Rudraprayag
कल से शुरू होगा यक्षराज जाख देवता के मंदिर में दो दिवसीय जाख मेला, 14 अप्रैल को धधकते अंगारों पर करेंगे नृत्य।

रुद्रप्रयाग – केदारघाटी के आराध्य रक्षक यक्षराज जाख देवता के मंदिर में दो दिवसीय जाख मेला संक्रांति 13 अप्रैल से शुरू होगा। नारायणकोटी, कोठेड़ा और देवशाल के ग्रामीणों की ओर से परंपरानुसार इस धार्मिक आयोजन की तैयारियां शुरू की गई और जंगल में चिह्नित की गई लकड़ियां काटी गईं। उन्हें शुक्रवार को मंदिर परिसर में लाया गया। जहां बैशाख माह की 2 गते यानी 14 अप्रैल को जाख देवता अपने पश्वा पर अवतरित होकर धधकते अंगारों पर नृत्य करेंगे।

नारायणकोटी गांव के ग्रामीणों ने भगवान यज्ञराज (जाख देवता) का आह्वान किया। इसके बाद ग्रामीण नंगे पैर जंगल पहुंचे और पूर्व में चिह्नित लकड़ियों को काटा गया। इस पूरी प्रक्रिया को स्थानीय भाषा में गोठी बैठना कहा जाता है। देवशाल के आचार्य मनोहर देवशाली ने बताया कि इन सूखी लकड़ियों को शुक्रवार को ढोल-नगाडों के साथ मंदिर परिसर में लाया जाएगा। जहां 13 अप्रैल को जाख देवता के मंदिर परिसर में सूखी लकड़ियों से अग्निकुंड तैयार किया जाएगा।
मंदिर के आचार्यगणों व पुजारियों की ओर से अग्निकुंड में अग्नि प्रज्जवलित की जाएगी और मंदिर में भगवान यक्षराज की पूजा होगी। 14 अप्रैल को जाख देवता के पश्वा अग्निकुंड के धधकते अंगारों पर नृत्य करेंगे।
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अगस्त्यमुनि में डोली के प्रवेश को लेकर गरमाया मामला, लोगों ने गेट तोड़ने का किया प्रयास
Rudraprayag: अगस्त्यमुनि में दूसरे दिन भी गेट के बाहर खड़ी रही डोली, मौके पर जमकर हुआ हंगामा
मुख्य बिंदु
रुद्रप्रयाग (Rudraprayag): उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में अगस्त्यमुनि में मैदान निर्माण को लेकर पिछले एक महीने से धरना चल रहा है। जिसके बाद कल मकर संक्रांति के पर्व पर केदारनाथ हाईवे पर अगस्त्यमुनि में मुनि महाराज की डोली ने जमकर तांडव मचाया। डोली को कल मंदिर से रवाना होकर अगस्त्य ऋषि के मैदान में जाना था। जहां सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे भक्त डोली का इंतजार कर रहे हैं।
अगस्त्यमुनि में दूसरे दिन भी गेट पर घंटों खड़ी रही मुनि महाराज की डोली
लेकिन मैदान का गेट उपर से बंद होने पर डोली ने मैदान के अंदर प्रवेश नहीं किया। जिसके बाद आज गुरुवार को भी माहौल गरम रहा। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मामले में हंगामा बढ़ने के बाद प्रवेश गेट को तोड़ना शुरू कर दिया है।
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गुरुवार को मकर संक्रांति पर निकली अगस्त्य ऋषि की ऐतिहासिक डोली यात्रा के दूसरे दिन भी भारी विवाद हुआ। मैदान का गोल गेट नहीं तोड़े जाने पर बुधवार को डोली ने प्रवेश नहीं किया था। जबकि आज गुरुवार को दोबारा डोली मैदान में प्रवेश के लिए पहुंची। लेकिन गेट न तोड़े जाने पर डोली ने आज भी मैदान में प्रवेश नहीं किया। जिसके बाद मौके पर जमा भीड़ में से कई लोग जिनमें औरतें भी शामिल थी गेट के ऊपर चढ़ कर गेट तोड़ने लगे।
आक्रोश में आए लोगों ने गेट तोड़ने का किया प्रयास
स्टेडियम निर्माण के खिलाफ स्थानीय लोग लम्बे समय से प्रदर्शन कर रहे थे। जिसके चलते साल के पहले दिन ही त्रिभुवन चौहान और अन्य को थाने में हाजिरी भी लगानी पड़ी थी। साथ ही जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने भी गेट को हटाने की बात कही थी। लेकिन मामले में किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई न होने से स्थानीय लोग आक्रोश में हैं। उनका कहना है कि ये भूमि अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की है जहाँ पर गेट निर्माण नहीं किया जाना चाहिए था।
डोली समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि
15 सालों बाद अगस्त्य ऋषि की डोली यात्रा का आयोजन किया गया, जिसको लेकर प्रशासन को पहले से सूचना दे दी गई थी। लेकिन प्रशासन ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
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कालीमठ और चामुंडा की देव डोलियों ने किया गंगा स्नान, हरिद्वार, देवप्रयाग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के मौके पर कालीमाई और चामुंडा की देव डोलियों ने किया गंगा स्नान
मुख्य बिंदु
Makar Sankranti 2026: रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) जिले के ऊखीमठ ब्लॉक के क्षेत्रान्तर्गत प्रसिद्ध सिद्ध पीठ कालीमठ से माँ काली की देवरा यात्रा कल 13 जनवरी को देवप्रयग पहुंची। जिसके बाद आज सुबह 14 जनवरी मकर संक्रांति के पावन पर्व पर देव डोली ने गंगा स्नान किया। साथ ही कालीमठ घाटी के जाल गांव में विराजमान चामुंडा माता ने भी मकर संक्रांति के पर्व पर हरिद्वार में गंगा स्नान किया।

सिद्धपीठ कालीमठ (Kalimath) की देवरा यात्रा देवप्रयाग पहुंची
बता दें कि कालीमठ की प्रसिद्ध कालीमाई की प्रथम चरण की देवरा यात्रा 7 दिसंबर को 15 वर्षों बाद शुरू हुई थी। जिसके बाद से कालीमाई की देवरायात्रा रुद्रप्रयाग के अलग-अलग गांवों का भ्रमण कर 13 जनवरी को देवप्रयाग पहुंची। भर्मण के दौरान भैरवनाथ और पाण्डवकाली ने माता की डोली की अगुवाई की।

कालीमाई ने मकर संक्रांति के पर्व पर किया गंगा स्नान
इस मौके पर भक्तों का खूब जमावड़ा रहा, ठण्ड के बीच संगम स्थल देवप्रयाग (Devprayag) में भक्तों के जय-जयकारों के साथ माता ने गंगा स्नान किया। इसके साथ ही भक्तों का जमवाड़ा हरिद्वार में भी देखने को मिला जहाँ कल 13 जनवरी को माँ चामुंडा (चौँरावाली) की डोली पहुंची।
चामुंडा (Chamunda devi) की डोली ने भी हरिद्वार में किया गंगा स्नान
हरिद्वार में चामुंडा माता की इस वर्ष तृतीय चरण की देवरा यात्रा गंगा स्नान के लिए पहुंची। जहाँ पर भक्तों के जय- जयकारों के बीच चामुंडा की डोली ने हरिद्वार में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गंगा स्नान किया।

इसके बाद चामुंडा की डोली अगले वर्ष तक के लिए अपने गद्दी स्थल जाल गांव में विराजमान होगी। जबकि कालीमाई की देवरा यात्रा वसंत पंचमी तक वापसी के दौरान भ्रमण कर अपनी गद्दी स्थल कालीमठ में प्रवेश करेगी।
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रुद्रप्रयाग : बर्फ़बारी न होने से औषधीय पौधों पर मंडरा रहा संकट, भेड़-बकरी पालकों के सामने भी समस्याएं

Rudraprayag news: मौसम की मार से जड़ी बूटी उत्पादन पर गंभीर असर
मुख्य बिंदु
Rudraprayag news: जिले के ऊखीमठ क्षेत्र में जनवरी के दूसरे सप्ताह तक भी मौसम के अनुरूप बर्फबारी नहीं हुई है। इसके कारण हिमालयी बुग्यालों की पारिस्थितिकी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। स्थानीय लोग और जड़ी-बूटी संग्राहक इसे बेहद चिंताजनक स्थिति मान रहे हैं। साथ ही मौसम की मार से भेड़-बकरी पालकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बुग्यालों में बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का अस्तित्व खतरे में (medicinal herbs under threat)
Rudraprayag जिले के उखीमठ क्षेत्रान्तर्गत कई हिमालयी घास के मैदान, यानी बुग्यालों में
- कीड़ाजड़ी (Ophiocordyceps sinensis)
- कूट (Saussurea costus)
- कुटकी(Picrorhiza kurroa)
- हथजारी/सलाम पंजा(Dactylorhiza hatagirea)
- अतीस (Aconitum heterophyllum)
समेत कई दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन औषधीय पौधों के प्राकृतिक विकास के लिए पर्याप्त बर्फबारी जरूरी है। लेकिन, इस साल अब तक बर्फ न गिरने से इनके अस्तित्व और उत्पादन दोनों पर खतरा मंडराने लगा है।

तापमान और नमी में आ रहा बदलाव
बर्फबारी के अभाव से मिट्टी की नमी घट रही है और तापमान में उतार-चढ़ाव बढ़ता जा रहा है। जिससे न केवल पौधों का उत्पादन रुक रहा है, बल्कि कई प्रजातियों के बीज अंकुरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। जिससे इन औषधीय पौधों पर संकट मंडरा रहा है।

भेड़-बकरी पालकों के सामने भी चारे का संकट (grazing shortage in Himalayan region)
जड़ी-बूटियों के साथ-साथ ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाले प्राकृतिक चारागाह (बुग्याल)भी प्रभावित हो रहे हैं। उखीमठ क्षेत्र में –
- मनणी बुग्याल
- खाम बुग्याल
- टिंगरी बुग्याल
- नंदी कुंड और
- पांडव सेरा
जैसे कई प्राकृतिक घास के मैदान मौजूद हैं। जिन पर चरवाहे अपने मवेशिओं के चारे के लिए निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में बर्फबारी नहीं हुई, तो बरसात के मौसम में बुग्यालों में 6 महीने प्रवास करने वाले भेड़-बकरी पालकों के सामने चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। जिसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा।वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता

पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बदलते मौसम के पैटर्न पर वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। उनका मानना है कि जड़ी-बूटियों के संरक्षण के साथ-साथ स्थायी आजीविका और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए नीतिगत स्तर पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
Rudraprayag में बर्फबारी न होने का मुख्य असर क्या है?
औषधीय जड़ी-बूटियों और चरागाहों पर संकट बढ़ रहा है।
भेड़-बकरी पालकों को क्या समस्या हो रही है?
चारे की कमी और आजीविका पर खतरा।
र्फबारी औषधीय पौधों के लिए क्यों जरूरी है?
यह मिट्टी की नमी और पौधों के प्राकृतिक विकास को बनाए रखती है।
किन medicinal herbs पर खतरा मंडरा रहा है?
कीड़ाजड़ी, कुट, कुटकी, अतीस और सलाम पंजा।
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