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जंगली जानवरों का आतंक, यहां तीन दिन बंद रहेंगे स्कूल, आदेश हुए जारी

जंगली जानवरों के आतंक के कारण नैनीताल के तीन विकासखंडों में स्कूल रहेंगे बंद
Nainital News : उत्तराखंड में इन दिनों मानव वन्य जीव हमलों से पूरे पहाड़ से लेकर मैदान तक लोगों में दहशत का माहौल है। नैनीताल जिले में तो लोगों का शाम ढलते ही बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। जिस कारण स्कूलों में छुट्टी के आदेश जारी किए गए हैं।
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जंगली जानवरों के आतंक के कारण तीन दिन बंद रहेंगे स्कूल
जंगली जानवरों के आतंक के कारण नैनीताल जिले में लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं और बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर रहे हैं। जिसे देखते हुए जिलाधिकारी नैनातील ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ विकासखंडों में स्कूलों की छुट्टी के निर्देश दिए हैं।
बाघ और गुलदार के हमले से लोगों में दहशत
बता दें कि नैनीताल जिले में आए दिन बाघ और गुलदार के हमले से लोगों में दहशत का माहौल है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने में भी कतरा रहे हैं। जिसे देखते हुए नैनीताल जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिले के तीन विकासखंडों में आंगनबाड़ी समेत 12 वीं कक्षा तक के सभी सरकारी और गैरसरकारी शिक्षण संस्थानों में अवकाश कि घोषणा कि है।
नैनीताल जिले के इन विकासखंडों में स्कूल रहेंगे बंद
जिलाधिकारी के निर्देशों के मुताबिक नैनीताल जिले के धारी, रामगढ़ और ओखलकांडा ब्लॉक में 19 जनवरी से लेकर 21 जनवरी तक सभी सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में अवकाश रहेगा।
आदेश में बताया गया कि पिछले कुछ दिनों में इन इलाकों में जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ी है। जिससे बच्चों के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों तक आने-जाने के दौरान किसी भी प्रकार की अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
बच्चों की जान-माल की सुरक्षा सर्वोपरि – जिलाधिकारी
जिलाधिकारी नैनातील ललित मोहन रयाल का कहना है कि बच्चों की जान-माल की सुरक्षा सर्वोपरि है। मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं न केवल ग्रामीणों के लिए बल्कि, स्कूली बच्चों के लिए भी खतरा बन सकती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए एहतियातन ये फैसला लिया गया है। ताकि, किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोका जा सके।

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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 जारी, 4 साल में डेढ़ गुना बढ़ी GSDP, कई सेक्टर में रिकॉर्ड प्रगति

Uttarakhand Economic Survey : आगामी बजट की तैयारी के बीच उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष आर्थिक सर्वेक्षण को अधिक पेशेवर और व्यापक बनाने के लिए नई पहल की है।
नियोजन विभाग द्वारा हर साल कराए जाने वाले आर्थिक सर्वेक्षण को इस बार बाहरी विशेषज्ञ संस्था के सहयोग से तैयार किया गया है, ताकि राज्य की आर्थिक प्रगति का अधिक सटीक आकलन किया जा सके और बजट निर्माण के लिए स्पष्ट दिशा मिल सके।
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उत्तराखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 जारी
राज्य की प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने प्रेस वार्ता में बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण किसी भी वित्तीय वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का समग्र आकलन प्रस्तुत करता है। इसके आधार पर सरकार यह तय करती है कि आने वाले बजट में किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना है और विकास की दिशा क्या होगी।
उन्होंने कहा कि पिछले साल से आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख संकेतकों को साझा करने के लिए बजट से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की परंपरा शुरू की गई है, जैसा कि केंद्र सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा किया जाता है।
कई सेक्टर में दर्ज की गई रिकॉर्ड प्रगति
डॉ. सुंदरम ने बताया कि पहले आर्थिक सर्वेक्षण पूरी तरह विभागीय स्तर पर ही तैयार किया जाता था। जिसमें अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग की टीम काम करती थी। लेकिन इस बार गुणवत्ता और पेशेवर दृष्टिकोण को मजबूत करने के उद्देश्य से National Council of Applied Economic Research को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया। यह संस्था भारत सरकार से संबद्ध एक प्रमुख आर्थिक शोध संगठन है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण एक संयुक्त प्रयास के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें एनसीएईआर और राज्य के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की टीम ने मिलकर काम किया है। सर्वेक्षण में राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास दर, विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों और चुनौतियों से जुड़े प्रमुख आंकड़े शामिल किए गए हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण की बजट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका
प्रमुख सचिव ने बताया कि सर्वेक्षण की प्रमुख निष्कर्षों और आंकड़ों को सार्वजनिक किया जा रहा है। जिससे सरकार की नीतियों और बजट की प्राथमिकताओं को समझने में मदद मिलेगी। ये दस्तावेज वित्त विभाग के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है और आने वाले बजट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चार साल में डेढ़ गुना बढ़ी GSDP
- 1. उत्तराखंड में 2022 के मुकाबले जीएसडीपी बढ़कर 2.54 लाख करोड़ से 3.81 लाख करोड़ से अधिक हो गई है।
- 2. राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1.94 लाख रुपये से बढ़कर करीब 2.73 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
- 3.उत्तराखंड में गरीबी दर 9.7% से घटकर 6.92% रह गई है।
- 4. राज्य में MSME इकाइयों की संख्या 59 हजार से बढ़कर 79 हजार से अधिक हो गई है।
- 5. MSME सेक्टर के विस्तार से करीब साढ़े चार लाख लोगों को रोजगार मिला है।
- 6. उत्तराखंड में बड़े उद्योगों की संख्या 107 से बढ़कर 128 हो गई है।
- 7. राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा है, 2022 के 702 स्टार्टअप अब बढ़कर करीब 1750 हो गए हैं।
- 8. पिछले चार वर्षों में उत्तराखंड में लगभग 885 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया गया है।
- 9. राज्य में सोलर ऊर्जा उत्पादन 439 मेगावाट से बढ़कर 1027 मेगावाट तक पहुंच गया है।
- 10. उत्तराखंड में चावल, दूध और मछली उत्पादन में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही राज्य की जीएसडीपी में सबसे बड़ा योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 26.02% है।
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2027 में उत्तराखंड में हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुटी भाजपा, कांग्रेस को घरने के लिए इस रणनीति पर कर रही काम

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को अभी भले ही समय है लेकिन इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती दिख रही हैं। बीजेपी अगले विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है। इसके साथ ही बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने की तैयारी भी कर ली है।
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2027 में उत्तराखंड में हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुटी भाजपा
2027 में उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुट गई है। 23 मार्च 2026 को राज्य की धामी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के चार साल पूरे कर रही है। इसी मौके को राजनीतिक रूप से बड़े संदेश में बदलने की तैयारी भारतीय जनता पार्टी ने कर ली है।
7 मार्च को हरिद्वार में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की विशाल जनसभा है जिसे बीजेपी के 2027 के चुनावी रण से जोड़कर देखा जा रहा है। जबकि इसी महीने 22 मार्च को श्रीनगर गढ़वाल में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दौरा भी प्रस्तावित है। इन दोनों रैलियों को चुनावी शंखनाद माना जा रहा है।

अमित शाह के दौरे का माना जा रहा चुनावी बिगुल
सात मार्च को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हरिद्वार में होने वाले इस कार्यक्रम को आगामी 2027 के चुनावों के लिए बेहद ही अहम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम में राज्य सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा और केंद्र की विभिन्न योजनाओं के तहत नई सौगातों की घोषणा भी हो सकती है।
अमित शाह के इस दौरे को लेकर कहा जा रहा है कि ये केवल धामी सरकार की उपलब्धियों का बखान के लिए ही नहीं है बल्कि इसके जरिए भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का काम करने जा रही है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री पहुंचेंगे श्रीनगर गढ़वाल
जहां एक ओर गृह मंत्री हरिद्वार में कार्यक्रम में शिरकत करेंगे तो वहीं दूसरी ओर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह श्रीनगर गढ़वाल पहुंचेंगे। यहां से ना केवल वो भाजपा की उपलब्धियां गिनवाएंगे बल्कि कार्यकर्ताओं में भी जोश भरेंगे। इसके साथ ही उनके इस दौरे को पार्टी को आम जनता से जोड़ने का भी अहम जरिया बताया जा रहा है।

कांग्रेस को घरने के लिए इस रणनीति पर कर रही काम
विश्लेषकों का मानना है कि ये दोनों दौरे भाजपा के लिए बेहद ही अहम हैं। अमित शाह और राजनाथ सिंह के दौरे से पार्टी हाईकमान उत्तराखंड में साल 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए अभी से सियासी बिसात बिछा रही है। इसके साथ ही पार्टी हाईकमान सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति बना रही है।
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थराली में जंगलों में लगी भीषण आग, कई गौशालाएं आई जद में, उठ रहीं 50 मीटर तक ऊंची लपटें

Chamoli News : उत्तराखंड में जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। तापमान में हल्की बढ़ोतरी के साथ ही पहाड़ों पर जंगल धधकने लगे हैं। बुधवार को चमोली जिले में बद्रीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत मध्य पिंडर रेंज के जंगलों भीषण आग लग गई। कई गावों के जंगल इसकी चपेट में आ गए हैं।
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थराली में जंगलों में लगी भीषण आग, कई गौशालाएं आई जद में
चमोली जिले में बद्रीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत मध्य पिंडर रेंज के जंगलों में आग लगने से लाखों की वन संपदा को नुकसान हो रहा है। इस आग की चपेट में चेपड़ों और सौगांव के जंगल भी आ गए हैं। जंगलों में लगी ये आग इतनी भयंकर है कि इसने खाड़ीबगड़, सौगांव जूनिधार और गोठिंडा के वन क्षेत्रों को भी अपने जद में ले लिया है।
50 मीटर तक ऊंची उठ रही हैं आग की लपटें
ग्रामीण और महिलाएं लगातार इस आग को बुझाने की कोशिश कर रहीं हैं। लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही है कि इसे रोकना मुश्किल हो रहा है। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी 50 मीटर तक ऊंची लपटें उठ रही हैं।

चेपड़ों गांव में कई गौशालाएं आई आग की जद में
मिली जानकारी के मुताबिक आग के कारण अब तक 20 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया है। आग ने चेपड़ों गांव की कई गौशालाओं को भी अपनी जद में ले लिया है। जिस कारण स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। आग के कारण अब आबादी वाले इलाके के लिए भी खतरा पैदा हो गया है।
वन विभाग की टीमें आग बुझाने के लिए युद्धस्तर पर जुटी
आग पर काबू पाने के लिए ग्रामीणों के साथ ही अग्नि शमन कर्मचारी और वन विभाग की टीमें जुटी हुई हैं। लेकिन आग इतनी विकराल है कि उसपर काबू पाने में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी का कहना है कि टीम पूरी रात आग बुझाने की कोशिशों में जुटी हुई है, लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है।
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