Nainital
हल्द्वानी में कांग्रेस को लगा बड़ा झटका , इंदिरा हृदयेश के करीबी सौरभ भट्ट ने जॉइन की बीजेपी…..

हल्द्वानी : उत्तराखंड निकाय चुनाव के बीच हल्द्वानी में दल बदलने की प्रक्रिया जारी है। मंगलवार को कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा जब पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश के करीबी और उनके प्रतिनिधि रहे कांग्रेस नेता सौरभ भट्ट ने अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जॉइन की।
सौरभ भट्ट को बीजेपी के जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट, सांसद अजय भट्ट और मेयर प्रत्याशी गजराज बिष्ट ने हल्द्वानी स्थित बीजेपी कुमावत संभाग कार्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई। बीजेपी में शामिल होते हुए सौरभ भट्ट ने कांग्रेस को छोड़ने का कारण बताया कि वह अब बीजेपी में अपनी राजनीतिक यात्रा को और मजबूती से आगे बढ़ाना चाहते हैं।
सांसद अजय भट्ट ने किया जीत का दावा
बीजेपी में शामिल होने के बाद सांसद अजय भट्ट ने कहा, “प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है और विकास कार्यों की गति तेज है। इस बार के स्थानीय निकाय चुनाव में भी बीजेपी की जीत होगी और यह ट्रिपल इंजन की सरकार को तीसरी बार बनाएगी।” अजय भट्ट ने बीजेपी की ओर से पूरी उम्मीद जताई और स्थानीय चुनावों में पार्टी की जीत का दावा किया।
सौरभ भट्ट का गजराज बिष्ट को समर्थन
सौरभ भट्ट ने बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा कि उन्होंने “घर वापसी” की है और अब वह बीजेपी के मेयर प्रत्याशी गजराज बिष्ट को पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतारेंगे। उन्होंने बताया कि कांग्रेस में रहकर वह खुद को असहज महसूस कर रहे थे और बीजेपी की विचारधारा से वह पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र और राज्य दोनों में है, और यदि बीजेपी का प्रत्याशी हल्द्वानी का मेयर बनता है, तो शहर का और अधिक विकास होगा।
big news
नैनीताल में तिब्बती समुदाय ने धूमधाम से मनाया लोसर, लोगों ने मठ में की पूजा अर्चना

Nainital News : तिब्बती समुदाय विश्वभर में अपने नये साल यानी लोसर (Losar Festival) का जश्न मना रहा है। नैनीताल में भी तिब्बती समुदाय ने सुख निवास स्थिति बौद्ध मठ में लोसर का जश्न मनाया।
Table of Contents
नैनीताल में तिब्बती समुदाय ने धूमधाम से मनाया Losar Festival
तिब्बती समुदाय विश्वभर में नये साल यानी लोसर का जश्न मना रहा है। इसी क्रम में नैनीताल में भी तिब्बती समुदाय के लोगों ने धूमधाम से लोसर पर्व मनाया। इस दौरान समुदाय के लोगों ने मठ में पूजा अर्चना की। तीन दिन तक चले लोसर के जश्न में लोगों ने एक दूसरे को नए वर्ष की शुभकामनाएं दी।
लोगों ने मठ में की पूजा अर्चना कर की शांति की कामना
तिब्बती समुदाय ने पूजा अर्चना कर विश्व शांति और दलाई लामा की दीर्घायु की कामना की। Losar Festival के मौके पर तिब्बती समुदाय की महिलाओं और पुरूषों ने पारंपरिक परिधानों में मंगल गीत गाये। आपको बता दें कि आज ही के दिन तिब्बती समुदाय द्वारा रंग बिरंगे झंडे लगाए जाते हैं जो 5 रंग के होते है।

तिब्बती समुदाय द्वारा इस दिन लगाए जाते हैं झंडे
आज के दिन लगाए जाने वाले रंगे बिरंगे झंडे में हरा जो हरियाली का लाल अग्नी सफेद जो शांति का नीला जो जल का और पीला जमीन का प्रतीक होते हैं। इन झंडों में मंत्र लिखे होते हैं और माना जाता है कि हवा के बहाव से जितनी बार यह झंडे हवा में लहराते हैं उतनी ही ज्यादा विश्व में शांति आएगी।
तीन दिन तक मनाया जाता है लोसर पर्व
लोसर का पर्व 3 दिन तक मनाया जाता है। जिसमें सामूहिक पूजा की जाती है विश्व और नगर की शांति के लिए नगर में देवी आपदा ना आये तिब्बतियों में लोसर का उत्साह देखा जाता है तिब्बती समुदाय के लोग लोसर को नए साल के रूप में मानते है। महिलाएं व बच्चों पर खासा उत्साह देखने को मिलता है महिलाएं अपने घरों दुल्हन की तरह को सजाते हैं।

Losar Festival FAQs (लोसर पर्व से जुड़े सवाल-जवाब)
Q1. लोसर क्या है?
Ans: लोसर तिब्बती समुदाय का नववर्ष (New Year) होता है। इसे तिब्बती लोग नए साल की शुरुआत के रूप में बड़े उत्साह और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाते हैं।
Q2. लोसर कितने दिन तक मनाया जाता है?
Ans: लोसर का पर्व आमतौर पर तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, सजावट और सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
Q3. लोसर पर रंग-बिरंगे झंडे क्यों लगाए जाते हैं?
Ans: लोसर के दिन तिब्बती समुदाय पांच रंगों के झंडे लगाता है। इन झंडों पर मंत्र लिखे होते हैं और माना जाता है कि हवा के साथ लहराने पर ये मंत्र विश्व में शांति का संदेश फैलाते हैं।
Q4. लोसर के झंडों के रंग क्या दर्शाते हैं?
Ans:हरा – हरियाली का प्रतीक
- लाल – अग्नि का प्रतीक
- सफेद – शांति का प्रतीक
- नीला – जल का प्रतीक
- पीला – धरती (जमीन) का प्रतीक
Q5. लोसर पर क्या विशेष किया जाता है?
Ans: इस पर्व पर सामूहिक पूजा की जाती है, नगर और विश्व की शांति की कामना की जाती है, और घरों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है।
Q6. लोसर किसका नया साल माना जाता है?
Ans: लोसर तिब्बती समुदाय का पारंपरिक नया साल होता है, जिसे बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
Q7. लोसर पर सबसे ज्यादा उत्साह किनमें देखा जाता है?
Ans: लोसर पर खासतौर पर महिलाओं और बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिलता है। महिलाएं घरों को सजाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाज निभाती हैं।
Ramnagar
कॉर्बेट ढेला रेस्क्यू सेंटर की बढ़ी क्षमता, वन मंत्री ने 10 नए बाड़ों और अत्याधुनिक लैब का किया लोकार्पण

Ramnagar News : नैनीताल जिले के रामनगर स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में आज प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने 10 नए बाड़ों का उद्घाटन किया। इस विस्तार के साथ रेस्क्यू सेंटर में बाड़ों की संख्या 20 से बढ़कर 30 हो गई है।
Table of Contents
कॉर्बेट ढेला रेस्क्यू सेंटर में बढ़ी क्षमता
रामनगर के कॉर्बेट ढेला रेस्क्यू सेंटर की क्षमता बढ़ गई है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने 10 नए बाड़ों का उद्घाटन किया है। जिस से यहां बाड़ों की संख्या 30 हो गई है। अब यहां रखे जाने वाले बाघ और गुलदारों के लिए बेहतर और सुरक्षित आवास की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद
वन मंत्री ने बताया कि वर्तमान में रेस्क्यू सेंटर में 13 लेपर्ड और 12 टाइगर मौजूद हैं,कुल 25 वन्यजीवों को यहां रखा गया है और नए बाड़ों के बनने से उनकी देखभाल और प्रबंधन अधिक व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पहले सीमित स्थान के कारण वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष की आशंका बनी रहती थी। लेकिन अब पर्याप्त जगह मिलने से उन्हें अलग-अलग और अनुकूल वातावरण में रखा जा सकेगा। इससे मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।
वन मंत्री ने अत्याधुनिक लैब का किया लोकार्पण
वन मंत्री ने वन्यजीवों के सैंपल परीक्षण और आधुनिक उपकरणों के उपयोग के लिए एक अत्याधुनिक लैब का भी शुभारंभ किया, इस लैब के माध्यम से रेस्क्यू सेंटर में मौजूद वन्यजीवों की स्वास्थ्य जांच और अन्य आवश्यक परीक्षण अब स्थानीय स्तर पर ही किए जा सकेंगे, जिससे उपचार और निगरानी की प्रक्रिया और तेज व प्रभावी होगी।
वनाअग्नि की घटनाओं पर जन सहभागिता बढ़ाने पर फोकस वनाअग्नि की घटनाओं को लेकर सुबोध उनियाल ने कहा कि पिछले चार वर्षों में जन सहभागिता बढ़ाने पर विशेष फोकस किया गया है। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और राजस्व विभाग को भी वन अग्नि नियंत्रण अभियान से जोड़ा गया है। जिन क्षेत्रों में आग की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटियों का गठन कर प्रत्येक समिति को 30 हजार रुपये की सहायता दी गई है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को आधुनिक उपकरणों जैसे फायर प्रूफ जैकेट, बूट, ब्रश कटर और वुड कटर से लैस किया गया है,साथ ही आग बुझाने में सहयोग करने वाले कर्मचारियों, समूहों और आम नागरिकों को प्रोत्साहित करने की योजना भी शुरू की गई है। नई तकनीक और त्वरित रिस्पांस टीम के कारण वन अग्नि की घटनाओं में कमी आई है और पिछले चार वर्षों में लगभग 19 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।
Nainital
यमुना व दून घाटी में 7 हजार पेड़ कटान मामले में हुई सुनवाई, हाईकोर्ट ने राज्य व केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Nainital News : यमुना व दून घाटी में प्रस्तावित सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में लगभग 7 हजार पेड़ों के कटान मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की। जिसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।
Table of Contents
यमुना व दून घाटी में 7 हजार पेड़ कटान मामले में हुई सुनवाई
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यमुना व दून घाटी में प्रस्तावित सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में लगभग 7 हजार पेड़ों के कटान से पर्यावरण, वन्यजीवों सहित प्राकृतिक जल स्रोतों पर पड़ने वाले असर को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल हाइवे एथॉरिटी, जैव विविधता बोर्ड, वन विभाग, राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार से 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने राज्य व केंद्र सरकार से मांगा जवाब
आपको बता दें कि देहरादून की समाजसेवी रेनू पाल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि यमुना व दून घाटी में आशारोडी व झाझरा के बीच गतिमान ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत सड़क निर्माण के लिए लगभग 7 हजार पेडों का कटान किया जाना प्रस्तावित है।
याचिका में कहा गया है कि ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत गतिमान सड़क निर्माण से पहले उत्तराखंड बायोडेविटी बोर्ड से कोई अनुमति नही ली गई है। बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान से पर्यावरण के साथ ही वन्यजीवों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। क्योंकि इन जंगलों में बर्ड की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है।
3 सप्ताह बाद होगी मामले की अगली सुनवाई
नेशनल हाइवे एथॉरिटी, जैव विविधता बोर्ड, वन विभाग, राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार से जवाब मांगते हुए अलगी सुनवाई की तारीख भी तीन हफ्ते बाद की दी गई है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट की खंडपीठ ने 3 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।
Cricket17 hours agoNZ-W vs ZIM-W Dream11 Prediction : टीम, पिच रिपोर्ट और फैंटेसी टिप्स..
big news4 hours agoआज होगी धामी कैबिनेट की अहम बैठक, बजट सत्र से पहले कई अहम प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर
Rudraprayag24 hours agoजाम मुक्त चारधाम यात्रा की मुहिम तेज़, डीएम विशाल मिश्रा का अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम जारी
Haldwani22 hours agoधमकी भरे मेल से दहशत, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज को बम से उड़ाने की धमकी
Uttarakhand23 hours agoALMORA NEWS: सल्ट में दहशत फैलाने वाला गुलदार पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
Haridwar3 hours agoजीएसटी दफ्तर में घूसखोरी का पर्दाफाश, 20 हजार लेते डाटा क्लर्क रंगे हाथ गिरफ्तार
Uttarakhand21 hours agoBanbhulpura News: रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले की सुनवाई, इस दिन आएगा फैसला
Dehradun2 hours agoDehradun Crime: युवती को चापड़ दिखाकर धमकाने वाला आरोपी गिरफ्तार



































