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NEET पेपर लीक पर दून में बवाल!, सड़कों पर उतरे कांग्रेसी, शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
Dehradun News : नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का विरोध लगातार जारी है। इसी क्रम में सोमवार को देहरादून में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
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NEET पेपर लीक पर दून में सड़कों पर उतरे कांग्रेसी
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सचिवालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जबकि कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे।
शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के प्रयास किए। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की।

पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को लिया हिरासत में
प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए और छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। बाद में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
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केशव नेगी की गिरफ्तारी पर क्यों भड़का उत्तराखंड?, आम जनता से लेकर नेताओं तक ने उठाए सवाल

Keshav Negi : दिल्ली के मालवीय नगर अग्रिकांड में 21 लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। इस मामले में जांच एजेंसियों ने शेफ केशव नेगी को गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
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कौन है केशव नेगी, जिनकी गिरफ्तारी पर भड़का उत्तराखंड?
मालवीय नगर होटल अग्निकांड में कुक Keshav Negi को गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी के बाद दिल्ली से देहरादून तक राजनीति गरमाई हुई है औरर इस गिरफ्तारी को लेकर लोगों में आक्रोश है. सोशल मीडिया पर शेफ केशव नेगी के लिए आवाज उठाई जा रही है।
राजनीतिक दलों ने भी केशव नेगी के लिए न्याय की मांग की है। जहां एक ओर कांग्रेस ने केशव नेगी के लिए मोर्चा खोल दिया है। तो वहीं सीएम धामी ने भी इस मामले को लेकर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता से बात की है और उन्होंने उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण ब्लॉक के रहने वाले हैं Keshav Negi
आपको बता दें कि केशव नेगी मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण ब्लॉक के रहने वाले हैं। जो कि दिल्ली में रहकर मालवीय नगर के होटल में कुक का काम करते थे। दिल्ली में वो अपने परिवार के साथ रहते हैं जिसमें उनकी पत्नी और बच्चे शामिल हैं। उनकी बेटी कनिष्का नेगी वकील हैं जो कि फिलहाल तीस हजारी कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं।

दिल्ली के इस अग्निकांड में बुधवार को केशव नेगी की गिरफ्तारी हुई है। उनकी गिरफ्तारी के बाद आम जनतका के साथ ही प्रदेश के नेताओं ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि केशव नेगी पर ये आरोप हैं कि उन्होंने होटल में लगी आग को बुझाने में मदद नहीं की।

ये तो आम बात है कि जब कहीं अचानक से आग लगती है तो हर कोई अपनी जान बचाने की कोशिश करता है, इधर-उधर भागता है। केशव नेगी ने भी यही किया होगा। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके साथ ही पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी केशव नेगी के लिए आवाज उठाई है।

मामले को लेकर सीएम धामी ने भी दिल्ली की मुख्यमंत्री से बात
इस मामले को लेकर सीएम धामी ने रविवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से फोन पर बात की है। जिस पर उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं इस मामले में पूर्व सीएम और हरिद्वार से बीजेपी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल से बीजेपी सांसद अनिल बलूनी ने भी दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से बात की है। जिसमें उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
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उत्तराखंड के लाल लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जम्मू कश्मीर में शहीद, राजौरी में ऑपरेशन के दौरान दिया देश के लिए बलिदान

Almora News : जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद हो गए। इस खबर से उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई।
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उत्तराखंड के लाल लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जम्मू कश्मीर में शहीद
जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी राजौरी के मंजाकोट क्षेत्र में चल रहे ‘ऑपरेशन शेरोवाली’ के तहत तैनात थे। अभियान के दौरान दुर्गम और जंगलों से घिरे इलाके में ऑपरेशनल ड्यूटी निभाते समय वे एक गहरी खाई में गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथी सैनिकों ने तत्काल उन्हें बाहर निकालकर सहायता पहुंचाई, लेकिन बाद में उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली।
राजौरी में ऑपरेशन के दौरान दिया देश के लिए बलिदान
सेना के अधिकारियों के मुताबिक, जिस क्षेत्र में अभियान चलाया जा रहा है वह अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। घने जंगल, खड़ी चट्टानें, खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए अभियान को और जटिल बना देती हैं। क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना के बाद कई दिनों से तलाशी अभियान जारी है।

अल्मोड़ा में किया जाएगा अंतिम संस्कार
सेना के प्रवक्ता ने बताया कि शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का पार्थिव शरीर जम्मू एयर फोर्स स्टेशन लाया जाएगा। जहां सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक जनपद अल्मोड़ा भेजा जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की शहादत से उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर है। देश उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान को सदैव याद रखेगा।
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देहरादून से 10 दिन में 13 बच्चे लापता, सबसे ज्यादा नाबालिग बच्चियां हुई लापता, सामने आई चौंकाने वाली वजह

Dehradun News : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले 10 दिनों के दौरान 13 नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामले सामने आने से अभिभावकों, पुलिस और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज इन मामलों ने बच्चों की सुरक्षा और बदलते सामाजिक परिवेश को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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देहरादून से 10 दिन में 13 बच्चे लापता
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों की गुमशुदगी से जुड़े मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। इनमें ऋषिकेश, सेलाकुई, सहसपुर और अन्य इलाकों से नाबालिगों के घर से लापता होने की घटनाएं शामिल हैं। सभी मामलों में बच्चों की उम्र 12 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है।
सबसे ज्यादा बच्चियां हुई लापता
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि लापता होने वाले बच्चों में बड़ी संख्या नाबालिग बच्चियों की है। इससे परिजनों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की भी चिंताएं बढ़ी हैं। पुलिस इन मामलों की जांच में जुटी है और बच्चों की तलाश के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव, आभासी दुनिया की ओर आकर्षण और अपेक्षाओं में वृद्धि जैसी परिस्थितियां बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। उनका कहना है कि कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों से नाराज होकर भावनात्मक निर्णय ले लेते हैं और घर छोड़ने जैसे कदम उठा बैठते हैं।
डॉक्टर ने सोशल मीडिया को बताया इसकी वजह
डॉक्टर ने सोशल मीडिया को इसकी वजह बताया है। उन्होंने बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने की जरूरत का संदेश दिया है। विशेषज्ञ परिवारों में संवाद बढ़ाने, बच्चों की भावनात्मक स्थिति को समझने और उनकी गतिविधियों पर संतुलित नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि दर्ज मामलों में कार्रवाई जारी है और बच्चों को सुरक्षित खोजने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
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