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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दि बीटल्स एण्ड दि गंगा फेस्टिवल का शुभारंभ कर 422.71 लाख की योजनाओं का किया लोकार्पण।

देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को स्वर्गाश्रम, यमकेश्वर, पौड़ी में ‘दि बीटल्स एण्ड दि गंगा फेस्टिवल – 2023’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने जनपद पौड़ी की ₹422.71 लाख की 3 योजनाओं का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पण की गई योजनाओ में ₹224 लाख की लागत से स्वर्गाश्रम में जानकी सेतु से परमार्थ निकेतन तक आस्था पथ निर्माण कार्य। ₹48.3 लाख की लागत से गंगा पद यात्रा के अंतर्गत चारधाम पौराणिक हरिद्वार- बद्रीनाथ पैदल मार्ग के विभिन्न स्थानों पर रेलिंग कार्य एवं ₹150.41 लाख की लागत से क्षतिग्रस्त वेद निकेतन घाट की मरम्मत कार्य, आपदा राहत बचाव कार्य हेतु हैलीपैड एवं पार्किंग निर्माण कार्य शामिल है। उन्होंने यमकेश्वर विधानसभा की विभिन्न विकास योजनाएं का प्रशिक्षण करवा उन्हें अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित किए जाने की बात कही।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के तौर पर आगे बढ़ रहा है। दि बीटल्स एण्ड दि गंगा फेस्टिवल का आयोजन भारतीय संस्कृति के विभिन्न घटकों योग, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, कला, प्रतिष्ठित परम्पराओं आदि को उत्सव के रूप में मनाने का एक प्रयास है। तथा स्थानीय सभ्यता एवं परम्पराओं को विश्व में प्रदर्शित करने की एक पहल है। फेस्टिवल के माध्यम से उत्तराखण्ड को एक नई ऊर्जा मिलेगी, एवं माँ गंगा के आशीर्वाद से अपनी लोक संस्कृति को वैश्विक स्तर पर फैला सकेगें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संस्कृति, अध्यात्म तथा संगीत में एक गहरा सम्बन्ध है। विश्व प्रसिद्ध बीटल्स बैण्ड ने पाश्चात्य सभ्यता को यह दिखाया कि किस प्रकार आत्मा तथा संगीत मिश्रित होकर अध्यात्म में विलीन हो सकते हैं। 50 वर्ष पूर्व बीटल्स के सदस्यों ने इसी पावन भूमि से प्रेरित होकर ऐसा संगीत बनाया जिसकी महक पूरे विश्व ने महसूस की। उन्होंने कहा योग तथा मनोसाधना से मानव जीवन के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है। हमारे देश की प्राचीन और महान संस्कृति ने ही सर्वप्रथम ’’वसुधैव कुटुम्बकम’’ अर्थात ’’समस्त विश्व एक परिवार है’’ की अवधारणा विश्व के समक्ष रखी थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश के महापुरुषों ने एकता व सद्भावना के माध्यम से मानव समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। ऋषियों और मुनियों ने समाज में अध्यात्म और ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया तथा अध्यात्म के संदेश से लोगों का हृदय परिवर्तन कर सद्भावना का मार्ग प्रशस्त किया। राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए प्रेम व अहिंसा के रास्ते पर चलकर समाज में एकता की भावना को मजबूत करना होगा। सद्भावना से ही राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा मिल सकता है

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत का मान- सम्मान पूरे विश्व में बढ़ रहा है। वो दिन दूर नहीं जब हमारा देश पुनः “विश्व गुरु” पद पर आरूढ़ होगा। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आज “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” और “आत्मनिर्भर” भारत की भावना को मजबूत करते हुए सामाजिक, आर्थिक एवं संवैधानिक एकीकरण का कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने अनावश्यक और पुराने कानूनों से छुटकारा पाया है। एकता के आदर्शों को मजबूत किया है और कनेक्टिविटी एवं बुनियादी ढांचे पर जोर देकर भौगोलिक तथा सांस्कृतिक दूरियां घटाई हैं। देश को शक्तिशाली बनाने का अभियान निरंतर जारी है। देश सुरक्षित होगा तभी हम एकजुट होकर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। लोगों की भागीदारी को देश की ताकत बनाया है। प्रत्येक व्यक्ति को देश के सर्वांगीण विकास के लिए अपना बहुमूल्य योगदान देना होगा। सभी के सहयोग से ही हम अपने देश को विश्व का “सर्वश्रेष्ठ देश” बनाने में सफल हो सकेंगे। राज्य सरकार उत्तराखंड वासियों के सपनों के अनुरूप देवभूमि उत्तराखंड को भी देश के “सर्वश्रेष्ठ राज्य” के रूप में प्रतिस्थापित करने हेतु वचनबद्ध है ।
विधायक रेनू बिष्ट ने कहा कि दि बीटल्स एण्ड दि गंगा फेस्टिवल से क्षेत्र वासियों का मनोबल बढ़ा है। इस आयोजन से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा एवं इस महत्वपूर्ण स्थान को एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पर्यटन, धार्मिक स्थलों का निरंतर विकास हो रहा है। आज उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छूने का काम कर रहा है।
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Ramnagar में अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन, पुलिस ने 13 प्रदर्शनकारियों को किया गिरफ्तार

Ramnagar : रामनगर के ग्राम पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गूलरघटटी के समीप मंगल बाजार चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार, पुलिस और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
Ramnagar में अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोग गिरफ्तार
रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अतिक्रमण का विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस ने लोगों के साथ मारपीट की और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को कार्रवाई से पहले वहां बसे परिवारों के पुनर्वास की योजना बनानी चाहिए थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटने के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं और कड़ाके की ठंड में उनके सामने रहने, खाने और पीने तक की समस्या खड़ी हो गई है। इतना ही नहीं, कई जगहों पर बिजली भी काट दी गई है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे पीड़ित परिवारों से मिलने और उनकी मदद करने के लिए मौके पर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस द्वारा उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। इससे आक्रोश और बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों ने इसे जनता और मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले में वे अब न्यायालय की शरण भी लेंगे।
प्रद्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान मौके पर सीओ सुमित पांडे और कोतवाल सुशील कुमार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पुरुषों और महिलाओं सहित 13 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया। पुलिस की बस में बैठते ही सभी गिरफ्तार लोगों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
Ramnagar Encroachment Protest – FAQs (
1. रामनगर में विरोध किस वजह से हुआ?
वन विभाग द्वारा पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
2. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को क्यों हिरासत में लिया?
अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को भीड़ बढ़ने और तनावपूर्ण स्थिति के चलते पुलिस ने हिरासत में लिया।
3. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया।
4. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को कार्रवाई से पहले वहां रहने वाले परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
5. अतिक्रमण हटने के बाद प्रभावित परिवारों की क्या स्थिति है?
कई परिवारों के बेघर होने और ठंड में रहने, खाने, पीने जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया गया है। कुछ क्षेत्रों में बिजली काटे जाने की बात भी सामने आई है।
6. प्रदर्शनकारियों को किस बात से सबसे ज्यादा नाराज़गी है?
पुलिस द्वारा उन्हें प्रभावित परिवारों से मिलने से रोकने पर प्रदर्शनकारियों का आक्रोश बढ़ गया।
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नेत्र दान (Eye Donation) कर हमेशा याद रहेगा जगदीश, पीआरडी जवान का समाज को सन्देश
पिथौरागढ़: नेत्र दान ( Eye Donation ) मरने के बाद भी आंखों का दान करने से किसी की अंधेरी जिंदगी को रोशन हो सकती है। ऐसा ही एक मामला पिथौरागढ़ के बेरीनाग से सामने आया है। बेरीनाग नगर मुख्यालय में रहने वाले 46 वर्षीय पीआरडी जवान जगदीश सिंह डोबाल ने अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में नेत्र दान का फैसला लिया।
कौन थे जगदीश सिंह डोभाल
जगदीश सिंह डोभाल पिथौरागढ़ के बेरीनाग नगर मुख्यालय में रहता था। जो प्रान्तीय रक्षक दल का जवान था। जगदीश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेरीनाग में एम्बुलेंस चालक के पद पर तैनात था। जगदीश स्वास्थ्य कर्मी होने के साथ ही बेहतरीन रंगकर्मी और पशु प्रेमी था। जगदीश ने बेरीनाग में आयोजित रामलीला में 5 वर्षों तक सुग्रीव का अभिनय किया। मृतक जगदीश के साथी बताते हैं कि जगदीश सेवा के दौरान से ही अपने शरीर के अंग दान करने कि बातें करता था।
लगातार स्वास्थ्य खराब होने के चलते लिया फैसला
बेरीनाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात 46 वर्षीय जगदीश का अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर परिजन उसे देहरादून के एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया, जिसे देखते हुए जगदीश ने अपनी आंखों को दान ( Eye Donation ) करने का निर्णय लिया। लेकिन जगदीश के इस फैसले से परिजन भी हैरान हो गए। जगदीश के नेत्र दान करने के फैसले की अनेक संगठनों ने सराहना की।
क्या होता है नेत्रदान ( Eye Donation )
नेत्रदान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी आँखों से कॉर्निया निकालकर आई बैंक में संरक्षित किया जाता है। और बाद में जिनकी दृष्टि कॉर्निया खराब हो जाती है सर्जरी के माधयम से उनकी कॉर्निया को बदल दिया जाता है। एक व्यक्ति के नेत्र दान करने से दो व्यक्तियों की आँखों को रोशनी मिल सकती है।

कैसे पूरी होती है प्रक्रिया
- मृत्यु के 6 घंटे के अंदर आंखें निकाली जाती हैं
- मृत्यु के बाद परिजन आई बैंक को सूचना देते हैं।
- आई बैंक की टीम घर/अस्पताल पहुँचती है।
- मृतक की आँखों से केवल कॉर्निया निकाला जाता है (15–20 मिनट)।
- कॉर्निया आई बैंक में परीक्षण व संरक्षण किया जाता है।
- उपयुक्त मरीज को कॉर्निया प्रतिरोपित किया जाता है।
- एक दाता से दो लोगों को रोशनी मिलती है।
FAQs on Eye Donation (Netra Dan)
- 1. नेत्रदान (Eye Donation) क्या है?
- नेत्रदान वह प्रक्रिया है जिसमें मृत्यु के बाद दाता के कॉर्निया को निकालकर किसी अंधे व्यक्ति को दृष्टि देने के लिए प्रतिरोपित किया जाता है।
- 2. नेत्रदान कब और कैसे किया जाता है?
- मृत्यु के 6–8 घंटे के भीतर आई बैंक को कॉल किया जाता है, और उनकी टीम घर/अस्पताल आकर कॉर्निया सुरक्षित रूप से निकालती है।
- 3. क्या नेत्रदान से शरीर के रूप में बदलाव आता है?
- नहीं, केवल कॉर्निया निकाला जाता है, जिससे चेहरे पर कोई बदलाव नहीं होता।
- 4. कौन नेत्रदान कर सकता है?
- लगभग हर आयु और अधिकांश स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोग नेत्रदान कर सकते हैं।
- 5. नेत्रदान से कितने लोगों को लाभ मिलता है?
- एक दाता के कॉर्निया से दो लोगों की दृष्टि वापस लाई जा सकती है।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की राज्यपाल से मुलाकात, राजभवन का नाम लोक भवन करने पर दी बधाई

देहरादून: कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज लोक भवन जाकर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान मंत्री जोशी ने राज्यपाल को राजभवन का नाम लोक भवन होने पर बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया।
राजभवन का नाम लोक भवन करना महत्वपूर्ण कदम : गणेश जोशी
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन किया जाना जनता की भावना और स्थानीय संस्कृति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राज्यपाल का भी इस निर्णय को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद किया।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) की अध्यक्ष साधना शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से कैंप कार्यालय में भेंट की थी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस संबंध में एक पत्र मंत्री जोशी के माध्यम से भेजकर राजपथ की तर्ज पर ब्रिटिशकालीन ‘‘राजभवन’’ नाम को बदलने का आग्रह किया था।
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