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आलोक शर्मा का बड़ा बयान, 2027 से पहले जा सकते हैं सीएम धामी, कहा भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाएंगे
हल्द्वानी पहुंचे Congress प्रवक्ता Alok Sharma, 2027 चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं में भरा जोश
हल्द्वानी: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता Alok Sharma एक दिवसीय दौरे पर हल्द्वानी पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर बैठक में चर्चा की। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाते हुए दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उत्तराखंड की सत्ता से भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाएगी।
मुख्य बिंदु
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय हुआ केंद्रीय नेत्तृत्व
उत्तराखंड में 2027 में Assembly Election होने हैं। जिसे लेकर सभी पार्टियों ने अपनी गतिविधियां तेज़ कर दी हैं। कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व लगातार प्रदेश का दौरा कर रहा है। इसी कड़ी में रविवार को Alok Sharma हल्द्वानी पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मौके पर हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं के साथ बैठक, चुनावी रणनीति पर मंथन
आलोक शर्मा ने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर चुनावी तैयारियों पर चर्चा की और संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एकजुट होकर विधानसभा चुनाव मैदान में उतरेगी और जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगी।
राज्य सरकार को बताया पूरी तरह विफल
मीडिया से बातचीत के दौरान आलोक शर्मा ने राज्य सरकार को पूरी तरह फेल बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और Assembly Election के मुद्दे अलग-अलग होते हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में राज्य से जुड़े मुद्दे हावी होंगे। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वो झूठ की राजनीति और खनन माफियाओं को संरक्षण देते हैं। इसके आलावा उन्होंने कहा कि कॉंग्रेस पार्टी केंद्र सरकार की नीतियों के साथ-साथ राज्य सरकार की विफलताओं को भी जनता के सामने उजागर करेगी। उनका कहना था कि भाजपा सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी है।
खनन, Paper Leak और बेरोजगारी बड़े मुद्दे, चुनाव से पहले CM Dhami की विदाई के संकेत
आलोक शर्मा ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन, Paper Leak, बेरोजगारी, पलायन और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ भाजपा सरकार को घेरेगी। उन्होंने दावा किया कि इन मुद्दों को लेकर जनता में सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी है। साथ ही उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि संभव है कि CM Dhami को 2027 के चुनाव से पहले ही पद छोड़ना पड़े। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों का असर अब जनता पर साफ दिखाई देने लगा है।
मनरेगा और केंद्र की योजनाओं पर साधा निशाना
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आलोक शर्मा ने कहा कि मनरेगा अब रोजगार देने की योजना नहीं रह गई है, बल्कि इसे “पैसा बचाओ योजना” बना दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाई गई योजनाओं को भाजपा शासित राज्य अपने तरीके से लागू कर रहे हैं, जिसके नकारात्मक परिणाम आने वाले समय में सामने आएंगे।
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16 फरवरी को कांग्रेस करेगी राजभवन घेराव, कानून व्यवस्था और बेरोजगारी को लेकर दर्ज करेगी विरोध

Uttarakhand Politics : प्रदेश में भले ही चुनाव अभी दूर हो लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जहां एक ओर बीजेपी फुल चुनावी मोड में नजर आ रही है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी तैयारियों में जुट गई है। कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर नजर आ रही है।
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16 फरवरी को कांग्रेस करेगी राजभवन घेराव
ऋषिकेश में कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ सड़क से राजभवन तक संघर्ष का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस कमेटी 16 फरवरी को राजभवन घेराव करेगी, जिसमें प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था, महिलाओं पर बढ़ते अपराध और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
प्रदेशभर से हजारों कार्यकर्ता होंगे शामिल
रेलवे रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि ये कार्यक्रम पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर किया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर से हजारों कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे।

कानून व्यवस्था और बेरोजगारी को लेकर दर्ज करेगी विरोध
हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा सवालों के घेरे में है, युवा बेरोजगारी से जूझ रहा है और कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन जनहित के मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को सीधे जवाबदेह बनाएगी और राजभवन घेराव के जरिए अपना विरोध दर्ज कराएगी।
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आपके बच्चे के फोन में भी है ये गेम तो हो जाएं सावधान !, एक टास्क ने ले ली तीन सगी बहनों की जान

Uttar Pradesh News : आपके बच्चे भी खेलते ऑनलाइन गेम्स तो जाएं सावधान, एक टास्क ने ले ली तीन सगी बहनों की जान
UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ऑनलाइन गेमिंग की लत में आकर तीन सगी बहनों ने खुदखुशी कर ली। इस मामले के सामने आने के बाद से हर कोई हैरान है और ये मामला कई सवाल भी उठा रहे हैं।
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गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने छत से कूदकर की खुदखुशी
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग लड़कियों ने एक अपार्टमेंट की नौंवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। शुरूआत में लोगों को लग रहा था कि ये एक सामान्य आत्महत्या का मामला है। लेकिन प्रारंभिक जांच के बाद हुए खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों लड़कियों ने अवसाद या परेशानी के चलते आत्महत्या नहीं की थी। बल्कि ऑनलाइन गेमिंग की लत थी जिसे छोड़ने को कहने पर इसे छोड़ने के बजाय लड़कियों ने मौत को गले लगाना सही समझा। इस खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। लड़कियों ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है जिसमें उन्होंने माता-पिता से माफी मांगकर अपनी डायरी को पढ़ने को कहा है।

ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण तीनों ने ले ली अपनी जान
गाजियाबाद के डीसीपी निमिष पाटिल ने मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिस को एक नोट मिला है जिसमें उन्होंने लिखा है कि वो कोरियन कल्चर से प्रभावित थी और इसी के चलते उन्होंने अपनी जान ली है।
कोरियाई टास्क आधारित गेम खेलती थी तीनों
एसीपी अतुल कुमार सिंह कुमार ने बताया कि तीनों लड़कियां क कोरियाई टास्क-आधारित इंटरएक्टिव- ‘लव गेम’ खेलती थीं और उन्हें इसकी लत लग गई थी। ज्यादातर समय वो Online games खेलती रहती थी इसीलिए माता-पिता ने उनकी इसे लेकर नाराजगी जताई। परिजनों ने तीनों बहनों के फोन इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी इसी के चलते उन्होंने ये कदम उठा लिया।

अगर आपके बच्चे भी खेलते हैं ऑनलाइन गेम तो दें ध्यान
गाजियाबाद की इस घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। इसके साथ ही परिजनों के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा किया है। अगर आपके बच्चे भी गेम खेलते हैं तो आपको बच्चों पर ध्यान देने की खास जरूरत है। बच्चे किस तरीके का Online game खेल रहे हैं कितने समय तक खेल रहे हैं या फिर वो फोन पर क्या कर रहे हैं परिजनों को इस बात का खास ख्याल रखने की जरूरत है।
ये घटना ऐसे परिजनों की आंखें खोलने के लिए काफी है जो व्यस्त होने के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं देते या फिर बच्चों को टाइमपास करने के लिए फोन पकड़ा देते हैं। धीरे-धीरे बच्चों को इसकी आदत पड़ जाती है। कई बार जहां बच्चों को ऑनलाइन गेम्स की लत लग जाती है तो कई मामलों में बच्चों के गलत आदतें सीखने की बात भी सामने आई है। फोन के कारण छोटी उमर में ही बच्चे अश्लील कटेंट देख रहे हैं जो कि बिल्कुल गलत है।
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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड हुआ समाप्त, क्या कहता है अल्पसंख्यक समाज, पढ़ें खास रिपोर्ट

Uttarakhand News : धामी सरकार ने खत्म किया मदरसा बोर्ड, सामने आई अल्पसंख्यक समाज की प्रतिक्रिया
Uttarakhand News : उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। मदरसा बोर्ड को जहां खत्म कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर अल्पसंख्यक समाज क्या सोचता है इस खास रिपोर्ट में आपको बताते हैं।
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उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
अवैध मदरसों की आड़ में अपने मंसूबों को अंजाम देने वालों पर सीएम धामी ने बड़ा प्रहार किया है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक छात्र हितों में क्रांतिकारी बदलाव किया है। सरकार ने Madrasa Board को बैन करते हुए, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। प्राधिकरण में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षाविदों को सम्मिलित किया गया है। जिसमें अध्यक्ष डॉ सुरजीत सिंह गांधी समेत 11 सदस्य बनाए गए हैं।

पिछले विधानसभा सत्र सीएम ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले विधानसभा सत्र में Madrasa Board खत्म करने की घोषणा की थी। जिसकी अधिसूचना अब जारी की गई है। फिलहाल मदरसा बोर्ड का अस्तित्व जुलाई में खत्म हो जाएगा। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आएगा।
उत्तराखंड में 452 मदरसे हैं Madrasa Board से रजिस्टर्ड
उत्तराखंड में 452 मदरसे, मदरसा बोर्ड से रजिस्टर्ड है। 117 मदरसों का संचालन वक्फ बोर्ड करता है। जबकि बड़े पैमाने पर और भी मदरसे हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक इन मदरसों में लगभग 70 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं को तालीम दी जा रही है।

मदरसा बोर्ड खत्म करने पर क्या कहता है अल्पसंख्यक समाज
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी के साथ ही वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मदरसा बोर्ड को भंग करने पर फैसले का स्वागत किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री का भी आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक प्राधिकरण की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है।
मुफ्ती शमून कासमी का कहना है कि ये अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि मदरसों के बच्चे दीन के साथ दुनिया की तालीम भी हासिल करेंगे। उनको भी अब शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा।

शिक्षाविदों ने फैसला को बताया समाज हित में दूरदर्शी
अल्पसंख्यक समाज के लोग भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस फैसले की सभी सराहना कर रहे हैं। खासतौर पर अल्पसंख्यक समाज के शिक्षाविद इसको समाज हित में दूरदर्शी निर्णय बता रहे हैं। हालांकि जुलाई के बाद जब प्राधिकरण अस्तित्व में आएगा। उसके बाद क्या कुछ बदलाव मदरसों में तालीम लेने वाले छात्र-छात्राओं के जीवन में आएगा ये देखना दिलचस्प होगा।
FAQs: Madrasa Board बैन और नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
Q1. उत्तराखंड में Madrasa Board को क्यों बैन किया गया?
अवैध मदरसों पर रोक लगाने, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और छात्र हितों की रक्षा के लिए सरकार ने Madrasa Board को बैन किया है।
Q2. Madrasa Board की जगह कौन-सी नई व्यवस्था लाई गई है?
सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है।
Q3. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में कौन-कौन शामिल हैं?
प्राधिकरण में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षाविद शामिल हैं, जिसमें अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी समेत कुल 11 सदस्य हैं।
Q4. Madrasa Board को खत्म करने की घोषणा कब हुई थी?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी घोषणा पिछले विधानसभा सत्र में की थी।
Q5. Madrasa Board का अस्तित्व पूरी तरह कब समाप्त होगा?
जारी अधिसूचना के अनुसार, Madrasa Board का अस्तित्व जुलाई महीने में समाप्त हो जाएगा।
Q6. उत्तराखंड में कितने मदरसे Madrasa Board से रजिस्टर्ड हैं?
राज्य में कुल 452 मदरसे Madrasa Board से रजिस्टर्ड हैं।
Q7. वक्फ बोर्ड द्वारा कितने मदरसों का संचालन किया जाता है?
उत्तराखंड में 117 मदरसे वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित किए जाते हैं।
Q8. क्या राज्य में बिना रजिस्ट्रेशन के भी मदरसे हैं?
हां, बड़ी संख्या में ऐसे मदरसे भी हैं जो अब तक रजिस्टर्ड नहीं हैं।
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