Uttarakhand
मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ निकाला जुलूस, आंगनबाड़ी कार्यकत्री हुई बेहोश

उत्तरकाशी – राजकीय कर्मचारी घोषित करने और मानदेय बढ़ोतरी की मांग पूरी नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। शुक्रवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जुलूस निकाला। इस दौरान एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता सेमवाल बेहोश हो गई।

जुलूस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पुतलों के साथ निकाला गया। शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ जुलूस बस अड्डे तक पहुंचा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सेविका व मिनी आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन के बैनर तले जनपद भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुईं।
कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंककर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 19 फरवरी से कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। जिनके धरने को आज 25 दिन पूरे हो चुके हैं। अब लोकसभा चुनाव के लिए कभी भी आचार संहिता लगने और मांगे पूरी न होने पर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
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Uttarakhand में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से दहशत, 25 सालों में 1,264 लोगों की मौत

Uttarakhand : प्रदेश में जंगली जानवरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बीते कुछ समय से पहाड़ों पर गुलदार का आतंक इतना बढ़ गया है कि लोगों को रात के समय तो छोड़ो दिन में भी अपने घरों से बाहर निकलने में डर लग रहा है। आलम ये है कि कुछ जिलों में जंगली जानवरों के हमलों के कारण तो स्कूलों का समय भी बदलना पड़ा है।
Uttarakhand में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से दहशत
मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं Uttarakhand में लगातार बढ़ रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार व भालू, मैदानी क्षेत्रों में हाथी ने कई लोगों को मौत के घाट उतारा है। पिछले 25 वर्षों के आंकड़े डरावने तो है ही लेकिन इस साल की घटनाएं उससे भी ज्यादा भय का माहौल पैदा कर रही है। जिस कारण लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
25 सालों में 1,264 लोगों की मौत
उत्तराखंड के पहाड़ी जनपदों के कई गांव में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। दिन ढलते ही आवाजाही बंद हो जाती है जिसे देख ऐसा लगता है कि मानो कर्फ्यू लग गया हो। इसके पीछे की वजह प्रदेश में लगातार बढ़ता मानव वन्यजीव संघर्ष है। दिन दोपहरी में भी जंगली जानवर किसी ने किसी को अपने निवाला बना रहे हैं। इसका ताजा उ उदाहरण रामनगर का है जहां बीते शनिवार को एक व्यक्ति पर गुलदार ने हमला कर दिया। इसे व्यक्ति की किस्मत ही कहेंगे कि आस-पास मौजूद लोगों के कारण उसकी जान बच गई।
ये हमला पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि ऐसे हमले Uttarakhand में पहाड़ों से लेकर मैदानों तक अब एक आम बात हो गए हैं। बीते 25 वर्षों के आंकड़े पर नजर डालेंगे तो सामने आता है कि जंगली जानवरों ने एक या दो नहीं बल्कि हजारों लोगों को अपना निवाला बनाया है। इन 25 वर्षों में वन्यजीवों ने 1264 व्यक्तियों को मौत के घाट उतारा है, जबकि मौत को मात देते हुए 6519 लोग घायल हुए हैं।
Uttarakhand में इस साल अब तक 64 की मौत
2025 के आंकड़ों ही पर नजर डाली जाए तो ये तस्वीर और भी भयावह है। इस बार जंगली जीवों के हमले से 64 परिवारों के चिराग बुझे हैं। खास तौर पर इस साल भालू का आतंक ज्यादा ही देखने को मिला है। भालू के हमले से नौ लोगों की जान गई है जबकि 25 लोग घायल हुए हैं।
राज्यसभा से लेकर लोकसभा तक गूंजा Uttarakhand Wildlife Attacks का मुद्दा
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों को लेकर भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया है। ये मामला इतना गंभीर है कि न केवल उत्तराखंड विधानसभा के अंदर बल्कि राज्यसभा और लोकसभा के भीतर भी गूंजा है। राज्यसभा में महेंद्र भट्ट ने तो वहीं लोकसभा में अनिल बलूनी ने इस प्रकरण को उठाया है।
ये हाल तब है जब उत्तराखंड 65 फीसद वन आच्छादित है, विभाग में अफसरों की भी लंबी फौज है। लेकिन इसके बावजूद लोग खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं और प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल बयानबाजी में मशगूल हैं। लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि कब तक जंगली जानवरों के हमले में उनके अपने जान गंवाते रहेंगे लेकिन वन मंत्री इसका जवाब तक नहीं दे पा रहे। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन कर्फ्यू जैसे हालातों से प्रदेश के लोग कब मुक्त होंगे? इससे भी गंभीर सवाल ये है कि कुंभकर्णी निंद्रा में सोया वन विभाग आखिर कब जागेगा ?
Uttarakhand Wildlife Attacks – FAQs
Q1. उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले क्यों बढ़ रहे हैं?
उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं—जंगलों का सिकुड़ना, बढ़ती जनसंख्या, जानवरों का मानव बस्तियों की ओर आना, और भोजन-पानी की तलाश में गांवों में प्रवेश करना।
Q2. सबसे ज्यादा हमले किन जंगली जानवरों द्वारा किए जा रहे हैं?
पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार (तेंदुआ) और भालू, जबकि मैदानी क्षेत्रों में हाथी लोगों पर सबसे अधिक हमले कर रहे हैं।
Q3. पिछले 25 वर्षों में कितने लोग जंगली जानवरों के हमलों में मारे गए हैं?
पिछले 25 सालों में 1,264 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा 6,519 लोग घायल हुए हैं।
Q4. क्या 2025 में भी ऐसे हमलों में बढ़ोतरी हुई है?
हाँ, 2025 में स्थिति और भयावह हो गई है। इस वर्ष अब तक 64 लोगों की मौत जंगली जानवरों के हमलों से हो चुकी है।
Q5. इस साल (2025) कौन सा जानवर सबसे ज्यादा हमला कर रहा है?
2025 में भालू के हमले सबसे अधिक सामने आए हैं—
- 9 लोगों की मौत
- 25 लोग घायल
Q6. क्या इन हमलों का असर स्थानीय जीवन पर पड़ रहा है?
हाँ, बेहद गंभीर असर पड़ रहा है।
कई पहाड़ी गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है।
कुछ जिलों में स्कूलों के समय भी बदले गए हैं क्योंकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है।
Q7. क्या हाल ही में कोई बड़ा हमला सामने आया है?
हाँ, रामनगर में एक व्यक्ति पर गुलदार ने हमला किया था। वह व्यक्ति मुश्किल से मौत के मुंह से बाहर निकल पाया—उसका बयान भी सामने आया है।
Breakingnews
Ramnagar में अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन, पुलिस ने 13 प्रदर्शनकारियों को किया गिरफ्तार

Ramnagar : रामनगर के ग्राम पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गूलरघटटी के समीप मंगल बाजार चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार, पुलिस और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
Ramnagar में अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोग गिरफ्तार
रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अतिक्रमण का विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस ने लोगों के साथ मारपीट की और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को कार्रवाई से पहले वहां बसे परिवारों के पुनर्वास की योजना बनानी चाहिए थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटने के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं और कड़ाके की ठंड में उनके सामने रहने, खाने और पीने तक की समस्या खड़ी हो गई है। इतना ही नहीं, कई जगहों पर बिजली भी काट दी गई है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे पीड़ित परिवारों से मिलने और उनकी मदद करने के लिए मौके पर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस द्वारा उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। इससे आक्रोश और बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों ने इसे जनता और मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले में वे अब न्यायालय की शरण भी लेंगे।
प्रद्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान मौके पर सीओ सुमित पांडे और कोतवाल सुशील कुमार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पुरुषों और महिलाओं सहित 13 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया। पुलिस की बस में बैठते ही सभी गिरफ्तार लोगों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
Ramnagar Encroachment Protest – FAQs (
1. रामनगर में विरोध किस वजह से हुआ?
वन विभाग द्वारा पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
2. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को क्यों हिरासत में लिया?
अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को भीड़ बढ़ने और तनावपूर्ण स्थिति के चलते पुलिस ने हिरासत में लिया।
3. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया।
4. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को कार्रवाई से पहले वहां रहने वाले परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
5. अतिक्रमण हटने के बाद प्रभावित परिवारों की क्या स्थिति है?
कई परिवारों के बेघर होने और ठंड में रहने, खाने, पीने जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया गया है। कुछ क्षेत्रों में बिजली काटे जाने की बात भी सामने आई है।
6. प्रदर्शनकारियों को किस बात से सबसे ज्यादा नाराज़गी है?
पुलिस द्वारा उन्हें प्रभावित परिवारों से मिलने से रोकने पर प्रदर्शनकारियों का आक्रोश बढ़ गया।
Dehradun
सशस्त्र सेना झंडा दिवस आज, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लगाया फ्लैग

सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से लोक भवन में निदेशक, सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास श्याम सिंह ने मुलाकात कर फ्लैग लगाया।
देशभर में मना जा रहा सशस्त्र सेना झंडा दिवस
देशभर में आज सशस्त्र झंडा दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देहरादून में लोक भवन में निदेशक, सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास श्याम सिंह ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से मुलाकात कर उन्हें फ्लैग लगाया। इस दौरान राज्यपाल ने सशस्त्र सेना झंडा कोष में सहयोग राशि देते हुए प्रदेशवासियों से भी अंशदान देने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने दी सशस्त्र सेना झंडा दिवस की शुभकामनाएं
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रदेश के सभी सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिजनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सशस्त्र सेना झंडा दिवस हमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की याद दिलाता है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य भूमि है और हम सब का प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश के पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिजनों की अधिक से अधिक सहायता की जाए।
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