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महिलाओं, बच्चों और युवाओं के लिए राहत! जानिए कैबिनेट के खास फैसले

देहरादून: कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के अन्तर्गत स्वायत्तशासी राज्य अनुदानित संस्था उत्तराखण्ड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के संशोधित विभागीय संरचना/ढांचे के सम्बन्ध में निर्णय।
उत्तराखण्ड जैव प्रौद्योगिकी परिषद् के गठन के पश्चात् न्यूनतम आवश्यकता के आधार पर पूर्व में परिषद् के हल्दी, पंतनगर स्थित मुख्यालय हेतु 34 पद एवं एडवांस सेन्टर फॉर कम्प्यूटेशनल एण्ड एप्लाईड बॉयोटेक्नोलॉजी, देहरादून हेतु 12 पद सहित कुल 46 पद सृजित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी थी। परिषद् के स्वीकृत विभागीय संरचना/ढांचे में पदों की संख्या में परिवर्तन किए बिना विभागीय संरचना/ढांचे में मुख्यालय एवं देहरादून सेन्टर/अन्य सेन्टर हेतु समस्त पदों को एकीकृत (एकल संवर्ग) रूप में रखे जाने एवं भर्ती के स्रोत में परिवर्तन किये जाने का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।
2 – भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के संरचनात्मक ढांचे में अतिरिक्त पद सृजित किये जाने के सम्बन्ध में लिया गया निर्णय।
मा० उच्च न्यायालय, उत्तराखण्ड द्वारा जनहित याचिका (Suo Moto) 174/2024 Developing Cracks in Houses, fertile lands of poor Villagers and drying up of drinking water sources due to land subsidence in some villages of District Bageshwar V/s State of Uttarakhand & other में सुनवाई के दौरान दिये गये निर्देशों के समादर में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के ढांचे में विभागीय आवश्यकतानुसार पर्याप्त कार्मिकों की उपलब्धता कराये जाने हेतु अतिरिक्त पदों के सृजन को कैबिनेट ने दी मंजूरी। इस प्रकार से कुल 18 पदों को बढ़ाया गया है।
3 – उत्तराखण्ड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण अधिनियम, 2012 के प्राविधानानुसार जनपद देहरादून के तहसील सदर एवं विकासनगर के अंतर्गत आसन नदी के प्रारम्भिक बिन्दु भट्टा फॉल से आसन बैराज (कुल लगभग 53.00 किमी0 लम्बाई) तक आसन नदी के दोनों तटों पर बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण की अधिसूचना के सम्बन्ध में लिया गया निर्णय।
मा० राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली में योजित मूल आवेदन संख्याः 477/2022 राजेन्द्र गंगसारी बनाम उत्तराखण्ड राज्य व अन्य में मा० अधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांकः 19.03.2024 के अनुपालन में उत्तराखण्ड राज्य में नदियों के बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण की व्यवस्था हेतु अधिनियमित उत्तराखण्ड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण अधिनियम, 2012 के अन्तर्गत जनपद देहरादून के तहसील सदर एवं विकासनगर के अंतर्गत आसन नदी के प्रारम्भिक बिन्दु भट्टा फॉल से आसन बैराज (कुल लगभग 53.00 किमी० लम्बाई) तक आसन नदी के दोनों तटों पर चिन्हित भूमि को प्रतिषिद्ध तथा निर्बन्धित क्षेत्रों के सम्बन्ध में जारी अनन्तिम अधिसूचना संख्या-1141, दिनांकः 19.11.2024 के क्रम में अन्तिम अधिसूचना निर्गत किये जाने एवं राज्य की विभिन्न नदियों के बाढ मैदान परिक्षेत्रण हेतु पूर्व में निर्गत विभिन्न अधिसूचनाओं में उल्लिखित प्रतिषिद्ध तथा निर्बन्धित क्षेत्रों में अंकित अनुमन्य कार्यों में एस०टी०पी० का निर्माण, रोपवे टावरों का निर्माण, मोबाइल टावर का निर्माण, हाई टेंशन विद्युत ट्रॉन्समिशन हेतु टावर का निर्माण कार्य तथा ऐलिवेटेड रोड कॉरिडोर के लिए नींव एवं उपसंरचना आदि से सम्बन्धित निर्माण कार्यों को कैबिनेट द्वारा अनुमोदन दिया गया।
4 – लोक निर्माण विभाग, उत्तराखण्ड के चयनित 05 निरीक्षण भवनो का पी०पी०पी० माध्यम से संचालन द्वारा मुद्रीकरण (Monetization) किये जाने का कार्य यू०आई०आई०डी०बी को आवंटित किये जाने का निर्णय।
लोक निर्माण विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत स्थापित विभिन्न निरीक्षण भवनों/गेस्ट हाउस में से प्रथम चरण के अन्तर्गत 05 चयनित निरीक्षण भवनों (रानीखेत, उत्तरकाशी, दुग्गलबिट्टा, हर्षिल व ऋषिकेश) को पी०पी०पी० मोड में संचालित करते हुये उनका मुद्रीकरण का कार्य यू०आई०आई०डी०बी द्वारा किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमण्डल द्वारा इस प्रतिबंध के साथ अनुमोदन प्रदान किया गया कि उक्त निरीक्षण भवनो से संबधित भूमि का स्वामित्व लोक निर्माण विभाग के पास रहेगा तथा यू०आई०आई०डी०बी उक्त कार्य हेतु Transaction Advisor के रूप में कार्य करते हुये नियमानुसार अपना शुल्क प्राप्त करेगा।
उक्त मुद्रीकरण के फलस्वरूप जंहा लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों का बेहतर रख-रखाव संभव होगा एवं विभाग को अधिक राजस्व भी प्राप्त हो सकेगा, वहीं उस क्षेत्र मे आने वाले पर्यटको को बेहतर आवासीय सुविधायें प्राप्त होगी।
5 – वर्तमान में राज्य में परा-चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रमों हेतु उत्तराखण्ड पराचिकित्सा अधिनियम, 2009 एवं परा-चिकित्सा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों हेतु स्टेट मेडिकल फैकल्टी के प्राविधान प्रभावी हैं, के अन्तर्गत विभिन्न 22 पराचिकित्सा विधाओं में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का पंजीकरण किया जाता है। देश में सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देख-रेख व्यवसायियों हेतु शिक्षा और सेवाओं के मानकों को विनियमित करने, आचार संहिता, प्रवेश परीक्षाएं, पाठ्यक्रम मानकीकरण, पंजीकरण के मानकों में एकरूपता लाने, अन्तर्राज्यीय पंजीकरण को सरल एवं सुलभ बनाये जाने तथा कुल 10 श्रेणियों में समूहीकृत 56 व्यवसायी उपाधियों को मान्यता प्रदान किये जाने हेतु राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग अधिनियम-2021 (THE NATIONAL COMMISSION FOR ALLIED AND HEALTHCARE PROFESSION ACT-2021) (2021 का अधिनियम संख्यांक 14) के अध्याय-3 की धारा 22 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद् का गठन करने का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।
6 – मुख्यमंत्री महिला एवं बाल बहुमुखी सहायता निधि (कॉर्पस फण्ड) के क्रियान्वयन के संबंध में लिया गया निर्णय।
कैबिनेट द्वारा मुख्यमंत्री महिला एवं बाल बहुमुखी सहायता निधि (कॉर्पस फण्ड) सम्बन्धी नियमावली के अन्तर्गत विभाग को प्राप्त विदेशी मदिरा/बियर पर उपकर (सैस) की धनराशि को कॉर्पस फण्ड के रूप में विभागान्तर्गत संचालित उत्तराखण्ड महिला एवं बाल विकास समिति के माध्यम से संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत राज्य की महिलाओं एवं बच्चों के विकास हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं के प्राप्त अंतरालों (Gap Filling) को भरा जायेगा व आवश्यकता एवं प्रस्थिति के अनुसार नवाचार योजनाओं का क्रियान्वयन भी किया जायेगा। प्रमुख रूप से उक्त निधि के तहत आपदा/दुर्घटना में अनाथ हुए बच्चों, निराश्रित महिलाओं के जीविकोपार्जन व वृद्ध महिलाओं के लिए जीवन निर्वहन की समुचित व्यवस्था का निर्माण किया जायेगा।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, छात्रों से की पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील

dharmendra pradhan resigns : दिल्ली में छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच शनिवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। हाल के दिनों में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों, खासकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे और शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं के नाम जारी एक पत्र में कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने लिखा कि उनका यह फैसला देश में शांति और एकता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि आंदोलन की स्थिति का कोई भी देश-विरोधी तत्व फायदा न उठा सके और छात्र किसी कानूनी विवाद में फंसने के बजाय अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
छात्रों से की पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र हित, शिक्षा और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका मानना है कि एक मजबूत, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव होती है।

उन्होंने आगे लिखा कि वे देश के युवाओं की भावनाओं, आकांक्षाओं और उनकी उचित अपेक्षाओं का सम्मान करते हैं। उनके अनुसार, भारत के युवाओं के सपनों को साकार करना सार्वजनिक जीवन में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे बताया लोकतंत्र की जीत
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस जिम्मेदारी को निभाना उनके लिए सम्मान की बात रही।

इस बीच, प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों के बीच आए इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए छात्रों के आंदोलन का परिणाम बताया है।
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UTU Paper Leak मामले में बड़ी कार्रवाई, पेपर लीक करने वाला सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

UTU Paper Leak : उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) की सेमेस्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अभियुक्त ने परीक्षा से पहले छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप और आंतरिक पोर्टल के माध्यम से प्रश्नपत्र से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल साझा किए थे।
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UTU Paper Leak मामले में पेपर लीक करने वाला गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की शिकायत पर प्रेमनगर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया। शिकायत में बताया गया कि 8 जुलाई 2026 को आयोजित सम-सेमेस्टर परीक्षा के संबंध में विश्वविद्यालय को एक ई-मेल प्राप्त हुआ था। ई-मेल में दावा किया गया था कि 3 जुलाई को शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के एक सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे।
व्हट्सअप ग्रुप के माध्यम से पेपर किए थे लीक
विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति ने मामले की जांच की। जांच के दौरान ये सामने आया कि परीक्षा से पहले छात्रों के साथ साझा किए गए कई प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते थे। इसके बाद विश्वविद्यालय ने मामले की सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने आरोपी को देहरादून से किया गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई तेज की। दस्तावेजी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आशीष कुमार गुप्ता, सहायक प्रोफेसर, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा को गिरफ्तार कर लिया गया।
अभियुक्त के कब्जे से मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की शुरू
पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र किस तरह साझा किए गए और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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उत्तराखंड में फिर से पेपर लीक !, UTU ने रद्द किए दो एग्जाम, व्हाट्सएप और पोर्टल पर प्रश्नपत्र शेयर करने के आरोप

UTU Paper Leak : एक ओर जहां देश में पेपर लीक को लेकर बवाल देखने को मिल रहा है। दिल्ली से लेकर देहरादून तक प्रदर्शन हो रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड से फिर से पेपर लीक होने की बात सामने आ रही है। पेपर लीक होने के कारण यूटीयू ने दो एग्जाम रद्द कर दिए हैं।
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उत्तराखंड में फिर से पेपर लीक !, UTU ने रद्द किए दो एग्जाम
दिल्ली में पेपर लीक के विरोध को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से भी परीक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) ने प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि के बाद दो सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इस फैसले से विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के हजारों छात्रों की परीक्षा प्रभावित हुई है।
एग्जाम होने से पहले छात्रों तक पहुंचा प्रश्नपत्र
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी.के. पटेल के अनुसार, ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ और ‘इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ विषयों के प्रश्नपत्र परीक्षा आयोजित होने से पहले ही छात्रों तक पहुंचने की शिकायत मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति के निर्देश पर जांच समिति का गठन किया गया। संबंधित संस्थान की आंतरिक जांच में भी आरोपों की पुष्टि हुई।

व्हाट्सएप और पोर्टल पर प्रश्नपत्र शेयर करने के आरोप
जांच में सामने आया कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने कथित रूप से प्रश्नपत्र छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप और एक ऑनलाइन पोर्टल पर साझा किए। जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की सभी परीक्षा संबंधी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है।
दोनों विषयों की परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द
प्रश्नपत्र लीक होने के बाद विश्वविद्यालय ने दोनों विषयों की परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। अब इन परीक्षाओं का आयोजन अगस्त के तीसरे सप्ताह में किया जाएगा। नई परीक्षा तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को परीक्षा की गोपनीयता और निगरानी व्यवस्था में लापरवाही बरतने पर कड़ी चेतावनी भी जारी की है। विश्वविद्यालय ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाने की बात कही है।
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