Dehradun
लोकतंत्र पर्व: उत्तराखंड की पांचों सीटों पर मतदान हुआ शुरू, बूथ केंद्रों पर लगी लंबी लाइन।

देहरादून – लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान आज 19 अप्रैल को है। इस चरण में 21 राज्यों की कुल 102 सीटों पर वोटिंग है। उत्तराखंड की पांचों सीटों पर पहले ही चरण में आज मतदान होगा। प्रदेश के 83 लाख से ज्यादा मतदाता 55 प्रत्याशियों का भाग्य तय करेंगे।

18वीं लोकसभा के लिए उत्तराखंड की पांचों सीटों पर मतदान शुरू हो गया है। लोग मतदान के लिए बूथ पर पहुंचने लगे हैं। कुछ बूथ केंद्रों पर लंबी लाइन लगी है।
जनपद चमोली की तीनों विधानसभा क्षेत्रों के 303 मतदेय स्थलों में से 271 बूथ पर वेबकास्टिंग शुरू हो गई है। 31 बूथों पर रिकॉर्डिंग हो रही है।
पांचों लोकसभा सीट जिसमें गढ़वाल मंडल की हरिद्वार, गढ़वाल और टिहरी के साथ कुमाऊं मंडल की नैनीताल-ऊधमसिंह नगर और सुरक्षित सीट अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के मतदाताओं पर इस बार अपना सांसद चुनने के साथ मतदान प्रतिशत बढ़ाने की भी बड़ी जिम्मेदारी है।
मतदान से पहले सभी प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में मॉक पोल शुरू हो गया है। बस कुछ ही देर में मतदान शुरू होगा, जो कि शाम पांच बजे तक चलेगा।
लोकसभा चुनाव के कुल मतदाता
- कुल मतदाता-83,37,914
- महिला मतदाता-40,20,038
- पुरुष मतदाता-43,17,579
- ट्रांसजेंडर मतदाता-297
- सर्विस मतदाता-93,187
- फर्स्ट टाइम वोटर-1,48,090
- 85 से अधिक आयु के मतदाता-65,160
- दिव्यांग मतदाता-80,335
- कुल पोलिंग स्टेशन-11,723
- टिहरी लोकसभा के कुल मतदाता-15,77,664
- गढ़वाल लोकसभा के कुल मतदाता-13,69,388
- अल्मोड़ा लोकसभा के कुल मतदाता-13,39,327
- नैनीताल लोकसभा के कुल मतदाता-20,15,809
- हरिद्वार लोकसभा के कुल मतदाता-20,35,726
उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर आज 83,37,914 मतदाता 55 प्रत्याशियों का भाग्य तय करेंगे। पांचों सीटों पर मतदान शुरू हो गया है। आयोग ने मतदान बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। 2019 में 61.50 प्रतिशत मतदान हुआ था। पांचों सीटों पर मतदान के बाद चार जून को मतगणना होगी।
चुनाव आयोग ने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक मतदान की अपील की है। मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया, सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है। जो कि शाम पांच बजे तक मतदान चलेगा। शाम को पांच बजे तक जो भी मतदाता अपने मतदेय स्थल के भीतर दाखिल हो जाएंगे, वे सभी वोट दे सकेंगे।
वोट डालने के लिए वोटर आईडी के अलावा 12 अन्य दस्तावेज का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया, शाम तक 9,500 पोलिंग पार्टियां अपने मतदेय स्थल पर पहुंच चुकी थी। वे मतदान प्रारंभ होने की सूचना उपलब्ध कराएंगी।
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देहरादून में कानून व्यवस्था हुई धड़ाम, बेखौफ घूम रहे बदमाश !, 14 दिन में 4 हत्याओं से दहशत का माहौल

Dehradun crime : देहरादून जो कभी अपने शांत वातावरण के लिए देशभर में मशहूर था, आज वहीं दिनदहाड़े भरेबाजार हत्याएं हो रही हैं। जिस कारण लोगों में दहशत का माहौल है। देहरादून में 14 दिनों में चार हत्याओं से जहां एक ओर कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। तो वहीं दसूरी ओर लोगों में डर साफ-साफ देखा जा सकता है।
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देहरादून 14 दिन में 4 हत्याओं से दहशत का माहौल
राजधानी देहरादून में बुधवार को एक युवक की भरेबाजार गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये हत्या शहर के बीचोबीच और सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके में की गई। तिब्बती मार्केट में टेनिस खेलकर वापस लौट रहे युवक को बदमाशों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। लेकिन ये इकलौती ऐसी घटना नहीं है। इस पहले लगातार एक के बाद कई हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

शहर में महज 14 दिनों के भईतर चार हत्याओं को अंजाम दिया गया है। 29 जनवरी को विकासनगर क्षेत्र में एक छात्रा की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जिसका शव अगले दिन घर से कुछ ही दूरी पर झाड़ियों में पड़ा हुआ मिला था। इस घटडना के दो दिन बाद ही 31 जनवरी को ऋषिकेश में महिला की उसके लिव-इन-पार्टनर ने हत्या कर कर दी थी। इस घटना के एक दिन बाद ही दो फरवरी को दूल्हा बाजार में हुए गुंजन हत्याकांड से सनसनी मच गई थी। इसके 9 दिन बाद ही बुधवार को कारोबारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई।
देहरादून में कानून व्यवस्था हुई धड़ाम
महज 14 दिनों के भीतर हुई इन हत्याओं ने देहरादून की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। बल्कि इन घटनाओं ने खाकी को दागदार किया है। जिस तरीके से शहर के बीचो-बीच गुंजन हत्याकांड और तिब्बती मार्केट हत्याकांड को अंजाम दिया गया इसने पुलिस की नाकामी को उजागर कर दिया है।

गुंजन हत्याकांड में आरोपी ने मच्छी बाजार में कोतवाली से कुछ ही मीटर दूरी पर हत्या को अंजाम दिया। इतना ही नहीं आरोपी कितना बेखौफ इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हत्या के बाद वो भागा नहींबल्कि चापड़ लहराते हुए निकला। ठीक इसी तरह तिब्बती मार्केट हत्याकांड में भी बदमाशों ने अर्जुन को गोली मारने से पहले फुरसत से बीड़ी पी और फिर उसे गोली मारकर आसानी से निकल गए।

खुलेआम घूम रहे बदमाश, नहीं बचा पुलिस का खौफ
तिब्बती मार्केट में हुए अर्जुन हत्याकांड के बाद आरोपी भाग निकले और उन्हें पकड़ने में पुलिस को 24 घंटे लग गए। ये हत्याकांड शहर के बीचोबीच हुआ था और आरोपियों को शहर के बाहर से एनकाउंटर के बाद पकड़ा गया है। ये घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। कैसे शहर के बीचोबीच घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश इतनी दूर तक निकल गए और दिनभर कैसे पुलिस की नजरों से बचे रहे ?, इसके साथ ही सवाल ये भी उठता है कि क्या बदमाशों में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया जो दिनदहाड़े राजधानी में ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
राजधानी में बीते 14 दिनों में हुई ये वारदातें पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े होते हैं। जब प्रदेश की राजधानी में इस तरीके से वारदातें हो रही हैं तो पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था का क्या हाल होगा।
Dehradun
Dehradun: BCA की छात्रा की प्री-मेच्योर डिलीवरी में मौत, कथित पिता ने बच्चे को लेने से किया इनकार

देहरादून में रह रही खटीमा की छात्रा की प्री-मेच्योर डिलीवरी में मौत, लिव इन में रह रही थी छात्रा
Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां पर एक अविवाहित छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया है। बच्चे को जन्म देने के दौरान छात्रा की मौत हो गई है। जिसके बाद अब नवजात का कथित पिता उसे स्वीकार करने से इन्कार कर रहा है। जानकारी के मुताबिक छात्रा और युवक लिव इन में रह रहे थे, जिसकी खबर न तो परिजनों को थी और न ही उन्होंने UCC पोर्टल पर पंजीकरण किया था।
मुख्य बिंदु
अविवाहित छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म
पुलिस के मुताबिक, मृतक छात्रा मूल रूप से खटीमा, जनपद ऊधमसिंहनगर की रहने वाली थी। वर्तमान में वो देहरादून के सुभाषनगर क्षेत्र स्थित एक विश्वविद्यालय से बीसीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान,वो अपने ही क्षेत्र के एक युवक के साथ देहरादून में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। युवक मनीष उसी विश्वविद्यालय से बीएससी न्यूट्रीशन साइंस की पढ़ाई पूरी कर चुका है। बताया जा रहा है कि दोनों लंबे समय से साथ रह रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने इस संबंध की जानकारी अपने परिवारों को नहीं दी थी। इसके अलावा, पुलिस जांच में ये भी सामने आया है कि उनके लिव-इन संबंध का कोई आधिकारिक पंजीकरण नहीं कराया गया था।
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बच्चे को जन्म देने के बाद छात्रा की मौत
इस बीच, जांच में ये अहम तथ्य सामने आया कि छात्रा गर्भवती थी। कुछ दिन पहले ही आठ महीने में उसकी सिजेरियन प्रक्रिया के जरिए प्री-मेच्योर डिलीवरी हुई थी। दुर्भाग्यवश, जन्म के बाद नवजात शिशु की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसके चलते उसे एनआईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं, रविवार को छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसका प्रेमी उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल, मौत के स्पष्ट कारण सामने नहीं आ पाए हैं, इसलिए पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है।
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कथित पिता ने बच्चे को लेने से किया इनकार
इधर, अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले की लिखित सूचना बाल कल्याण समिति को दी। जानकारी में बताया गया कि एक अविवाहित युवती ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। शुरुआत में नवजात के कथित पिता ने बच्चे को अपने साथ घर ले जाने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में उसने इससे इनकार कर दिया। इसके चलते, युवक और युवती—दोनों के परिवारों के बीच भी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि नवजात शिशु की देखभाल की जिम्मेदारी आखिर किसके पास होगी।
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हॉस्पिटल प्रशासन ने बाल कल्याण समिति को लिखा पत्र
डॉक्टरों का कहना है कि नवजात को अधिक समय तक एनआईसीयू वार्ड में रखना संभव नहीं है। इसी कारण, अस्पताल प्रशासन ने बाल कल्याण समिति से अनुरोध किया है कि बच्चे को अस्थायी रूप से शिशुगृह में रखा जाए। इस संबंध में, समिति की सदस्य नीता कंडपाल ने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन को निर्देश दिए गए हैं कि नवजात का आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। ताकि, शिशु के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
Dehradun
फायर सीजन के लिए तैयारियों में जुटा वन विभाग, जंगलों को आग से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ हुई बैठक
Forest Fire : उत्तराखंड में हर साल जंगलों की आग तांडव मचाती है। कई लोगों और जानवरों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। जंगलों की आग से होने वाले नुकसान से बचने के लिए वन विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
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फायर सीजन के लिए तैयारियों में जुटा वन विभाग
प्रदेश में हर साल गर्मियों में लगातार आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसमें कई लोगों के साथ जीव जंतुओ की भी मौत भी हो जाती है। ऐसे में वनाग्नि की घटनाओं पर रोकथाम के लिए उत्तराखंड वन विभाग ने विभिन्न विभागों के साथ बैठक की। ये बैठक राज्य में वनाग्नि की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने तथा विभिन्न विभागों के मध्य समन्वित कार्यप्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
जंगलों को आग से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ हुई बैठक
जंगलों को आग से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ हुई बैठक के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। जिसमें उत्तराखंड में वनाग्नि की वर्तमान स्थिति, संवेदनशील क्षेत्र, जोखिम मानचित्रण तथा पूर्व वर्षों के अनुभवों पर प्रकाश डाला गया।

वनाग्नि को रोकने और जनहानि कम करने पर हुई चर्चा
प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा ने बताया की इस बैठक में उत्तराखंड वन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सूचना विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), वन सर्वेक्षण भारत (FSI), भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE), वन अनुसंधान संस्थान (FRI), यूकॉस्ट (UCOST), यूरेडा (UREDA), सूचना विभाग रेड क्रॉस सोसाइटी, शिक्षा विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक का उदेश्य राज्य में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने और जन हानि को कम करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
इसके साथ ही बैठक में विभिन्न विभागों की भूमिका और उत्तरदायित्व मानक तैयार करने पर भी चर्चा की गई। जिसमें संसाधनों के साझा उपयोग, आपदा की स्थिति में त्वरित समन्वय, कानून व्यवस्था बनाए रखने, राहत और पुनर्वास कार्यों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
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