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उत्तराखंड: झगड़ालू छात्र नेताओं पर पुलिस लगाएगी अंकुश, प्रशासन की ओर से इन छात्र नेताओं को जारी किए जाएंगे नोटिस

देहरादून – छात्र संघ चुनावों से पहले पुलिस ने झगड़ालू छात्र नेताओं पर अंकुश लगाने की तैयारी की है। विभिन्न छात्र संगठनों के कुल 28 छात्र नेताओं को मुचलका पाबंद करने की कार्रवाई पुलिस की ओर से की गई है। अब जल्द ही प्रशासन की ओर से इन छात्र नेताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे।
इसके अलावा हर थाना प्रभारी को ऐसे सभी छात्र नेताओं की निकटतम निगरानी करने के निर्देश कप्तान की ओर से दिए गए हैं।एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि अगले माह से छात्र संघ चुनाव शुरू हो सकते हैं। इसके लिए सभी महाविद्यालयों में तैयारियां भी जोरों पर चल रही हैं। मगर, इसके लिए पुलिस ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
हर बार छात्र संघ चुनावों में झगड़ा, मार पिटाई व बलवा आदि की घटनाएं सामने आती हैं। पुलिस जांच में इन सब मामलों में कुछ गिने चुने छात्र नेताओं के नाम सामने आते हैं। जांच में यह भी सामने आता है कि इनकी प्रत्यक्ष रूप से भूमिका हो या नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से जरूर रहती है। ऐसे में पुलिस इन सभी छात्र नेताओं की निगरानी में जुट गई है।
इस संबंध में थाना डालनवाला पुलिस को झगड़ालू छात्र नेताओं की सूची तैयार करने को कहा गया था। ताकि, इनके खिलाफ पहले से ही मुचलका पाबंद करने की तैयारी की जा सके। पुलिस ने इस क्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(एबीवीपी) के पांच, नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के 13, आर्यन ग्रुप के आठ, यूवीएस और दिवाकर ग्रुप के एक-एक छात्र नेता को इस सूची में शामिल किया है।
इन छात्र नेताओं के कारण शांति व्यवस्था भंग होने की संभावना के मद्देनजर सभी के खिलाफ मुचलका पाबंद करने की कार्रवाई की गई है। अब प्रशासन इसमें अगली कार्रवाई करेगा। एसएसपी ने बताया कि यह सूची और भी लंबी हो सकती है। इसकी तैयारियां की जा रही हैं।
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देहरादून: वरिष्ठ पत्रकार रामप्रताप मिश्र साकेती का निधन, पत्रकारिता में योगदान रहेगा याद

देहरादून: वरिष्ठ पत्रकार रामप्रताप मिश्र ‘साकेती’ के निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है. पिछले कुछ समय से बीमारी के बाद उनका रविवार को निधन हो गया. उनके निधन की खबर मिलते ही पत्रकारों और परिजनों में शोक छाया है.
मुख्य बिंदु
वरिष्ठ पत्रकार साकेती का निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूर्णीय क्षति
रामप्रताप मिश्र साकेती ने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन में कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं के साथ काम किया. उन्होंने माया, पांचजन्य, पंजाब केसरी और विजन 2020 राष्ट्रीय मासिक पत्रिका सहित अनेक प्रकाशनों में अपनी लेखनी का प्रभाव छोड़ा. उनकी लेखन शैली और विचारों ने पाठकों पर गहरी छाप छोड़ी, जिसके कारण वे पत्रकारिता जगत में एक सम्मानित नाम बन गए.
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साकेती ने लंबे समय तक पत्रकारिता जगत में अपनी सेवाएं दीं और उनकी लेखनी से अनेक पाठक प्रभावित हुए. उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए कई पत्रकार आज पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं. इसलिए उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा.
सकती के निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने जताया शोक
इसके आलावा, रामप्रताप मिश्र ‘साकेती’ ने सूचना विभाग की पत्रिका का संपादन भी किया था. वे अपने सरल और विनम्र स्वभाव के लिए भी जाने जाते थे. उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी शोक व्यक्त किया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. साथ ही उन्होंने शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की कामना की.
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महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने किया दुःख व्यक्त
महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने भी साकेती के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी. उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की. इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न पत्रकार संगठनों ने भी उनके निधन को पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.
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डीजी आईटीबीपी ने सीएम धामी से की मुलाकात, सीमांत क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा समन्वय पर हुई चर्चा

Dehradun News : रविवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर राज्य की सीमाओं की सुरक्षा, सीमांत क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आपदा प्रबंधन में समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
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डीजी आईटीबीपी ने सीएम धामी से की मुलाकात
डीजी आईटीबीपी ने आज सीएम धामी से मुलाकात की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा में आईटीबीपी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्य में आईटीबीपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में तैनात जवान न केवल देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों में भी सहभागी बन रहे हैं।
सीमांत क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा समन्वय पर हुई चर्चा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत जिलों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, स्वास्थ्य, संचार और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास निरंतर जारी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और आईटीबीपी के बीच बेहतर समन्वय से सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।

डीजी आईटीबीपी शत्रुजीत कपूर ने मुख्यमंत्री को सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं, आधुनिक संसाधनों तथा बल की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आईटीबीपी को दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी समन्वय बनाए रखने का आश्वासन दिया।
राहत और बचाव कार्यों में आईटीबीपी की सक्रिय भूमिका पर हुई चर्चा
बैठक में आपदा प्रबंधन, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में आईटीबीपी की सक्रिय भूमिका पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय आईटीबीपी ने सदैव तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर प्रदेशवासियों का विश्वास जीता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सुरक्षित सीमा, सशक्त उत्तराखंड” के संकल्प के साथ राज्य सरकार सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य कर रही है, ताकि सीमांत क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास की त्रिस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
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संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम, ई-संस्कृत संभाषण शिविर का किया शुभारंभ

Dehradun News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति भी विद्यार्थियों को प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र और ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ और उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया।
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संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान ऊंचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक, रामायण से लेकर महाभारत तक, आयुर्वेद से लेकर खगोलशास्त्र तक, गणित से लेकर दर्शनशास्त्र तक हमारे ज्ञान की जड़ें संस्कृत में ही निहित हैं। संस्कृत हमारे अतीत की स्मृति मात्र नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की संभावना भी है।
संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक व्याकरण है। पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी आज भी विश्व के भाषाविदों के लिए आश्चर्य का विषय है। आज विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत की वैज्ञानिकता पर विभिन्न प्रकार के शोध किए जाते हैं।

ई-संस्कृत संभाषण शिविर का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के विशेष प्रयास किए गए हैं। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
एआई के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में सबके सामने रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत अध्ययन और शोध का केंद्र रही है। राज्य में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। राज्य में पहली बार ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत की गई है।

राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे नवाचार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन, अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशाला और संस्कृत छात्र प्रतियोगिता जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग एवं रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर इसे नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किये हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं को बढ़ाया गया है। प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम बनाये गये हैं। संस्कृत को बढ़ावा देने के अलग स्ट्रीम बनाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं।
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