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कौन हैं विजय थलापति ?, 6 दशकों का DMK व AIADMK के तिलिस्म को तोड़कर बने सीएम, जानें कैसे अभिनेता से बन गए नेता..

Vijay Thalapathy Biography : दक्षिण भारतीय फिल्म स्टार Thalapathy Vijay इन दिनों तमिलनाडु की राजनीति में लगातार चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। फिल्मों से दूरी बनाकर राजनीति में कदम रखने के बाद से ही उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। राज्य की सियासत में उनकी सक्रियता ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है, वहीं उनके समर्थकों के बीच भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
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कौन हैं विजय थलापति ? (Vijay Thalapathy Biography)
विजय थलापति ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। यूं तो चुनाव जीतने के बाद से ही हर ओर उनके चर्चे हो रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद हर कोई उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक (Vijay Thalapathy Biography in hindi) हैं। आज करोड़ों फैंस उन्हें Thalapathy Vijay के नाम से जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग उनका पूरा नाम जानते हैं।
उनका वास्तविक नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। उनका जन्म 22 जून 1974 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। विजय का परिवार लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा रहा है। उनके पिता फिल्म निर्देशक रहे हैं, जबकि उनकी मां एक प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर के तौर पर जानी जाती हैं।

6 दशकों का DMK व AIADMK के तिलिस्म को तोड़कर बने सीएम
तमिलगा वेट्री कझगम (Tamilaga Vettri Kazhagam) के प्रमुख C. Joseph Vijay ने रविवार, 10 मई 2026 को चेन्नई स्थित Jawaharlal Nehru Stadium में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव की तस्वीर सामने आई है, जहां लंबे समय से चली आ रही डीएमके और एआईएडीएमके की पारंपरिक राजनीतिक पकड़ टूटती नजर आई।
18 साल की उम्र में कर दी थी फिल्मी करियर की शुरुआत
विजय थलापति ने बेहद कम उम्र में अपने अभिनय करियर की शुरुआत कर दी थी। उनकी पहली फिल्म ‘नालैया थीरपू’ थी, जो 1992 में रिलीज हुई थी। फिल्मी परिवार से आने वाले विजय को उनके पिता और फिल्म निर्माता एस. ए. चंद्रशेखर का पूरा समर्थन मिला।

1990 के दशक में उन्होंने कई रोमांटिक फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। इसके बाद फिल्म ‘घिल्ली’ उनके करियर की बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हुई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। इसी सफलता के बाद विजय ने लगातार कई हिट फिल्मों में काम किया और दक्षिण भारतीय सिनेमा के बड़े स्टार बनकर उभरे। आज उन्हें साउथ इंडस्ट्री के ‘मास हीरो’ के रूप में भी जाना जाता है।
कैसे विजय थलापति अभिनेता से बन गए नेता ?
Thalapathy Vijay ने साल 2024 में आधिकारिक रूप से राजनीति में कदम रखा। राजनीति में सक्रिय होने के लिए उन्होंने फिल्मी करियर से दूरी बनाने का फैसला भी किया। एक सार्वजनिक संबोधन में विजय ने कहा था कि उन्हें जो पहचान और प्यार मिला है, वह जनता की बदौलत है, और अब वह लोगों की सेवा कर उस विश्वास को लौटाना चाहते हैं।

राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी टीवीके की शुरुआत की। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इसके बाद मुख्यमंत्री पद के लिए विजय का नाम तेजी से चर्चा में आया। अब सीएम पद की शपथ लेकर उन्होंने इतिहास रच दिया है।
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शूटिंग के ‘चैंपियन कोच’ जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में दिल्ली के मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस

jaspal rana : भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध निशानेबाज, कोच और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता Jaspal Rana का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
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शूटिंग के ‘चैंपियन कोच’ jaspal rana का निधन
शूटिंग के ‘चैंपियन कोच’ जसपाल राणा का निधन हो गया है। मिली जानकारी के दौरान जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय विमान में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
49 साल की उम्र में दिल्ली के मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस
राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, उड़ान के दौरान उन्हें असहज महसूस हो रहा था। जांच के बाद डॉक्टरों ने उनके हृदय में स्टेंट भी डाला था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस खबर के बाद से देश शोक की लहर दौड़ गई है।

भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
एक खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा का करियर बेहद शानदार रहा। उन्होंने एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए कई पदक जीते तथा देश के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते थे। बाद में उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जसपाल राणा मनु भाकर के भी थे गुरू
कोच के रूप में भी उनका योगदान अमूल्य रहा। उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया और पेरिस ओलंपिक में दो पदक हासिल किए। इसके अलावा उन्होंने Saurabh Chaudhary, Anish Bhanwala और Chinki Yadav जैसे कई प्रतिभाशाली निशानेबाजों के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई।
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RBI Polymer Notes 2026 : भारत में आने वाले हैं ₹200 और ₹500 के नए नोट , जानिए RBI की नई योजना…

RBI Polymer Notes 2026: क्या ₹200 और ₹500 के प्लास्टिक नोट आने वाले हैं?
भारत में एक बार फिर मुद्रा व्यवस्था को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। हाल ही में कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में Polymer Banknotes यानी प्लास्टिक नोटों को शुरू करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस खबर के सामने आने के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या ₹200 और ₹500 के नोट बदल जाएंगे? क्या पुराने नोट बंद हो जाएंगे? क्या यह 2016 की नोटबंदी जैसा कदम होगा?
फिलहाल RBI ने किसी नोटबंदी की घोषणा नहीं की है, लेकिन Polymer Currency Notes को लेकर चर्चा तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार RBI जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है, जिसके तहत कुछ मूल्यवर्ग के नोटों को Polymer Material पर छापा जा सकता है।
Polymer Notes क्या होते हैं?
Polymer Notes ऐसे बैंक नोट होते हैं जो पारंपरिक कागज के बजाय विशेष प्रकार की प्लास्टिक सामग्री पर बनाए जाते हैं। इन्हें आम भाषा में Plastic Currency Notes भी कहा जाता है।
हालांकि ये क्रेडिट कार्ड की तरह कठोर नहीं होते। ये सामान्य नोटों की तरह ही मुड़ सकते हैं और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में Polymer Currency पहले से सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही है।
RBI Polymer Notes पर विचार क्यों कर रहा है?
भारत में डिजिटल पेमेंट्स तेजी से बढ़े हैं, लेकिन नकदी की मांग अभी भी काफी अधिक है। RBI के आंकड़ों के अनुसार देश में Currency in Circulation लगातार बढ़ रही है। इसी के साथ नोटों की छपाई और रखरखाव की लागत भी बढ़ रही है।
Polymer Notes पर विचार करने के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
1. नकली नोटों पर रोक
हाल ही में RBI की रिपोर्ट में नकली ₹500 नोटों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बैंकिंग सिस्टम में पकड़े गए फर्जी ₹500 नोटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
Polymer Notes में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, जिनकी नकल करना काफी कठिन होता है।
2. लंबी उम्र
कागज के नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं या खराब हो जाते हैं। Polymer Notes अधिक समय तक चलते हैं और बार-बार बदलने की जरूरत कम होती है।
3. लागत में कमी
शुरुआत में Polymer Notes की छपाई महंगी हो सकती है, लेकिन उनकी लाइफ ज्यादा होने के कारण लंबे समय में खर्च कम हो सकता है।
4. ATM Compatibility
रिपोर्ट्स के अनुसार RBI अब ऐसी तकनीक विकसित कर चुका है जिससे ATM मशीनें Polymer Notes को आसानी से संभाल सकेंगी।
क्या ₹200 और ₹500 के नोट बदले जाएंगे?
सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा ₹200 और ₹500 नोटों को लेकर हो रही है। हालांकि कई रिपोर्ट्स में शुरुआती परीक्षण के लिए ₹10 और ₹20 नोटों का भी जिक्र किया गया है। अभी तक RBI ने आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-से मूल्यवर्ग सबसे पहले Polymer Format में आएंगे।
लेकिन ₹500 नोट पर विशेष ध्यान इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि यह भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले नोटों में से एक है और नकली नोटों के मामलों में भी इसका बड़ा हिस्सा सामने आता है।
क्या यह नोटबंदी होगी?
इस सवाल का जवाब है – नहीं।
फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि RBI या केंद्र सरकार मौजूदा ₹200 या ₹500 नोटों को अमान्य घोषित करने वाली है।
2016 की नोटबंदी में पुराने ₹500 और ₹1000 नोटों को कानूनी मान्यता से बाहर कर दिया गया था और उनकी जगह नए नोट जारी किए गए थे। वर्तमान Polymer Notes योजना केवल नोटों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुधारने से जुड़ी हुई दिखाई दे रही है।
इसलिए लोगों को किसी भी तरह की अफवाहों से बचना चाहिए।
Polymer Notes के प्रमुख फायदे
अधिक टिकाऊ
- जल्दी नहीं फटते
- पानी से कम खराब होते हैं
- गंदगी कम पकड़ते हैं
बेहतर सुरक्षा
- Transparent Windows
- Micro-Optic Features
- Advanced Holograms
- विशेष सुरक्षा स्याही
इन फीचर्स के कारण नकली नोट बनाना कठिन हो जाता है।
कम Replacement Cost
हर साल बड़ी संख्या में खराब नोटों को हटाना पड़ता है। Polymer Notes लंबे समय तक उपयोग में बने रह सकते हैं।
Polymer Notes के संभावित नुकसान
हालांकि इसके कई फायदे हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं।
शुरुआती निवेश अधिक
नई प्रिंटिंग तकनीक और मशीनों पर बड़ा खर्च करना पड़ सकता है।
लोगों की आदत बदलना
भारत में लोग लंबे समय से कागज के नोटों का इस्तेमाल करते आए हैं। नए नोटों को स्वीकार करने में समय लग सकता है।
बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव
ATM, Cash Sorting Machines और अन्य उपकरणों में कुछ तकनीकी बदलाव करने पड़ सकते हैं।
दुनिया के किन देशों में Polymer Notes हैं?
कई विकसित और विकासशील देशों ने Polymer Currency को अपनाया है।
कुछ प्रमुख देश:
- Australia
- Canada
- United Kingdom
- New Zealand
- Singapore
- Romania
- Vietnam
इन देशों में Polymer Notes को सफल माना जाता है क्योंकि इनकी लाइफ कागज के नोटों से काफी अधिक होती है।
भारत में Polymer Notes का पुराना इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब भारत में Polymer Currency की चर्चा हो रही है।
RBI ने 2013 में ₹10 Polymer Notes का सीमित परीक्षण भी किया था। हालांकि तकनीकी और परिचालन कारणों से उस समय यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब लगभग 12 साल बाद इस विचार को दोबारा जीवित किया जा रहा है।
क्या UPI के दौर में भी नकदी की जरूरत है?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट बाजार बन चुका है। UPI ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं।
इसके बावजूद नकदी की मांग खत्म नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे व्यापारियों और कई स्थानीय बाजारों में आज भी कैश का उपयोग व्यापक रूप से होता है। यही कारण है कि RBI नकदी प्रबंधन को और बेहतर बनाने के लिए Polymer Notes पर विचार कर रहा है।
RBI की अगली रणनीति क्या हो सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI पहले सीमित स्तर पर Pilot Project शुरू कर सकता है।
संभावित चरण:
- चुनिंदा शहरों में परीक्षण
- सीमित मूल्यवर्ग के नोट जारी करना
- ATM और बैंकिंग सिस्टम की जांच
- जनता की प्रतिक्रिया लेना
- सफल होने पर बड़े स्तर पर विस्तार
हालांकि अंतिम फैसला RBI की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
निष्कर्ष
RBI Polymer Notes 2026 भारत की मुद्रा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। बढ़ती नकदी मांग, नकली नोटों की समस्या और प्रिंटिंग लागत को देखते हुए Polymer Currency एक आधुनिक समाधान के रूप में सामने आ रही है।
फिलहाल ₹200 और ₹500 के मौजूदा नोट पूरी तरह वैध हैं और उन्हें बंद करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन यदि Polymer Notes का पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय मुद्रा का स्वरूप बदल सकता है।
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FAQs
RBI Polymer Notes क्या हैं?
Polymer Notes प्लास्टिक आधारित बैंक नोट होते हैं जो सामान्य कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित होते हैं।
क्या ₹500 के नोट बंद होने वाले हैं?
नहीं, अभी तक RBI ने ₹500 नोट बंद करने की कोई घोषणा नहीं की है।
क्या Polymer Notes भारत में जल्द लॉन्च होंगे?
रिपोर्ट्स के अनुसार RBI एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार कर रहा है, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
Polymer Notes का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
इनकी लंबी उम्र और बेहतर सुरक्षा फीचर्स सबसे बड़े फायदे माने जाते हैं।
क्या यह 2016 की नोटबंदी जैसा कदम है?
नहीं, यह नोटबंदी नहीं है। यह केवल नई तकनीक वाले नोटों को लाने की संभावित योजना है।
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पेट्रोल और डीजल के बाद अब बढ़े सीएनजी के दाम, 2 रुपये प्रति किलोग्राम हुई महंगी, देखें नए रेट

CNG Price Hike : पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी के बाद अब सीएनजी उपभोक्ताओं को भी महंगाई का झटका लगा है। 26 मई से सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर इजाफा किया गया है।
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पेट्रोल और डीजल के बाद अब बढ़े सीएनजी के दाम
पेट्रोल और डीजल के बाद अब सीएनजी के दाम बढ़ गए हैं। नई दरों के अनुसार, CNG अब 2 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हो गई है। बीते कुछ दिनों में ये चौथी बार है जब सीएनजी की कीमतों में बदलाव किया गया है। नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में CNG की कीमत बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है।
चौथी बार सीएनजी के दामों में हुई बढ़ोतरी
पिछले दिनों कीमतों में क्रमिक वृद्धि देखी गई थी। 15 मई को 2 रुपये, 18 मई को 1 रुपये, 23 मई को 1 रुपये और अब 26 मई को 2 रुपये की बढ़ोतरी के साथ बीते 11 दिनों में कुल 6 रुपये प्रति किलोग्राम तक कीमत बढ़ चुकी है।

इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र पर पड़ सकता है, जहां बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी, स्कूल वाहन और निजी गाड़ियां सीएनजी पर निर्भर हैं।
आने वाले दिनों में रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें हो सकती हैं महंगी
गौरतलब है कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कई बार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की बढ़ती लागत से परिवहन खर्च बढ़ सकता है, जिसका असर सब्जियों, फलों, दूध, दवाओं और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
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