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Does God Exist? जावेद अख़्तर कौन हैं, उनके जन्मदिन पर पढ़िए चुनिंदा शेर..

Javed Akhtar Birthday: शब्दों का जादूगर, विचारों का योद्धा और भारतीय सिनेमा की जीवित विरासत
Javed Akhtar Birthday: जावेद अख़्तर केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा, साहित्य और विचारधारा का एक ऐसा अध्याय हैं, जिसने दशकों तक समाज को शब्द, सोच और साहस दिया। 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में जन्मे जावेद अख्तर आज हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली पटकथा लेखक, गीतकार, कवि और निर्भीक विचारक के रूप में जाने जाते हैं।
मुख्य बिंदु
Javed Akhtar on Does God Exist
आज जावेद अख़्तर का 81 वां जन्म दिन है। वर्तमान समय में शायद ही ऐसा कोई होगा जो जावेद अख्तर को न जनता होगा। अगर आप उन्हें नहीं भी जानते हो फिर भी उनके गाने या शायरी कभी न कभी सोशल मीडिया की फीड से आपकी जुबान तक जरूर पहुंचे होंगे। हाल ही में लल्लनटॉप के मंच पर”क्या ईश्वर है” चर्चा के बाद तो जावेद अख्तर का नाम डिजिटल युग के छोटे-बड़े हर इंसान की जुबान पर था। जावेद अख्तर और मुफ़्ती शामाइल के बीच चली इस बहस ने उनके तर्कों पर हर किसी को सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
साहित्यिक विरासत से सिनेमा तक का सफर
जावेद अख्तर को शब्द विरासत में मिले। उनके पिता जान निसार अख्तर उर्दू के प्रतिष्ठित कवि और गीतकार थे, जबकि उनके दादा और परदादा भी साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। बचपन लखनऊ में बीता, जहाँ तहज़ीब और शायरी ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा। भोपाल के सैफिया कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे सपनों की नगरी मुंबई पहुँचे—जेब खाली थी, लेकिन हौसले बेहिसाब।
सलीम-जावेद: जिसने हिंदी सिनेमा की दिशा बदल दी
1970 के दशक में जावेद अख्तर की किस्मत तब बदली जब उनकी जोड़ी सलीम खान के साथ बनी। सलीम-जावेद नाम की इस ऐतिहासिक जोड़ी ने हिंदी फिल्मों को नया नायक दिया—“Angry young men”।
ज़ंजीर, दीवार, शोले, डॉन, त्रिशूल और शक्ति जैसी फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि समाज के गुस्से, संघर्ष और आत्मसम्मान को परदे पर उतार दिया। सलीम-जावेद भारतीय सिनेमा के पहले ऐसे पटकथा लेखक बने जिन्हें स्टारडम मिला।
गीतों में संवेदना, शब्दों में क्रांति (Songs, shayari of javed akhtar)
1980 के दशक में जोड़ी के टूटने के बाद जावेद अख्तर ने गीत लेखन को अपना मुख्य माध्यम बनाया। उनके गीत मनोरंजन से कहीं आगे जाकर संवेदना, सामाजिक चेतना और मानवीय भावनाओं की आवाज़ बने।
“एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा”,
“संदेशे आते हैं”,
“कल हो ना हो”,
“मितवा”,
“तेरे लिए”
जैसे गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में बसे हैं।
बेबाक विचारक और सामाजिक हस्तक्षेप
जावेद अख्तर सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि एक निर्भीक सार्वजनिक बुद्धिजीवी हैं। वे खुलकर धर्मनिरपेक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, तर्कवाद और लैंगिक समानता की वकालत करते रहे हैं। स्वयं को “सभी धर्मों के प्रति समान अवसर वाला नास्तिक” बताने वाले अख्तर ने सामाजिक पाखंड पर हमेशा सवाल उठाए।
2010 से 2016 तक वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे और संसद में कला व संस्कृति की सशक्त आवाज बने।
पुरस्कार और सम्मान
जावेद अख्तर को मिले सम्मान उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण हैं:
- पद्म श्री (1999)
- पद्म भूषण (2007)
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (2013)
- रिचर्ड डॉकिन्स अवॉर्ड (2020) – पाने वाले पहले भारतीय
- 5 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
- 16 फिल्मफेयर पुरस्कार
निजी जीवन: कला का पारिवारिक वृक्ष
जावेद अख्तर की पहली शादी हनी ईरानी से हुई, जिनसे उनके दो बच्चे—फरहान अख्तर और जोया अख्तर—हुए, जो आज खुद सिनेमा के बड़े नाम हैं। बाद में उन्होंने अभिनेत्री शबाना आज़मी से विवाह किया। यह परिवार भारतीय सिनेमा का एक रचनात्मक स्तंभ माना जाता है।
आज भी प्रासंगिक
2024 में आई अमेज़न प्राइम की डॉक्यूमेंट्री ‘Angry Young Men’ ने एक बार फिर सलीम-जावेद की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ा। वहीं 2025 में “क्या ईश्वर का अस्तित्व है?” विषय पर हुई बहस में जावेद अख्तर की तार्किक दृष्टि ने वैश्विक ध्यान खींचा।
जावेद अख्तर के जन्मदिन पर पढ़िए उनके लिखे चुनिंदा शेर
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
गलत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता

नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो
हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग

हमको तो बस तलाश नए रास्तों की है,
हम हैं मुसाफिर ऐसे जो मंजिल से आए हैं

इस शहर में जीने के अंदाज निराले हैं
होठों पे लतीफ़े हैं आवाज में छाले हैं

मैं पा सका न कभी इस खलिश से छुटकारा
वह मुझसे जीत भी सकता था जाने क्यों हारा

अगर लहरों को है दरिया में रहना
तो उनको होगा चुपचाप अब बहना

तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूं फिर भी शायद
निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

तब हम दोनों वक्त चुरा कर लाते थे
अब मिलते हैं जब भी फुर्सत होती है

जावेद अख्तर कौन हैं?
जावेद अख्तर भारत के प्रसिद्ध कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैं। वे हिंदी सिनेमा और आधुनिक उर्दू शायरी में अपने गहरे विचारों और प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते
जावेद अख्तर क्यों प्रसिद्ध हैं?
जावेद अख्तर अपनी अर्थपूर्ण गीत रचनाओं, प्रगतिशील सोच और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक विचारों के कारण प्रसिद्ध हैं।
Famous Books of Javed Akhtar
जावेद अख्तर की प्रमुख पुस्तकें हैं:
तरकश
लावा
टॉकिंग सॉन्ग्स
Javed Akhtar birthday date
17 january 1945, ग्वालियर
जावेद अख्तर को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
जावेद अख्तर को:पद्म श्रीपद्म भूषणराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारकई फिल्मफेयर पुरस्कारमिल चुके हैं।
Does God exist (क्या ईश्वर है) ?
हाल ही में जावेद अख्तर और मुफ़्ती शमाइल के बीच हुई बहस से जावेद काफी चर्चाओं में आए।
mufti shamail कौन है?
मुफ़्ती शमाइल नदवी एक भारतीय इस्लामी विद्वान हैं, जो जावेद अख़्तर के साथ “क्या ईश्वर है?” विषय पर हुई बहस के लिए चर्चा में आए।
क्या जावेद अख्तर नास्तिक हैं
हां जावेद अख्तर नास्तिक हैं
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Dehradun
DEHRADUN NEWS: 2 साल तक पुलिस रही नाकाम, माँ ने खुद ढूंढ निकाला बेटे का कातिल!

2 साल तक भटकती रही माँ, पुलिस नहीं कर पाई जांच… फिर खुद ढूंढ लाई बेटे का कातिल!
DEHRADUN NEWS: देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सिस्टम पर सवाल खड़े करती है. साल 2024 में 18 वर्षीय क्षितिज चौधरी की एक तेज रफ्तार डंपर से कुचलकर मौत हो गई थी, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी न आरोपी पकड़ा गया और न ही पुलिस किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाई. इस दौरान मृतक की मां इंसाफ के लिए दर-दर भटकती रही.
मुख्य बिंदु
क्या है पूरा मामला- क्षितिज चौधरी एक्सीडेंट
15-16 फरवरी 2024 की रात क्षितिज अपने दोस्त के साथ प्रेमनगर क्षेत्र में पैदल जा रहा था, तभी पीछे से आए डंपर ने उसे कुचल दिया. हादसे के बाद करीब 45 मिनट तक वो सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन न समय पर एंबुलेंस पहुंची और न ही पुलिस. बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया और फिर एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया, जहां 17 फरवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
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पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, माँ पहुँच गई आरोपी तक
19 फरवरी 2024 को मृतक की मां ललिता चौधरी ने केस दर्ज कराया, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ी. आरोप है कि पुलिस ने जब डंपर का नंबर मांगा, तो मां ने खुद सीसीटीवी फुटेज खंगालकर वाहन की पहचान की. पुलिस के हाथ खाली रहने पर मां ने खुद ही जांच की कमान संभाली और आखिरकार 2 साल बाद आरोपी डंपर चालक तक पहुंच गई.

क्षितिज चौधरी एक्सीडेंट मामले में जांच के आदेश
मूल रूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली ललिता चौधरी पिछले कई वर्षों से अकेले अपने बच्चों की परवरिश कर रही थीं. बेटे की मौत के बाद अब वह इंसाफ के लिए संघर्ष कर रही हैं. मामले में प्रमेंद्र डोभाल ने संज्ञान लेते हुए केस को दोबारा जांच के लिए रेफर कर दिया है और कोर्ट में री-इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
Dehradun
UKSSSC एक बार फिर सवालों के घेरे में, परीक्षा किट की टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप
UKSSSC TENDER विवाद: पारदर्शिता पर सवाल, जांच की मांग तेज
UKSSSC TENDER: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा किट की आपूर्ति से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह गहराता जा रहा है और जांच की मांग तेज हो गई है.
मुख्य बिंदु
UKSSSC पर टेंडर निरस्त करने पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, ये टेंडर 15 सितंबर 2025 को UKTENDER पोर्टल के माध्यम से जारी किया गया था. स्कीमेटिक्स माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के मालिक आदित्य मंगल का कहना है कि शुरुआती चरण में केवल उनकी कंपनी ने ही बिड डाली थी. इसके बाद आयोग द्वारा टेंडर को निरस्त कर दोबारा जारी किया गया. हैरानी की बात यह है कि इस प्रक्रिया को एक-दो नहीं बल्कि कुल चार बार रद्द कर फिर से खोला गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
आदित्य मंगल ने आरोप लगाया कि बार-बार टेंडर निरस्त करने के बाद उनकी कंपनी को प्रक्रिया से अयोग्य घोषित कर दिया गया. इसके बाद दिल्ली की एक कंपनी को टेंडर में शामिल कर अंतिम रूप से कार्य आवंटित कर दिया गया. उनका दावा है कि यह सब एक सुनियोजित तरीके से किया गया, ताकि बाहरी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके. साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कंपनियों को गलत दस्तावेजों के आधार पर क्वालीफाई किया गया और MSME व EMD से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई.

कीमत में भारी अंतर, निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को और गंभीर बनाते हुए आदित्य मंगल ने दावा किया कि जिस परीक्षा किट की वास्तविक कीमत करीब 350 रुपये होनी चाहिए थी, उसे कथित रूप से बढ़ाकर 5000 रुपये तक दिखाया जा रहा है, जो बड़े स्तर पर लागत बढ़ाने (Cost Inflation) की ओर इशारा करता है. उन्होंने ये भी बताया कि जब उन्होंने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो उनकी शिकायत तक नहीं ली गई.
मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
उन्होंने पूरे मामले में शासन से अपनी कुछ मांगें रखी हैं. उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, जांच को सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने और दोषी अधिकारियों व संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. अब देखना होगा कि आयोग या शासन स्तर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है.
Dehradun
DEHRADUN MURDER CASE: ब्रिगेडियर जोशी मर्डर केस में पुलिस को बड़ी सफलता, सभी 10 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

देहरादून: ब्रिगेडियर हत्याकांड में 10वां आरोपी गिरफ्तार
DEHRADUN MURDER CASE: देहरादून के राजपुर क्षेत्र में हुए रिटायर्ड ब्रिगेडियर हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही इस सनसनीखेज मामले में शामिल सभी 10 आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। सभी अभियुक्तों को हत्या की धाराओं में न्यायालय से रिमांड पर लिया गया है।
मुख्य बिंदु
30 अप्रैल को हुई थी रिटायर्ड ब्रिगेडियर की हत्या
दरअसल, 30 मार्च 2026 की सुबह जोहड़ी गांव में फायरिंग की घटना के दौरान मॉर्निंग वॉक कर रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी को गोली लग गई थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों की तहरीर के आधार पर थाना राजपुर में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) सहित अन्य धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई में 9 आरोपी गिरफ्तार
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले ही 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं, एक अन्य आरोपी वैभव कुमार घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार तलाश में जुटी हुई थीं और विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही थी।
रविवार को फरार आरोपी वैभव गिरफ्तार
जिसके बाद अब पुलिस ने 5 अप्रैल को फरार आरोपी वैभव कुमार को राजपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी हरियाणा के यमुनानगर जिले का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, अब इस मामले में शामिल सभी 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और सभी के खिलाफ हत्या की धाराओं में कार्रवाई जारी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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