Uttarakhand
चारधाम यात्रा से पहले सुरक्षा का बड़ा ट्रायल, 10 अप्रैल को पूरे गढ़वाल मंडल में होगी NDMA मॉकड्रिल

Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरो- शोरों पर चल रही है। ताकि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। चारधाम यात्रा से पहले सुरक्षा व्यवस्थाएं जांचने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।
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चारधाम यात्रा से पहले सुरक्षा का बड़ा ट्रायल
चारधाम यात्रा 2026 से संबंधित तैयारियों को परखने के लिए उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग आगामी 10 अप्रैल को चारधाम के संबंधित जिलों के साथ ही गढ़वाल रीजन के सभी जिलों में मॉक ड्रिल किया जाएगा। हर जिले के लिए अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर योजना बनाई गई है, ताकि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले तैयारियों में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते सुधार लिया जाए।
10 अप्रैल को पूरे गढ़वाल मंडल में होगी NDMA मॉकड्रिल
चारधाम यात्रा की तैयारियों को परखने के लिए 10 अप्रैल को गढ़वाल मंडल के सभी जिलों में एक साथ मॉक ड्रिल की जाएगी। बता दें कि उत्तराखंड चारधाम की यात्रा 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही शुरू हो रही है। पिछले साल की तरह इस साल भी चार धाम की यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

जिसके दृष्टिगत शासन प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रा से जुड़े विभागों ने अपनी- अपनी व्यवस्थाओं को धरातल पर उतारने की कवायत भी शुरू कर दी है। ताकि 19 अप्रैल से पहले इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया जाए क्योंकि चारधाम के कपाट खुलने से दो दिन पहले ही चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की रवानगी शुरु हो जाती है।
आपदा सीजन को लेकर परखी जाएंगी व्यवस्थाएं
उत्तराखंड चार धाम यात्रा के दौरान कई बार श्रद्धालुओं को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिसमें भूस्खलन होने की वजह से यातायात बाधित होना, वाहनों की अत्यधिक दबाव होने के चलते ट्रैफिक जाम होना समेत अन्य समस्याएं शामिल है।
इसके अलावा कई बार आपदा सीजन के दौरान भी चारधाम यात्रा काफी अधिक प्रभावित होती है। जिसको देखते हुए भी आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से पहले से ही व्यवस्थाओं को मुकम्मल कराया जाता है। ताकि भारी बारिश या फिर भूस्खलन की वजह से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। यही वजह है कि चाधाम से संबंधित जिलों रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली के साथ ही गढ़वाल रीजन की अन्य जिलों में भी मॉकड्रिल कराया जाएगा।
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Gidara Bugyal Trek : उत्तरकाशी का अनछुआ खजाना | Complete Trekking Guide 2026

गिदारा बुग्याल ट्रेक (Gidara Bugyal Trek): उत्तराखंड का विशाल और अनछुआ मखमली मैदान
अगर आप हिमालय की गोद में बसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहाँ दूर-दूर तक फैली हरियाली, शांत माहौल और बादलों को छूती पर्वत शृंखलाएँ हों, तो गिदारा बुग्याल ट्रेक (Gidara Bugyal Trek) आपके लिए एक सपने के सच होने जैसा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित गिदारा बुग्याल भारत के सबसे बड़े और खूबसूरत आल्पाइन घास के मैदानों (Alpine Meadows) में से एक है।
जहाँ दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) जैसे प्रसिद्ध ट्रेक पर पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है, वहीं गिदारा बुग्याल आज भी शांत, अनछुआ और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। लगभग 12,780 फीट (3,900 मीटर से 4,200 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित यह मखमली मैदान ट्रेकर्स को एक अलग ही दुनिया का अहसास कराता है। इस लेख में हम आपको Gidara Bugyal Trek से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी विस्तार से देंगे।
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गिदारा बुग्याल ट्रेक का संक्षिप्त परिचय (Trek Overview)
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | उत्तरकाशी जिला, उत्तराखंड |
| अधिकतम ऊँचाई | लगभग 12,780 फीट – 13,900 फीट |
| ट्रेक की दूरी | लगभग 29 किमी से 35 किमी (रूट के अनुसार) |
| ट्रेक की अवधि | 6 से 7 दिन |
| कठिनाई का स्तर | मध्यम (Moderate) |
| बेस कैंप | भांगेली गाँव (Bhangeli Village) / तिहार गाँव |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | देहरादून (Dehradun) |
| निकटतम हवाई अड्डा | जौलीग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून |
| सबसे अच्छा समय | मई – जून (ग्रीष्मकाल) और सितंबर – अक्टूबर (शरद ऋतु) |
गिदारा बुग्याल ट्रेक क्यों खास है? (Why Choose Gidara Bugyal Trek?)
उत्तराखंड में कई खूबसूरत बुग्याल (हिमालयी घास के मैदान) हैं, लेकिन गिदारा बुग्याल की बात ही कुछ अलग है। आइए जानें कि यह ट्रेक ट्रेकर्स के दिलों में खास जगह क्यों रखता है:
1. भारत के विशालतम मखमली मैदानों में से एक
गिदारा बुग्याल का दायरा बेहद विशाल है। जब आप इस बुग्याल में कदम रखते हैं, तो जहाँ तक आपकी नज़र जाती है, आपको हरे-भरे घास के मैदान और रंग-बिरंगे जंगली फूल ही दिखाई देते हैं। इसे पूरा घूमने में ही कई घंटे लग जाते हैं।
2. भीड़भाड़ से दूर एकांत अनुभव
केदारकंठ या दयारा बुग्याल की तुलना में गिदारा ट्रेक पर व्यावसायिक गतिविधियाँ कम हैं। यदि आप शांति, अध्यात्म और प्रकृति के साथ एकांत क्षण बिताना चाहते हैं, तो यह ट्रेक आपके लिए सबसे उपयुक्त है।
3. हिमालयी चोटियों के भव्य दृश्य
गिदारा बुग्याल ट्रेक के दौरान आपको गंगोत्री ग्रुप, श्रीकंठ, बंदरपूँछ, जौनली और द्रौपदी का डांडा जैसी भव्य हिमालयी चोटियों के 360-डिग्री स्पष्ट नज़ारे देखने को मिलते हैं।
4. समृद्ध वनस्पति और दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ
यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ देवदार, बांज (Oak) और भोजपत्र के घने जंगलों के साथ-साथ कई प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ (जैसे मासी, जयान आदि) पाई जाती हैं।
गिदारा बुग्याल जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Gidara Bugyal Trek)
गिदारा बुग्याल ट्रेक वर्ष के अलग-अलग महीनों में अपना अलग ही रूप दिखाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार यात्रा का समय चुन सकते हैं:
मई से जून (ग्रीष्मकाल – Pre-Monsoon)
- मौसम: मौसम सुहावना और साफ़ रहता है।
- विशेषता: मई की शुरुआत में ऊपरी हिस्सों में बर्फ के टुकड़े मिल सकते हैं। जून आते-आते बर्फ पिघल जाती है और मखमली घास उगने लगती है। इस समय दिन में धूप खिली रहती है और रातें हल्की ठंडी होती हैं।
सितंबर से अक्टूबर (शरद ऋतु – Post-Monsoon)
- मौसम: मानसून के ठीक बाद का समय सबसे सुंदर माना जाता है।
- विशेषता: बारिश के बाद पूरा बुग्याल गहरे हरे रंग से भर जाता है और जगह-जगह रंग-बिरंगे जंगली फूल खिल उठते हैं। आसमान एकदम साफ़ रहता है, जिससे दूर-दूर स्थित बर्फ से ढकी चोटियाँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।
नोट: जुलाई और अगस्त (मानसून) के दौरान भारी बारिश, फिसलन और भूस्खलन के खतरे के कारण इस ट्रेक पर जाने से बचना चाहिए। वहीं अत्यधिक सर्दियों (दिसंबर से मार्च) में भारी बर्फबारी के कारण मार्ग बंद हो जाता है।
गिदारा बुग्याल ट्रेक का विस्तृत रूट चार्ट (Detailed Itinerary)
गिदारा बुग्याल ट्रेक को आमतौर पर 6 से 7 दिनों में पूरा किया जाता है। यहाँ एक आदर्श 6-दिवसीय यात्रा कार्यक्रम दिया गया है:
दिन 1: देहरादून से भांगेली गाँव (Drive: 185 किमी, 8-9 घंटे)
आपकी यात्रा देहरादून से शुरू होती है। आप मसूरी, चिन्यालीसौड़ और उत्तरकाशी होते हुए भागीरथी नदी के किनारे-किनारे भांगेली गाँव पहुँचते हैं। भांगेली एक खूबसूरत और पारंपरिक पहाड़ी गाँव है। यहाँ होमस्टे में रात विश्राम किया जाता है।
दिन 2: भांगेली से रिकोडा कैंपसाइट (Trek: 5 किमी, 4-5 घंटे)
सुबह भांगेली गाँव से ट्रेक की शुरुआत होती है। रास्ते में ओक, मैपल और देवदार के घने जंगल आते हैं। छोटे-छोटे पहाड़ी झरनों को पार करते हुए आप रिकोडा पहुँचते हैं। रिकोडा में टेंट लगाकर रात गुजारी जाती है।
दिन 3: रिकोडा से डोगरानी / थलोत्या (Trek: 5-6 किमी, 5 घंटे)
इस दिन की चढ़ाई जंगलों से होकर गुजरती है। जैसे-जैसे आप ऊँचाई पर बढ़ते हैं, पेड़ों की रेखा खत्म होने लगती है। यहाँ से गंगोत्री रेंज के नज़ारे दिखने लगते हैं। थलोत्या या डोगरानी कैंपसाइट पर रात का कैंप लगाया जाता है।
दिन 4: थलोत्या से गिदारा बुग्याल व गिदारा टॉप और वापसी (Trek: 9-10 किमी, 7-8 घंटे)
यह ट्रेक का सबसे मुख्य और रोमांचक दिन है। सुबह जल्दी उठकर आप गिदारा बुग्याल की ओर चढ़ाई शुरू करते हैं। कुछ ही देर में आप विशाल घास के मैदानों में प्रवेश कर जाते हैं। गिदारा टॉप (Gidara Top) पर पहुँचकर आपको जो 360-डिग्री व्यू मिलता है, वह आपकी सारी थकान दूर कर देता है। बुग्याल का अन्वेषण करने के बाद आप वापस कैंपसाइट लौट आते हैं।
दिन 5: थलोत्या / थिरया से वापस भांगेली गाँव (Trek: 7-8 किमी, 4-5 घंटे)
गिदारा की खूबसूरत यादों को सहेजते हुए आप ढलान की ओर चलना शुरू करते हैं और जंगलों व पगडंडियों से होते हुए वापस भांगेली गाँव पहुँचते हैं।
दिन 6: भांगेली गाँव से देहरादून वापसी (Drive: 185 किमी, 8 घंटे)
सुबह नाश्ते के बाद भांगेली से देहरादून के लिए गाड़ी से रवाना होते हैं और शाम तक देहरादून पहुँच जाते हैं।
कठिनाई का स्तर और शारीरिक तैयारी (Difficulty Level & Fitness)
Gidara Bugyal Trek को मध्यम (Moderate) श्रेणी का ट्रेक माना जाता है।
- दूरी: प्रतिदिन लगभग 5 से 10 किमी चलना होता है।
- चढ़ाई: कुछ हिस्सों पर खड़ी चढ़ाई और तीखी ढलानें हैं।
- ऑक्सीजन स्तर: ऊँचाई 12,000 फीट से अधिक होने के कारण हवा हल्की हो सकती है।
शारीरिक तैयारी कैसे करें?
- कार्डियो व्यायाम: ट्रेक पर जाने से 3-4 सप्ताह पहले रोज़ाना 4-5 किमी पैदल चलें या जॉगिंग करें।
- स्टैमिना बढ़ाएँ: सीढ़ियाँ चढ़ना-उतरना, साइकिल चलाना और तैराकी करना बहुत फायदेमंद रहता है।
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: पैरों और कोर (Core) की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए स्क्वैट्स (Squats) और लंग्स (Lunges) करें।
गिदारा बुग्याल ट्रेक के लिए आवश्यक पैकिंग सूची (Packing Checklist)
हिमालयी क्षेत्रों में मौसम बहुत तेज़ी से बदलता है। इसलिए सही सामान साथ ले जाना बेहद ज़रूरी है:
1. कपड़े (Clothing)
- ट्रेकिंग पैंट (Quick-dry Track Pants) – 2
- फुल स्लीव टी-शर्ट (Synthetic/Dry-fit) – 3
- थर्मल इनरवियर (Top & Bottom) – 1 सेट
- फ़्लीस जैकेट (Fleece Jacket) – 1
- डाउन जैकेट (Down/Puffer Jacket) – 1
- रेनकोट या पोंचो (Raincoat/Poncho) – 1
2. जूते और मोज़े (Footwear)
- अच्छी ग्रिप वाले वॉटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज़ (Trekking Shoes with Ankle Support)
- सूती मोज़े (Cotton Socks) – 3 जोड़े
- ऊनी मोज़े (Woolen Socks) – 2 जोड़े
3. गियर्स और एक्सेसरीज़ (Gears)
- 50-60 लीटर का बैकपैक (Rain Cover के साथ)
- ट्रेकिंग पोल (Trekking Pole)
- हेडलैंप या टॉर्च (अतिरिक्त बैटरी के साथ)
- यूवी प्रोटेक्शन सनग्लासेस (Sunglasses)
- सनस्क्रीन लोशन (SPF 50+) और लिप बाम
- वॉटर बॉटल / हाइड्रेशन बैग (कम से कम 2 लीटर)
4. पर्सनल मेडिकल किट (Medical Kit)
- पैरासिटामोल, डिस्प्रिन, ओआरएस (ORS) या इलेक्ट्रोलाइट्स
- बैंडेज, कॉटन और एंटीसेप्टिक क्रीम
- एल्टीट्यूड सिकनेस (AMS) की दवा (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा टिप्स (Safety Guidelines)
- एक्लिमेटाइजेशन (Acclimatization) का ध्यान रखें: ऊँचाई वाले क्षेत्रों में शरीर को ढलने का समय दें। अधिक मात्रा में पानी पिएँ।
- स्थानीय गाइड साथ रखें: गिदारा बुग्याल के रास्ते अनछुए हैं और कई जगह भ्रमित कर सकते हैं। हमेशा स्थानीय गाइड या प्रमाणित ट्रेकिंग एजेंसी के साथ ही जाएँ।
- पर्यावरण का सम्मान करें: “Leave No Trace” के नियम का पालन करें। प्लास्टिक, पॉलिथीन या कचरा पहाड़ों पर न फेंकें।
- मौसम पर नज़र रखें: पहाड़ों में मौसम अचानक बदल सकता है। गाइड के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: क्या गिदारा बुग्याल ट्रेक शुरुआती (Beginners) के लिए सही है?
उत्तर: यदि आप शारीरिक रूप से फिट हैं और नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, तो आप एक अच्छे गाइड के साथ यह ट्रेक कर सकते हैं। हालाँकि, यह बिल्कुल नए ट्रेकर्स के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रश्न 2: क्या इस ट्रेक पर मोबाइल नेटवर्क मिलता है?
उत्तर: भांगेली गाँव तक बीएसएनएल (BSNL) और जिओ (Jio) का नेटवर्क मिल जाता है। लेकिन जैसे ही आप ट्रेक पर आगे बढ़ते हैं, नेटवर्क पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 3: दयारा बुग्याल और गिदारा बुग्याल में क्या अंतर है?
उत्तर: दयारा बुग्याल अधिक प्रसिद्ध और आसानी से सुलभ है, जहाँ पर्यटकों की भीड़ होती है। वहीं गिदारा बुग्याल आकार में दयारा से बड़ा, अधिक ऊँचाई पर स्थित और बहुत शांत व अनछुआ है।
प्रश्न 4: क्या गिदारा बुग्याल में सोलो (Solo) ट्रेकिंग की जा सकती है?
उत्तर: नहीं, गिदारा बुग्याल का मार्ग काफी दूरदराज़ का है और रास्ते में भटकने की संभावना रहती है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से सोलो ट्रेकिंग के बजाय गाइड या समूह के साथ जाना ही उचित है।
निष्कर्ष (Conclusion)
गिदारा बुग्याल ट्रेक (Gidara Bugyal Trek) प्राकृतिक सुंदरता, शांति और रोमांच का एक अद्भुत संगम है। अगर आप शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, प्रकृति के विशाल और मखमली आंचल में कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तरकाशी का यह अनछुआ खजाना आपका इंतज़ार कर रहा है। अपनी अगली हिमालयी यात्रा की योजना बनाएँ और गिदारा बुग्याल के अविस्मरणीय नज़ारों के साक्षी बनें!
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1109 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में उत्तराखंड में पड़ा CBI का छापा, काशीपुर में फैक्टरी में खंगाले दस्तावेज

CBI Raid in Uttarakhand : 1109 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में उत्तराखंड में CBI की कार्रवाई देखने को मिली है। CBI ने काशीपुर में फैक्टरी में दस्तावेज खंगाले हैं।
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1109 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में उत्तराखंड में पड़ा CBI का छापा
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 1109 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत उत्तराखंड के काशीपुर स्थित एक औद्योगिक इकाई में छापेमारी की। ये कार्रवाई ओडिशा की कंपनी गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज मामले के संबंध में की गई।
CBI ने काशीपुर में फैक्टरी में खंगाले दस्तावेज
बताया जा रहा है कि काशीपुर स्थित यह फैक्टरी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण औद्योगिक उपकरणों का निर्माण करती है। सीबीआई की जांच केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रही। एजेंसी ने इस मामले में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और ओडिशा के विभिन्न ठिकानों पर भी एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जुटाना है।
केनरा बैंक से जुड़ा हुआ है मामला
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी पर केनरा बैंक से फंड आधारित और गैर-फंड आधारित ऋण सुविधाओं के माध्यम से करीब 1109 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधिक ऋण प्राप्त करने के लिए कंपनी ने अपने स्टॉक का मूल्य वास्तविकता से अधिक दर्शाया और व्यापारिक देनदारियों से जुड़े आंकड़ों में कथित रूप से हेरफेर किया। इसके अलावा वित्तीय दस्तावेजों में भी भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने के आरोप लगाए गए हैं।
छापेमारी के दौरान जब्त किए गए कई दस्तावेज
सीबीआई का कहना है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया और उसे अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया गया। जांच में यह भी आरोप है कि बैंक खातों को नियमित और सक्रिय दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी वित्तीय लेनदेन किए गए, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
फिलहाल सीबीआई मामले की विस्तृत जांच कर रही है और छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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उत्तराखंड में आज भारी बारिश का रेड अलर्ट, 12 जिलों में आज स्कूल बंद, लोगों से सतर्क रहने की अपील

Uttarakhand Weather Alert : उत्तराखंड में भारी बारिश का सिलसिला जारी है। आज भी पहाड़ से लेकर मैदान तक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। जिसके चलते प्रदेश के 12 जिलों में आज स्कूल बंद रहेंगे।
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उत्तराखंड में आज भारी बारिश का रेड अलर्ट
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच मौसम विभाग ने सोमवार को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
अगले 24 घंटों के दौरान कई क्षेत्रों में आ सकती है बाढ़
मौसम विभाग की फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने भी अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई क्षेत्रों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा जताया है। विभाग का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण कई स्थानों की मिट्टी पहले ही पूरी तरह नम हो चुकी है। ऐसे में नई बारिश होने पर पानी का बहाव तेजी से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है।

भारी बारिश के चलते 12 जिलों में स्कूल बंद
रेड अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बागेश्वर को छोड़कर राज्य के 11 जिलों में सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश के तहत कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यालयों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। साथ ही मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन की सहायता लें।
बारिश के चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने और नदियों का जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में यात्रियों और स्थानीय लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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