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Rudraprayag: घरवालों को बिना बताए केदारनाथ घूमने पहुंचा नाबालिक, पुलिस ने परिजनों को सौंपा बालक

रुद्रप्रयाग: पुलिस ने एक 13 वर्षीय बालक को सकुशल परिजनों को सौंप दिया है। नाबालिक बालक मध्यप्रदेश का रहने वाला है जो अपने घर वालों को बिना बताए केदारनाथ घूमने निकल पड़ा। इस सम्बन्ध में एक स्थानीय व्यापारी द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी गई।
घर वालों को बिना बताए केदारनाथ घूमने निकल पड़ा नाबालिक
जानकारी के मुताबिक, एक स्थानीय व्यापारी ने चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी कि एक नाबालिग बालक धीरेन्द्र प्रजापति, जिसकी उम्र लगभग 13 वर्ष है, अपने घर मध्य प्रदेश से भागकर रुद्रप्रयाग पहुंच गया है। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण इकाई द्वारा बच्चे के पास पहुंचकर उससे विस्तृत वार्ता कर पूरी जानकारी प्राप्त की गई।
मध्यप्रदेश से रुद्रप्रयाग पहुंचा 13 वर्षीय धीरेन्द्र
बालक अपने परिजनों का नंबर नहीं बता पाया। जिसके बाद रुद्रप्रयाग पुलिस के द्वारा विभिन्न चैनलों के माधयम से बालक के परिजनों का पता लगाया गया है। जिसके बाद पुलिस ने बालक के माता-पिता से संपर्क कर बालक के सकुशल होने की जानकारी पहुंचाई। जिसके बाद टीम द्वारा बच्चे का मेडिकल चेकअप किया गया और आज बच्चे के परिजनों से संपर्क करके बच्चे को सकुशल परिजनों को सौंप दिया गया है।
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उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के ये हाल, जन्म नहीं लेकिन मौत की गारंटी !, डिलीवरी से पहले कराए जिम्मेदारी के साइन

Uttarkashi News : उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों के रेफर सेंटर बनने की खबरें अक्सर सामने आती हैं। लेकिन उत्तरकाशी से एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव में प्रसव के लिए गई महिला के परिजनों से कर्मचारियों ने प्रसव के बाद मौत अस्पताल की ना होने पर दस्तखत करवाए।
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उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की जन्म नहीं लेकिन मौत की गारंटी !
एक प्रसूता दर्द में कहरा रही है और परिजन उसे अस्पताल ले जाते हैं। लेकिन कर्मचारी ईलाज से पहले मौत की जिम्मेदारी को लेकर हस्ताक्षर करवाते हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला और इंसानियत को झकझोर देने वाली ये घटना Uttarkashi जिले के नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई है।
मिली जानकारी के मुताबिक यहां प्रसूता को डिलीवरी के लिए ले जाया जाता है। लेकिन कर्मचारी उसका प्रसव कराने की तैयारी नहीं बल्कि अस्पताल प्रबंधन परिजनों से एक एग्रीमेंट साइन करवाता है। जिस पर लिखा होता है कि “अस्पताल में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है, न ब्लड बैंक की सुविधा है और न ही ऑपरेशन की व्यवस्था। इसके साथ ही पत्र में जच्चा-बच्चा की मौत की जिम्मेदारी अस्पताल की ना होने की बात लिखी गई।

Uttarkashi में डिलीवरी से पहले कराए जिम्मेदारी के साइन
बता दें कि इस पत्र में लिखा गया है कि “हमे बता दिया गया है कि इस अस्पताल मे कोई भी विषेशज्ञ डाक्टर नहीं हैं और न ही ब्लड बैंक और आप्रेश की सुविधा है प्रसव के दौरान होने वाले सभी खतरों के बारे में हमें अवगत करा दिया गया है, और मै इसके बावजूद भी अपनी पत्नी का प्रसव सामु०स्वा० केन्द्र नौगांव में उपलब्ध सीमित सुविधाओं के साथ करवाना चाहता हूं।
प्रसव के दौरान ज्यादा रक्तश्राव होने से मां और बच्चे के साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना घट सकती है जिसमे मृत्यु भी भाामिल है यह सब जानते हुए हम इसी अस्पताल मे उपलब्ध सीमित सुविधाओं मे प्रसव कराने के लिए तैयार हैं। यदि उपरोक्त कोई भी घटना घटती है तो उसके लिये मैं स्वयं जिम्मेदार रहूंगा, इसके लिए अस्पताल के कर्मचारी और अधिकारी जिम्मेदार नही होगें।”

मौत का सौदागर उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग
अस्पताल प्रबंधन द्वारा ऐसा पत्र लिखवाया जाना प्रदेश के लोगों को भद्दा मजाक ही नहीं है बल्कि ये उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है। भले ही स्वास्थ्य मंत्री और सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लाख दावे करे लेकिन इस एक घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।
Uttarkashi की इस घटना को देखकर ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग इलाज देने वाला ना बनकर मौत का सौदागर बन गया है। क्योंकि ये किसी एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल नहीं है बल्कि पूरे पहाड़ के हर अस्पताल का यही हाल है। जिसके मामले गाहे-बगाहे सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आते रहते हैं।
क्या पहाड़ों पर रहने वालों की जान का नहीं है कोई मोल ?
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिसमें सबसे बड़ा सवाल ये है कि मरीजों और प्रसूताओं को रेफर कर देना या इस तरीके से मजबूरन उनसे जिम्मेदारी के लिए साइन करवाना कहां तक ठीक है ?, पहाड़ के लोगों की जान का कोई मोल नहीं है।
क्या उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी खराब हो गई है कि एक सुरक्षित प्रसव तक सरकारी अस्पतालों में नहीं हो सकता। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो सरकार क्यों हर सुविधा होने के दावे करती है ? Qj आखिर कब तक पहाड़ की महिलाएं और अन्य लोग रेफर-रेफर के खेल में अपनी जान गंवा देंगे ?
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अंकिता भंडारी मर्डर केस में कथित vip के खिलाफ मुकदमा दर्ज, पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी ने की थी शिकायत

Dehradun News : अंकिता भंडारी मामला बीते कुछ समय से चर्चाओं में है। अभिनेत्री उर्मिला सनावर के दावों के बाद से ही इस मामले में वीआईपी की चर्चाएं तेज हो गई थी। जिसे लेकर विरोध देखने को मिल रहा था। अब कथित वीआईपी के खिलाफ देहरादून में मुकदमा दर्ज हो गया है।
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Ankita Bhandari case में कथित vip के खिलाफ मुकदमा दर्ज
अंकिता भंडारी मामले में बीते दिनों हुए विरोध के बाद अब मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति सीएम धामी ने कर दी है। इसके बाद अब इस मामले में अब कथित vip के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है। बता दें कि कथित VIP के खिलाफ मुकदमा पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी ने मुकदमा दर्ज कराया है।
पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी ने की थी शिकायत
पद्मभूषण पर्यावरणविद डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर पुलिस महानिदेशक को शिकायत दी थी। जिसके बाद आब देहरादून वसंत विहार थाने में Ankita Bhandari case के कथित वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

सीएम धामी ने दी मामले की CBI जांच की संस्तुति
आपको बता दें कि लगातार इस मामले की सीबीआई जांच की मांग उठ रही थी। सीाबीआई जांच की मांग को लेकर पहाड़ से लेकर मैदान तक लोग सड़कों पर उतर आए थे। दिवंगत अंकिता के माता-पिता ने भी सीएम धामी से मिलकर सीबीआई जांच कराने ती जिसके बाद शुक्रवार को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है।
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अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले की होगी CBI जांच, सीएम धामी ने लिया बड़ा फैसला

Ankita Bhandari case : उत्तराखंड की इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता की अनुरोध व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण की CBI जांच कराए जाने की संस्तुति प्रदान की है ।
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अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले की होगी CBI जांच
अंकिता Ankita Bhandari case की सीबीआई जांच को सीएम धामी ने संस्तुति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई इस अत्यंत दुखद और हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
Ankita Bhandari case में सीएम धामी ने लिया बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। SIT द्वारा गहन विवेचना के पश्चात अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत द्वारा सुनवाई पूर्ण होने पर अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट – सीएम धामी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि Ankita Bhandari case प्रकरण में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। साथ ही, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में भी अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिन पर जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी।

अंकिता के माता–पिता के अनुरोध पर लिया गया फैसला
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वयं स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात की। जिसमें बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता के इस अनुरोध और उनकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस प्रकरण की CBI से जांच कराने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार पहले भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी पूरी दृढ़ता एवं संवेदनशीलता के साथ स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी।
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