Dehradun
धामी सरकार ने डेढ़ साल में 2021 युवाओं को फॉरेस्ट गार्ड में दी नौकरी, देश के किसी भी राज्य के पास नही एक साल में भर्ती देने का यह रिकॉर्ड।

धामी सरकार ने डेढ़ साल में 2021 युवाओं को दी फॉरेस्ट गार्ड की रिकॉर्ड नौकरी।
देश के किसी भी राज्य के नाम नहीं डेढ़ साल में भर्ती का यह रिकॉर्ड।
धामी सरकार के ढ़ाई साल के कार्यकाल में वन विभाग में 2528 पदों पर भर्ती।
राज्य में फारेस्ट गार्ड, दरोगा, रेंजर भर्ती से वनों की सुरक्षा का बढ़ेगा घेरा।
देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने वन विभाग में डेढ़ साल में 2021 फॉरेस्ट गार्ड (वन आरक्षी) की भर्ती कर देश में रिकॉर्ड बनाया है। अभी तक संख्या और समय पर भर्ती कराने का यह रिकॉर्ड किसी भी राज्य के पास नहीं है। इसके अलावा ढाई साल के कार्यकाल में अकेले वन विभाग में 2528 पदों पर युवाओं को नौकरी देकर सरकार ने पारदर्शिता का वायदा निभाया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो कहते हैं, उस पर अमल भी पूरा करते हैं। खासकर युवाओं के भविष्य को लेकर धामी सरकार बेहद संजीदा है। इसका पुख्ता प्रमाण वन महकमे में युवाओं को समय पर मिली बंपर नौकरियां हैं। चूंकि उत्तरखंड देश में सबसे ज्यादा 71 फीसद वन भूमि क्षेत्र से आच्छादित है, ऐसे में यहां आम से खास का नाता वन क्षेत्रों से पड़ता है। इसके लिए फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में फॉरेस्ट गार्ड की अहम भूमिका होती है। लेकिन राज्य में कुछ सालों से फॉरेस्ट गार्ड की कमी महसूस हो रही थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कमान संभाली तो वन विभाग में 340 वन दरोगा, 96 कनिष्ठ सहायकों के अलावा 2021 पदों पर अलग-अलग समय पर फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती शुरू की। संख्या के हिसाब से भर्ती समय पर कराने की चुनौती थी। किंतु सरकार ने तय शेड्यूल पर रिकॉर्ड डेढ़ साल के भीतर फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती कर युवाओं के सपनों को साकार किया है। यह रिकॉर्ड न केवल राज्य के 23 सालों में हुई भर्ती बल्कि देश के दूसरे राज्यों में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती करने में सबसे अव्वल रिकॉर्ड है। इसके पीछे सरकार की पारदर्शी नीति और युवाओं के हित में लिए गए निर्णय शामिल हैं। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया का कहना है कि फॉरेस्ट गार्ड में पहले 1129 और उसके बाद 892 पदों पर धामी सरकार में कुल 2021 पदों पर डेढ़ साल के भीतर भर्ती हुई है। यह संख्या वन विभाग में हुई भर्ती में अब तक सबसे ज्यादा है।
पहले 15 हजार से ज्यादा को नौकरी।
राज्य में धामी सरकार इससे पहले सिर्फ एक साल में यूकेपीएससी से 6635 अफसरों तथा समूह ग के पदों पर 7644 युवाओं को पुलिस दूर संचार, रैंकर्स, आबकारी सिपाही, पशुपालन, रेशम, शहरी विकास, वन विभाग, शिक्षा विभाग में एलटी, कृषि विभाग,पेयजल निगम, विभिन्न विभागों में सहायक लेखाकार, लेखाकार, अनुदेशक, कार्यशाला अनुदेशक, वाहन चालक, सचिवालय रक्षक, मत्स्य विभाग आदि में नौकरी देकर रिकॉर्ड बना चुकी है।
हमारी सरकार युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर काबलियत के अनुसार रोजगार दे रही है। युवाओं को समय पर नौकरी मिले, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। आयोग को तय शेड्यूल के अनुसार भर्ती कराने से लेकर परिणाम जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक हुई भर्ती परीक्षाएं और परिणाम पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से जारी हो रहे हैं।
Accident
मसूरी-कीमाड़ी मार्ग पर फिर हादसा, बाइक फिसलने से युवक की मौत

Mussoorie Accident : मसूरी-कीमाड़ी मार्ग पर एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। रविवार को हाथीपांव से करीब तीन किलोमीटर आगे झरने के पास एक बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई। हादसे में बाइक सवार युवक की मौत हो गई।
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मसूरी-कीमाड़ी मार्ग पर बाइक फिसलने से युवक की मौत
पुलिस के अनुसार दुर्घटना की सूचना डायल 112 के माध्यम से मिली, जिसके बाद मसूरी कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल युवक को 108 एंबुलेंस से सिविल अस्पताल मसूरी ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान अनूप बंगवाल (32 वर्ष) निवासी कृष्णा विहार, थानो रोड, रायपुर (देहरादून) के रूप में हुई है। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बरसात में और खतरनाक हो जाता है मार्ग
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथीपांव से कीमाड़ी तक का मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। बारिश के मौसम में कई स्थानों पर झरनों का पानी सीधे सड़क पर बहने लगता है, जिससे सड़क बेहद फिसलन भरी हो जाती है। इसके अलावा गड्ढे, टूटी हुई सड़क और कमजोर किनारे वाहन चालकों के लिए बड़ा जोखिम पैदा करते हैं।
खस्ताहाल मार्ग के स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई छोटे-बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। लोगों ने प्रशासन से जल्द सड़क सुधार, जल निकासी की व्यवस्था और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है।
मसूरी-कीमाड़ी मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रहे हादसों ने एक बार फिर मसूरी-कीमाड़ी मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सड़क की स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं।
Dehradun
उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर फिर मंडराया खतरा, चीन के वायरस ने किया बड़ा हमला

Uttarakhand News : उत्तराखंड के सरकारी डिजिटल सिस्टम पर साइबर खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हाल ही में राज्य के डेटा सेंटर में एक संदिग्ध ‘बहरूपिया वायरस’ (Polymorphic Malware) मिलने के बाद साइबर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। शुरुआती आशंका है कि इस हमले के पीछे विदेशी हैकर गिरोह, विशेष रूप से चीन से जुड़े किसी साइबर समूह का हाथ हो सकता है।
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उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर फिर मंडराया खतरा
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह एक ऐसा मैलवेयर है जो सिस्टम में प्रवेश करने के बाद अपना स्वरूप बदल लेता है। यही वजह है कि पारंपरिक एंटीवायरस या सुरक्षा प्रणालियों के लिए इसे पहचानना आसान नहीं होता। कई बार यह सिस्टम की सामान्य फाइल जैसा दिखाई देता है, लेकिन सक्रिय होते ही यह संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने या अन्य नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है।
पिछले साल भी हुआ था बड़ा साइबर हमला
साल 2024 में उत्तराखंड के डेटा सेंटर पर माकोप रैनसमवेयर का हमला हुआ था। उस साइबर हमले में कई सिस्टम लॉक हो गए थे और कथित तौर पर डेटा को अनलॉक करने के बदले फिरौती की मांग की गई थी। उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया था, लेकिन अब नए प्रकार के वायरस की मौजूदगी ने फिर से चिंता बढ़ा दी है।

डेटा चोरी की आशंका, लेकिन पुष्टि नहीं
प्रारंभिक जांच में इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि साइबर अपराधियों ने कुछ डेटा की कॉपी करने की कोशिश की हो। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही किसी प्रकार की फिरौती या अन्य मांग सामने आई है।
मामले की जांच में जुटे
सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े अधिकारी फिलहाल पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञ सिस्टम लॉग, नेटवर्क गतिविधियों और संभावित मैलवेयर की जांच कर रहे हैं ताकि ये स्पष्ट हो सके कि वायरस ने कितना प्रभाव डाला और किसी प्रकार का डेटा प्रभावित हुआ या नहीं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से नागरिकों को घबराने की बजाय आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करने और साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Dehradun
मसूरी में कब्रगाह ध्वस्त होने पर बवाल, मुस्लिम समुदाय का प्रदर्शन, NH हुआ जाम

Mussoorie News : मसूरी में प्रशासन की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद विवाद गहरा गया है। कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया, जबकि प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी बताया।
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मसूरी में कब्रगाह ध्वस्त होने पर बवाल
मसूरी में कब्रगाह से जुड़े विवाद को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए उस पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि जिस भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, वह नगर पालिका परिषद की संपत्ति है। अधिकारियों के अनुसार, सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद ही संबंधित निर्माण हटाया गया।
समुदाय ने जताई आपत्ति
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर कार्रवाई की गई, वो कोई हालिया निर्माण नहीं था। उनके अनुसार ये स्थल लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए उपयोग में रहा है तथा यहां उनके पूर्वजों की कब्रें मौजूद हैं। समुदाय का दावा है कि इस स्थान का इतिहास लगभग 200 साल पुराना है।

टीनशेड को लेकर भी उठे सवाल
समुदाय के लोगों ने प्रशासन के उस दावे पर भी आपत्ति जताई, जिसमें संरचना को मस्जिद बताया गया। उनका कहना है कि वहां नियमित नमाज नहीं होती थी, बल्कि यह एक टीनशेड था, जिसका उपयोग अंतिम संस्कार के बाद जनाजे की अंतिम नमाज अदा करने के लिए किया जाता था।
संवेदनशीलता बरतने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले उनकी भावनाओं और पक्ष को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना था कि अगर भूमि सरकारी थी तो इतने वर्षों तक इस संबंध में कोई कार्रवाई या विवाद सामने क्यों नहीं आया। उन्होंने धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन से संवाद और संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग की।
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