Dehradun
सड़क सुरक्षा सिर्फ नियम नहीं, जिम्मेदारी भी है-राज्यपाल गुरमीत सिंह ने राजभवन में संगोष्ठी के माध्यम से दिया संदेश !

देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को राजभवन में आयोजित सड़क सुरक्षा गोष्ठी में प्रतिभाग किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा का दायरा केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन-जागरूकता, सामूहिक जिम्मेदारी और नागरिकों के जिम्मेदार व्यवहार से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे सड़क सुरक्षा को एक जन-आंदोलन का रूप दें, जिससे आमजन में नियमों के प्रति स्वाभाविक अनुशासन और जिम्मेदारी विकसित हो।

राज्यपाल ने विशेष रूप से स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वे सड़क सुरक्षा के ब्रांड एम्बेसडर बनें, अपने परिवार व समुदाय को जागरूक करें और नियमों का पालन स्वयं कर दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क सुरक्षा की चुनौतियाँ और भी अधिक जटिल हैं। यहां की भौगोलिक बनावट, संकरी व घुमावदार सड़कें, तीव्र ढलान और बदलते मौसम – ये सभी सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को बढ़ाते हैं। ऐसी स्थिति में वाहन चलाते समय सतर्कता, संयम और नियमों का पालन जीवन रक्षा के लिए अनिवार्य है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और गति सीमा का पालन करना हमारी जीवन रक्षा की गारंटी हो सकता है।

राज्यपाल ने सभी लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई किए जाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।

गोष्ठी के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन संस्था के निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह और तकनीकी अधिकारी प्रशांत खड़गे ने उपस्थित जनसमूह को सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों की बात नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की जीवन शैली का हिस्सा बननी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण लापरवाही और नियमों की अनदेखी है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक पद्मश्री डॉ. बी.के.एस. संजय ने संगोष्ठी के उद्देश्य और आयोजन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा, एडीजी वी. मुरुगेशन, डॉ. सुधारानी पांडेय, डॉ. गौरव संजय, अन्य गणमान्य अतिथि तथा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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Uttarakhand
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026: 5 से 8 फरवरी तक देहरादून में आयोजित होगा महोत्सव

Uttarayani Kauthik Mahotsav: सेवा संकल्प फाउंडेशन करेगा उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 का आयोजन
मुख्य बिंदु
Uttarayani Kauthik Mahotsav: सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 का भव्य आयोजन देहरादून, परेड ग्राउंड में 5 से 8 फरवरी 2026 तक किया जा रहा है। चार दिवसीय ये सांस्कृतिक उत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरागत कला एवं व्यंजन, लोकगीत, संगीत एवं लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियों का सजीव मंच बनेगा।
महोत्सव का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार
महोत्सव का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे जन-जन तक सशक्त रूप में पहुँचाना है। उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को केंद्र में रखते हुए भारत के विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय संस्कृतियों की भी भव्य प्रस्तुति की जाएगी। विशेष रूप से इस महोत्सव में उत्तर-पूर्वी भारत की सांस्कृतिक झलक, वहां की परंपराएं, लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सशक्त संदेश जनमानस तक पहुंचेगा।

पांच फरवरी से शरू होगा महोत्सव
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, लोककला एवं लोकसंगीत को जन-जन तक पहुँचाना, स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त मंच प्रदान करना तथा समाज में सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता को मजबूत करना है। ये महोत्सव देहरादून, परेड ग्राउंड में 5 से 8 फरवरी 2026 तक आयोजित्त होगा।



Uttarakhand
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 की तैयारी शुरू, गीता धामी ने किया पूजन

DEHRADUN: माघ पूर्णिमा पर उत्तरायणी कौथिक महोत्सव की तैयारी, गीता धामी ने विधि-विधान से किया पूजन
मुख्य बिंदु
DEHRADUN: सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर परेड ग्राउंड, देहरादून में 5 फरवरी से 8 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले उत्तरायणी कौथिक महोत्सव की सफलता के लिए विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्रद्धा एवं आस्था के साथ पूजन कर महोत्सव के सफल, सुव्यवस्थित एवं मंगलमय आयोजन की कामना की।
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव को लेकर सेवा संकल्प फाउंडेशन ने शुरू की तैयारी
पूजा के बाद गीता धामी ने पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश देते हुए वृक्षारोपण किया। इसके बाद उन्होंने सेवा संकल्प फाउंडेशन से जुड़े सभी साथियों के साथ बैठक कर महोत्सव की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की और आयोजन को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं जनसरोकारों से जोड़ने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में जनजातीय संस्कृतियों की दी जाएगी प्रस्तुति
गीता धामी ने जानकारी दी कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को केंद्र में रखते हुए भारत के विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय संस्कृतियों की भी भव्य प्रस्तुति की जाएगी। विशेष रूप से इस महोत्सव में उत्तर-पूर्वी भारत की सांस्कृतिक झलक, वहां की परंपराएं, लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सशक्त संदेश जनमानस तक पहुंचेगा।

उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, लोककला एवं लोकसंगीत को जन-जन तक पहुँचाना, स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त मंच प्रदान करना तथा समाज में सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता को मजबूत करना है।
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देहरादून: गणेश गोदियाल ने आम बजट को बताया दिशाहीन, कहा उत्तराखंड के हाथ फिर लगी निराशा

DEHRADUN: गणेश गोदियाल ने केन्द्रीय बजट को दिशाहीन और जनता को बरगलाने वाला बताया
DEHRADUN: उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केन्द्र की मोदी सरकार के आम बजट को दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास अवरोधी, अपने उद्योगपति मित्रों का पोषक तथा आम आदमी के हितों के खिलाफ मंहगाई और बेरोजगारी बढ़ाने वाला बजट बताया है।
गणेश गोदियल ने केंन्द्रीय आम बजट को बताया दिशाहीन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केन्द्रीय आम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्रीय वित्त मंत्री ने एकबार फिर से दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास विरोधी, मंहगाई व बेरोजगारी बढ़ाने वाला तथा देश की आर्थिक वृद्धि पर चोट पहुंचाने वाला बजट है। केन्द्रीय बजट में उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों और आम आदमी की घोर उपेक्षा की गई है। देश के वित्त मंत्री ने बजट में एकबार फिर से आंकडों की बाजीगरी ही दिखाई है।
वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा आम बजट में तीन कर्तव्यों आर्थिक वृद्धि मे तेजी, जन आकांक्षाओं को पूरा करना तथा सबका साथ सबका विकास जैसी कोरी बातें ही की गई हैं। केन्द्रीय बजट में सात उच्चगति रेल कॉरिडोर विकसित किये जाने की बात 100 स्मार्ट सिटी विकसित किये जाने जैसे जुमले छोड़े गये हैं।
गोदियाल ने कहा कि कोरी घोषणायें कर जनता को बरगलाने की कोशिश
गणेश गोदियाल ने स्मार्ट सिटी मिशन, प्रदूषण, स्वास्थ्य और किसानों की आय जैसे मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पूर्व के बजट की भांति किसानों और आम आदमी की आय में वृद्धि जैसी कोरी घोषणायें कर उन्हें बरगलाने की कोशिश की गई है। इस बार मोदी सरकार ने ‘‘तीन कर्तव्य’’ के रूप में नया जुमला छोड़ा गया है। केन्द्रीय बजट न तो नई दिशा दिखाता है और न ही किसी बड़े बदलाव का संकेत देता है। बजट में प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। केवल मोदी सरकार ने वास्तविक और ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश मात्र की है।
केन्द्रीय बजट से आम आदमी के हाथ केवल निराशा
कुल मिलाकर केन्द्रीय बजट से आम जनता को निराशा हाथ लगी है। केंद्रीय बजट में महंगाई कम करने की कहीं बात नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से केन्द्रीय आम बजट में लगातार की जा रही कोरी घोषणाओं व जुमलेबाजी तथा अपने चहेते उद्योग पतियों को लाभ पहुंचाने वाले बजट में वित्तीय प्रबन्धन का नितांत अभाव है। जहां एक ओर महंगाई से जनता के सिर का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है वहीं देश का आम आमी विदेशी कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बजट में योजनाओं और कार्यक्रमों के बजटीय आवंटन में पारदर्शिता का नितांत अभाव है। बजट के प्रावधानों से देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था में विकास दर दहाई का आंकडा भी नहीं छू पायेगी और न ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सात उच्चगति रेल कॉरिडोर विकसित किये जाने की घोषणा की गई है परन्तु जो हवाई अड्डे वर्तमान में स्थापित हैं उनकी हालत खस्ता हो चली है उसके लिए बजट मे कोई प्रावधान नहीं किया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा कृषकों की आय बढ़ाने तथा आम आदमी बढ़ाने की बात बार-बार की जाती है परन्तु इन वर्गों की आय में वृद्धि करने का कोई प्रावधान बजट में नहीं किया गया है।
बजटीय आवंटन में पारदर्शिता का नितांत अभाव
गणेश गोदियाल ने कहा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत आम बजट में तीन कर्तव्य नाम से नया जुमला छोड़ते हुए कोरी घोषणाओं का अंबार लगाया गया है परन्तु उन्हें पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा इसका कोई उल्लेख नहीं है। बजट में गरीब, किसान तथा युवा वर्ग की पूरी तरह उपेक्षा की गई आम जनता को मंहगाई से निजात दिलाने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। आम बजट में नौजवानों के भविष्य की घोर उपेक्षा की गई है इस बजट से देश में रोजगार के अवसर घटेंगे, किसान, गरीब व आम आदमी के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं है तथा केन्द्रीय बजट मात्र कुछ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला बजट है।
मध्यम वर्ग के हितों पर बजट में सबसे अधिक चोट
मध्यम वर्ग के हितों पर बजट में सबसे अधिक चोट की गई है। नौकरी पेशा व्यक्ति को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, 4 से 8 लाख में 5 प्रतिशत टैक्स लगाकर मध्यम वर्ग के नौकरी पेशा वर्ग के गाल पर टैक्स का तमाचा मारा गया है। इनकम टैक्स छूट के स्लैबों मे की गई बढ़ोत्तरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। महिला सुरक्षा, किसानों, बेरोजगार नौजवानों के लिए इस बजट में कोई विषेष प्रावधान नजर नही आता है। रोजगार के सृजन तथा महिलाओं के सशक्तिकरण एवं सम्मान की बात केवल मोदी सरकार की लच्छेदार भाषणों का हिस्सा मात्र रही है बजट मे उसके लिए कोई प्रावधान नहीं है।
केन्द्रीय बजट से उत्तराखंड के हाथ निराशा
गणेश गोदियाल ने कहा कि केन्द्रीय आम बजट में उत्तराखंड को एक बार फिर से निराशा हाथ आई है। आपदा प्रभावित राज्य होने के बावजूद उत्तराखण्ड राज्य के दैवीय आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बजट में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। केन्द्र सरकार ने अपने बजट में उत्तराखण्ड जैसे आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील राज्य को रेल कनेक्टिविटी और एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कुछ भी नहीं दिया है। कुल मिलाकर आम बजट में अपने उद्योगपति मित्रों के हित साधन कर देश के आम आदमी की घोर उपेक्षा की गई है।
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