Uttarakhand
RUDRAPUR NEWS:रुद्रपुर में सरस मेले से लौट रही महिला से गैंगरेप, वीडियो बनाकर दी धमकी

सरस मेले से घर लौट रही महिला बनी दरिंदगी का शिकार, देवर के दोस्तों ने किया गैंगरेप
RUDRAPUR NEWS: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक गंभीर आपराधिक घटना सामने आई है। सरस मेले से घर लौट रही एक महिला को कथित तौर पर तीन युवकों ने हथियार के बल पर अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने घटना का वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी भी दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुख्य बिंदु
सरस मेले से लौट रही महिला को अगवा कर गैंगरेप का ममला
जानकारी के मुताबिक, घटना 22 फरवरी की देर रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। पीड़िता अपने देवर के साथ मेले से वापस लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में एक मैदान के पास दो मोटरसाइकिलों पर आए तीन युवकों ने उन्हें रोक लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी देवर के परिचित थे, इसलिए शुरुआत में किसी अनहोनी की आशंका नहीं हुई, लेकिन कुछ ही देर में आरोपियों ने हथियार निकालकर दोनों को धमकाना शुरू कर दिया।
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गैंगरेप कर विडियो बनाकर वायरल करने की धमकी
इसके बाद आरोपी महिला को जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर सुनसान स्थान पर ले गए। पीड़िता के मुताबिक, विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई और देवर के सामने ही बारी-बारी से दुष्कर्म किया गया। इतना ही नहीं, विरोध करने पर एक आरोपी ने चाकू से हमला कर उसकी उंगली घायल कर दी। घटना के दौरान महिला लगातार रहम की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक नहीं सुनी।
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पीडिता का मेडिकल कराने के बाद, आरोपियों की तलाश जारी
वारदात के दौरान आरोपियों ने पूरी घटना का वीडियो भी बना लिया और पुलिस में शिकायत करने पर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल फॉरेंसिक टीम साक्ष्य जुटा रही है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है, जबकि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
Uttarakhand
ALMORA NEWS: सल्ट में दहशत फैलाने वाला गुलदार पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की साँस
ALMORA NEWS: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के डभरा सौराल गांव में कई दिनों से दहशत का कारण बना गुलदार आखिरकार वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद कर लिया गया. आबादी के पास उसकी लगातार मौजूदगी और पालतू जानवरों पर हमलों से ग्रामीण में दहशत का माहौल बना हुआ था. गुलदार के पकड़े जाने के बाद गांव के लोगों ने राहत की साँस ली है.
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मुख्य बिंदु
वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ गुलदार
दरअसल, ग्रामीणों के मुताबिक गुलदार पिछले कुछ समय से गांव के आसपास घूम रहा था और कई बार बकरियों को अपना शिकार बना चुका था. सी कारण लोगों में डर का माहौल बन गया था. खासतौर पर बच्चों और महिलाओं को अकेले बाहर भेजने में परिजन असहज महसूस कर रहे थे और लगातार वन विभाग से कार्रवाई की मांग कर रहे थे.
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गुलदार के कैद होने के बाद ग्रामीणों में राहत
इसके बाद वन विभाग ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील स्थान पर पिंजरा लगाया. निगरानी बढ़ाई गई और टीम को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए. जिसके बाद सुबह के समय लगभग दो वर्षीय मादा गुलदार पिंजरे में फंस गया, जिसे देखकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली.
मेडिकल जांच के बाद होगी अग्रिम कार्रवाई
वन अधिकारियों के मुताबिक पकड़ा गया गुलदार स्वस्थ है और उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू सेंटर अल्मोड़ा भेजा जा रहा है. वहां चिकित्सकीय परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. साथ ही अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें और किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें.
Rudraprayag
जाम मुक्त चारधाम यात्रा की मुहिम तेज़, डीएम विशाल मिश्रा का अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम जारी
RUDRAPRAYAG NEWS: उत्तराखंड में महाशिवरात्रि को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा होने के बाद जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं. केदारनाथ यात्रा 2026 से पहले जिला प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम जारी कर दिया है.
मुख्य बिंदु
केदारनाथ हाईवे पर अतिक्रमण कारियों को डीएम का अल्टीमेटम
तिलवाड़ा बाजार में अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है. जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का औचक निरीक्षण कर अतिक्रमणकारियों को तुरंत जमीन खाली करने की चेतावनी दी. मुआवजा ले चुके भू-स्वामियों को भी अंतिम नोटिस जारी किया गया है.
जिलाधिकारी ने किया तिलवारा बाजार का औचक निरिक्षण
निरीक्षण के दौरान डीएम ने सड़क चौड़ीकरण कार्य की धीमी प्रगति और सड़क किनारे पड़े मलबे पर नाराजगी जताई. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि जिन भवनों को हटाया जा चुका है, उनका मलबा तत्काल साफ किया जाए, अन्यथा संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सड़क पर फैला मलबा और अवैध कब्जे ही जाम की बड़ी वजह बन रहे हैं.\
RUDRAPRAYAG NEWS अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेज़ी लाने के निर्देश
इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकारियों के साथ बैठक में चौड़ीकरण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए. प्रशासन की योजना है कि खाली कराई गई भूमि का उपयोग पार्किंग, बैठने की व्यवस्था और यात्रियों की सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा, ताकि यात्रा सीजन में यातायात सुचारु रह सके.
तिलवारा बाजार को बनाया जाएगा अतिक्रमण मुक्त
डीएम ने दुकानदारों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि सड़क सीमा से बाहर सामान रखने पर चालान के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने सभी विभागों को संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, ताकि चारधाम यात्रा से पहले तिलवाड़ा बाजार को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सके.
Uttarakhand
इमरजेंसी में भी देरी! कोरोनेशन अस्पताल की व्यवस्था कटघरे में, घायल युवती ने खोली हॉस्पिटल की पोल

उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति – कोरोनेशन अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल
DEHRADUN NEWS: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय कोरोनेशन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं। हाल ही में एक युवती, प्रियंका चौहान, को उपचार के दौरान जिस प्रकार की अव्यवस्था, देरी और प्रक्रियात्मक जटिलताओं का सामना करना पड़ा, वो सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।
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मुख्य बिंदु
घायल युवती ने खोली उत्तराखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल
मिली जानकारी के मुताबिक, प्रियंका चौहान गंभीर अवस्था में अस्पताल की इमरजेंसी में पहुँचीं। लेकिन तत्काल उपचार देने के बजाय उन्हें पहले इमरजेंसी विभाग से ऑर्थोपेडिक विभाग में भेजा गया। ऑर्थो विभाग में भी प्राथमिक उपचार शुरू करने से पहले बिलिंग की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद एक्स-रे के लिए भेजा गया, जहाँ पुनः बिलिंग की औपचारिकता पूरी करनी पड़ी। एक्स-रे रिपोर्ट आने के बाद प्लास्टर के लिए फिर से अलग से बिलिंग करवाई गई। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद जाकर उनका प्लास्टर किया गया।
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DEHRADUN NEWS– घायल को प्राथमिक उपचार देने में फेल हॉस्पिटल प्रशासन
सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि यदि कोई मरीज अत्यंत गंभीर स्थिति में हो या जीवन-मृत्यु की अवस्था में हो, तो क्या इस प्रकार की लंबी और जटिल प्रक्रिया उसकी जान को खतरे में नहीं डाल सकती? आपातकालीन सेवाओं का मूल उद्देश्य त्वरित और प्राथमिक उपचार देना होता है, न कि मरीज और उसके परिजनों को विभागों और बिलिंग काउंटरों के चक्कर लगवाना।
जिला अस्पताल देहरादून में मूलभूत सुविधाओं की चिंताजनक स्थिति
अस्पताल में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। व्हीलचेयर जर्जर अवस्था में हैं, जिनका संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा था। स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। मरीजों और उनके परिजनों को उचित मार्गदर्शन और सहयोग का अभाव महसूस हुआ।
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सरकारी अस्पताल विशेषकर उन लोगों के लिए जीवनरेखा होते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और निजी अस्पतालों का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं। यदि सरकारी अस्पतालों में भी इस प्रकार की लापरवाही और अव्यवस्था बनी रही, तो आम जनता का भरोसा पूरी तरह से डगमगा सकता है।
हम उत्तराखंड सरकार एवं संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से निम्नलिखित मांग करते हैं:
- पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- आपातकालीन सेवाओं में “ट्रीटमेंट फर्स्ट, बिलिंग लेटर” की नीति लागू की जाए।
- विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
- अस्पताल में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैसे व्हीलचेयर, स्ट्रेचर, स्वच्छता और उपकरणों का तत्काल निरीक्षण कर सुधार किया जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- यह विषय केवल एक मरीज का नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र से जुड़ा हुआ है। जनहित में आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए और आम नागरिकों को सम्मानजनक तथा त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
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