Uttarakhand
देहरादून के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल – जानिए उत्तराखंड की राजधानी की खूबसूरती…

Dehradun Tourist Places 2026 Guide
देहरादून, उत्तराखंड की खूबसूरत राजधानी, हिमालय की गोद में बसा एक शांत और मनमोहक शहर है। यह शहर न केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए, बल्कि अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और शैक्षणिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। यहाँ की हरियाली, झरने, मंदिर और शांति भरा वातावरण हर पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं या शहर की भीड़-भाड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो Dehradun Tourist Places आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं।
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Dehradun का इतिहास और महत्व
देहरादून का नाम “देहरा” (डेरे) और “दून” (घाटी) से मिलकर बना है। यह शहर गुरु राम राय द्वारा स्थापित किया गया था। ब्रिटिश काल में भी यह स्थान अपनी सुंदरता और मौसम के कारण पसंदीदा रहा। देहरादून आज शिक्षा, सेना और आध्यात्मिकता का प्रमुख केंद्र है।
भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य
देहरादून समुद्र तल से लगभग 450 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो इसे सालभर सुखद बनाता है। यहाँ की हरियाली, झरने और नदियाँ इस शहर को और आकर्षक बनाते हैं।
देहरादून क्यों प्रसिद्ध है?
Dehradun एक ऐसा शहर है जहाँ आधुनिकता और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहाँ FRI जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएँ हैं, वहीं दूसरी ओर तपकेश्वर मंदिर जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल भी हैं। देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी का द्वार भी कहलाता है।
देहरादून के प्रमुख पर्यटन स्थल (Dehradun Tourist Places)
सहस्रधारा – झरनों का स्वर्ग
सहस्रधारा का अर्थ है “हजार धाराएँ”। यह स्थान अपने गंधक युक्त झरनों के लिए प्रसिद्ध है, जिनके बारे में कहा जाता है कि इनका जल त्वचा रोगों में लाभकारी होता है। हरियाली और पहाड़ों के बीच यह एक प्राकृतिक स्पा जैसा अनुभव देता है।

रॉबर्स केव (गुच्चूपानी)
यह एक रहस्यमयी गुफा है जहाँ से नदी बहती है। इसे देखने के लिए गर्मियों में हजारों पर्यटक आते हैं। यहाँ पानी में चलने का अनुभव बेहद रोमांचक होता है।
टपकेश्वर मंदिर
भगवान शिव को समर्पित यह गुफा मंदिर अपने प्राकृतिक शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिस पर लगातार पानी की बूंदें टपकती रहती हैं।

बुद्धा मंदिर (Mindrolling Monastery)
यह विशाल बौद्ध मठ अपने शांत वातावरण और 220 फीट ऊँचे स्तूप के लिए जाना जाता है। यहाँ का बागीचा और रंगीन दीवारें इसे फोटोग्राफी के लिए आदर्श स्थान बनाती हैं।
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI)
यह देहरादून का सबसे प्रसिद्ध संस्थान है, जिसकी भव्य इमारत ब्रिटिश काल की वास्तुकला का उदाहरण है। कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग यहाँ हो चुकी है।

परिवार के साथ घूमने लायक जगहें (Dehradun Tourist Places To Visit With Family)
देहरादून में मालसी डियर पार्क, लच्छीवाला नेचर पार्क और मिसेस हॉल का गार्डन जैसे स्थान परिवारों के लिए बेहतरीन पिकनिक स्पॉट हैं।
देहरादून में धार्मिक स्थल
यहाँ का टपकेश्वर मंदिर, संतला देवी मंदिर और बुद्धा मंदिर धार्मिक आस्था के प्रतीक हैं। हर साल यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
देहरादून की प्राकृतिक सुंदरता
देहरादून की घाटियाँ, झरने और घने जंगल इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग बनाते हैं। विशेषकर मानसून के दौरान यहाँ की सुंदरता दोगुनी हो जाती है।
देहरादून के आसपास घूमने लायक स्थान
देहरादून से कुछ ही दूरी पर मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध स्थल हैं, जिन्हें एक साथ यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
Dehradun की स्थानीय संस्कृति और भोजन
पहाड़ी व्यंजन
देहरादून का भोजन उत्तराखंड की पारंपरिक झलक पेश करता है। यहाँ के लोकप्रिय व्यंजन हैं —
- काफुली और झोल – पालक और अन्य हरी सब्जियों से बनी पौष्टिक डिश।
- भट्ट की चुड़कानी – काले सोयाबीन से बना प्रसिद्ध व्यंजन।
- आलू के गुटके – मसालेदार आलू, जो चाय के साथ खाए जाते हैं।
- सिंगोरी – नारियल और खोया से बनी मिठाई, जिसे मालू के पत्ते में लपेटा जाता है।
स्थानीय मेले और त्यौहार
देहरादून में झंडा मेला, बुद्ध पूर्णिमा, और महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाए जाते हैं। यह त्यौहार यहाँ की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं।

Dehradun कैसे पहुँचे
हवाई मार्ग
देहरादून का निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है। दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।
रेलमार्ग
देहरादून रेलवे स्टेशन उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से सीधा जुड़ा है। “नंदा देवी एक्सप्रेस” और “शताब्दी एक्सप्रेस” जैसी ट्रेनें यहाँ आसानी से पहुंचाती हैं।
सड़क मार्ग
देहरादून, दिल्ली से लगभग 240 किमी दूर है और राष्ट्रीय राजमार्ग NH 7 के माध्यम से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। बसें और निजी कैब आसानी से उपलब्ध रहती हैं।
ठहरने और खरीदारी की जगहें
होटल और रिज़ॉर्ट
देहरादून में हर बजट के लिए ठहरने की व्यवस्था है —
- फोर पॉइंट्स बाय शेरेटन
- लेमन ट्री होटल
- होटल सौरभ पर्वत
- स्थानीय होमस्टे और गेस्ट हाउस
देहरादून के प्रसिद्ध बाजार
अगर आप शॉपिंग के शौकीन हैं, तो पलटन बाजार, राजपुर रोड, और अस्थली बाजार आपको निराश नहीं करेंगे। यहाँ से आप ऊनी कपड़े, हस्तशिल्प और पहाड़ी मसाले खरीद सकते हैं।
यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय
देहरादून में घूमने का सबसे उपयुक्त समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक होता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, और झरनों का आनंद लेने का सबसे अच्छा समय होता है।
सर्दियों (दिसंबर–फरवरी) में यहाँ हल्की ठंड रहती है, जबकि मानसून (जुलाई–अगस्त) में हरी-भरी घाटियाँ अपनी पूरी खूबसूरती में निखर उठती हैं।
देहरादून यात्रा के टिप्स
- हल्के कपड़े और जैकेट साथ रखें क्योंकि रातें ठंडी हो सकती हैं।
- स्थानीय बाजारों में भाव-ताव करें, लेकिन शालीनता बनाए रखें।
- प्लास्टिक का उपयोग न करें, और पर्यावरण की स्वच्छता बनाए रखें।
- पानी की बोतल, रेनकोट और स्नीकर्स साथ रखें, विशेषकर ट्रेकिंग के लिए।
पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता
देहरादून अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, इसलिए पर्यटकों को चाहिए कि वे “जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism)” अपनाएँ।
कचरा खुले में न फेंकें, झरनों या धार्मिक स्थलों में प्लास्टिक का उपयोग न करें, और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें।
FAQs – देहरादून पर्यटन से जुड़े सामान्य प्रश्न
1. Dehradun घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर देहरादून यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय है। इस दौरान मौसम न तो बहुत ठंडा होता है, न बहुत गर्म।
2. देहरादून में कौन-कौन से पर्यटन स्थल देखने योग्य हैं?
मुख्य आकर्षण हैं – सहस्रधारा, रॉबर्स केव, टपकेश्वर मंदिर, बुद्धा मंदिर, और FRI।
3. देहरादून से मसूरी कितनी दूर है?
देहरादून से मसूरी की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है, जो कार से 1.5 घंटे में तय की जा सकती है।
4. क्या देहरादून में बर्फबारी होती है?
देहरादून शहर में बर्फबारी बहुत कम होती है, लेकिन मसूरी और धनोल्टी में दिसंबर-जनवरी के दौरान बर्फबारी देखी जा सकती है।
5. क्या देहरादून परिवार के लिए सुरक्षित है?
हाँ, देहरादून एक सुरक्षित और शांत शहर है। यहाँ परिवार और बच्चों के लिए कई मनोरंजक स्थल उपलब्ध हैं।
6. देहरादून में कौन से स्थानीय व्यंजन प्रसिद्ध हैं?
काफुली, भट्ट की चुड़कानी, आलू के गुटके और सिंगोरी यहाँ के प्रसिद्ध व्यंजन हैं।
निष्कर्ष – देहरादून की यात्रा का समग्र अनुभव
Dehradun उत्तराखंड का एक ऐसा शहर है जो हर मौसम, हर उम्र और हर रुचि के लोगों के लिए कुछ खास लेकर आता है। चाहे आप झरनों के बीच रोमांच की तलाश में हों, मंदिरों में शांति चाहते हों, या बस प्रकृति की गोद में कुछ दिन बिताना चाहते हों — Dehradun Tourist Places आपकी हर इच्छा पूरी करेंगे।
यहाँ की हरियाली, सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय आतिथ्य इसे भारत के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक बनाते हैं।
🔗 अधिक जानकारी के लिए देखें – उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट
Haridwar
यूजीसी कानून पर रोक के बाद संतों का गंगा पूजन, 1 फरवरी को सवर्ण समाज से दुकानें बंद रखने की अपील

Haridwar News : देशभर में यूजीसी कानून भारी विरोध के बाज सुप्रीम कोर्ट स्टे लगा दिया है। जिसके बाद हरिद्वार में सतों ने गंगा पूजन किया है। इसके साथ ही संतों ने सवर्ण समाज से 1 फरवरी को दुकानें बंद रखने की अपील की है।
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यूजीसी कानून पर रोक के बाद संतों का गंगा पूजन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर रोक लगाए जाने के बाद परशुराम अखाड़े से जुड़े संतों और स्वर्ण समाज के लोगों ने हरिद्वार में गंगा पूजन किया।संतों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि ये कानून समाज को बांटने वाला था। गंगा तट पर एकत्र होकर संतों ने देश में शांति, एकता और भाईचारे की कामना की।
1 फरवरी को सवर्ण समाज से दुकानें बंद रखने की अपील
परशुराम अखाड़े से जुड़े संतों ने स्वर्ण समाज से एकजुट रहने का आह्वान किया है। इस दौरान सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने एक फरवरी को दुकानें बंद रखकर अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की।

परशुराम अखाड़े से जुड़े संतों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूजीसी कानून पूरी तरह गलत है और इससे भाई-भाई के बीच विभाजन पैदा किया जा रहा था, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
UGC कानून तुरंत लिया जाना चाहिए वापस
संतों का कहना है कि केंद्र सरकार को यह कानून तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा। सवर्ण समाज देशभर में इस मुद्दे को लेकर संगठित होकर संघर्ष करता रहेगा।
Pauri
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने किया घोस्ट विलेज पातली का दौरा, निर्जन गांवों आबाद बनाने का लिया संकल्प

Pauri News : उत्तराखंड में पलायन इस कदर हावी हो गया है कि दर्जनों गांव हर साल खाली हो रहे हैं और घोस्ट विलेज बन रहे हैं। जहां एक ओर लोग गांव छोड़कर बाहर जा रहे हैं तो वहीं गढ़वाल से लोक सभा सांसद एवं भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी घोस्ट विलेज पातली पहुंचे और गांव का दौरा किया। उन्होंने निर्जन गांवों आबाद बनाने का संकल्प लिया।
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गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने किया घोस्ट विलेज पातली का दौरा
गढ़वाल से लोक सभा सांसद अनिल बलूनी पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक स्थित पातली गाँव पहुंचे जो कि एक निर्जन गाँव (घोस्ट विलेज) है। पहाड़ में घोस्ट विलेज और पलायन की समस्या पर जन जागरण और प्रवासी ग्रामीणों का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए गढ़वाल सांसद ने पातली और आस पास के प्रवासी ग्रामीणों से संवाद कर इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
पातली गाँव के लोगों को जो गाँव से पलायन कर चुके हैं, वे सभी देहरादून और अन्य महानगरों से अपने गाँव पातली पहुंचे थे। आसपास के कई गाँवों से बड़ी संख्या में लोग भी पातली आये थे। अनिल बलूनी ने उनसे चर्चा की कि पहाड़ के गाँवों का सुनसान होना कितना खतरनाक है, अपनी आँखों के सामने अपने ही गाँव को घोस्ट विलेज बनते देखना कितना तकलीफदेह है। सभी प्रवासी ग्रामीणों की आंखों में अपने गांवों के घोस्ट विलेज बन जाने की पीड़ा स्पष्ट दिख रही थी। वे अपने गांव को बचाने को लेकर काफी भावुक थे।

निर्जन गांवों आबाद बनाने का लिया संकल्प
गढ़वाल सांसद ने लोगों से अपील की कि हम सबको कम से कम एक लोकपर्व और अपने परिवार के कम से कम एक सदस्य का जन्मदिन अपने गाँव में मनाना चाहिए। एक संतान का विवाह कार्यक्रम भी अपने गाँव में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हमने ऐसा किया तो हमारे बच्चे, हमारे परिवार के सदस्य भी स्वाभाविक रूप से अपने गाँव से जुड़ेंगे, अपनी विरासत और संस्कृति से जुड़ेंगे और अपने पुरुखों से परिचित होंगे। इससे घोस्ट विलेज भी गुलजार होंगे।
वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज से गांव किए जा रहे आबाद
गढ़वाल सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज और वेडिंग इन उत्तराखंड के जरिये पहाड़ को आबाद करने का बीड़ा उठाया है तो क्या हम अपने निजी आयोजनों के लिए भी अपना गांव नहीं आ सकते हैं? अनिल बलूनी ने कहा कि मैंने पहाड़ और अपने निर्जन गाँवों को आबाद करने के उद्देश्य से इगास और अपना वोट, अपने गाँव जैसे कार्यक्रम शुरू किये जिससे जमीन पर अच्छा बदलाव आया है।

पहाड़ के कम होते राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी की चर्चा
भाजपा सांसद ने ग्रामीणों से पहाड़ के कम होते राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहाड़ के गांवों को बचाना उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और यहाँ के राजनैतिक भविष्य के लिहाज से भी बेहद जरूरी है। हमारा सीमांत प्रदेश, चीन से सटा हुआ है। इस लिहाज से उच्च हिमालयी क्षेत्र के ग्रामीण, हमारे फुटसोल्जर सरीखे होते हैं। दूसरी वजह पहाड़ में निर्वाचन क्षेत्रों की लगातार घटती संख्या है।
पौड़ी जिले में पहले 8 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र थे जो अब घटकर 6 रह गए हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले समय में केवल 4 या 5 विधानसभा रह जाए। इसी प्रकार चमोली जिले में 4 विधानसभा थी, आने वाले समय में 2 रह जाए – ऐसा भी हो सकता है। नैनीताल, पिथौरागढ़ में भी विधानसभा सीटें कम हो रही है। ये हम लोगों के लिए सोचने का विषय है। पहाड़ की आवाज उठाने के लिए पहाड़ को आबाद रखना बेहद जरूरी है।
big news
उत्तराखंड में बड़ा सड़क हादसा, स्कूल बस की चपेट में आने से तीन युवकों की मौत

Khatima News : खटीमा में स्कूल बस ने बाइक को मारी टक्कर, हादसे में तीन युवकों की मौत
Khatima News : ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। यहां एक निजी स्कूल की बस ने बाइक को टक्कर मार दी। इस हादसे में तीन युवकों की मौत हो गई।
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खटीमा में स्कूल बस ने बाइक को मारी टक्कर
खटीमा में शुक्रवार शाम बड़ा हादसा हो गया। यहां निजी स्कूल बस की चपेट में आने से बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई। हादसे के बाद से ही बस का चालक मौके से फरार है। हादसे की जानकारी पर पहुंची पुलिस शव कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई कर रही है। घटना के बाद से युवकों के परिजनों में कोहराम मच गया है।
दर्दनाक हादसे में तीन युवकों की मौत
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार शाम को प्रतापपुर नंबर सात, थाना क्षेत्र नानकमत्ता निवासी देवेंद्र सिंह (24) पुत्र उमेश सिंह, राजेश सिंह (26) पुत्र दर्शन सिंह और राजेश सिंह (34) पुत्र पंचम सिंह बाइक से झनकट से अपने घरों को वापस लौट रहे थे।

इसी दौरान प्रतापपुर नंबर नौ के पास सामने से आ रही एक स्कूल बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस हादसे में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की जानकारी पर परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना से तीनों के परिवारों में मचा कोहराम
घटना के बाद से ही तीनों मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया है। बताया जा रहा कि देवेंद्र और राजेश राज मिस्त्री का काम करते थे। जबकि राजेश पुत्र दर्शन सिंह उन्हीं के साथ मजदूरी का काम करता था। इसीलिए तीनों साथ काम पर आते-जाते थे। हादसे के बाद से ही बस चालक फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है।
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