Dehradun
केदारनाथ यात्रा: सोनप्रयाग से पैदल यात्रा शुरू, बाबा के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे तीर्थयात्री

रुद्रप्रयाग – केदारनाथ के लिए सोनप्रयाग से पैदल यात्रा शुरू हो गई है। बारिश बंद होने के बाद सुबह दस बजे से एनडीआरफ के जवानों की मौजूदगी में सोनप्रयाग से यात्रियों को भेजा गया। वहीं रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक रातभर हल्की बारिश होती रही।
दूसरे चरण की चारधाम यात्रा के लिए 17 दिन में 2.70 लाख तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण कराया है। एक दिन में औसतन 20 हजार यात्री बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा के लिए पंजीकरण करा रहे हैं।
ऑनलाइन के साथ ही हरिद्वार व ऋषिकेश में ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा है। मानसून के दौरान थमी चारधाम यात्रा फिर से रफ्तार पकड़ने लगी है। सितंबर, अक्तूबर व नवंबर माह में चारधामों की यात्रा करने के लिए पंजीकरण की संख्या बढ़ गई है। एक से 17 सितंबर तक 2.70 लाख से अधिक यात्रियों ने पंजीकरण कराया।
यात्रा शुरू होने से अब तक पंजीकरण का आंकड़ा 59.30 लाख पहुंच गया है। इसमें 33.50 लाख से ज्यादा चारधामों के दर्शन कर चुके हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष चारधाम यात्रा के लिए 72 लाख यात्रियों ने पंजीकरण कराया था।
इसमें 56 लाख यात्रियों ने दर्शन कर नया रिकॉर्ड बनाया था। इस बार भी पंजीकरण की संख्या 80 लाख पहुंचने का अनुमान है। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि चारधाम यात्रा में दर्शन करने वाले यात्रियों को फिर से नया रिकॉर्ड बनेगा।
इसके अलावा मौसम में सुधार होते ही केदारघाटी के आसमान में हेलिकॉप्टर की उड़ान शुरू हो गई है। बीते दो दिन में हेलिकॉप्टर से 2412 यात्री केदारनाथ पहुंचे। इस दौरान 9 हेलिकॉप्टर की कुल 439 शटल हुईं।
हेलिकॉप्टर से यात्रा को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह है। सभी हेली कंपनियों में एडवांस ऑनलाइन बुकिंग के साथ ऑफलाइन बुकिंग भी हो रही है। इस वर्ष 10 मई से केदारनाथ यात्रा शुरू हुई थी। शुरूआती 40 दिन की यात्रा में हजारों यात्रियों ने हेली सेवा का लाभ उठाया। अब फिर मौसम सामान्य होते ही यात्रा धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है।
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कौन हैं IPS प्रमेंद्र डोभाल ?, जिन्हें सौंपी गई राजधानी देहरादून की कमान, जानें यहां

IPS Pramendra Dobhal : असफलता से IPS के शिखर तक, देहरादून के नए कप्तान प्रमेंद्र डोभाल की अनकही कहानी
IPS Pramendra Dobhal : राजधानी देहरादून में 14 दिनों में 4 हत्याओं की घटनाएं सामने आने के बाद से ही पुलिस महकमे में बड़े बदलाव की चर्चाएं हो रही थी। 15वें दिन सुबह-सुबह हुई पांचवी हत्या ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया। शाम होते-होते एक आदेश जारी हुआ और चर्चाओं पर विराम लग गया। ये आदेश पुलिस महकमे में बड़े बदलाव का था। जिसमें राजधानी देहरादून के एसएसपी अजय सिंह को हटाते हुए IPS प्रमेंद्र डोभाल को दून की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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कौन हैं IPS प्रमेंद्र डोभाल ?
IPS प्रमेंद्र डोभाल को देहरादून का नया एसएसपी बनाया गया है। ये सिर्फ खबर नहीं पदस्थापना की खबर नहीं बल्कि उस शख्सियत के संघर्ष की गाथा है जिसने ये साबित कर दिया कि ‘मार्कशीट के नंबर’ भविष्य का फैसला नहीं कर सकते।
प्रमेंद्र डोभाल का जन्म उत्तराखंड में एक साधारण परिवार में हुआ और उनका बचपन अनुशासन और संघर्ष के बीच बीता। पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया। ये वही अधिकारी हैं जो दसवीं में फेल हो गए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज वो आईपीएस अधिकारी हैं।
असफलता से IPS के शिखर तक
आईपीएस प्रमेंद्र डोभाल की कहानी में सबसे प्रेरणादायक मोड़ उनकी 10वीं कक्षा में आया जब वो फेल हो गए। आज के दौर में जहां छात्र एक-दो अंक कम आने पर अवसाद में चले जाते हैं, वहीं उन्होंने हाईस्कूल में फेल होने के बाद भी हार नहीं मानी।

एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने जीवन का ये किस्सा साझा करते हुए बताया था कि उस समय समाज और आसपास के लोगों का नजरिया बदल गया था। लेकिन उस विफलता ने उनके भीतर एक ऐसी आग जला दी जिसने उन्हें ‘साधारण’ से ‘असाधारण’ बना दिया। उन्होंने हार मानने के बजाय दोगुनी मेहनत से पढ़ाई की और अपनी शिक्षा पूरी की। ये उनके जीवन का वो “EEAT” फैक्टर है जो उन्हें युवाओं के लिए एक विश्वसनीय मार्गदर्शक (Expert) बनाता है।
खाकी का सफर : PPS से IPS तक का गौरवमयी मार्ग
प्रमेंद्र डोभाल का पुलिस सेवा में करियर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला। एक PPS अधिकारी के रूप में उन्होंने चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जैसे संवेदनशील जिलों में काम किया।

व्यक्तिगत जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा
प्रमेंद्र डोभाल केवल वर्दी तक सीमित नहीं हैं। वो एक अच्छे पाठक और खेल प्रेमी भी हैं। अक्सर वो स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों से संवाद करते हैं। उनका एक ही संदेश होता है:
“अगर मैं 10वीं में फेल होने के बाद यहाँ तक पहुँच सकता हूँ, तो दुनिया का कोई भी छात्र कुछ भी हासिल कर सकता है।”
उनकी सादगी का आलम यह है कि वह अक्सर बिना तामझाम के औचक निरीक्षण पर निकल जाते हैं ताकि जमीनी हकीकत जान सकें।
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उत्तराखंड पुलिस में बड़ा बदलाव, 8 जिलों के बदले गए कप्तान..यहाँ देखें ट्रांसफर लिस्ट..

उत्तराखंड की कानून व्यवस्था में हुआ बड़ा फेरबदल, 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले
UTTARAKHAND POLICE TRANSFER: उत्तराखंड पुलिस में बड़ा फेरबदल हुआ है. प्रदेश में 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए हैं. शासन की तरफ से जारी तबादला सूची में आठ जिलों के पुलिस कप्तान बदले गए हैं.
मुख्य बिंदु
उत्तराखंड पुलिस में अधिकारियों के बंपर तबादले
उत्तराखंड शासन ने पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेर बदल किया है. जारी शासनादेश के मुताबिक 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए हैं, जिनमें आठ जिलों के पुलिस कप्तान भी बदले गए हैं. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, ये बदलाव प्रशासनिक संतुलन, कार्यकुशलता और आगामी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
स्थानांतरित अधिकारियों को शीघ्र नए तैनाती के निर्देश
सभी स्थानांतरित अधिकारियों को शीघ्र नए तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं. इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद राज्य की पुलिस व्यवस्था में नई कार्यशैली और सक्रियता देखने की उम्मीद जताई जा रही है. पिछले कुछ समय से प्रदेश की चरमराई कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे थे.
यहाँ देखें तबादला सूची

Dehradun
मानवता की मिसाल: CM राहत कोष में रिटायर्ड ब्रिगेडियर का ₹10 लाख योगदान

दैवीय आपदा प्रभावित बच्चों के लिए रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मानवीय पहल
देहरादून(DEHRADUN): समाज के प्रति दायित्व और मानवीय संवेदनाओं को आज भी जीवित रखने वाले लोग हमारे बीच मौजूद हैं। इसी भावना का परिचय देते हुए सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर हरीश चंद्र जोशी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 10 लाख रू. की उदार राशि का योगदान दिया है। ये सहयोग आपदा पीड़ितों और समाज के वंचित वर्गों, विशेष रूप से बच्चों के कल्याण के उद्देश्य से किया गया है।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर सीएम रिलीफ फण्ड में दिया 10 लाख रूपए
देहरादून के वसंत विहार निवासी एवं मूल रूप से जहरिखाल, पौड़ी गढ़वाल से ताल्लुक रखने वाले ब्रिगेडियर हरीश चंद्र जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट कर ये चेक सौंपा। उन्होंने बताया कि ये राशि पूर्व में आई दैवीय आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आपदा से प्रभावित गरीब और वंचित बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका को संबल देने के लिए प्रदान की गई है।

रिटायर्ड ब्रिगेडियर की सराहनीय पहल: सीएम धामी
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ब्रिगेडियर जोशी की सराहना करते हुए कहा कि एक अनुभवी सैन्य अधिकारी द्वारा किया गया यह योगदान राज्य और समाज के समग्र विकास के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल न केवल जरूरतमंदों के लिए सहारा बनती है, बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी सेवा और सहयोग के लिए प्रेरित करती है।
ब्रिगेडियर जोशी का यह कदम साबित करता है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्र और समाज के प्रति सेवा का भाव समाप्त नहीं होता, बल्कि और अधिक सशक्त रूप में सामने आता है।
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