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मसूरी नगर पालिका सभासद गीता कुमाई ने क्षेत्र की जनता की समस्या के निराकरण को लेकर लगाई चौपाल।

देहरादून – मसूरी नगर पालिका की सभासद गीता कुमाई द्वारा क्षेत्र की समस्या को लेकर एक होटल के सभागार में चौपाल का आयोजन किया। जिसमें संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ क्षेत्र की जनता ने प्रतिभाग किया। चौपाल में क्षेत्र की जनता ने बताया कि वार्ड मेें सड़कों के हाल खराब है। बड़े-बड़े गड्ढे हो रखे जिससे आवागमन में काफी दिक्कतें हो रही है वह कई बार दोपहिया वाहन दुर्घाटनग्रस्त हो गए है जिसमें कई लोग चोटिल भी हो चुके है। वार्ड में कई जगह सीवरेज खुले में बह रहा है, जिससे लोगों को गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों ने बताया कि मसूरी हेमटन कोर्ट के पास लोग लोगों द्वारा सड़क किनारे खुले में शौच किया जा रहा है जिससे सडक किनारे बदबू और गंदगी के कारण लोगो को आने जाने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कई जगह स्ट्रीट लाइट भी नहीं जल रही है जिससे लोगों को दिक्कत हो रही है। सभासद गीता कुमाई ने अधिकारियों से आग्रह किय कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर गंभीर हो वह लोगों के द्वारा बताई गई समस्याओं का तत्काल निराकरण किये जाने के लिये आवश्यक कार्यवाही करे।
गीता कुमाई ने कहा कि उनको जनता ने क्षेत्र के विकास और जनता को हो रही समस्या का निराकरण किये जाने को लेकर उनको चुन कर पालिका में भेजा है। वह एक जनप्रतिनिधि अधिकारियों और जनता के बीच में सेतु का काम करते है जिससे कि जनता की समस्याओं और विकास हो सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए तत्पर है परंतु नगर पालिका में कई महीनों तक बोर्ड मीटिंग ना होने के कारण क्षेत्र के विकास काफी प्रभावित हो गए हैं उन्होंने कहा कि कोई भी प्रस्ताव बिना बोर्ड बैठक के पास नहीं होता है जिस वजह से क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं उन्होंने नगरपालिका के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी से आग्रह किया है कि वह हर माह बोर्ड मीटिंग का आयोजन जरूर करें जिससे जनता को समस्याओं को बोर्ड मीटिंग में रखकर उसका निराकरण कराया जा सके।
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Ramnagar में अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन, पुलिस ने 13 प्रदर्शनकारियों को किया गिरफ्तार

Ramnagar : रामनगर के ग्राम पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गूलरघटटी के समीप मंगल बाजार चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार, पुलिस और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
Ramnagar में अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोग गिरफ्तार
रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अतिक्रमण का विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस ने लोगों के साथ मारपीट की और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को कार्रवाई से पहले वहां बसे परिवारों के पुनर्वास की योजना बनानी चाहिए थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटने के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं और कड़ाके की ठंड में उनके सामने रहने, खाने और पीने तक की समस्या खड़ी हो गई है। इतना ही नहीं, कई जगहों पर बिजली भी काट दी गई है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे पीड़ित परिवारों से मिलने और उनकी मदद करने के लिए मौके पर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस द्वारा उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। इससे आक्रोश और बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों ने इसे जनता और मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले में वे अब न्यायालय की शरण भी लेंगे।
प्रद्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान मौके पर सीओ सुमित पांडे और कोतवाल सुशील कुमार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पुरुषों और महिलाओं सहित 13 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया। पुलिस की बस में बैठते ही सभी गिरफ्तार लोगों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
Ramnagar Encroachment Protest – FAQs (
1. रामनगर में विरोध किस वजह से हुआ?
वन विभाग द्वारा पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
2. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को क्यों हिरासत में लिया?
अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को भीड़ बढ़ने और तनावपूर्ण स्थिति के चलते पुलिस ने हिरासत में लिया।
3. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया।
4. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को कार्रवाई से पहले वहां रहने वाले परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
5. अतिक्रमण हटने के बाद प्रभावित परिवारों की क्या स्थिति है?
कई परिवारों के बेघर होने और ठंड में रहने, खाने, पीने जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया गया है। कुछ क्षेत्रों में बिजली काटे जाने की बात भी सामने आई है।
6. प्रदर्शनकारियों को किस बात से सबसे ज्यादा नाराज़गी है?
पुलिस द्वारा उन्हें प्रभावित परिवारों से मिलने से रोकने पर प्रदर्शनकारियों का आक्रोश बढ़ गया।
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नेत्र दान (Eye Donation) कर हमेशा याद रहेगा जगदीश, पीआरडी जवान का समाज को सन्देश
पिथौरागढ़: नेत्र दान ( Eye Donation ) मरने के बाद भी आंखों का दान करने से किसी की अंधेरी जिंदगी को रोशन हो सकती है। ऐसा ही एक मामला पिथौरागढ़ के बेरीनाग से सामने आया है। बेरीनाग नगर मुख्यालय में रहने वाले 46 वर्षीय पीआरडी जवान जगदीश सिंह डोबाल ने अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में नेत्र दान का फैसला लिया।
कौन थे जगदीश सिंह डोभाल
जगदीश सिंह डोभाल पिथौरागढ़ के बेरीनाग नगर मुख्यालय में रहता था। जो प्रान्तीय रक्षक दल का जवान था। जगदीश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेरीनाग में एम्बुलेंस चालक के पद पर तैनात था। जगदीश स्वास्थ्य कर्मी होने के साथ ही बेहतरीन रंगकर्मी और पशु प्रेमी था। जगदीश ने बेरीनाग में आयोजित रामलीला में 5 वर्षों तक सुग्रीव का अभिनय किया। मृतक जगदीश के साथी बताते हैं कि जगदीश सेवा के दौरान से ही अपने शरीर के अंग दान करने कि बातें करता था।
लगातार स्वास्थ्य खराब होने के चलते लिया फैसला
बेरीनाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात 46 वर्षीय जगदीश का अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर परिजन उसे देहरादून के एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया, जिसे देखते हुए जगदीश ने अपनी आंखों को दान ( Eye Donation ) करने का निर्णय लिया। लेकिन जगदीश के इस फैसले से परिजन भी हैरान हो गए। जगदीश के नेत्र दान करने के फैसले की अनेक संगठनों ने सराहना की।
क्या होता है नेत्रदान ( Eye Donation )
नेत्रदान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी आँखों से कॉर्निया निकालकर आई बैंक में संरक्षित किया जाता है। और बाद में जिनकी दृष्टि कॉर्निया खराब हो जाती है सर्जरी के माधयम से उनकी कॉर्निया को बदल दिया जाता है। एक व्यक्ति के नेत्र दान करने से दो व्यक्तियों की आँखों को रोशनी मिल सकती है।

कैसे पूरी होती है प्रक्रिया
- मृत्यु के 6 घंटे के अंदर आंखें निकाली जाती हैं
- मृत्यु के बाद परिजन आई बैंक को सूचना देते हैं।
- आई बैंक की टीम घर/अस्पताल पहुँचती है।
- मृतक की आँखों से केवल कॉर्निया निकाला जाता है (15–20 मिनट)।
- कॉर्निया आई बैंक में परीक्षण व संरक्षण किया जाता है।
- उपयुक्त मरीज को कॉर्निया प्रतिरोपित किया जाता है।
- एक दाता से दो लोगों को रोशनी मिलती है।
FAQs on Eye Donation (Netra Dan)
- 1. नेत्रदान (Eye Donation) क्या है?
- नेत्रदान वह प्रक्रिया है जिसमें मृत्यु के बाद दाता के कॉर्निया को निकालकर किसी अंधे व्यक्ति को दृष्टि देने के लिए प्रतिरोपित किया जाता है।
- 2. नेत्रदान कब और कैसे किया जाता है?
- मृत्यु के 6–8 घंटे के भीतर आई बैंक को कॉल किया जाता है, और उनकी टीम घर/अस्पताल आकर कॉर्निया सुरक्षित रूप से निकालती है।
- 3. क्या नेत्रदान से शरीर के रूप में बदलाव आता है?
- नहीं, केवल कॉर्निया निकाला जाता है, जिससे चेहरे पर कोई बदलाव नहीं होता।
- 4. कौन नेत्रदान कर सकता है?
- लगभग हर आयु और अधिकांश स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोग नेत्रदान कर सकते हैं।
- 5. नेत्रदान से कितने लोगों को लाभ मिलता है?
- एक दाता के कॉर्निया से दो लोगों की दृष्टि वापस लाई जा सकती है।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की राज्यपाल से मुलाकात, राजभवन का नाम लोक भवन करने पर दी बधाई

देहरादून: कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज लोक भवन जाकर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान मंत्री जोशी ने राज्यपाल को राजभवन का नाम लोक भवन होने पर बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया।
राजभवन का नाम लोक भवन करना महत्वपूर्ण कदम : गणेश जोशी
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन किया जाना जनता की भावना और स्थानीय संस्कृति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राज्यपाल का भी इस निर्णय को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद किया।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) की अध्यक्ष साधना शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से कैंप कार्यालय में भेंट की थी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस संबंध में एक पत्र मंत्री जोशी के माध्यम से भेजकर राजपथ की तर्ज पर ब्रिटिशकालीन ‘‘राजभवन’’ नाम को बदलने का आग्रह किया था।
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