Dehradun
उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, विनोद कुमार सुमन को मिले कई अहम विभाग…जानिए किन-किन के क्षेत्र में हुआ बदलाब।

देहरादून – शासन स्तर पर प्रशासनिक फेरदबल में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 15 अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल कर दिया गया है। अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन से आवास, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु से शहरी विकास और सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा से आपदा प्रबंधन विभाग का दायित्व हटा दिया गया है। आईएएस शैलेश बगौली को फिर गृह सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

लोकसभा चुनाव के दौरान उनसे गृह सचिव का प्रभार हटा कर सचिव दिलीप जावलकर को दे दिया गया था। बगौली कारागार का भी जिम्मा देखेंगे। बगौली को सचिव सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान प्रौद्योगिकी से मुक्त कर दिया गया है। जावलकर को सहकारिता का प्रभार दिया गया है।
कार्मिक सतर्कता विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के विभागों को यथावत रखते हुए उन्हें आवास, आयुक्त आवास, मुख्य प्रशासक उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिद्वार, ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना के प्रभार दिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को आवास, मुख्य प्रशासक उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण से मुक्त किया गया है। बाकी विभाग यथावत रहेंगे।
अध्ययन अवकाश से लौटे सचिव नितेश झा को शहरी विकास, सूचना प्रौद्योगिकी व विज्ञान प्रौद्योगिकी का जिम्मा दिया गया है। सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम को पशुपालन, मत्स्य, दुग्ध विकास और निदेशक मत्स्य का जिम्मा दिया गया। सचिव रंजीत कुमार सिन्हा से आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, परियोजना निदेशक बाह्य सहायतित परियोजनाएं हटा दिए गए हैं। उन्हें तकनीकी शिक्षा का जिम्मा दिया गया है।
सचिव हरि चंद्र सेमवाल को पंचायती राज से मुक्त करते हुए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास व आयुक्त खाद्य का जिम्मा दिया गया है। सचिव चंद्रेश यादव से जनगणना, संस्कृत शिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग हटाते हुए पंचायती राज का जिम्मा दिया गया है। सचिव बृजेश कुमार संत से समाज कल्याण, आयुक्त समाज कल्याण, अध्यक्ष बहुउद्देश्यीय, वित्त विकास निगम हटाकर ये सभी प्रभार सचिव डॉ. नीरज खैरवाल को दिए गए हैं। खैरवाल से नियोजन हटा दिया गया है। संत से आयुक्त खाद्य हटाकर उन्हें सचिव परिवहन और आयुक्त परिवहन का प्रभार दिया गया है।
सचिव डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडेय से आवास, आयुक्त आवास, अपर मुख्य प्रशासक आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना, वित्त एवं निदेशक ऑडिट हटाकर कृषि एवं कृषक कल्याण का प्रभार दिया गया है। सचिव विनोद कुमार सुमन को कृषि, पशुपालन, मत्स्य, दुग्ध विकास व सहकारिता हटाकर सचिव आपदा प्रबंधन व पुनर्वास, सचिव एसडीएमए, परियोजना निदेशक बाह्य सहायतित दिए गए हैं। भारतीय संचार सेवा के अधिकारी दीपक कुमार को सचिव जनगणना, संस्कृत शिक्षा व आईएफएस पराग मधुकर धकाते को विशेष सचिव जलागम का जिम्मा दिया गया है।
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बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने किया पुलिस मुख्यालय कूच, गोदियाल ने सरकार पर साधा निशाना

Uttarakhand Politics : राज्य की ध्वस्त पड़ी कानून व्यवस्था के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने आज प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, के नेतृत्व में पुलिस मुख्यालय का घेराव कर सरकार को चेतावनी दी कि अगर राज्य की कानून व्यवस्था पटरी पर नहीं आई तथा लगातार हो रही हत्याओं पर लगाम नहीं लगा तो कांग्रेस पार्टी उग्र आन्दोलन को मजबूर होगी।
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बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने किया पुलिस मुख्यालय कूच
ध्वस्त कानून व्यवस्था के चलते राज्यभर में लगातार हो रही निर्मम हत्याओं के विरोध में आज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालते हुए पुलिस मुख्यालय का घेराव करते हुए पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपते हुए उत्तराखंड में दिन-दहाड़े हो रहे हत्याकांडों एवं बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग की।
कांग्रेस ने पुलिस महानिदेशक को सौंपा ज्ञापन
पुलिस मुख्यालय घेराव के उपरान्त पुलिस महानिदेशक को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस पार्टी ने कहा कि विगत कुछ समय से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जनपदों में दिन-दहाड़े घटित हो रही हत्या और गंभीर आपराधिक घटनाओं से आमजन में भय, असुरक्षा व चिंता का वातावरण व्याप्त है।

उत्तराखंड जैसे शांतिप्रिय और देवभूमि कहे जाने वाले राज्य की राजधानी और अन्य महानगरों में हाल के दिनों में दिन-दहाड़े घटित हुई हत्याकांड की घटनाओं ने समूचे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं से आम नागरिकों में भय, असुरक्षा एवं आक्रोश का वातावरण व्याप्त है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। कानून का भय नगण्य होता प्रतीत हो रहा है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं, अपितु राज्य की सामाजिक शांति व नागरिकों के विश्वास को भी प्रभावित कर रही हैं।
गणेश गोदियाल ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य की कानून-व्यवस्था की ये स्थिति अत्यंत चिंताजनक और अस्वीकार्य है। राज्य की कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से चरमरा चुकी है तथा अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त हो चुका है।

इसका ताजा उदाहरण विगत 15 दिन के अन्दर राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जिलों में दिन दहाड़े 5 जघन्य हत्याकांड की घटनायें हैं। पुलिस की नाक के नीचे हुई इन हत्याकांड की घटनाओं में शामिल सभी अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है जो कि गम्भीर चिन्ता का विषय है। इसके साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर जमकर निशाना साधा।
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कौन हैं IPS प्रमेंद्र डोभाल ?, जिन्हें सौंपी गई राजधानी देहरादून की कमान, जानें यहां

IPS Pramendra Dobhal : असफलता से IPS के शिखर तक, देहरादून के नए कप्तान प्रमेंद्र डोभाल की अनकही कहानी
IPS Pramendra Dobhal : राजधानी देहरादून में 14 दिनों में 4 हत्याओं की घटनाएं सामने आने के बाद से ही पुलिस महकमे में बड़े बदलाव की चर्चाएं हो रही थी। 15वें दिन सुबह-सुबह हुई पांचवी हत्या ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया। शाम होते-होते एक आदेश जारी हुआ और चर्चाओं पर विराम लग गया। ये आदेश पुलिस महकमे में बड़े बदलाव का था। जिसमें राजधानी देहरादून के एसएसपी अजय सिंह को हटाते हुए IPS प्रमेंद्र डोभाल को दून की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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कौन हैं IPS प्रमेंद्र डोभाल ?
IPS प्रमेंद्र डोभाल को देहरादून का नया एसएसपी बनाया गया है। ये सिर्फ खबर नहीं पदस्थापना की खबर नहीं बल्कि उस शख्सियत के संघर्ष की गाथा है जिसने ये साबित कर दिया कि ‘मार्कशीट के नंबर’ भविष्य का फैसला नहीं कर सकते।
प्रमेंद्र डोभाल का जन्म उत्तराखंड में एक साधारण परिवार में हुआ और उनका बचपन अनुशासन और संघर्ष के बीच बीता। पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया। ये वही अधिकारी हैं जो दसवीं में फेल हो गए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज वो आईपीएस अधिकारी हैं।
असफलता से IPS के शिखर तक
आईपीएस प्रमेंद्र डोभाल की कहानी में सबसे प्रेरणादायक मोड़ उनकी 10वीं कक्षा में आया जब वो फेल हो गए। आज के दौर में जहां छात्र एक-दो अंक कम आने पर अवसाद में चले जाते हैं, वहीं उन्होंने हाईस्कूल में फेल होने के बाद भी हार नहीं मानी।

एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने जीवन का ये किस्सा साझा करते हुए बताया था कि उस समय समाज और आसपास के लोगों का नजरिया बदल गया था। लेकिन उस विफलता ने उनके भीतर एक ऐसी आग जला दी जिसने उन्हें ‘साधारण’ से ‘असाधारण’ बना दिया। उन्होंने हार मानने के बजाय दोगुनी मेहनत से पढ़ाई की और अपनी शिक्षा पूरी की। ये उनके जीवन का वो “EEAT” फैक्टर है जो उन्हें युवाओं के लिए एक विश्वसनीय मार्गदर्शक (Expert) बनाता है।
खाकी का सफर : PPS से IPS तक का गौरवमयी मार्ग
प्रमेंद्र डोभाल का पुलिस सेवा में करियर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला। एक PPS अधिकारी के रूप में उन्होंने चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जैसे संवेदनशील जिलों में काम किया।

व्यक्तिगत जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा
प्रमेंद्र डोभाल केवल वर्दी तक सीमित नहीं हैं। वो एक अच्छे पाठक और खेल प्रेमी भी हैं। अक्सर वो स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों से संवाद करते हैं। उनका एक ही संदेश होता है:
“अगर मैं 10वीं में फेल होने के बाद यहाँ तक पहुँच सकता हूँ, तो दुनिया का कोई भी छात्र कुछ भी हासिल कर सकता है।”
उनकी सादगी का आलम यह है कि वह अक्सर बिना तामझाम के औचक निरीक्षण पर निकल जाते हैं ताकि जमीनी हकीकत जान सकें।
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उत्तराखंड पुलिस में बड़ा बदलाव, 8 जिलों के बदले गए कप्तान..यहाँ देखें ट्रांसफर लिस्ट..

उत्तराखंड की कानून व्यवस्था में हुआ बड़ा फेरबदल, 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले
UTTARAKHAND POLICE TRANSFER: उत्तराखंड पुलिस में बड़ा फेरबदल हुआ है. प्रदेश में 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए हैं. शासन की तरफ से जारी तबादला सूची में आठ जिलों के पुलिस कप्तान बदले गए हैं.
मुख्य बिंदु
उत्तराखंड पुलिस में अधिकारियों के बंपर तबादले
उत्तराखंड शासन ने पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेर बदल किया है. जारी शासनादेश के मुताबिक 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए हैं, जिनमें आठ जिलों के पुलिस कप्तान भी बदले गए हैं. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, ये बदलाव प्रशासनिक संतुलन, कार्यकुशलता और आगामी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
स्थानांतरित अधिकारियों को शीघ्र नए तैनाती के निर्देश
सभी स्थानांतरित अधिकारियों को शीघ्र नए तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं. इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद राज्य की पुलिस व्यवस्था में नई कार्यशैली और सक्रियता देखने की उम्मीद जताई जा रही है. पिछले कुछ समय से प्रदेश की चरमराई कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे थे.
यहाँ देखें तबादला सूची

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