Dehradun
भारत-पाक तनाव के बीच उत्तराखंड सहित देशभर में आज होगी सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल, युद्ध जैसी तैयारी शुरू…

देहरादून: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है। ऐसे हालातों को देखते हुए भारत सरकार ने देशभर में जनता को हमले के समय बचाव की रणनीति सिखाने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय ने आज, 7 मई को उत्तराखंड समेत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने का आदेश जारी किया है।
इस मॉक ड्रिल के तहत हवाई हमले की चेतावनी देने के लिए सायरन सिस्टम को सक्रिय किया जाएगा। नागरिकों और खासकर स्कूली छात्रों को युद्ध जैसे हालात में कैसे बचाव करना है, इसकी जानकारी और ट्रेनिंग दी जाएगी।

गौरतलब है कि ऐसा अभ्यास पहले भी 1971 के भारत-पाक युद्ध से पहले किया गया था, जब देश में जगह-जगह सायरन बजते थे और नागरिकों को अंधेरे में रहने, खिड़कियां ढंकने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का अभ्यास कराया जाता था।
रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल, जो उत्तराखंड से हैं और चार बार जम्मू-कश्मीर में तैनात रह चुके हैं, ने बताया, “मॉक ड्रिल लोगों को यह सिखाने के लिए होती है कि अगर युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो कैसे तुरंत प्रतिक्रिया दी जाए। 1971 में युद्ध शुरू होने से 6–8 महीने पहले ही ऐसी तैयारियां शुरू कर दी गई थीं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब देश की जनसंख्या दोगुनी हो चुकी है और युद्ध जैसे हालात में किसी आबादी वाले क्षेत्र में हमले की स्थिति में अफरातफरी से बचाने के लिए ऐसी जागरूकता जरूरी हो गई है।
युद्ध की संभावना पर मेजर जनरल सभरवाल ने कहा, “हम अभी प्रिकॉशन स्टेज में हैं। सरप्राइज़ वही तक है, जब तक दुश्मन को ये नहीं पता कि कब, कहां और कैसे हमला होगा। ऐसे में पाकिस्तान के मनोबल को तोड़ना ही फिलहाल भारत की रणनीति है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान आंतरिक रूप से अस्थिर होता है और बलूचिस्तान या सिंध जैसे क्षेत्र अलग होने की ओर बढ़ते हैं, तो यह भारत के लिए सामरिक रूप से लाभदायक हो सकता है।
गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, देशभर के 244 सिविल डिफेंस जिलों में यह ड्रिल की जाएगी। ये कवायद सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांव स्तर तक सुरक्षा और जागरूकता को बढ़ाया जाएगा।
मॉक ड्रिल के दौरान नागरिकों को बताया जाएगा कि सायरन बजने पर क्या करना है, कैसे खुद को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है और लाइट बंद रखने जैसी सावधानियों का पालन कैसे किया जाता है।
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Uttarakhand
Uttarakhand Pension Scheme: पेंशन योजनाओं की मासिक आय सीमा बढ़ाने की तैयारी, हजारों लोगों को मिलेगा लाभ

Uttarakhand Pension Scheme : मासिक आय सीमा को 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये करने का प्रस्ताव तैयार
देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य के जरूरतमंद लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। समाज कल्याण विभाग ने राज्य में संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं की पात्रता के लिए निर्धारित मासिक आय सीमा को 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय ले सकती है।
पेंशन पात्रता बढ़ने से हजारों नए लाभार्थी जुड़ेंगे
वर्तमान में समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य में वृद्धावस्था, दिव्यांग, विधवा समेत कुल आठ प्रकार की पेंशन योजनाओं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ फिलहाल करीब 9 लाख 71 हजार लाभार्थियों को मिल रहा है।.
विभाग के अनुसार यदि पेंशन पात्रता के लिए निर्धारित मासिक आय सीमा को 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये कर दिया जाता है, तो लाभार्थियों की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इससे ऐसे हजारों जरूरतमंद परिवारों को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा, जो वर्तमान आय सीमा के कारण पात्र नहीं बन पा रहे हैं।
सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
आय सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव से जहां जरूरतमंद लोगों को राहत मिलेगी, वहीं राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ेगा। विभाग के अनुमान के अनुसार इस फैसले के लागू होने पर सरकार पर करीब 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा।
वर्तमान समय में समाज कल्याण विभाग हर महीने लगभग 170 करोड़ रुपये विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत वितरित कर रहा है।
समाज कल्याण मंत्री ने दी जानकारी
समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने बताया कि विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है और सरकार जल्द ही इस पर फैसला लेने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, ताकि पात्र व्यक्तियों को आर्थिक सहायता मिल सके।
राज्य के लाखों लोगों को मिल सकती है राहत
यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो पेंशन योजनाओं के दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। इससे राज्य के हजारों बुजुर्गों, दिव्यांगों, विधवाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
Uttarakhand
उत्तराखंड में फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश , सभी प्रमुख संस्थानों का कराया जाएगा व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट..

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मानकों पर खरे न उतरने वाले संस्थानों को किया जाएगा चिन्हित
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए।
विभागों के बीच समन्वय बनाकर समयबद्ध तरीके से पूरा होगा ऑडिट
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध ढंग से ऑडिट की प्रक्रिया पूरी की जाए।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत बिन्द्रा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना और सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और अपर सचिव तृप्ति भट्ट मौजूद थे।
Uttarakhand
कर्णप्रयाग और नगरासू प्रकरण की निष्पक्ष जांच जारी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई: सीएम धामी

चारधाम एवं हेमकुंट साहिब यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता, अफवाहों से बचें: सीएम धामी
सीएम धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम एवं हेमकुंट साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों का देवभूमि उत्तराखण्ड में स्वागत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की कि वे देवभूमि उत्तराखण्ड के शांत वातावरण में अपनी यात्रा का पूर्ण आनंद लें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।
कर्णप्रयाग और नगरासू प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई जारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू में सामने आई घटनाओं के संबंध में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार, प्रशासन एवं पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई है तथा सभी तथ्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्रा सुचारु रूप से संचालित
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा के साथ-साथ हेमकुंट साहिब यात्रा भी सुचारु रूप से संचालित हो रही है। चारधाम यात्रा में अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, हेमकुंट साहिब यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 25 हजार अधिक दर्ज की गई है।

सिख गुरुओं द्वारा स्थापित तीन प्रमुख पवित्र स्थल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सिख गुरुओं द्वारा स्थापित तीन प्रमुख पवित्र स्थल—हेमकुंट साहिब, रीठा साहिब और नानकमत्ता साहिब—स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सभी का सम्मान करना देवभूमि उत्तराखण्ड की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के अनुरूप यहां आने वाले सभी लोगों का स्वागत एवं सत्कार किया जाता है।
समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों ने मिल-जुलकर देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक और भड़काऊ खबरें फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संवाद और सौहार्द से ही संभव है समाधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सभी धार्मिक स्थल आस्था, श्रद्धा और प्रेरणा के केंद्र हैं, जहां से समाज को सकारात्मक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट रुख है कि देवभूमि उत्तराखण्ड में ऐसा कोई कृत्य स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचे या किसी धर्म एवं आस्था को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि संवाद, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है।
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