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चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में आई कमी, प्रशासन ने पंजीकरण से पहले की टोकन व्यवस्था को किया ख़त्म।

ऋषिकेश – चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में कमी आ गई। इससे यात्रा प्रशासन ने पंजीकरण से पहले की टोकन व्यवस्था को खत्म कर दिया है। ट्रांजिट कैंप में प्रतिदिन औसतन 2,600 से 2,700 तीर्थयात्री पंजीकरण के लिए काउंटरों पर पहुंच रहे हैं।

एक जून से यात्रा प्रशासन की ओर से 1,500 तीर्थ यात्रियों के पंजीकरण का स्लॉट बनाया गया था। कुछ दिन बाद 2,000 का स्लॉट जारी किया गया फिर 3,000 किया गया। उसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में चार हजार का स्लॉट जारी करने की घोषणा कर दी। बाद में यह बाध्यता भी खत्म कर दी।
बीते तीन दिनों ट्रांजिट कैंप में औसत 2,600 से 2,700 तीर्थयात्री काउंटर पर पंजीकरण कराने के लिए पहुंच रहे हैं। ट्रांजिट कैंप परिसर में तीर्थ यात्रियों की भीड़ नजर नहीं आ रही है। कम तीर्थ यात्रियों के आने से यात्रा प्रशासन ने अब पंजीकरण से पहले टोकन देने की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब तीर्थयात्री सीधे काउंटर पर आकर पंजीकरण करवाकर चारधाम की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं।
चारधाम यात्रा प्रशासन ओएसडी नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने बताया कि टोकन व्यवस्था को खत्म किया गया है। प्रतिदिन औसतन 2,600 से 2,700 तीर्थयात्री पंजीकरण करवाकर सीधे चारधाम की यात्रा पर जा रहे हैं।
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ऋषिकेश में शर्मसार करने वाली घटना, शराब पिलाकर नाबालिग से गैंगरेप, 3 गिरफ्तार

Rishikesh News : ऋषिकेश में नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म की घटना ने सनसनी फैला दी है। आरोप है कि युवती को पहले बहला-फुसलाकर शराब पिलाई गई और फिर उसकी नशे की हालत का फायदा उठाया गया। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।
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ऋषिकेश में शराब पिलाकर नाबालिग से गैंगरेप
ऋषिकेश के आईडीपीएल क्षेत्र में एक 16 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि युवती को बहला-फुसलाकर शराब पिलाई गई और नशे की हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता के पिता ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि नाबालिग अपनी एक परिचित युवती के साथ आईडीपीएल इलाके में गई थी।
आरोप है कि वहां मौजूद कुछ युवकों ने दोनों को अपने झांसे में लेकर शराब पिलाई। शिकायत के अनुसार, नाबालिग के नशे की हालत में होने का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
तीनों आरोपी रुड़की के हैं रहने वाले
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट के अनुसार, पीड़िता के बयान और शिकायत के आधार पर पुलिस ने शिवम उर्फ शुभम (19), गोविंद (21) और दीपक उर्फ डीपी (20) को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपी रुड़की क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।
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Rishikesh News: दिसंबर तक बंद रहेगा ऋषिकेश का राम झूला, जानें क्यों लिया गया ये फैसला ?

Rishikesh News : ऋषिकेश के प्रसिद्ध रामझूला पुल को मरम्मत कार्य के चलते आम लोगों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) नरेंद्र नगर के अनुसार पुल के व्यापक पुनर्वास का काम शुरू हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मरम्मत पूरी होने के बाद ही पुल को दोबारा जनता के लिए खोला जाएगा।
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दिसंबर तक बंद रहेगा ऋशिकेष का राम झूला
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, रामझूला पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और इसे राज्य के असुरक्षित पुलों की सूची में शामिल किया गया था। आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सरकार ने मरम्मत कार्य के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया।
मरम्मत के कारण लिया गया ये फैसला
मरम्मत के दौरान गंगा नदी के भीतर स्थित पुल के 20 पाइलों (आधार स्तंभों) को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा पुल में लगे 440 सस्पेंडर वायर भी बदले जा रहे हैं, ताकि इसकी संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वर्ष 1985 में निर्मित ये सस्पेंशन पुल लगभग 220 मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा है। रामझूला मुनि की रेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र को जोड़ने वाला एक प्रमुख संपर्क मार्ग होने के साथ-साथ धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

2023 में बारिश के कारण पुल के सहायक तार हो गए थे क्षतिग्रस्त
गौरतलब है कि 17 अगस्त 2023 को भारी बारिश और गंगा के जलस्तर में तेज वृद्धि के कारण पुल के कुछ सहायक तार क्षतिग्रस्त हो गए थे और संरचना में दरारें आने के बाद दोपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई थी। इससे पहले जुलाई 2019 में भी कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि मरम्मत कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि दिसंबर के अंत तक रामझूला को सुरक्षित रूप से फिर से आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए खोला जा सके।
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ऋषिकेश जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट, बजरंग सेतु चलने के लिए देना होगा किराया !

Rishikesh Bajrang Setu : ऋषिकेश में गंगा नदी पर बने बजरंग सेतु के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर रहा है। इस SOP के तहत पुल के उपयोग, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और कांच से बने विशेष पैदल मार्ग के संचालन से जुड़े नियम तय किए जाएंगे। इसके साथ ही कांवड़ यात्रा के दौरान विशेष व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी।
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बजरंग सेतु चलने के लिए देना होगा किराया
ऋषिकेश में बजरंग सेतु का मुख्य हिस्सा पहले की तरह आम लोगों की आवाजाही के लिए खुला रहेगा। हालांकि पुल के दोनों किनारों पर बनाए गए पारदर्शी कांच के फुटपाथ पर जाने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों से शुल्क लिया जा सकता है। इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और इस आकर्षण का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना है।
शुल्क की अंतिम दर SOP लागू होने के बाद होगी तय
बता दें कि ऋषिकेश में जो लोग गंगा के ऊपर बने कांच के रास्ते पर चलने का रोमांचक अनुभव लेना चाहेंगे, उन्हें निर्धारित शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। शुल्क की अंतिम दर SOP लागू होने के बाद तय की जाएगी।
कांवड़ यात्रा में बंद रहेगा कांच वाला हिस्सा
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान कांच से बने फुटपाथ को पूरी तरह बंद रखा जाएगा। इस दौरान लाखों कांवड़ियों की आवाजाही के कारण पुल पर अत्यधिक भीड़ रहती है। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल पुल के सामान्य हिस्से से ही आवागमन की अनुमति दी जाएगी।

सुरक्षा और निगरानी पर रहेगा विशेष फोकस
करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बजरंग सेतु का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। लगभग 132.30 मीटर लंबे और 8.60 मीटर चौड़े इस आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज को लक्ष्मण झूला के विकल्प के रूप में विकसित किया गया है।
कांच को कई बार पहले भी पहुंच चुका है नुकसान
पुल के दोनों ओर बनाए गए पैदल मार्ग में पांच परतों वाले टफेंड ग्लास का उपयोग किया गया है। निर्माण के दौरान कांच को कई बार नुकसान पहुंचने की घटनाओं के बाद अब इसकी सुरक्षा, नियमित निगरानी और रखरखाव के लिए भी विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
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