Pithauragarh
डीएम ने नन्हीं परी इंजीनियरिंग कॉलेज का किया स्थलीय, कार्य व नुकसान की मांगी रिपोर्ट।

पिथौरागढ़ – पिथौरागढ़ मुख्यालय के मड़धूरा में अधूरे पड़े नन्हीं परी इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण कार्य की अनियमितता के संबंध में शासन द्वारा जिलाधिकारी रीना जौशी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की गई।
जांच कमेटी की अध्यक्ष जिलाधिकारी रीना जोशी द्वारा कमेटी के अन्य सदस्यों के साथ निर्माणाधीन नन्ही परी इंजीनियरिंग कॉलेज मड़ का स्थलीय निरीक्षण किया।
इस दौरान जांच कमेटी के सदस्यों द्वारा भवन की वर्तमान स्थिति आदि का जायजा लिया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कमेटी के सदस्य लोनिवि के अधिशासी अभियंता को दो दिन के भीतर भवन में वर्तमान तक हुए कुल कार्य व क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं, साथ ही सदस्य भू वैज्ञानिक से भी भवन क्षेत्र का वर्तमान स्थिति के अनुसार भू सर्वेक्षण कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि निरीक्षण के साथ ही सम्पूर्ण जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा सके।
निरीक्षण के दौरान भवन के पिछले हिस्से में पहाड़ी से हो रहे भू-कटाव के कारण भवन के भू तल के सभी कक्ष्यों में मलवा भरा पाया गया। इस भाग में किसी भी प्रकार की सुरक्षा हेतु रिटेनिंग / सुरक्षात्मक दीवारों का निर्माण कार्य नहीं किया गया है, जिस कारण भवन के पिछले भाग में वर्षा के कारण मृदा संरक्षण की प्रकिया तीव्रता से गतिमान है। ब्लॉक भवन के ग्राउंड फ्लोर में मृदा की परत व मृदा का जमाव पाया गया है। ग्राउंड फ्लोर के सभी कमरे क्षतिग्रस्त है।
जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया गया कि संस्थान के भवन निर्माण में हुई क्षति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाए।
जिलाधिकारी द्वारा नन्ही परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रभारी निदेशक डॉ अजीत सिंह को निर्देश दिए की भवन में रखी गई सारी मशीनों को किसी अन्य स्थान पर रखा जाए ताकि वो सुरक्षित रहें।
Bageshwar
उत्तराखंड में बारिश का कहर: बागेश्वर में दो महिलाओं की मौत, कई गांवों में भारी नुकसान

बागेश्वर/पिथौरागढ़ : प्रदेश में मौसम लगातार करवट बदल रहा है और कई जिलों में भारी बारिश ने तबाही मचाई है। बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के कई गांवों में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। ग्राम पंचायत बैसानी, पौसारी और सुमटी से भारी नुकसान की सूचना मिल रही है।
बारिश ने ली दो महिलाओं की जान, तीन अब भी लापता
पौसारी गांव में एक मकान मलबे में दब गया, जिसमें से दो महिलाओं के शव बसंती देवी और बछुली देवी — बाहर निकाले गए हैं, जबकि तीन लोग — रमेश चंद्र जोशी, गिरीश चंद्र और पूरन चंद्र — अब भी लापता हैं। क्षेत्र में बीएसएनएल की संचार सेवा ठप होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में समन्वय स्थापित करने में प्रशासन को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
राहत बचाव कार्य जारी, विधायक और डीएम मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंच गईं, और विधायक सुरेश गढ़िया एवं जिलाधिकारी आशीष भटगाईं ने राहत कार्यों का जायजा लिया। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और स्थानीय प्रशासन मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटा है।
सड़कें और पुल टूटे, पम्पिंग योजना बह गई
हरसीला-जगथाना मार्ग पर कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
मालूखेत के पास सड़क का 20 मीटर से अधिक हिस्सा बह गया है।
चचई गांव की पम्पिंग योजना बारिश में बह चुकी है।
सुमटी गांव में जमीन धंसने और बैसानी में मकान पूरी तरह से ढहने की खबर है।
कई पैदल पुलों को भी नुकसान पहुंचा है।
चार सेवा ठप, राहत में बाधा
सबसे बड़ी चुनौती संचार सुविधा का ठप होना है, जिससे सूचना आदान-प्रदान और राहत सामग्री के समन्वय में कठिनाई हो रही है।
पिथौरागढ़ और चंपावत में भी भारी नुकसान
पिथौरागढ़: 25 से अधिक सड़कें बंद, काली नदी खतरे के निशान से ऊपर
पिथौरागढ़ जिले में भी मूसलाधार बारिश का असर दिख रहा है। 25 से अधिक सड़कों पर मलबा आने से आवागमन पूरी तरह से ठप है। धारचूला में काली नदी चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही है। डीएम ने विद्यालयों में अवकाश घोषित करते हुए लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है।
चंपावत: ऑरेंज अलर्ट के बीच स्कूलों में छुट्टी, सड़कों पर मलबा
चंपावत जिले में भी 12 घंटे से लगातार बारिश हो रही है। कई सड़कों पर मलबा आ गया है। सीईओ मेहरबान सिंह बिष्ट ने सभी विद्यालयों में अवकाश के आदेश जारी कर दिए हैं।
प्रशासन अलर्ट, SDRF और आपदा टीमें सक्रिय
राज्य भर में आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर डटी हुई हैं। सरकार ने लोगों से अफवाहों से बचने और सतर्क रहने की अपील की है।
Pithauragarh
CM धामी के पिथौरागढ़ दौरे से पहले प्रशासन अलर्ट, मेला परिसर और आपदा स्थलों का DM-SP ने लिया जायजा

पिथौरागढ़: मुख्यमंत्री उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी के 28 अगस्त 2025 को प्रस्तावित पिथौरागढ़ भ्रमण (मोस्टमानू मन्दिर प्रतिभाग) के दृष्टिगत जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने कलेक्ट्रेट सभागार में विभागीय अधिकारियों की बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
तत्पश्चात जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने देवतचौड़ा गांव का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। हाल ही में लगातार वर्षा के कारण पहाड़ियों से चट्टानें खिसकने के खतरे के चलते प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। अस्थायी रूप से प्रेशियस अकादमी भवन एवं बैंकेट हाल में ठहराव की व्यवस्था की गई है, जहां उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया।
इसके उपरान्त जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने मोस्टमानू मेला परिसर, बनाए गए मंच तथा अल्प विश्राम कक्षों का निरीक्षण कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर उन्होंने मेला समिति के अध्यक्ष व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बिरेंद्र बोहरा, प्रसिद्ध सिने अभिनेता हेमंत पाण्डेय एवं मेला समिति के पदाधिकारियों से भेंट कर तैयारियों की जानकारी ली और प्रशासन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
साथ ही छानापाण्डेय के तमखानी मैदान में निर्मित हो रहे हेलीपैड का भी स्थलीय निरीक्षण कर लोनिवि के अभियंता एवं उपजिलाधिकारी सदर मंजीत सिंह को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया।
Pithauragarh
रात के सन्नाटे में टूटी पहाड़ी, देवत गांव के लोग घर छोड़ भागे

पिथौरागढ़: जिले के नैनी सैनी हवाई अड्डे के पास स्थित देवत गांव में रविवार रात लगभग 9 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई जब पास की पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने लगे। पत्थरों की आवाज़ इतनी भयावह थी कि ग्रामीण घबराकर अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। रात को ग्रामीणों को बारात घर में सुरक्षित स्थान पर ठहराया गया।
यह घटना उस दुखद हादसे के ठीक एक सप्ताह बाद हुई है, जिसमें देवत पुरचौड़ा गांव के रघुवर प्रसाद और नरेश कुमार के घर के अंदर भारी-भरकम पत्थर गिर गया था। उस हादसे में 12 वर्षीय बालक की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य किशोर सनी घायल हो गया था।
रविवार रात फिर से पत्थर गिरने की घटना ने ग्रामीणों की पुरानी दहशत को और गहरा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यह इलाका पहले भी ऐसे हादसों का गवाह रहा है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
स्थानीय निवासियों ने कहा कि हम हर दिन डर के साए में जी रहे हैं। कभी भी कोई बड़ा पत्थर जान ले सकता है। प्रशासन को चाहिए कि इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर उचित कदम उठाए।”
फिलहाल, प्रशासन द्वारा क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि सर्वे कर पहाड़ी से गिरते पत्थरों को रोकने के लिए मजबूत दीवार या सुरक्षा उपाय जल्द से जल्द किए जाएं।
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