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केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने उत्तराखंड की शानदार व्यवस्थाओं की सराहना की, सीएम धामी बोले- राष्ट्रीय खेलों से नई उम्मीदें और संभावनाएं बनीं !

हल्द्वानी: केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में अन्तरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स स्टेडियम गोलापार, हल्द्वानी में 38वें राष्ट्रीय खेल का समापन समारोह आयोजित किया गया। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी. ऊषा ने 38वें राष्ट्रीय खेल के समापन की घोषणा की। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री ने प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले सर्विसेज, महाराष्ट्र और हरियाणा को सम्मानित किया।

उत्तराखंड के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड के चारों धामों के देवी देवताओं को प्रणाम करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो गया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री ने देवभूमि को राष्ट्रीय खेलों के नक्शे पर 25वें स्थान से 7वें स्थान पर लाने का कार्य किया है। राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के विजेता खिलाड़ियों ने देवभूमि को खेल भूमि बनाया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने सभी उत्तराखंड के विजेता खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उत्तराखंड की मेजबानी का देशभर में गुणगान।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड की आयोजन समिति एवं खेल संगठनों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए पूरे देश में उत्तराखंड की तारीफ हो रही है। पूरा देश उत्तराखंड द्वारा की गई शानदार व्यवस्थाओं के गुणगान कर रहा है। भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद उत्तराखंड राज्य ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में इस कार्य को कुशलतापूर्वक सम्पन्न किया है। उन्होंने 38वें राष्ट्रीय खेल के सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हार और जीत का खेल से मतलब नहीं है। जीत का जज्बा और हार से निराश न होना, ये खेल का संदेश है। हारने वाले खिलाड़ियों के लिए अगली बार मेडल लाने का मौका है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में 38वें राष्ट्रीय खेलों में इको- फ्रेंडली प्रैक्टिसेज एवं इको फ्रेंडली गेम को धरातल में उतारा गया है। खिलाड़ियों के नाम पर पौधारोपण किया गया। राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों द्वारा कई नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए गए हैं, इन रिकॉर्डों से अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी भारत के लिए पदक की उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय खेलो की यह मशाल उत्तराखंड से अब मेघालय जाएगी। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने यह निर्णय लिया है कि नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों में कुछ खेलों के आयोजन से पूरे नॉर्थ ईस्ट को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने मेघालय के मुख्यमंत्री संगमा को आगामी राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।

हार से लें जीत की प्रेरणा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के वातावरण में सकारात्मक बदलाव आया है। देश भर के कई जिलों में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग की व्यवस्था, खिलाड़ियो को प्रोत्साहन और पारदर्शी चयन के माध्यम से आज विश्व के खेल पटल पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा भारत के खेलों का भविष्य उज्ज्वल है। खेलों में हर बार नए कीर्तिमान स्थापित हो इसकी व्यवस्था केंद्रीय खेल मंत्री ने की है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री मोदी ने फिट इंडिया और खेलो इंडिया के माध्यम से युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाया है। खेल हमें हारने के बाद जितने के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

प्रधानमंत्री को खेल मित्र मानता है हर खिलाड़ी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सफलता सिर्फ शारीरिक क्षमता से नहीं बल्कि दृढ़ निश्चय और मजबूत मन से प्राप्त होती है। अथक परिश्रम और निरंतर प्रयास खिलाड़ियों को आगे ले जाएगी। इन सभी के माध्यम से खिलाड़ी मेडल तक की यात्रा तय कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए। आज हर खिलाड़ी प्रधानमंत्री मोदी को खेल मित्र के रूप में मानता है। उन्होंने कहा 2014 में खेल बजट 800 करोड़ था, जो 2025 – 26 में खेल बजट 3800 करोड़ तक पहुंचाया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों में भी हमारे खिलाड़ियों ने तिरंगे का मान बढ़ाया है। खिलाड़ियों के मेडल से पता लगता है कि देश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और जीतने की भूख में बढ़ोतरी हुई है।

2036 में ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार है भारत।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि खेलो इंडिया के माध्यम से उत्तराखंड जैसे छोटे पहाड़ी राज्य ने इतने बड़े खेल आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह बताता है कि भारत का हर राज्य खेलने और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। इस राज्य से, अब फिर राष्ट्रीय खेल का आयोजन एक पहाड़ी राज्यों में जा रहा है। आज खिलाड़ी कई प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा भारत 2036 में ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार है। 2036 में ओलंपिक के अंदर उत्तराखंड के खिलाड़ी भी मेडल लाकर भारत के तिरंगे का मान बढ़ाएंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. सुषमा स्वराज एवं पुलवामा में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पुलवामा के जवानों की शहादत ने देश को सुरक्षित किया है। जवानों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक कर करारा जवाब दिया था। इसी के कारण पूरी दुनिया का भारत के प्रति नजरिया बदला है। इससे दुश्मनों को साफ संदेश गया कि भारत की सेना और सीमा से कभी खिलवाड़ नहीं करना है।

नेशनल गेम्स से उत्तराखण्ड में नई उम्मीदों, और नई संभावनाओं की एक नई शुरुआत -सीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ के अवसर पर हमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। आज इन खेलों के समापन के अवसर पर हमें देश के गृहमंत्री अमित शाह का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में उत्तराखंड में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का आयोजन हुआ। खेलों के इस महा समागम में देशभर से पधारे 16 हजार से अधिक एथलीट्स ने 35 खेल विधाओं में प्रतिभाग कर कुल 448 स्वर्ण 448 रजत तथा 594 कांस्य पदक जीते। कई खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर अनेक रिकॉर्ड स्थापित किए गए और भविष्य में भारत का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता रखने वाले बहुत से चैंपियन भी उभर कर सामने आए हैं। इन खेलों में जहां हमने पहली बार योग और मलखंब जैसे अपने पारंपरिक खेलों को शामिल करने का कार्य किया वहीं रात्रि काल में रिवर राफ़्टिंग की प्रतियोगिता का आयोजन कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय खेलों को ग्रीन गेम्स की थीम पर आयोजित किया गया। इस आयोजन में प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करने के साथ ही बिजली के लिए सोलर एनर्जी का उपयोग भी किया। खिलाड़ियों को दिए गए मेडल को ई-वेस्ट और खेल किटों को रीसाइकिल्ड पदार्थों से तैयार किया गया। ट्रांसपोर्टेशन के लिए ई-वाहनों का प्रयोग भी किया गया। 2.77 हेक्टेयर वन क्षेत्र को ’खेल वन’ के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें प्रत्येक पदक विजेता खिलाड़ी के नाम से रूद्राक्ष के पेड़ लगाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस राष्ट्रीय खेल में देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी और ऋषिकेश जैसे मैदानी शहरों के साथ ही अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और टिहरी जैसे सुदूर पहाड़ी स्थानों में भी खेल स्पर्धाएं आयोजित की गई। चकरपुर जैसे एक छोटे से कस्बे में भी राष्ट्रीय खेलों की प्रमुख स्पर्धा का आयोजन हुआ। राष्ट्रीय खेल में जितने भी वाटर स्पोर्ट्स के इवेंट्स हुए, सभी को उत्तराखंड की हाई एल्टिट्यूड पर स्थित झीलों एवं नदियों में आयोजित किया गया। इन खेलों के आयोजन के लिए अस्थाई निर्माण की बजाय प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थाई स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रयास किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों को सफलतापूर्वक आयोजन के साथ उत्तराखंड ने इन खेलों में 24 स्वर्ण पदकों के साथ रिकॉर्ड 103 पदक अर्जित किए। इन परिणामों से हमारे युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि “अतिथि देवो भवः“ की प्राचीन परंपरा के अनुसार खेलों के आयोजन के दौरान प्रयास किया गया कि विभिन्न राज्यों से पधारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को किसी भी प्रकार की कोई समस्या न हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय खेल में आये खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ देवभूमि उत्तराखंड से अपने इस रिश्ते को बनाए रखेंगे और भविष्य में सपरिवार उत्तराखण्ड की नैसर्गिक सुंदरता को देखने अवश्य आएंगे। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों का समापन आप सभी खिलाड़ियों के लिए खेल अवसरों का अंत नहीं, बल्कि नई उम्मीदों, नए संकल्पों और नई संभावनाओं की एक नई शुरुआत है।

उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेल के आयोजन की जिम्मेदारी देने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा खेल मंत्री मनसुख मांडविया का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान देने वाले भारतीय ओलंपिक संघ, उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन, खेल विभाग और सभी वॉलेंटियर्स का भी आभार व्यक्त किया। प्रस्तावित 39वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के लिए मेघालय को भी उन्होंने अग्रिम शुभकामनाएं दी।

केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया ने 38 राष्ट्रीय खेलों के शानदार आयोजन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजना के बाद देवभूमि उत्तराखण्ड खेलभूमि भी बन गई है। उन्होंने इस राष्ट्रीय खेल में पदक प्राप्त करने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश स्पोर्ट्स हब बने इसकी शुरूआत आज से हुई है।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी. ऊषा ने कहा कि बहुत कम समय मिलने के बावजूद भी उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय खेल की हर स्पर्धा का शानदार आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में खेल और खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि खिलाड़ियों ने संकल्प से शिखर तक को आत्मसात कर उत्तराखण्डियों को गर्व से अभिभूत किया। राज्य की रजत जयंती को स्वर्णिम बनाया है। हमारे खिलाड़ियों ने उत्तराखंड को खेल भूमि के रूप में आगे बढ़ाया है। उत्तराखंड की जनता ने राष्ट्रीय खेल के महा आयोजन को सफल बनाया है
इस अवसर पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट उपस्थित थे।
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सर्पदंश से बच सकती है जान! वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन, जानिए क्या करें

Haldwani News : उत्तराखंड में मानसून के साथ सर्पदंश के मामलों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। लगातार हो रही बारिश के कारण सांप आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल है। ऐसे में वन विभाग ने लोगों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1926 जारी किया है।
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सर्पदंश से बचाव के लिए हेल्पलाइन नंबर हुआ जारी
बरसात का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के कई इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। खेतों, जंगलों और रिहायशी क्षेत्रों में सांप निकलने से लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है। कई बार घबराहट और अंधविश्वास के कारण मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों लोगों से सतर्क रहने और सही समय पर सही कदम उठाने की अपील कर रहे हैं। हल्द्वानी वन प्रभाग ने जहां सांपों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए विशेष टीमें तैयार की हैं, वहीं सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि वन प्रभाग की पांचों रेंजों में सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए प्रशिक्षित टीमें तैनात की गई हैं। पिछले एक वर्ष में आबादी वाले क्षेत्रों से करीब 700 सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है।

हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से की अपील
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से अपील की कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उसे मारने की कोशिश करें। तत्काल वन विभाग के टोल फ्री नंबर 1926 पर सूचना दें, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ देती है।
अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज पहुंचे अस्पताल
सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. परमजीत सिंह के अनुसार इस वर्ष अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। जून में 22 औऱ जुलाई माह में 38 सबसे अधिक सर्पदंश के मरीज अस्पताल में एडमिट हुए हैं, उन्होंने बताया कि यदि मरीज को समय पर अस्पताल लाया जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और एंटी स्नेक वेनम (ASV) मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। अब तक कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि, दो मरीजों की मौत इसलिए हुई क्योंकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने में काफी देर हो गई थी।
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हल्द्वानी में खौफनाक मंजर! उफनती भाखड़ा नदी में फंसे दो लोग, बाल-बाल बची जान

Haldwani News : लगातार हो रही बारिश अब उत्तराखंड में खतरे की घंटी बनती जा रही है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने कुछ देर के लिए हर किसी की सांसें रोक दीं। फतेहपुर क्षेत्र की उफनती भाखड़ा नदी पार करते समय दो लोग तेज बहाव में फंस गए।
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हल्द्वानी में उफनती नदी में बहने ही वाले थे दो लोग
नैनीताल जिले के फतेहपुर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच सोमवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया। भाखड़ा नदी पार करने के दौरान बाइक सवार दो लोग अचानक तेज बहाव में फंस गए। स्थिति गंभीर होती देख आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से पड़ी जान खतरे में
इन दिनों मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इसी बीच फतेहपुर की भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से दो लोगों की जान खतरे में पड़ गई।

बाइक के साथ नदी पार करने का कर रहे थे प्रयास
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों व्यक्ति बाइक के साथ नदी पार करने का प्रयास कर रहे थे। तभी नदी का बहाव तेज हो गया और वे बीच धारा में फंस गए। उन्हें संघर्ष करते देख आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई की बदौलत दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बरसात के दौरान नदी का बढ़ जाता है जलस्तर
ग्रामीणों का कहना है कि खेती, स्कूल, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए उन्हें रोज इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से हर बार दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द स्थायी पुल निर्माण की मांग दोहराई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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हल्द्वानी के लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा, रेत में दबने से मजदूर की मौत

Haldwani News : उत्तराखंड के लालकुआं में एक स्टोन क्रशर पर हुए दर्दनाक हादसे ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्दूचौड़ निवासी 30 वर्षीय मजदूर पवन सिंह की काम के दौरान रेत में दबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि डंपर में रेत भरने की प्रक्रिया के दौरान हुई कथित लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
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लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा
लालकुंआ में दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। मिली जानकारी क मुताबिक हल्दूचौड़ निवासी पवन सिंह रोज की तरह सुबह काम पर गया था। स्टोन क्रशर में वह डंपर के किनारों पर कट्टे लगा रहा था ताकि रेत बाहर न गिरे।
रेत में दबने से मजदूर की मौत
इसी दौरान लोडर चालक ने कथित तौर पर बिना ये देखे कि डंपर में कोई व्यक्ति मौजूद है या नहीं, उसमें रेत डालनी शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में पवन भारी मात्रा में रेत के नीचे दब गया। बरसात के कारण रेत गीली और अधिक भारी थी, जिससे उसके बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं बची।
रेत खाली करते समय चला हादसे का पता
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ समय बाद जब डंपर से रेत उतारी जा रही थी, तब मजदूरों को रेत के नीचे पवन के दबे होने की जानकारी मिली। इसके बाद सभी ने मिलकर उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। माना जा रहा है कि रेत के दबाव और दम घुटने की वजह से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद कार्यस्थल पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मशीन चलाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता कि डंपर के अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भारी मशीनों के संचालन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना आवश्यक है। मशीन शुरू करने से पहले कर्मचारियों की मौजूदगी की पुष्टि करना, आपसी समन्वय बनाए रखना और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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