Chamoli
गुलदार ने मवेशियों को बनाया निवाला, गुस्साए ग्रामीणों ने वनकर्मियों को ही बना लिया बंधक, कई घंटे तक नहीं छोड़ा

Chamoli News : उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। चमोली में जब ग्रामीणों के मवेशियों को गुलदार ने निवाला बना लिया तो गुस्साए लोगों ने वनकर्मियों को ही बंधक बना लिया और कई घँटे तक अपने कब्जे में रखा।
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गुलदार के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने वनकर्मियों को बनाया बंधक
चमोली से ऐसी खबर (Chamoli News) सामने आई जिसने सभी को हैरान करने के साथ ही सोचने पर भी मजबूर कर दिया। गैरसैंण के सीमावर्ती मेहलचौरी और कुनीगाड क्षेत्र में गुलदार का आतंक कम होने के का नाम नहीं ले रहा। आए दिन गुलदार ग्रामीणों के मवेशियों को अपना निवाला बना रहा है।

गौशाला का दरवाजा तोड़कर गौशाला में घुसा गुलदार
मंगलवार रात तो गुलदार गौशाला में घुसा और गाय और उसके बछड़े को मार डाला। इस घटना से ग्रामीणों आक्रोशित हो गए। जब इसकी जानकारी वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गुस्साए ग्रामीणों ने आधा दर्जन से ज्यादा बनकर्मियों को बंधक बना लिया।

गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग
गुस्साई महिलाओं ने कई घंटों तक फॉरेस्टर समेत आधा दर्जन से ज्यादा कर्मचारियों को मौके पर ही रस्सों से बांधे रखा और उन्हें ना छोड़ने की जिद्द पर अड़ी रही। गांव वालों का कहना है कि गुलदार के हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। अब तक वो 10 से ज्यादा गायों को मार चुका है।
इसके अलावा गौवंश और कुत्तों को भी अपना शिकार बना चुका है। ऐसे में कभी भी किसी बच्चे ओर वृद्ध पर भी हमला हो सकता है। इसलिए ग्रामीणों की वन विभाग से से गुलदार को पकड़ कर संरक्षित क्षेत्र में भेजने की मांग है।
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भारत-चीन सीमा पर बड़ी उपलब्धि, मलारी स्टील पुल से सेना और नीति घाटी को नई ताकत…

Chamoli news: मलारी स्टील ब्रिज से मिलेगी भारत को मजबूती, नीती घाटी के दर्जनों गांवों में बढ़ेगा पर्यटन
Chamoli news: चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारत को मिली महत्वपूर्ण सफलता। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत स्यून गदेरे के पास 104 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत, अगले साल तक इस पुल को यातायात के लिए खोलने की योजना है, जिससे सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्य बिंदु
भारत चीन सीमा को जोड़ेगा Malari Steel Bridge
इसके साथ ही, दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में बने इस स्टील ब्रिज को इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सीमांत क्षेत्र में इतने बड़े स्टील ब्रिज का निर्माण पहली बार किया गया है। परिणामस्वरूप, भारतीय सेना और आईटीबीपी की चौकियों तक रसद सामग्री और भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित हो सकेगी, जिससे सीमा सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नीति घाटी और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इसी कड़ी में, ढाक वार्ड की जिला पंचायत सदस्य आरुषि बुटोला ने बताया कि इस पुल के बन जाने से नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पहले से मौजूद कई पुल जर्जर स्थिति में थे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी। अब, इस नए और मजबूत स्टील ब्रिज से ग्रामीणों की आवाजाही सुरक्षित होगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका
एसडीएम जोशीमठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने इस पुल को सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे नीति घाटी के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इसके परिणामस्वरूप, पर्यटकों को सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। BRO का ये प्रोजेक्ट सामरिक महत्व के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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Malari Steel Bridge कहाँ बनाया जा रहा है?
Malari स्टील ब्रिज उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्यून गदेरे के पास बनाया जा रहा है।
Malari Steel Bridge की लंबाई कितनी है?
इस स्टील ब्रिज की कुल लंबाई 104 मीटर है, जिसे सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत बनाया जा रहा है।
Malari स्टील ब्रिज कब तक यातायात के लिए खुलेगा?
BRO के अनुसार Malari Steel Bridge को अगले वर्ष तक आम यातायात और सैन्य उपयोग के लिए खोलने की योजना है।
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ज्योतिर्मठ में आर्मी कैंप में भीषण आग, सेना जवान आग बुझाने में जुटे, 1 घंटे बाद भी नहीं बुझी आग

Chamoli News : चमोली जिले के ज्योतिर्मठ में औली रोड पर स्थित आर्मी कैंप में आग लगने से हड़कंप मच गया। आग लगने की सूचना पर आर्मी के जवान और आर्मी फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई है और आग बुझाने की कोशिश की जा रही है।
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Chamoli के ज्योतिर्मठ में आर्मी कैंप में भीषण आग
ज्योतिर्मठ में आर्मी कैंप की कैंटीन में आग लगने से पूरे कैंप परिसर में अफरा तफरी मच गई। मिली जानकारी के मुताबिक आग कैंटीन के स्टोर में लगी है। जहां पर प्लास्टिक का सामान रखा गया था। तेज हवाओं के कारण आग और भी तेजी से फैली और इसने विकराल रूप ले लिया है।
एक घंटे बाद भी आग पर नहीं पाया जा सका काबू
मिली जानकारी के मुताबिक आग लगने की सूचना पर सेना की फायर ब्रिगेड और जवान तत्काल मौके पर पहुंचे। लगातार आग बुझाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन तेज हवाओं के कारण खबर लिखे जाने तक आग बुझ नहीं सकी है। एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है।

आसमान में उठा काले धुएं का गुबार
बताया जा रहा है कि आग लगने के कारण आर्मी कैंटीन के स्टोर में रखा ज्यादातर सामान जलकर खाक हो चुका है। फिलहाल स्टोर के अंदर रखे सामान को बचाने की कोशिश की जा रही है। आग लगने के कारण घटनास्थल के पास आसमान में काले धुएं का गुबार उठ गया है। जिस आस-पास के लोगों में डर का माहौल है।
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नीति घाटी से सामने आई बर्फ़बारी की सुन्दर तस्वीरें, साल के पहले दिन मौसम हुआ मेहरबान

Snowfall in Uttarakhand : नीति घाटी में हुई सीजन की पहली बर्फ़बारी, खिल उठे सैलानियों के चेहरे
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Snowfall in Uttarakhand : उत्तराखंड में लम्बे समय से सूखी ठण्ड के कहर से पहाड़ से मैदान तक लोग परेशान हैं। इस बार पूरा दिसंबर बिना बारिश और बर्फ़बारी के गुजर गया। अब जाकर उत्तराखंड में बर्फबारी का इंतजार खत्म हो गया है। चमोली जिले की Niti valley में साल की पहली बर्फबारी हुई है। तिब्बत बॉर्डर के पास बसी नीती घाटी ( Niti Valley ) से बर्फबारी की तस्वीरें सामने आई हैं। इसी के साथ अब राज्य के अन्य पहाड़ी इलाकों में भी बर्फबारी होने की उम्मीद है।
नीती घाटी में हुई साल 2026 की पहली बर्फबारी
उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत चीन सीमा से लगी Niti valley में साल की पहली बर्फबारी ( Snowfall in Uttarakhand ) देखने को मिली है। सैलानी लंबे समय से बर्फबारी का इंतजार कर रहे थे। चमोली जिले में 1 जनवरी से ही मौसम बिगड़ना शुरू हुआ। साल के पहले दिन आसमान में घने काले बादल छाए रहे। इससे पहले क्रिसमस और नए साल पर बड़ी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड का रुख कर कर चुके हैं। लेकिन बर्फ़बारी न होने से सभी मायूस दिख रहे थे।

बर्फबारी नहीं होने से सैलानी थे निराश
ऐसे में नए साल के पहले दिन ही सैलानियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। ताजा तस्वीरों में चमोली जिले की नीती घाटी बर्फ की चादर ओढ़े नजर आई, यहाँ पर बर्फबारी का सुन्दर दृश्य देखने को मिल रहा है। अब तक बर्फबारी न होने से उत्तराखंड के अन्य इलाकों में मौसम शुष्क बना हुआ है। जिससे जंगलों में आग लगने और फैलने की आशंका भी बनी रहती है। बारिश और बर्फबारी न होने से किसानों को भी इसका खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
बर्फबारी के अभाव से रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे जंगली जानवर
इस वर्ष अपेक्षित बर्फबारी न होने का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। परिणामस्वरूप, जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ है और वे भोजन व पानी की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण भालू और तेंदुए जैसे हिंसक वन्यजीव उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में लगातार शहरी और ग्रामीण बस्तियों में नजर आ रहे हैं।

बर्फ़बारी न होने से पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट
वहीं दूसरी ओर, बर्फबारी न होने से उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल औली और आइजन टॉप भी वीरान पड़े हुए हैं। इसका सीधा असर चमोली जिले के पर्यटन कारोबार पर पड़ा है, जहां के व्यवसायी निराश दिखाई दे रहे हैं। आमतौर पर हर साल दिसंबर और जनवरी के महीनों में बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार न बारिश हुई और न ही बर्फ गिरी। ऐसे में पूरे क्षेत्र में मौसम शुष्क बना हुआ है, जिससे ठंड का मिजाज भी बदला हुआ महसूस किया जा रहा है।
Snowfall in Uttarakhand : बर्फबारी से खिले सैलानियों के चेहरे
नीती घाटी में साल की पहली बर्फबारी होने से मौसम को लेकर उम्मीदें एक बार फिर जागी हैं। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बर्फबारी के आसार भी बढ़ते नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके, अन्य वर्षों की तुलना में फिलहाल ठंड का असर अपेक्षाकृत कम महसूस किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी नहीं हुई, तो उन्हें केवल शुष्क और तीखी ठंड का ही सामना करना पड़ेगा। इसलिए मौसम में बदलाव को लेकर लोगों की निगाहें अब आने वाले दिनों पर टिकी हुई हैं।
उत्तराखंड में साल 2026 की पहली बर्फबारी कहाँ हुई है?
उत्तराखंड में साल 2026 की पहली बर्फबारी चमोली जिले की नीती घाटी (Niti Valley) में हुई है, जो भारत-चीन सीमा के पास स्थित है।
नीती घाटी में बर्फबारी कब हुई?
नीती घाटी में यह बर्फबारी 1 जनवरी 2026 के आसपास दर्ज की गई, जिससे लंबे समय से जारी सूखी ठंड का सिलसिला टूटा।
क्या Auli में Snowfall हुआ है?
फिलहाल औली में Snowfall in Uttarakhand नहीं हुई है, जिस कारण वहां पर्यटकों की संख्या में कमी देखी गई।
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