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संसद में गूंजा उत्तरकाशी पेड़ काटने का मामला, उत्तराखंड के सांसद नहीं उठा पाए लेकिन छत्तीसगढ़ की सांसद ने उठाया मुद्दा, देखें वीडियो

Gangotri National Highway Update : गंगोत्री नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का मुद्दा इन दिनों उत्तराखंड में चर्चाओं में है। इसके चर्चाओं में होने की वजह हाईवे के चौड़ीकरण के लिए काटे जा रहे पेड़ हैं। हाईवे चौड़ीकरण के लिए छह हजार पेड़ काटे जाने हैं जिसका विरोध पर्यावरणविद कर रहे हैं।
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संसद में गूंजा उत्तरकाशी में पेड़ काटने का मामला
राज्यसभा में Gangotri National Highway के चौड़ीकरण के लिए काटे जा रहे पेड़ों के इस मामले को जहां उत्तराखंड के सांसद नहीं उठा पाए तो वहीं छत्तीसगढ़ से कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने इसे उठाया। उन्होंने इसे लेकर सरकार से तीखे सवाल भी किए हैं।
आपको बता कें कि NH34 पर भैरोघाटी से झाला 20.600 किमी और क्षेत्रफल 41.9240 हेक्टेयर के लिए गैर वानकी का कार्य करने को मंजूरी दी गई है। इसके बदले 76.924 हेक्टेयर भूमि पर वनीकरण प्रतिपूर्ति के रूप में किया जाएगा।
क्या है उत्तरकाशी पेड़ काटने का पूरा मामला ?
आपको बता दें कि उत्तरकाशी जिले के इको-सेंसेटिव जोन क्षेत्र में हाईवे के चौड़ीकरण के लिए हजारों पेड़ों को हटाए जाने की तैयारी हो रही है। यूं तो ये इलाका इको-सेंसेटिव जोन है जिसमें बड़े निर्माण और पेड़ कटान पर पूरी तरह रोक है। लेकिन इसके बाद भी उत्तरकाशी से गंगोत्री तक सड़क चौड़ीकरण के लिए छह हजार से भी ज्यादा पेड़ों को काटे जाने और ट्रांसलोकेट किए जाने की परमिशन दे दी गई है। जिसके बाद स्थानीय लोग और पर्यावरणविद इसका विरोध कर रहे हैं। पेड़ों को काटने से बचाने के लिए रक्षा सूत्र बांध रहे हैं और पेड़ों को काटे जाने से रोकने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।

Gangotri National Highway Update : कांग्रेस सांसद ने सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने इस मामले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को भी जमकर घेरा है। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि उत्तराखंड के इको-सेंसेटिव जोन में 6,000 पेड़ काटने की अनुमति दे दी गई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो पीएम मोदी एक पेड़ मां के नाम लगाओ कहते हैं और वहीं दूसरी तरफ विकास के नाम पर इतने पेड़ काट दिए जाते हैं।
आश्वासन के बाद भी दे दी Gangotri National Highway चौड़ीकरण के लिए अनुमति
कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसद में रक्षा मंत्री ने इसे लेकर आश्वासन भी दिया था। लेकिन इसके बाद भी Gangotri National Highway चौड़ीकरण के लिए अनुमति दे दी गई। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हिमालय में सड़कों का चौड़ीकरण असफल हो रहा है। चौड़ीकरण के कारण आए दिन सेना और यात्री भूस्खलन की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में सरकार कैसा विकास कर रही है ? उन्होंने सरकार से सवाल पूछा है कि एक तरफ कहा जा रहा है कि ये सड़क सेना के लिए बेहद ही जरूरी है लेकिन वहीं दूसरी तरफ सेना सड़क कई दिनों, कभी एक महीने तक बंद रहती है। सरकार किसकी शह पर ऐसा विकास कर रही है ?

क्या होता है इको सेंसटिव जोन ?
आपको बता दें कि पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र इको सेंसटिव जोन कहा जाता है। ऐसा क्षेत्र जहां पर नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाले नुकसान से बचाने और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए कुछ गतिविधियां प्रतिबंधित नहीं बल्कि विनियमित यानी कि regulate होती हैं। आसान भाषा में कहा जाए तो इको सेंसटिव जोन में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सभी गतिविधियों पर कड़ी पाबंदी होती है।
पेड़ और पहाड़ कटेंगे तो लैंडस्लाइड बढ़ेंगे – रंजीत रंजन
उत्तरकाशी में पेड़ काटे जाने के मामले को धराली से जोड़ते हुए कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि छह और सात दिसंबर की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोग पेड़ों को बचाने के लिए रक्षा सूत्र बांध रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये वही जगह है जहां इसी साल धराली की भीषण आपदा आई थी और 150 लोगों के शव आज भी मलबे में दबे होने की बात कही जा रही है।
उन्होंने कहा कि ये सोचने वाली बात है कि चारधाम ऑल वेदर रोड के नाम पर उच्च हिमालय में इतने सारे पेड़ और पहाड़ काटे जा रहे हैं तो भूस्खलन की घटनाएं बढ़ेंगी। इस बारे में लगातार कई सामाजिक कार्यकर्ता आवाज उठा रहे हैं और खुद बीजेपी के नेता मुरली मनोहर जोशी भी सरकार को पत्र लिख चुके हैं।
1. गंगोत्री नेशनल हाईवे पर पेड़ काटने का विवाद क्या है?
यह विवाद Uttarkashi के इको-सेंसिटिव जोन में हाईवे चौड़ीकरण के लिए 6,000 से ज्यादा पेड़ काटने की अनुमति मिलने को लेकर है, जिसका स्थानीय लोग और पर्यावरणविद विरोध कर रहे हैं।
2. हाईवे चौड़ीकरण के लिए कितने पेड़ काटे जा रहे हैं?
Uttarkashi में भैरोघाटी से झाला तक NH-34 पर 6,000 से अधिक पेड़ों को काटने या ट्रांसलोकेट करने की अनुमति दी गई है।
3. पर्यावरणविद इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?
Uttarkshi का यह इलाका इको-सेंसिटिव जोन है, जहां बड़े निर्माण और पेड़ कटान पर सख्त प्रतिबंध हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे भूस्खलन, पर्यावरणीय नुकसान और खतरे बढ़ सकते हैं।
4. सांसद रंजीत रंजन ने संसद में क्या मुद्दा उठाया?
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि इको-सेंसिटिव जोन में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति क्यों दी गई, जबकि उत्तराखंड के सांसद इस मुद्दे को नहीं उठा सके।
5. इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) क्या होता है?
यह ऐसा संरक्षित क्षेत्र है जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण या प्रतिबंध रहता है। यहां बड़े निर्माण, खनन और बड़े पैमाने पर पेड़ कटान की अनुमति नहीं होती।
6. सरकार का इस परियोजना पर क्या पक्ष है?
सरकार का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण सेना की आवाजाही और कनेक्टिविटी के लिए जरूरी है, और बदले में 76.924 हेक्टेयर भूमि पर वनीकरण किया जाएगा।
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धामी कैबिनेट में 22 प्रस्तावों पर लगी मुहर, 7412 करोड़ के अनुपूरक बजट को मंजूरी

Dhami Cabinet decisions : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक समाप्त हो गई है। बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें 7412 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट, निराश्रित महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान योजना और शिक्षा, सड़क-पुल निर्माण समेत कई महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं।
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निराश्रित महिलाओं के लिए एकल नारी सम्मान योजना
कैबिनेट ने उत्तराखंड में निराश्रित महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान योजना को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा अनुपूरक बजट के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। यह बजट 7412 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।
समाज कल्याण विभाग के नियमों में बदलाव
समाज कल्याण विभाग के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग देने के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा में बढ़ोतरी की गई है। इसे दो लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
शिक्षा और दिव्यांगजनों से जुड़े फैसले
कैबिनेट ने ऊधम सिंह नगर जिले के राजकीय आश्रम पद्धति बालिका आवासीय विद्यालय को उच्चीकृत कर हाईस्कूल का दर्जा देने पर मुहर लगाई। वहीं, उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाओं में दिव्यांगजनों को पांच अंकों की छूट देने का निर्णय भी लिया गया।

सड़क और पुल निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया होगी आसान
प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण से जुड़े कार्यों के लिए अब अलग-अलग स्वीकृति लेने के बजाय एक ही स्वीकृति से काम किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे संबंधित कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया में बदलाव होगा।
इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
- उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) के ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके तहत कनिष्ठ अभियंता के पदों को उच्चीकृत किया जाएगा।
- समान नागरिक संहिता के प्रावधानों में लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए संशोधन को मंजूरी दी गई।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समूह-ग और समूह-घ कर्मचारियों के लिए सेवा नियमावली स्वीकृत की गई।
- स्टांप वादों के निस्तारण के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी गई।
- निदेशालय विभागीय लेखा के संरचनात्मक ढांचे में मिनिस्टीरियल संवर्ग के पदों का पुनर्गठन किया जाएगा।
- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई।
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धामी कैबिनेट की अहम बैठक आज, अनुपूरक बजट समेत इन प्रस्तावों पर टिकी नजरें

Dhami Cabinet : उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। शाम करीब चार बजे प्रस्तावित इस बैठक में कई विभागों से जुड़े अहम प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। आगामी विधानसभा सत्र के मद्देनजर इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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गैरसैंण सत्र से पहले धामी कैबिनेट की बैठक आज
कैबिनेट की बैठक में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के अनुपूरक बजट को मंजूरी दिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश करने के प्रस्ताव पर भी मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल सकती है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद बजट को सदन में रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही बैठक में विभिन्न विभागों से संबंधित प्रस्तावों और विधेयकों पर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है।
छठे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट होगी प्रस्तुत
बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी। यह रिपोर्ट प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों और नगर निकायों को राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले अनुदान से संबंधित है। रिपोर्ट के प्रस्तुत होने के साथ स्थानीय निकायों को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

कई विभागों के प्रस्तावों पर हो सकती है चर्चा
धामी कैबिनेट की बैठक में पर्यटन, शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण समेत कई विभागों के प्रस्ताव रखे जाने की संभावना है। इनके अलावा कुछ विधेयकों पर भी चर्चा हो सकती है।
यदि कैबिनेट संबंधित विधेयकों को मंजूरी देती है, तो उन्हें आगामी विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखने का रास्ता साफ हो सकता है। ऐसे में अनुपूरक बजट, राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट और विभिन्न विभागों के प्रस्तावों को लेकर आज होने वाली बैठक पर सबकी नजरें रहेंगी।
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2027 चुनाव से पहले भाजपा में हलचल! जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण ने थामा कांग्रेस का हाथ

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव से पहले भाजपा को झटका देते हुए मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता और पूर्व भाजपा नेता रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। सोमवार,को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके इस कदम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर रहेंगी कि रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी का आगामी चुनाव और चकराता क्षेत्र की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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1.रामशरण नौटियाल कांग्रेस में शामिल
2.कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में ली सदस्यता
3.भाजपा छोड़कर कांग्रेस में वापसी
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में थामा पार्टी का हाथ
नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रामशरण नौटियाल ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और चकराता विधायक प्रीतम सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने रामशरण नौटियाल का स्वागत करते हुए उन्हें पार्टी में शामिल किया।
भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटे रामशरण नौटियाल
रामशरण नौटियाल का कांग्रेस से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली थी। अब लगभग 12 साल बाद उन्होंने दोबारा कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। भाजपा से इस्तीफा देने से पहले उन्होंने पार्टी में उचित सम्मान नहीं मिलने की बात कही थी। उनके इस्तीफे के बाद से ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब कांग्रेस में शामिल होने के साथ विराम लग गया है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तेज हुई सियासी हलचल
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में रामशरण नौटियाल का भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होना प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। उनकी वापसी का चकराता और जौनसार-बावर क्षेत्र की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। साथ ही, आगामी चुनाव में कांग्रेस उन्हें किस तरह की भूमिका देती है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
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