Udham Singh Nagar
उधमसिंह नगर: आरोपियों को दी कुर्सी…बच्चों को भगाया, पीड़िता के पिता ने एसएचओ पर धमकाने का लगाया आरोप।

उधमसिंह नगर – वायरल ऑडियो मामले में पीड़िता के पिता ने पंतनगर थाने के एसएचओ पर धमकाने का आरोप लगाया है। पिता के अनुसार सात जून को उसके बच्चे घर में अकेले थे। आधी रात में पड़ोसी, उनके बेटे और दामाद ने घर में घुसकर उनसे मारपीट की। सुबह मामले की शिकायत लेकर जब उनके बच्चे थाने पहुंचे तो एसएचओ ने आरोपियों को थाने बुलाकर कुर्सी पर बिठाया और बच्चों को जेल भेजने की धमकी देकर भगा दिया। बच्चे जब एसएसपी के यहां फरियाद लेकर पहुंचे तो उनको वहां से भी डांटकर भगा दिया गया। जब वह मेडिकल कराने जिला अस्पताल पहुंचे तो पुलिस ने डाॅक्टर से उनका मेडिकल करने से मना कर दिया।

विधायक तिलकराज बेहड़ ने रविवार को विवि परिसर के लैंबर्ट स्क्वायर अतिथि गृह में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पंतनगर थाने की स्थिति बेहद खराब हो गई है। यहां एक ऐसा अधिकारी एसएचओ बनकर बैठा था, जिसकी अश्लील हरकतें उजागर होने से मित्र पुलिस सहित पंतनगर विवि की छवि भी खराब हुई है। निलंबित एसएचओ के कार्यकाल में पंतनगर थाना दलाली का अड्डा बन गया था। एसएचओ उच्चाधिकारियों की शह और छुटभइए नेताओं के दबाव में पीड़ितों की आवाज कुचलकर वसूली करने में जुटा था। उसको दी गई शह भी जांच का विषय है।
विधायक बेहड़ ने कहा कि लगभग एक वर्ष पूर्व दो पड़ोसियों के बीच मारपीट के एक मामले में एक पक्ष के पिता-पुत्री जेल गए थे। मामले की पैरवी में उसकी छोटी बेटी का पंतनगर थाने में आना-जाना हुआ। एसएचओ ने युवती को असहाय समझकर उससे अश्लील बातें शुरू कर दीं। वायरल ऑडियो उसी समय की है। लगभग 20 दिन पहले उसी पड़ोसी की ओर से दोबारा घर में घुसकर मारपीट की शिकायत लेकर पीड़ित युवती पंतनगर थाने पहुंची। एसएचओ तहरीर लेना छोड़, उसको बाहर मिलने के लिए कहने लगा।
युवती ने एसएसपी डीआईजी सहित सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया। तब पीड़िता ने एसएचओ की पूर्व में रिकाॅर्ड की ऑडियो क्लिप उन तक पहुंचाई। उन्होंने मामले से डीजीपी को अवगत कराया। डीजीपी ने आरोपी एसएचओ के खिलाफ जांच कर निलंबन और मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए लेकिन दुर्भाग्य है कि अब तक एसएचओ के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया। चेताया कि आरोपी एसएचओ के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया तो तीन जुलाई को एसएसपी कार्यालय पर सांकेतिक धरना प्रदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ने पर हजारों समर्थकों के साथ सड़कों पर उतरेंगे।
विधायक तिलकराज बेहड़ ने बताया कि एसएचओ के निलंबन के बाद पंतनगर से ही दो और मामले सामने आए हैं, जिसमें उसने आरोपियों का साथ दिया और पीड़ित की आवाज दबा दी। एक मामले में दलित महिला की ओर से 15 अक्टूबर 2023 को तहरीर दी गई तहरीर के अनुसार दबंगों ने मारपीट कर उसके घर में ताला लगा दिया। वह दर-दर भटक रही है। मामले में एसएचओ की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर वह एसएसपी के पास गई, फिर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। दूसरे मामले में एक युवती के अंतिम संस्कार में पहुंचे पिता व भाइयों के साथ दामाद, उसके भाई और दोस्तों ने श्मशान घाट में ही मारपीट कर दी। थाने में तहरीर देने पहुंचे पीड़ित पर एसएचओ और सत्ताधारी दल के एक छुटभैया नेता ने दबाव डालकर जबरदस्ती सुलहनामे पर हस्ताक्षर करवाए।
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1109 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में उत्तराखंड में पड़ा CBI का छापा, काशीपुर में फैक्टरी में खंगाले दस्तावेज

CBI Raid in Uttarakhand : 1109 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में उत्तराखंड में CBI की कार्रवाई देखने को मिली है। CBI ने काशीपुर में फैक्टरी में दस्तावेज खंगाले हैं।
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1109 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में उत्तराखंड में पड़ा CBI का छापा
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 1109 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत उत्तराखंड के काशीपुर स्थित एक औद्योगिक इकाई में छापेमारी की। ये कार्रवाई ओडिशा की कंपनी गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज मामले के संबंध में की गई।
CBI ने काशीपुर में फैक्टरी में खंगाले दस्तावेज
बताया जा रहा है कि काशीपुर स्थित यह फैक्टरी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण औद्योगिक उपकरणों का निर्माण करती है। सीबीआई की जांच केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रही। एजेंसी ने इस मामले में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और ओडिशा के विभिन्न ठिकानों पर भी एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जुटाना है।
केनरा बैंक से जुड़ा हुआ है मामला
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी पर केनरा बैंक से फंड आधारित और गैर-फंड आधारित ऋण सुविधाओं के माध्यम से करीब 1109 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधिक ऋण प्राप्त करने के लिए कंपनी ने अपने स्टॉक का मूल्य वास्तविकता से अधिक दर्शाया और व्यापारिक देनदारियों से जुड़े आंकड़ों में कथित रूप से हेरफेर किया। इसके अलावा वित्तीय दस्तावेजों में भी भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने के आरोप लगाए गए हैं।
छापेमारी के दौरान जब्त किए गए कई दस्तावेज
सीबीआई का कहना है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया और उसे अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया गया। जांच में यह भी आरोप है कि बैंक खातों को नियमित और सक्रिय दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी वित्तीय लेनदेन किए गए, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
फिलहाल सीबीआई मामले की विस्तृत जांच कर रही है और छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बाजपुर में नकली दवाइयों का बड़ा भंडाफोड़, लाखों की जीवनरक्षक दवाएं और अवैध शराब बरामद

Bazpur News : उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और औषधि प्रशासन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर नकली एलोपैथिक दवाइयों के एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है।
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बाजपुर में नकली दवाइयों का बड़ा भंडाफोड़
एसटीएफ द्वारा जनस्वास्थ्य से जुड़े अपराधों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के निर्देशन में कुमाऊं यूनिट और औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने 18 जुलाई की शाम बाजपुर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित कोविल बायोटेक में छापेमारी की।
लाखों की जीवनरक्षक दवाएं और अवैध शराब बरामद
जांच के दौरान सामने आया कि यहां प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर नकली एलोपैथिक दवाइयों का निर्माण और पैकेजिंग की जा रही थी।
कार्रवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी धीरेंद्र, पुत्र ब्रह्म सिंह, को मौके से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी के पास एलोपैथिक दवाओं के निर्माण का वैध लाइसेंस नहीं था। आरोप है कि वह आयुर्वेदिक और फूड लाइसेंस का उपयोग कर नकली एलोपैथिक दवाइयां तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रहा था।

छापेमारी के दौरान लगभग एक लाख टैबलेट बरामद
जांच एजेंसियों के अनुसार, फैक्ट्री में ऐसी दवाइयां बनाई जा रही थीं जिनका उपयोग अम्लता, बैक्टीरियल संक्रमण, दर्द और सूजन, नसों के दर्द, प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं, कैल्शियम और विटामिन की कमी तथा रक्तवर्धक उपचार में किया जाता है। छापेमारी के दौरान लगभग एक लाख टैबलेट और करीब 15 हजार सिरप की बोतलें बरामद की गईं, जिन्हें बाजार में बेचने की तैयारी थी।
अवैध अंग्रेजी शराब और आबकारी विभाग के होलोग्राम बरामद
पूछताछ के आधार पर टीम ने एनएच-74 स्थित एक गोदाम में भी तलाशी अभियान चलाया। वहां से बड़ी मात्रा में तैयार नकली दवाइयां, पैकिंग सामग्री, अवैध अंग्रेजी शराब और आबकारी विभाग के होलोग्राम बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर अपने सहयोगियों के साथ हरियाणा से अवैध शराब मंगाकर उत्तराखंड में उसकी आपूर्ति करता था।
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कोर्ट में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया नायब नाजिर, 3500 की रिश्वत ने पहुंचाया जेल!

Bazpur News : ऊधम सिंह नगर के बाजपुर स्थित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) न्यायालय में गुरुवार को सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम की भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। टीम ने नायब नाजिर ओम चौहान को 3,500 रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
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कोर्ट में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया नायब नाजिर
बाजपुर में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। बाजपुर निवासी एक व्यक्ति ने हल्द्वानी स्थित सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके खिलाफ एनआई एक्ट के तहत एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका था।
जब वो राजीनामा दाखिल कराने कोर्ट पहुंचा, तो वहां तैनात नायब नाजिर ने कोर्ट फीस का हवाला देते हुए 3,500 रुपये की रिश्वत की मांग की।
3500 की रिश्वत ने पहुंचाया जेल!
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने मामले की गोपनीय जांच कराई। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक, सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी के निर्देश पर निरीक्षक के नेतृत्व में ट्रैप टीम का गठन किया गया।
गुरुवार को विजिलेंस की टीम ने योजना के तहत बाजपुर सिविल कोर्ट में कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम लेते समय नायब नाजिर ओम चौहान को रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

विजिलेंस टीम को देखकर मचा हंगामा
कार्रवाई के दौरान सादी वर्दी में पहुंची विजिलेंस टीम को देखकर न्यायालय परिसर में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई। अधिवक्ताओं ने कार्रवाई का विरोध जताया, जिसके बाद विजिलेंस अधिकारियों ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को हाईकोर्ट से प्राप्त अनुमति संबंधी दस्तावेज दिखाए। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई।
पुलिस मामले की जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर माहौल शांत कराया। इस दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने विजिलेंस टीम के व्यवहार पर आपत्ति भी जताई, जिस पर टीम के अधिकारियों ने न्यायालय में जाकर खेद व्यक्त किया। फिलहाल विजिलेंस आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।
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