Uttarakhand
बस की खिड़की से टकरा, शीशे और कांच की क्लिप सर पर घुसने से युवक की मौत |

सूचना के अनुसार युवक पुलिस की शारीरिक परीक्षा देने के लिए देहरादून जा रहा था कि जिस बीच वह हादसे का शिकार हो गया। सराईंखेत के मटखानी गांव (स्याल्दे ब्लाक) निवासी दान सिंह रावत का 21 वर्षीय पुत्र राहेत सिंह रावत ने रानीखेत महाविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई पूरी कर ली थी। इन दिनों व प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था। उसने हालिया अल्मोड़ा में पुलिस भर्ती में हिस्सा लिया था। हादसे के पश्चात युवक को वहां से गोविंद सिंह माहरा नागरिक चिकित्सालय पहुंचाया मगर उसे नहीं बचाया जा सका। चिकित्सक डा. अमरजीत सिंह के अनुसार सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोट पहुंचने से युवक की जान चली गई।
Breakingnews
PITHORAGARH: मुनस्यारी मार्ग पर दर्दनाक कार हादसा, 3 लोगों की मौत, एक घायल

जौलजीबी-मुनस्यारी रोड एक्सीडेंट, बंगापानी के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई कार
MUNSIYARI CAR ACCIDENT: पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी मार्ग पर बंगापानी के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक एक कार अचानक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया।
मुख्य बिंदु
पुलिस और SDRF टीम ने चलाया रेस्क्यू अभियान
घटना की सूचना मिलते ही जौलजीबी थानाध्यक्ष Pradeep Yadav और मुनस्यारी कोतवाली प्रभारी Neeraj Chauhan पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद SDRF टीम की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल भेजा गया।

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MUNSIYARI CAR ACCIDENT हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत
इस भीषण दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान लक्ष्मण सिंह (30 वर्ष), निवासी धुरातोली मुनस्यारी और अंकित पांडेय (30 वर्ष), निवासी पिथौरागढ़ के रूप में हुई है। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई।
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उपचार के दौरान एक और युवक ने तोड़ा दम
हादसे में आयुष पंत (26 वर्ष), निवासी टकाना और देवेंद्र पंत (25 वर्ष) घायल हो गए थे। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल के लिए रवाना किया गया। हालांकि इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में आयुष पंत ने भी दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर तीन हो गई।

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पुलिस कर रही आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस द्वारा मृतकों का पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और दुर्घटना के कारणों की भी जांच की जा रही है।
Uttarakhand
DEHRADUN में फूलदेई की धूम: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बच्चों संग मनाया पारंपरिक लोकपर्व

लोक भवन में पारंपरिक अंदाज में मनाया गया फूलदेई
DEHRADUN: रविवार को उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई का आयोजन बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस अवसर पर गुरमीत सिंह ने लोक भवन में बच्चों के साथ मिलकर पर्व मनाया। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह लोकसंस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
मुख्य बिंदु
बच्चों ने देहरी पर चढ़ाए फूल और चावल
लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे बच्चों ने देहरी पर फूल और चावल अर्पित किए। साथ ही उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान बच्चों ने “फूल देई-छम्मा देई” जैसे पारंपरिक लोकगीत भी गाए, जिससे कार्यक्रम का माहौल और अधिक सांस्कृतिक बन गया।

राज्यपाल ने बच्चों को दिए उपहार और आशीर्वाद
इस अवसर पर राज्यपाल ने बच्चों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद देते हुए उपहार भेंट किए। उन्होंने कहा कि फूलदेई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और खुशियां बांटने का संदेश देने वाली हमारी समृद्ध लोक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से बच्चे घर-घर जाकर फूल अर्पित करते हैं और सभी के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश
राज्यपाल ने पारंपरिक वेशभूषा में पर्व मनाने के लिए बच्चों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी से हमें यह सीख मिलती है कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना कितना महत्वपूर्ण है। जब बच्चे गर्व के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को अपनाते हैं, तो यह हमारी विरासत के संरक्षण का मजबूत संदेश देता है।

पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के प्रयासों की सराहना
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों के चेहरे की मुस्कान और उनका उत्साह यह दर्शाता है कि खुशियों का वास्तविक आनंद तभी मिलता है जब उन्हें सबके साथ साझा किया जाए। उन्होंने पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के प्रयासों की भी सराहना करते हुए कहा कि संस्था उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की परंपराएं और पूर्वजों की विरासत हमें प्रकृति से प्रेम, आपसी सद्भाव और समाज में खुशियां बांटने की प्रेरणा देती हैं।
Uttarakhand
Uttarakhand News: 5 साल में 826 स्कूल बंद, विधानसभा में चौंकाने वाला खुलासा

पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था पर पलायन की मार, पांच सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
UTTARAKHAND NEWS: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में इस बार कई चौंकाने वाले मामले सामने आए. ऐसी ही एक खबर शिक्षा विभाग से निकलकर सामने आई. विधानसभा में भाजपा के ही विधायक के सवाल पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बतया कि प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में लगभग 826 प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं. सरकार ने इसके पीछे की वजह बढ़ते पलायन को बताया है.
मुख्य बिंदु
विधानसभा में आया शिक्षा विभाग से जुड़ा चौंकाने वाला मामला
विधानसभा में ये मुद्दा भाजपा विधायक महेश जीना ने उठाया, जिसके जवाब में शिक्षा मंत्री ने स्थिति को सदन में स्पष्ट किया. सरकार ने माना कि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम रह गई थी, जिसके कारण उन्हें चलाना मुश्किल हो गया. ऐसे में शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद कर छात्रों को पास के बड़े स्कूलों में समायोजित करने का निर्णय लिया. सरकार का कहना है कि इससे बच्चों को बेहतर शिक्षण माहौल और सुविधाएं मिल सकेंगी.
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पिछले 5 सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
उत्तराखंड में लचर शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता जिलेवार आंकड़े भी हैं. सबसे अधिक टिहरी जिले में 262 स्कूल बंद हुए हैं. इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104, अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49, चमोली में 43 और देहरादून में 38 स्कूल बंद हुए हैं. वहीं चंपावत में 34, उत्तरकाशी और बागेश्वर में 25-25, उधम सिंह नगर में 21, रुद्रप्रयाग में 15 और हरिद्वार में 2 स्कूलों पर ताले लगे हैं. वर्तमान में राज्य में करीब 10,940 स्कूल संचालित हो रहे हैं. लेकिन उनमें से कई स्कूल ऐसे भी हैं जहाँ पर बच्चों की संख्या केवल दो से तीन ही रह गई है.
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पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था के लिए अभिशाप बन रहा पलायन
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की कमी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं. कई सरकारी स्कूलों में भवन जर्जर हैं और शौचालय, पेयजल व खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं. यही कारण है कि अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. ऐसे में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को बचाए रखना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
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