सकता है। ऐसे में कु और दिन लोगों को बारिश परेशान कर सकती है।
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